Saturday, June 13, 2026

विज्ञान भारती : मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बने वैज्ञानिक नवाचार – योगी आदित्यनाथ जी


वाराणसी, 13 जून, 2026 विज्ञान भारती (विभा) के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारम्भ शनिवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में हुआ। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केन्द्र, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) तथा अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केन्द्र के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय अधिवेशन में भारत तथा विदेशों से 1,300 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं।

अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि अनुसंधान एवं नवाचार का उद्देश्य मानव कल्याण, आर्थिक प्रगति तथा राष्ट्रीय विकास होना चाहिए। अनुसंधान एवं नवाचार हमेशा से भारतीय सभ्यता में समाहित रहा है और इसने भारत की समृद्धि तथा वैश्विक नेतृत्व में योगदान दिया है। प्राचीन भारतीय परंपराएं, चाहे वे कृषि से जुड़ीं हो, स्वास्थ्य से संबंधित हों या भोजन से जुड़ी अन्य विधियां, वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित रही हैं। इन्होंने हमारे समाज को तो सशक्त बनाया ही है, लोगों को भी नई चेतना और प्रेरणा प्रदान की है। इसका उदाहरण हमने कोविड 19 महामारी के काल में भी देखा कि कैसे भारतीय प्राचीन ज्ञान पद्धतियों ने आम लोगों की सहायता की, जब इम्यूनिटी को मज़बूत करने के लिए भारतीय पद्धतियों को अपनाया गया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवाचार के बिना कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। युवा अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और अनुसंधान क्षमता को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करें। आधुनिक विज्ञान को पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने सतत विकास, प्राकृतिक कृषि, जमीनी स्तर के नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की स्थापना-दृष्टि विज्ञान भारती के उस उद्देश्य से गहराई से जुड़ी है, जिसके अंतर्गत आधुनिक विज्ञान और भारत की ज्ञान परम्पराओं के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय मूल्यों पर आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रतिभागियों से अधिवेशन की विभिन्न चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति और भारत की समग्र ज्ञान परम्पराओं के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समकालीन विज्ञान ने तकनीकी उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, किन्तु पर्यावरण, स्वास्थ्य तथा समाज से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए अधिक समन्वित एवं मानव-केंद्रित दृष्टिकोण आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को लेकर कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियों को मानव कल्याण एवं पर्यावरणीय स्थिरता के हित में उपयोगी बनाना विज्ञान भारती जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। युवाओं से सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय भाषाओं एवं भारत की समृद्ध ज्ञान परम्पराओं के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार का सुझाव दिया।

अपनी भाषाओं में भी बहुत सारा ज्ञान-विज्ञान भरा पड़ा है। संस्कृत के साथ ही अन्य भाषाओं तथा लोक भाषाओं में समाहित ज्ञान-विज्ञान में हम आधुनिक बातों को जोड़कर समाज के सामने उपयोगी रूप में प्रस्तुत करें। भारत में जीवन के हर क्षेत्र में समग्रता से विचार करते हुए मात्र मनुष्य ही नहीं, अपितु जगत और सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण हेतु एक सतत चिन्तन का अभ्यास चला है, इसलिए जीवन का कोई क्षेत्र-विषय उससे अछूता नहीं रहा।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा कि विज्ञान भारती भारत की ज्ञान परम्पराओं पर आधारित समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय परम्परा में विज्ञान, दर्शन और अध्यात्म को परस्पर पूरक माना गया है। जलवायु परिवर्तन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, नैतिकता और सभ्यतागत दृष्टिकोण के समन्वय से ही सार्थक समाधान प्राप्त किए जा सकते हैं।

विज्ञान भारती के महासचिव विवेकानन्द पई ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने विज्ञान भारती के प्रमुख विषयों- प्राचीन से आधुनिक विज्ञान, विज्ञान एवं अध्यात्म तथा भारतीय भाषाओं में विज्ञान का उल्लेख करते हुए पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव, विश्व आयुर्वेद कांग्रेस, विद्यार्थी विज्ञान मंथन तथा विभिन्न विज्ञान जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से विज्ञान भारती वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा विज्ञान संचार को सुदृढ़ बनाने के लिए कार्य कर रही है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान – बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों, नवउद्यमों, किसानों तथा नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर नवाचार एवं उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकता है।

अंतर विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने अधिवेशन की थीम “कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान और मानवता” का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान का उद्देश्य केवल मशीनों को अधिक सक्षम बनाना नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण के लिए नैतिक मूल्यों, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा मानव कल्याण पर आधारित संतुलित विकास की आवश्यकता बताई।

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में तीव्र प्रगति मानव जीवन को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित कर रही है, किन्तु समाज का भविष्य तकनीकी उन्नति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने पर निर्भर करेगा। मानवीय चेतना, संवेदनशीलता और नैतिक विवेक का कोई विकल्प नहीं है। विज्ञान को केवल दक्षता और उत्पादकता ही नहीं, बल्कि अधिक संतुलित, सार्थक और जागरूक समाज के निर्माण में भी योगदान देना चाहिए।

उद्घाटन सत्र के दौरान अधिवेशन स्मारिका तथा विज्ञान भारती के वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन भी किया गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी विज्ञान मंथन पहल के अंतर्गत भारत की प्रख्यात महिला वैज्ञानिकों प्रो. रोहिणी गोडबोले, प्रो. अन्ना मणि तथा प्रो. असीमा चटर्जी पर आधारित प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में देश के अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सहभागिता की।




No comments:

Post a Comment