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Wednesday, January 14, 2026

राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का दायित्व पूरे समाज का है – नरेन्द्र ठाकुर जी


सोनभद्र। स्वामी विवेकानंद जयंती की पूर्व संध्या पर स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में युवा विद्यार्थी सम्मेलन तथा युवा व्यावसायी सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि हमारे सामने भविष्य है और भविष्य से जुड़े सभी दायित्वों का निर्वहन आज के युवाओं को ही करना है। इसलिए प्रत्येक युवा को अपने परिवार, समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

उन्होंने कहा कि मनुष्य अकेला नहीं जीता, वह परिवार, समाज, गांव, जिला, राज्य और देश से जुड़ा होता है। विश्व में घटित होने वाली घटनाओं का प्रभाव देश पर पड़ता है, इसलिए केवल स्वार्थ के आधार पर जीवन नहीं चल सकता। राष्ट्र निर्माण किसी एक दिन या एक पीढ़ी का कार्य नहीं, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य, निरंतरता और त्याग की आवश्यकता होती है। त्वरित परिणामों की अपेक्षा किए बिना लंबे समय तक समाज के बीच रहकर कार्य करना ही वास्तविक समाधान है।

उन्होंने कहा कि यदि देश को सशक्त बनाना है तो सबसे पहले स्वयं को ठीक करना होगा। स्वस्थ रहने का अर्थ केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि सही सोच, विवेक और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी है। बुद्धि और विवेक यदि सही न हों तो मनुष्य गलत मार्ग पर चला जाता है। भाग्य के साथ-साथ परिश्रम भी आवश्यक है। उन्होंने स्वयं के बौद्धिक और मानसिक परिष्कार पर बल दिया।

उन्होंने डॉ. हेडगेवार के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को बदले बिना देश नहीं बदलेगा। इसी उद्देश्य से ऐसे संगठन का निर्माण किया जो चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करे। राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और नैतिक चेतना है, जिसे जीवित रखने का दायित्व पूरे समाज का है। समाज को बदलने के लिए सत्ता नहीं, बल्कि संस्कारों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने स्व आधारित जीवन, स्वदेशी, स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता, स्वभाषा, समरस समाज, नागरिक कर्तव्य बोध, पारिवारिक संस्कार एवं पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने युवाओं से जॉब सीकर नहीं, जॉब प्रोवाइडर बनने का आह्वान किया तथा छुआछूत, अस्पृश्यता और भेदभाव समाप्त कर समरस समाज के निर्माण पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि वास्तविक राष्ट्रभक्ति का अर्थ है बिना किसी अपेक्षा, अहंकार या स्वार्थ के राष्ट्र सेवा करना। राष्ट्र की उन्नति केवल भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक चेतना से संभव है। युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव होना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर एक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में जिला संघचालक हर्ष अग्रवाल, सह प्रांत कार्यवाह राकेश तिवारी मंच पर उपस्थित रहे।



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