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Thursday, March 19, 2026

प्रकृति पर आधारित सूर्य व चन्द्र के गणना पर आधारित है हिन्दू पंचाग - मनोज जी

गाजीपुर। नववर्ष की परम्परा आदि अनन्त काल से चली आ रही है। प्रकृति पर आधारित सूर्य व चन्द्र के गणना पर आधारित हिन्दू पंचाग है जो पूरे विश्व में सास्वत है। इसकी गणना कभी गलत व भ्रामक नही होती है। जो युगाब्द, विक्रमी सम्वत पर आधारित है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गाजीपुर द्वारा आयोजित विशाल पथ संचलन को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संम्पर्क प्रमुख मनोज जी ने व्यक्त किया।

वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर बुधवार को लंका स्थित श्रीरामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि इसी गणना के आधार पर वर्ष प्रतिपदा प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के प्रथम दिन मनाया जाता है और सम्पूर्ण भारत मे एक साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति को लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति ने भारी क्षति पहुचाया है और भारत में अंग्रेजी पद्धति के कांवेन्ट स्कूल के माध्यम से भारतीय संस्कृति व परम्परा को धवस्त करने का काम किया है। कार्यक्रम में सर्वप्रथम सभी स्वयंसेवकों ने संघ के संस्थापक डा.केशव बलिराम हेडगेवार को आद्य सर संघचालक प्रणाम निवेदित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम मे जिला धर्म जागरण प्रमुख प्रेम कुमार ओझा के निधन पर दो मिनट का मौन रख श्रद्धाजलि अर्पित किया गया।

यह संचलन श्रीरामलीला मैदान से प्रारम्भ होकर लंका चुंगी होते हुए सिंचाई विभाग चौराहा होते हुए सरयू पाण्डेय पार्क कचहरी होते हुए अफीम फैक्ट्री, महुआबाग, दुर्गाचौक सकलेनाबाद, जेलगेट होते हुए श्रीराम लीला लंका मैदान में विराम लिया। कार्यक्रम के अन्त में संघ प्रार्थना व ध्वज प्रणाम किया गया। कार्यक्रम में मा0 विभाग संघचालक सचिदानन्द, मा0 जिला संघचालक जयप्रकाश, सह विभाग प्रचारक प्रेमप्रकाश, जिला प्रचारक प्रभात, नगर प्रचारक विक्रम आदि उपस्थित रहे।





Wednesday, March 18, 2026

काशी प्रांत में समाज परिवर्तन की दिशा में आरएसएस का का बढ़ा कदम, शताब्दी वर्ष में देश में छः हजार तो काशी प्रांत में 116 शाखाएं बढ़ी

काशी। वैचारिक स्पष्टता सुसंगत व्यवहार और कार्यपद्धति के बल पर संघ जहां समाज के प्रत्येक घरो और समुदाय में पहुंच बनाने में सफल हो रहा है वहीं संघ की शाखाएं भी निरंतर बढ़ रही है। शताब्दी वर्ष में सकारात्मक सोच के साथ संघ और समाज के समन्वय से काशी प्रांत में समाज परिवर्तन की दिशा में अच्छा परिणाम दिखाई दे रहा है। शून्य से शतक तक संघ की इस यात्रा में इस वर्ष विजया दशमी उत्सव, व्यापक गृह संपर्क, हिंदू सम्मेलन, युवाओ के लिए कार्यक्रम, सामाजिक सद्भाव, प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी के कार्यक्रमों को सकारात्मक एवं व्यापक जन समर्थन मिला। यह जानकारी लंका स्थित विश्व संवाद केन्द्र काशी के माधव सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त के प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल जी एवं प्रान्त प्रचार प्रमुख डा0मुरार जी त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से दी।

हरियाणा के समालखा में आयोजित त्रिदिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से लौटने के पश्चात आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए प्रान्त कार्यवाह ने बताया कि जागरण श्रेणी एवं गतिविधियाँ मिलकर समाज की सज्जन शक्ति ,सुप्त शक्ति और उत्सुक शक्ति के साथ समाज जागरण के अभियान में सक्रिय है। पंच परिवर्तन को जीवन में उतारने से व्यवस्था का परिवर्तन होगा और यही समाज परिवर्तन का आधार है। जहां तक संगठन श्रेणी की बात है तो शताब्दी वर्ष में हम लक्ष्य के करीब है। पिछले वर्ष प्रतिनिधि सभा के समय देश में कुल 83129 शाखाएं थी तो इस वर्ष लगभग 6 हजार शाखाओं की बढोत्तरी के साथ कुल अट्ठासी हजारी नौ सौ नवासी शाखाएं संचालित है। मिलन और मंडली को लेकर देश में कुल सवा लाख प्रत्यक्ष कार्य संचालित है। काशी प्रांत के सभी 155 खंडों और 115 नगरों में संघकार्य है। कुल 1504 न्याय पंचायतो में से 1438 में शाखाएं और शेष में मिलन के कार्य है। प्रांत के कुल नगरों में 1044 बस्तियां है और सभी में शाखाएं मिलन और मंडली चल रही है। गतवर्ष काशी प्रांत में 2851 शाखाएं थी तो इस वर्ष 116 की वृद्धि के साथ कुल 2967 शाखाएं संचालित है।

शताब्दी वर्ष में 2102 हिन्दू सम्मेलन के साथ 31 लाख से अधिक घरों में स्वयंसेवकों ने किया सम्पर्क

प्रान्त प्रचार प्रमुख डा0मुरार जी त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष देश भर में चल रहे संघ के शताब्दी वर्ष में प्रान्त में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें 2102 हिन्दू सम्मेलन हुए। घर-घर सम्पर्क अभियान के अन्तर्गत स्वयंसेवकों ने 3198841 घरों में सम्पर्क किया। अभियान के अन्तर्गत 2 लाख संघ साहित्य बिक्री हुई एवं 3124275 कर पत्रक वितरित किये गये। इस अभियान हेतु 16512 टोलियों का गठन किया गया। युवा कार्यक्रम संगठन की योजनातंर्गत गठित सभी 27 जिलों के 269 स्थानों पर 560 युवा सम्मेलन हुए। जिसमें 376 सम्मेलन विद्यार्थियों एवं 184 सम्मेलन युवा व्यावसायियों के मध्य हुए। युवा कार्यक्रम में कुल 53032 विद्यार्थी एवं 20342 व्यावसायी उपस्थित रहें। प्रान्त में सद्भाव बैठकें 240 स्थानों पर सम्पन्न हुई जिसमें 14434 पुरुष एवं 2025 मातृशक्ति समेत कुल 16459 लोग उपस्थित रहें।

संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी के 650वां प्राकट्य वर्ष मनाएगा संघ

वक्ताओं ने बताया कि काशी की धरती से अवतरित हुए संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें प्राकट्य वर्ष पर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा द्वारा आगामी वर्ष में कार्यक्रमों की योजना बनाई गयी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है।

काशी प्रान्त में होंगे 2 सम्भाग

वर्ष 2027 से देश भर में 46 प्रान्त रचना के स्थान पर 85 सम्भाग अस्तित्व में आयेंगे। वर्तमान उत्तर प्रदेश राज्य एवं उत्तराखण्ड एक क्षेत्र के रूप में जाना जाएगा। इस योजना के अन्तर्गत वर्तमान काशी प्रान्त जिसमें संघ दृष्टि से 27 जिले है, को 2 सम्भागों में काशी एवं प्रयागराज में बांटा जाएगा।

Wednesday, January 14, 2026

राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का दायित्व पूरे समाज का है – नरेन्द्र ठाकुर जी


सोनभद्र। स्वामी विवेकानंद जयंती की पूर्व संध्या पर स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में युवा विद्यार्थी सम्मेलन तथा युवा व्यावसायी सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि हमारे सामने भविष्य है और भविष्य से जुड़े सभी दायित्वों का निर्वहन आज के युवाओं को ही करना है। इसलिए प्रत्येक युवा को अपने परिवार, समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

उन्होंने कहा कि मनुष्य अकेला नहीं जीता, वह परिवार, समाज, गांव, जिला, राज्य और देश से जुड़ा होता है। विश्व में घटित होने वाली घटनाओं का प्रभाव देश पर पड़ता है, इसलिए केवल स्वार्थ के आधार पर जीवन नहीं चल सकता। राष्ट्र निर्माण किसी एक दिन या एक पीढ़ी का कार्य नहीं, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य, निरंतरता और त्याग की आवश्यकता होती है। त्वरित परिणामों की अपेक्षा किए बिना लंबे समय तक समाज के बीच रहकर कार्य करना ही वास्तविक समाधान है।

उन्होंने कहा कि यदि देश को सशक्त बनाना है तो सबसे पहले स्वयं को ठीक करना होगा। स्वस्थ रहने का अर्थ केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि सही सोच, विवेक और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी है। बुद्धि और विवेक यदि सही न हों तो मनुष्य गलत मार्ग पर चला जाता है। भाग्य के साथ-साथ परिश्रम भी आवश्यक है। उन्होंने स्वयं के बौद्धिक और मानसिक परिष्कार पर बल दिया।

उन्होंने डॉ. हेडगेवार के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को बदले बिना देश नहीं बदलेगा। इसी उद्देश्य से ऐसे संगठन का निर्माण किया जो चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करे। राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और नैतिक चेतना है, जिसे जीवित रखने का दायित्व पूरे समाज का है। समाज को बदलने के लिए सत्ता नहीं, बल्कि संस्कारों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने स्व आधारित जीवन, स्वदेशी, स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता, स्वभाषा, समरस समाज, नागरिक कर्तव्य बोध, पारिवारिक संस्कार एवं पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने युवाओं से जॉब सीकर नहीं, जॉब प्रोवाइडर बनने का आह्वान किया तथा छुआछूत, अस्पृश्यता और भेदभाव समाप्त कर समरस समाज के निर्माण पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि वास्तविक राष्ट्रभक्ति का अर्थ है बिना किसी अपेक्षा, अहंकार या स्वार्थ के राष्ट्र सेवा करना। राष्ट्र की उन्नति केवल भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक चेतना से संभव है। युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव होना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर एक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में जिला संघचालक हर्ष अग्रवाल, सह प्रांत कार्यवाह राकेश तिवारी मंच पर उपस्थित रहे।



भारत का युवा ही दुनिया को प्रेम और सद्भाव के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाने का कार्य कर सकता है - नरेंद्र ठाकुर जी

 

प्रतापगढ़, 13 जनवरी। प्रतापगढ़ नगर स्थित तुलसी सदन में संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित युवा विद्यार्थी सम्मेलन एवं युवा व्यवसायी सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि युवा ही भारत के भाग्य विधाता हैं, यदि राष्ट्र की उन्नति और राष्ट्र का विकास तथा पूरी दुनिया को प्रेम और सद्भाव के मार्ग पर चलने का रास्ता दिखाने का कार्य कोई कर सकता है तो वह भारत का युवा ही कर सकता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी करना नहीं, शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यवसाय करना नहीं, शिक्षा का उद्देश्य व्यापक है। शंकराचार्य जी ने कहा था – सा विद्या या विमुक्तये अर्थात विद्या मोक्ष का मार्ग है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य है सर्वांगीण विकास और फिर राष्ट्रभक्ति का आचरण करना। इतिहास में भी युवाओं ने भूमिका निभाई है, चाहे वह भारत की आजादी का इतिहास रहा हो अथवा भारत की सांस्कृतिक उन्नति का इतिहास रहा हो या भारत के विकास का इतिहास रहा हो, हर क्षेत्र में युवाओं ने परिश्रम किया है और ईमानदारी पूर्वक किये गए अपने कार्य से देश और राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया है। जब देश में स्वतंत्रता का आंदोलन चल रहा था, उस समय भी सरदार भगत सिंह, राजगुरु, बटुकेश्वर दत्त, चंद्रशेखर आजाद जैसे युवाओं ने ही देश का नेतृत्व किया और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। ऐसा इसलिए किया कि क्योंकि भविष्य में देश के नागरिक, देश के युवा स्वतंत्रता की वायु को आत्मसात कर सकें। इसलिए अपने आचरण से, अपने मन, वचन, कर्म से राष्ट्र की सेवा करना ही परम लक्ष्य होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने 30 वर्ष की अवस्था में दुनिया को यह संदेश देने का काम किया कि यदि हम अपने आचरण से अपने संस्कारों से और मन, वचन, कर्म से परोपकार की भावना रखते हैं तो निश्चित रूप से पूरी दुनिया सुख और समृद्धि के वातावरण में स्वतंत्र रूप से अपने जीवन को अभिसिंचित करती रहेगी। हमें अपने समाज को जागृत करने के लिए एक राष्ट्र के नाते, एक समाज के नाते, अपने स्वाभिमान को जागृत करना पड़ेगा। प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र के प्रति भक्ति होनी चाहिए। वह देशभक्ति जहां भी, हम जिस कार्य में हैं उस कार्य को ईमानदारी से करने में है। विद्यार्थी है तो विद्या अर्जन करने में, कृषक हैं तो तो अच्छी खेती करने में है। इसी प्रकार से यदि व्यवसाय में हैं तो अच्छा व्यवसाय करने में है, वहां भी हम ईमानदारी पूर्वक अपना कार्य करके हम अपनी राष्ट्रभक्ति की दिशा में संलग्न रह सकते हैं।

कार्यक्रम के अध्यक्ष अर्पित सर्वेश ने कहा कि हम सब युवा हैं और भारत का भविष्य भी युवा के हाथों में है। इसलिए हमें अपनी संस्कृति के अनुसार कार्य करना सबको परम आवश्यक है।

मुख्य अतिथि रोशन सरोज भी उपस्थित रहे। व्यवसाई संवर्ग के कार्यक्रम की अध्यक्षता रविकांत उमर वैश्य ने की। मुख्य अतिथि सुश्री संजीवनी रही। कार्यक्रम की शुभारंभ अतिथियों द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रवज्जलन द्वारा हुई। कार्यक्रम में विधिवत् मंत्रोच्चार करके पुष्प वर्षा की गई। इस अवसर पर विद्यालय के युवा विद्यार्थियों द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये एवं पंच प्रण की वीडियो क्लिपिंग का प्रदर्शन किया गया। सम्मेलन में विद्यार्थी  संवर्ग एवं व्यवसाई वर्ग के युवाओं ने बढ़चढकर प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में विशेष रूप से विभाग कार्यवाह हरीश, विभाग प्रचारक ओम प्रकाश, जिला कार्यवाह हेमन्त कुमार, जिला प्रचारक प्रवीण कृष्ण उपस्थित रहे। संचालन डॉक्टर अनूप सिंह एवं अजीत ने किया। एकल गीत दीपकदेव एवं चंद्रभूषण ने किया। अंत में वन्देमातरम के सामूहिक गान द्वारा कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में सहप्रांत प्रचारक सुनील जी, प्रांत प्रचारक प्रमुख रामचंद्र जी,मा0 जिला संघचालक चिंतामणि जी,मा0 सह जिला संघचालक अशोक जी, विभाग प्रचार प्रमुख प्रभा शंकर, सुमित, अंकित, अवनीश, विवेकानंद, कार्तिकेय, महेश गुप्ता,आशीष मिश्र, अंकुर, ध्रुव शर्मा, रमेश पटेल, ऋचा सिंह, संतोष, उमंग, नीरज अग्रहरि, शिवानी मातन हेलिया, मनोज, शिवशंकर आदि उपस्थित रहे।




Tuesday, January 13, 2026

स्वयंसेवकों की तपस्या और साधना का परिणाम है समाज में संघ को मिली मान्यता – अलकाताई

प्रयागराज। माघ मेला स्थित परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका अलकाताई ने कहा कि त्यागी तथा समर्पणशील स्वयंसेवकों की साधना के कारण आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष मना रहा है। समाज में संघ को जो मान्यता मिली है, उसके पीछे स्वयंसेवकों की तपस्या और कठोर साधना है। इस साधना के कारण ही समाज में हिन्दुत्व का ज्वार दिखाई दे रहा है।

उन्होंने शंखध्वनि तथा वैदिक स्वस्ति वाचन के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रांत संघचालक अंगराज जी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान जी सहित अन्य उपस्थित रहे।

अलका ताई ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे आज की अनुकूल परिस्थितियां देखकर तनिक भी शिथिल न पड़ें, बल्कि दोगुने उत्साह से परम वैभव के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयास जारी रखें। लक्ष्य प्राप्ति के लिए और अधिक परिश्रम की आवश्यकता है। अभी काम बहुत बाकी है। हर क्षेत्र में संघ की विचारधारा को लेकर जाना है।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ प्रचारक यादवराव जोशी जी जब कर्नाटक में प्रचारक बन कर गए तो उन्हें कन्नड़ भाषा नहीं आती थी। एकदम अपरिचित परिवार में जाकर विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने आत्मीयता स्थापित की तथा संगठन की नींव मजबूत कर कार्यक्षेत्र में विस्तार किया।

आशीष चौहान ने कहा कि जब पूरे विश्व में उपनिवेशवादी शक्तियां हावी थीं, पश्चिम की औद्योगिक क्रांति का दौर चल रहा था। ऐसे परिवेश में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार जी ने भारत को भारत के रास्ते से चलाने का मार्ग खोजा। उन्होंने एक साथ देश को स्वाधीन कराने तथा देश फिर से गुलाम न हो, इसके लिए चिंतन किया तथा समाज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का यत्न किया।

एक दौर वह था, जब नारा लगवाया जाता था कि गर्व से कहो हम हिन्दू हैं। लेकिन आज युवा पीढ़ी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वयं लिख रही है कि हिन्दू होने पर हमें गर्व है। पंच परिवर्तन के विषय पर आज संघ जो बोल रहा है, वही पूरा समाज बोलने लगे यही संघ का लक्ष्य है।

कार्यक्रम का संचालन विभाग कार्यवाह प्रोफेसर संजय जी ने किया।

Thursday, January 1, 2026

हिंदुत्व एक जीवन दृष्टि है, विनम्रता इसका स्वरूप — सुभाष जी



सोनभद्र। हिंदुत्व एक जीवन दृष्टि है। हिंदुत्व का एक रूप विनम्रता का भी है और हिंदुत्व का एक रूप विशालता का भी है जो हमेशा देखने को मिलता है। उक्त विचार सोनभद्र नगर द्वारा बभनौली मोहाल मे आयोजित हिन्दू सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने व्यक्त किया।

उन्होंने कहा​ कि हिंदू धर्म मानवता का धर्म है। हमारी संस्कृति हिंदू है इसलिए हम हिंदू है। हमारे पुरखे हिंदू थे, इसलिए हम हिंदू हैं। हिन्दूत्व की विनम्रता यह है कि हम चींटी के अंदर भी भगवान का दर्शन करते हैं। सर्वत्र ईश्वर का दर्शन करते हैं जो कुछ हमारे आंखों के सामने है उसे हम परमात्मा के रूप में हम देखते हैं। कबीरदास जी कहते हैं केवल काशी में ही भगवान नहीं है, सब जगह भगवान है। इस प्रकार की मान्यता सिर्फ हिंदुत्व की है। इसलिए हमारे देश में हमने धरती को भी माता माना है। हमारे देश के एक प्रसिद्ध कवि थे। भारत के प्रधानमंत्री भी बने जिनका नाम अटल बिहारी वाजपेयी था वे कहते थे यह जो धरती है। यह केवल ईट पत्थर का ढेर नहीं है। वे कहते थे यह वंदन की भूमि है। यह चंदन की भूमि है। यह अभिनंदन की भूमि है। इसका कण कण शंकर है, इसका बिंदु बिंदु गंगाजल है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए और मरने के बाद भी हमारी हड्डियों से एक ही आवाज़ आएगी, भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

उन्होंने आगे कहा कि भारत हिन्दुस्तान है, हिंदू भूमि है,यह पुण्य भूमि है। यह धर्म भूमि है। यह आर्यभूमि है। हम यहां पैदा हुए हैं। इसके नाते से हमारी पहचान है और इसलिए हम हिंदू हैं। विवेकानंद कहते थे वह रस हिंदू का रस है। गर्भ से हम हिंदू हैं। एक बड़ा परिवार हमारा पुरखे, सब हिंदू है विराट सागर समाज अपना, हम सब इसके बिंदु है पुरखे सबके हिंदू है। गर्व से कहो हम सब हिंदू है। जाति का नहीं, हिंदू के नाते हम सब गर्व करें। हिंदू स्थान में रहने वाले लोगों के साथ सभी हिन्दू है। हमने विनम्रता सीखा है और हमारे पुरखों ने हमको विशाल हृदय दिया है, विशालता भी सिखाया है। वसुंधरा परिवार हमारा यह विश्व एक परिवार है। दुनिया में अगर कोई विश्व को परिवार मानता है तो वो केवल और केवल हिंदू ही है, जो कहते हैं कि विश्व हमारा परिवार है, हम इतना विशाल चिंतन रखते हैं।

उन्होंने बताया कि विवेकानंद जी ने अमेरिका के वासियों को संबोधित करते हुए अमेरिका में कहा था कि मैं उस देश से आया हूं जिस देश के लोगों ने दुनिया के सताए हुए लोगों को शरण देने का काम किया है। उन्होंने कुटुम्ब के अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि परिवार के अंदर हम मंगल संवाद करें। छोटे बच्चों को स्नेह दे बड़ों को सम्मान दें। नारी का सम्मान करें। महिलाओं का सम्मान करें। मातृ शक्ति का सम्मान करिए, नारी माता लक्ष्मी के रूप में है। नारी सरस्वती के रूप में है। नारी दुर्गा के रूप में है। जो संकट पड़ने पर नारी चंडी के रूप में भी प्रकट हो जाती है। नारी से ही नर होता है। जीजा माता बाल शिवा को शिवाजी बना करके दुश्मनों को धूल चटाने का काम करती है। नारी अपने पति के प्राणों को लाने के लिए यमराज से भी लड़ जाती है। नारी शक्ति है, उसको हम पहचानें और उसका सम्मान करें। परिवार को मजबूत करें। हमारे परिवार मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि हमारा समाज मजबूत होना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भूतपूर्व सैनिक कौशल गिरी ने किया। विशिष्ट अतिथि संत समाज के सौरभ भारद्वाज, मातृशक्ति चित्रा जालान व जिरवा देवी ने हिन्दू धर्म समाज व कुटुम्ब प्रबोधन और नागरिक कर्त्तव्य के पालन पर जोर दिया। कहा कि आज विश्व के पटल पर सर्वश्रेष्ठ देशो में एक ही नाम चलता है भारत, जिनको माता के नाम से संबोधित किया जाता है। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती व सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ से हुआ। कार्यक्रम का संचालन नीरज कुमार सिंह एडवोकेट ने किया। कार्यक्रम में हरेंद्र, महेश शुक्ला, शिवम सिंह, आशुतोष सिंह, अमन, प्रियांशु, सभासद विरेन्द्र प्रताप सिंह, रामबली आदि व मातृशक्ति के रूप में माताएँ बहने उपस्थित रही।



Wednesday, December 31, 2025

भारत की संस्कृति व्यक्तिमंगल से विश्वमंगल की – प्रदीप जोशी जी

 हिन्दू समाज का जागरण एवं संगठन ही संघ का उद्देश्य

जौनपुर। तिलकधारी महाविद्यालय के प्रांगण में आयोजित विराट हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी जी ने कहा कि भारत की संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम एवं सर्व धर्म समभाव की है। यह व्यक्तिमंगल से विश्वमंगल की संस्कृति है। आज वर्तमान समय में हिन्दू समाज के जागरण एवं संगठन की आवश्यकता है। हिन्दू समाज के जागरण के इस कार्य को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 1925 में प्रारंभ किया। इस वर्ष 2025 में संघ के स्थापना के सौ वर्ष पूरे हुए हैं और इसी क्रम में संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त देशभर में हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब हिन्दू समाज संगठित और अनुशासित होगा, तभी भारत विश्व गुरु बनेगा। एक संगठित और संयमित समाज ही राष्ट्र को परम वैभव की ओर ले जा सकता है।

उन्होंने कहा कि संघ शताब्दी वर्ष में समाज परिवर्तन के लिए पांच आयाम पर कार्य कर रहा है। ये पांच बातें सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुम्ब प्रबोधन, स्वदेशी भाव का जागरण और नागरिक कर्तव्यों का बोध को लेकर समाज का जागरण कर रहा है। इनसे हिन्दू समाज की जय होगी और विश्व का कल्याण होगा, जिसमें सभी को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। मुख्य वक्ता ने सकारात्मक विमर्श को खड़ा करने की आवश्यकता का बल दिया। युवा को पश्चिम के झूठे एवं छद्म विचारों को तोड़ने की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि गायत्री परिवार के आचार्य राम सिंह जी ने कहा कि सनातन धर्म ने ही संपूर्ण विश्व को जोड़ने का मंत्र दिया है। इसकी कल्पना केवल सनातन संस्कृति में ही मिलती है।

विशिष्ट अतिथि प्रो शिखा श्रीवास्तव जी ने कहा कि आधुनिक दौर में परिवार एवं कुटुम्ब परम्परा को बचाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की साधना और संतों की प्रेरणा से आज देश का हिन्दू संगठित हुआ है। अब लोग ‘भारतमाता की जय’ और ‘वंदेमातरम्’ बोलने के लिए तत्पर हैं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि फूलचंद सोनकर जी ने कहा, जब हिन्दू समाज में जाति-पाति, ऊंच-नीच का भेदभाव मिटकर एकता और समरसता आएगी, तभी एक मजबूत और विकसित, समर्थ भारत का निर्माण संभव है।

अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. उत्तम गुप्ता जी ने किया। संचालन डॉ. उदय जी ने किया।