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Saturday, June 13, 2026

विज्ञान भारती : मानव कल्याण और राष्ट्र निर्माण का माध्यम बने वैज्ञानिक नवाचार – योगी आदित्यनाथ जी


वाराणसी, 13 जून, 2026 विज्ञान भारती (विभा) के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारम्भ शनिवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में हुआ। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केन्द्र, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) तथा अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केन्द्र के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय अधिवेशन में भारत तथा विदेशों से 1,300 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि सहभागिता कर रहे हैं।

अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि अनुसंधान एवं नवाचार का उद्देश्य मानव कल्याण, आर्थिक प्रगति तथा राष्ट्रीय विकास होना चाहिए। अनुसंधान एवं नवाचार हमेशा से भारतीय सभ्यता में समाहित रहा है और इसने भारत की समृद्धि तथा वैश्विक नेतृत्व में योगदान दिया है। प्राचीन भारतीय परंपराएं, चाहे वे कृषि से जुड़ीं हो, स्वास्थ्य से संबंधित हों या भोजन से जुड़ी अन्य विधियां, वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित रही हैं। इन्होंने हमारे समाज को तो सशक्त बनाया ही है, लोगों को भी नई चेतना और प्रेरणा प्रदान की है। इसका उदाहरण हमने कोविड 19 महामारी के काल में भी देखा कि कैसे भारतीय प्राचीन ज्ञान पद्धतियों ने आम लोगों की सहायता की, जब इम्यूनिटी को मज़बूत करने के लिए भारतीय पद्धतियों को अपनाया गया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवाचार के बिना कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। युवा अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और अनुसंधान क्षमता को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करें। आधुनिक विज्ञान को पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने सतत विकास, प्राकृतिक कृषि, जमीनी स्तर के नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की स्थापना-दृष्टि विज्ञान भारती के उस उद्देश्य से गहराई से जुड़ी है, जिसके अंतर्गत आधुनिक विज्ञान और भारत की ज्ञान परम्पराओं के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भारतीय मूल्यों पर आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता दोहराते हुए प्रतिभागियों से अधिवेशन की विभिन्न चर्चाओं में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति और भारत की समग्र ज्ञान परम्पराओं के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समकालीन विज्ञान ने तकनीकी उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, किन्तु पर्यावरण, स्वास्थ्य तथा समाज से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए अधिक समन्वित एवं मानव-केंद्रित दृष्टिकोण आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को लेकर कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियों को मानव कल्याण एवं पर्यावरणीय स्थिरता के हित में उपयोगी बनाना विज्ञान भारती जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। युवाओं से सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय भाषाओं एवं भारत की समृद्ध ज्ञान परम्पराओं के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार का सुझाव दिया।

अपनी भाषाओं में भी बहुत सारा ज्ञान-विज्ञान भरा पड़ा है। संस्कृत के साथ ही अन्य भाषाओं तथा लोक भाषाओं में समाहित ज्ञान-विज्ञान में हम आधुनिक बातों को जोड़कर समाज के सामने उपयोगी रूप में प्रस्तुत करें। भारत में जीवन के हर क्षेत्र में समग्रता से विचार करते हुए मात्र मनुष्य ही नहीं, अपितु जगत और सम्पूर्ण सृष्टि के कल्याण हेतु एक सतत चिन्तन का अभ्यास चला है, इसलिए जीवन का कोई क्षेत्र-विषय उससे अछूता नहीं रहा।

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा कि विज्ञान भारती भारत की ज्ञान परम्पराओं पर आधारित समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय परम्परा में विज्ञान, दर्शन और अध्यात्म को परस्पर पूरक माना गया है। जलवायु परिवर्तन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, नैतिकता और सभ्यतागत दृष्टिकोण के समन्वय से ही सार्थक समाधान प्राप्त किए जा सकते हैं।

विज्ञान भारती के महासचिव विवेकानन्द पई ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने विज्ञान भारती के प्रमुख विषयों- प्राचीन से आधुनिक विज्ञान, विज्ञान एवं अध्यात्म तथा भारतीय भाषाओं में विज्ञान का उल्लेख करते हुए पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव, विश्व आयुर्वेद कांग्रेस, विद्यार्थी विज्ञान मंथन तथा विभिन्न विज्ञान जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से विज्ञान भारती वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा विज्ञान संचार को सुदृढ़ बनाने के लिए कार्य कर रही है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान – बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कहा कि अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों, नवउद्यमों, किसानों तथा नीति-निर्माताओं को एक मंच पर लाकर नवाचार एवं उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकता है।

अंतर विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने अधिवेशन की थीम “कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान और मानवता” का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान का उद्देश्य केवल मशीनों को अधिक सक्षम बनाना नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण के लिए नैतिक मूल्यों, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा मानव कल्याण पर आधारित संतुलित विकास की आवश्यकता बताई।

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में तीव्र प्रगति मानव जीवन को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित कर रही है, किन्तु समाज का भविष्य तकनीकी उन्नति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने पर निर्भर करेगा। मानवीय चेतना, संवेदनशीलता और नैतिक विवेक का कोई विकल्प नहीं है। विज्ञान को केवल दक्षता और उत्पादकता ही नहीं, बल्कि अधिक संतुलित, सार्थक और जागरूक समाज के निर्माण में भी योगदान देना चाहिए।

उद्घाटन सत्र के दौरान अधिवेशन स्मारिका तथा विज्ञान भारती के वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन भी किया गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी विज्ञान मंथन पहल के अंतर्गत भारत की प्रख्यात महिला वैज्ञानिकों प्रो. रोहिणी गोडबोले, प्रो. अन्ना मणि तथा प्रो. असीमा चटर्जी पर आधारित प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में देश के अनेक प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों एवं संस्थानों के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सहभागिता की।




Monday, June 8, 2026

संघ के साथ मिलकर चुनौतियों का सामना करें सभी देशवासी- स्वांत रंजन जी

प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन जी ने सभी देशवासियों से देश के सामने खडी चुनौतियों का मिलकर मुकाबला करने का आह्वान करते हुए कहा कि भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाने के लिए चार बड़ी चुनौतियों से मिलकर सामना करना होगा।

वे शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत द्वारा आयोजित प्रयागराज के गौहनिया स्थित वात्सल्य परिसर में आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग सामान्य एवं प्रांत घोष वर्ग के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने अपने उद्बोधन मे कहा कि आतंकवाद, अर्बन नक्सलवाद, मातांतरण तथा बाजारवाद समेत चार चुनौतियां देश के सामने मुंह बाये खड़ी है। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए संघ के साथ पूरे समाज को मिलकर इन चुनौतियों का सामना करना होगा।

उन्होंने कहा कि 100 वर्ष से संघ हिंदू समाज को सशक्त बनाने के लिए, उसकी शक्ति खड़ी करने के लिए प्रयास कर रहा है। इसके लिए उसे उपेक्षा और उपहास का भी सामना करना पड़ा। इन स्थितियों के बाद अब समाज में संघ की स्वीकार्यता बढी है लेकिन इस स्थिति से हम अभी भी संतुष्ट नहीं है। हमें अभी आगे और परिश्रम करना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत प्राचीन राष्ट्र है और हिंदू राष्ट्र है। हिंदू समाज ने इसकी रक्षा के लिए पसीना भी बहाया है और खून भी। आर्यों के बाहर से यहां आकर बसने की थ्योरी  पूरी तरह मनगढ़ंत है। यह एक सुनियोजित साजिश है। इससे देशवासियों को सावधान रहने की जरूरत है।

संघ पंच परिवर्तन के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन के लिए निरंतर प्रयत्नशील है। सभी देशवासी संघ के साथ जुड़कर कार्य करें जिससे भारत को विकासशील से विकसित राष्ट्र बनाया जा सके। उन्होंने आग्रह किया कि जो जहां है वहीं से इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए अपना सहयोग दें।

अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख ने कहा कि कार्यकर्ताओं का निर्माण करने के लिए देशभर में और 98 संघ शिक्षावर्ग चल रहे हैं। इसका उद्देश्य है वर्ग में तैयार होकर कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में संघ कार्य को आगे बढ़ाएं। उन्होंने संघ शिक्षा वर्ग के विषयों की भी विस्तार से जानकारी दी और कहा कि शारीरिक, बौद्धिक कार्यक्रमों के द्वारा स्वयंसेवकों को एक प्रामाणिक कार्यकर्ता के रूप में निर्माण किया जाता है।

पिछले 100 वर्षों से संघ राष्ट्र जागरण के महत्वपूर्ण कार्य में लगा है। संघ के समर्पित स्वयंसेवक इस कार्य को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र जागरण के इस महत्वपूर्ण कार्य में पूरे समाज को आगे बढ़कर अपना सहयोग करना होगा तभी लक्ष्य की पूर्ति हो सकेगी।

देश को परम वैभव पर ले जाना है तो सभी देशवासियों को मिलकर राष्ट्र निर्माण के इस अनुष्ठान में तन—मन—धन से लगना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यूनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ.जगदीश गुलाटी ने कहा कि संघ पूरे समाज को जोड़ने के लिए काम कर रहा है। सभी देशवासियों को संघ से जुड़ना चाहिए। सामाजिक समरसता के लिए संघ द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय है। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि आवश्यकता पड़ने पर देश सेवा के लिए हमेशा तैयार रहें।

कार्यक्रम का प्रारंभ संघ प्रार्थना के पश्चात शिक्षार्थियों द्वारा ध्वज की मान वंदना प्रदक्षिणा से हुई। इसके पश्चात शिक्षार्थियों ने दण्ड, पद विन्यास, यष्टि, नियुद्ध, दण्ड व्यायाम योग, व्यायाम योग, आसन का आकर्षक प्रदर्शन किया।

शताब्दी वर्ष के प्रतीक 100 पर  व्यूह रचना का  हुआ प्रदर्शन

घोष के प्रशिक्षणार्थियों ने भारतीय रागों पर आधारित रचनाओं का वादन करते हुए  समारोह मे आकर्षक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के क्रम में घोष की रचनाओं में शताब्दी वर्ष का प्रतीक 100 पर आधारित व्यूह रचना में स्वस्तिक, शंख में किरण, वेणु में स्वर पाठ एवं व्यायाम योग के समय कावेरी, ध्वजारोपणम, ध्वजावतरण का प्रमुख रूप से प्रदर्शन कर उपस्थित जनसमूह को भारतीय राग से परिचित कराया।

मंच पर मा0 प्रांत संघचालक अंगराज जी, ‌सर्वाधिकारी गौतम सिंह की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। वर्ग कार्यवाह डॉक्टर संजय जी ने अतिथि परिचय एवं वृत्त निवेदन किया। सर्वव्यवस्था प्रमुख आशीष जी ने आभार प्रकट किया।

समारोह में प्रांत प्रचारक रमेश जी, वर्ग पालक सुनील जी, प्रचारक प्रमुख राम चन्द्र जी, मुख्य शिक्षक कौशल जी के अतिरिक्त प्रांत कार्यवाह मुरली पाल, सहकार्यवाह डा0 राकेश जी, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉक्टर मुरार जी त्रिपाठी, बौद्धिक प्रमुख डा0 कुलदीप जी, सत्यविजय जी, घनश्याम जी, डा0 नीरज अग्रवाल, डा कृतिका अग्रवाल समेत बडी संख्या मे गणमान्य नागरिक एवं माताएं—बहने उपस्थित रही।











Saturday, May 23, 2026

देश में शांति स्थापित रहेगी तो हमारा जीवन भी शांतिपूर्ण यापन होगा : रमेश जी

प्रयागराज। अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रांत की ओर से शनिवार को राष्ट्र साधना के 100 वर्ष के उपलक्ष्य में जिला पंचायत सभागार में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि काशी प्रांत के प्रचारक रमेश जी ने कहा कि साहित्य परिषद सबके हित के कार्य को कवियों के माध्यम से रखने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश का भाग्य ही प्रत्येक ना
गरिक का भाग्य है। देश समर्थ
, समृद्ध और विकसित होगा तो हम भी समर्थ, समृद्ध और विकसित होंगे। देश में शांति स्थापित रहेगी तो हम भी शांति के साथ जीवन यापन कर सकेंगे। संघ अपने स्थापना वर्ष से देशहित में कार्य कर रहा है। राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए संघ 100 वर्षों से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में धर्म, संस्कृति और समाज की खोई हुई पुनः स्थापित करने का कार्य अखिल भारतीय साहित्य परिषद कर रही है।

अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री पवनपुत्र बादल ने कहा कि साहित्य परिषद ने केवल हिंदी नहीं बल्कि सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। भारत की एकात्मता का भाव लेकर लेकर साहित्य परिषद काम कर रहा है। उन्हेें राष्ट्र निर्माण के लिए साहित्य परिषद से जुड़ने का आग्रह किया। भारत की पुरातन, सनातन और वैदिक भाव को पुनः जागृति करने के लिए साहित्य परिषद कार्य कर रहा है। इस मौके पर स्वामी वैदेही वल्लभ सरकार ने कहा कि ब्रह्म से भी पहले शब्द की उत्पत्ति हुई। संघ तो वटवृक्ष है और संपूर्ण साधना सिखाता है।

‘एक दीप से जले हज़ारों यह अद्भुत विस्तार है, भारत के इस नव निर्माण में संघ शक्ति आधार है...’

इस अवसर पर आमंत्रित कवियों ने राष्ट्रप्रेम और त्याग की कविताओं से वातावरण भावपूर्ण बना दिया। कार्यक्रम में विनीत चौहान ने मंच संचालन किया। कवि अभय निर्भीक ने ‘त्याग तपस्या ज्ञान संघ है, क्षमता का उत्थान संघ है, मातृभूमि को सदा पूजता भारत का सम्मान संघ है’ के माध्यम से संघ को प्रस्तुत किया। कवियित्री प्रियंका राय ने ‘मैं भारत की आनबान सम्मान की खातिर जीती हूं, मुरझाये चेहरों पर मैं मुस्कान की खातिर जीती हूं, जीते होंगे लोग यहां धन-दौलत शोहरत की खातिर, सच कहती हूं मैं तो हिन्दुस्तान की खातिर जीती हूं’ के माध्यम से श्रोताओं में जोश भर दिया। कवि दास आरोही आनन्द ने ‘हम प्रखर पुंज, हम तेजवंत हम पारस जैसे सजे हैं, हमको हल्के में मत लेना, हम भारत के बच्चे हैं’ के माध्यम से युवाओं को जागृत किया। मध्यप्रदेश के भोपाल से आई नुसरत मेहंदी ने ’जन-जन में आत्मबोध जगाया है संघ ने, सर्वाेपरि है राष्ट्र सिखाया है संघ ने’ के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बारे में बताया। कवियित्री नेहा शर्मा ने अपनी कविता ‘हमेशा याद रखना तुम की ये धरती तुम्हारी है, ये गंगा गोमती सरयू, ये यमुना जी तुम्हारी है, तिरंगा भी तुम्हारा है, और भमवा तुम्हारा है, सनातन है तो सब कुछ है और हस्ती तुम्हारी’ के माध्यम से मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि प्रशांत अवस्थी ‘प्रखर’ ने अपनी कविता ‘सुनो कथानक कहता हूं मैं, है जिनकी कथा सुनहरी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक के संघी, सदा दंश के प्रहरी’ के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया। 

गांव और ग्रामीण संस्कृति पर कविता लिखने वाली मनु वैशाली ने अपनी कविता ‘चप्पल पहन के जिनकी चलते थे शौक से हम तुम पूछते हो वैसे गांव में क्या रखा है’ के माध्यम से गांव से जुड़ाव की याद दिलाई। कवि डां. प्रवीण आर्य ने कविता ‘जननी जन्मभूमि का वंदन, आओ कर ले हम, वन्दे मातरम वन्दे मातरम।। राम कृष्ण को मातृभूमि से स्वर्ग लगा धीमा धीमा, चूमे चरण चांदनी भू के, भाल लगा के सर टीका, सुर नर मुनि तरसा करते, पाने को जहाँ जन्म, वन्दे मातरम वन्दे मातरम’ के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का वातावरण बनाया। विख्यात मिश्र ने ‘सज गये सारंगधारी, संघ के कारण ही है, अब सजेंगे ब्रजबिहारी, संघ के कारण ही है’ के माध्यम से संघ का महत्व बताया। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे कवि और शिक्षक डॉ. विनम्र सेन सिंह ने अपनी कविता ‘एक दीप से जले हज़ारों यह अद्भुत विस्तार है, भारत के इस नव निर्माण में संघ शक्ति आधार है।’ के माध्यम से भारत की एकता का परिचय दिया।

कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन और भारत मां के चित्र पर पुष्प अर्पित करके किया गया। इसके बाद साहित्य परिषद की ओर से सभी मंचासीन अतिथियों और कवियों को स्वागत किया गया।

कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सह-कोषाध्यक्ष कमलाकांत गर्ग, प्रदेश महामंत्री महेश पाण्डेय ‘बजरंग’ पूर्व आईजी केपी सिंह, प्रो. वाईपी सिंह, डा. अमरेंद्र त्रिपाठी, प्रो. रमेश सिंह, डा. स्नेहसुधा, अर्चना सिंह और प्रो. कल्पना वर्मा आदि मौजूद रहे।



Monday, May 11, 2026

समाज का प्रबोधन करना ही सच्ची पत्रकारिता — सुभाष जी

आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती के उपलक्ष्य में सामाजिक परिवर्तन में मीडिया की भूमिका विषयक संगोष्ठी गोष्ठी का आयोजन।

प्रयागराज। आद्य पत्रकार  देवर्षि नारद जयंती के उपलक्ष्य में   रविवार को हिंदुस्तानी अकादमी में विश्व संवाद केंद्र प्रयागराज काशी प्रांत के द्वारा 'सामाजिक परिवर्तन में मीडिया की भूमिका’ विषयक  गोष्टी आयोजित की गयी।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने कहा कि  समाज का  प्रबोधन करना ही सच्ची पत्रकारिता है। समसामयिक विषयो के प्रति सामाजिक जागरूकता बढाना मीडिया का कार्य है। इसके लिए पत्रकारो को दीपक की तरह जल कर समाज मे वैचारिक  प्रकाश फैलाना पड़ता है। इसकी प्रेरणा नारद जी से मिलती है। नारद जी आद्य पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि संपादक जगत नारायाण लाला जैसे संपादकों को श्रेष्ठ जीवन मूल्य स्थापित करने के प्रयास में अपने प्राणों का बलिदान करना पड़ा लेकिन अखबार का प्रकाशन बंद नहीं होने दिया। ऐसे लोग पत्रकारों के प्रेरणास्रोत हैं। गीता प्रेस के संस्थापक हुनुमान प्रसाद पोद्दार ने सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली भारत रत्न जैसे सम्मान को विनम्रता के साथ अस्वीकार कर पूरे समाज के सामने नया आदर्श स्थापित किया। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद कोमल चित्त वाले थे। उनके अंदर करुणा और ममता थी यह पत्रकारों का स्वभाव होना चाहिए। उन्होंने दैनिक जागरण के पूर्व संपादक नरेन्द्र मोहन की भी चर्चा की और उनसे पत्रकारों को प्रेरणा लेने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अनावश्यक नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने से बचना चाहिए। पत्रकार सैनिकों की भाति  कलम के सिपाही हैं। कलम के सिपाही का मूल कर्तव्य है सामाजिक चेतना, सत्य को सामने लाना, राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीयता, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विचारों को संबल प्रदान करने का कार्य करना। यही नारद जयंती मनाने का उद्देश्य है।   

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं सम्पादक योगेश नारायण दीक्षित ने ‘आज की पत्रकारिता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम सब लोग पत्रकारिता के मूल उद्देश्य से भटक कर व्यवसायिकरण की ओर बढ़ रहे हैं।  हमें चिंतन करना होगा कि पत्रकार सत्य को उजागर एवं समाज की दृष्टि को सामने लाने के लिए समाज के प्रहरी के रूप में कार्य करता है। इसीलिए मीडिया को लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तम्भ माना गया है। सोशल मीडिया पर अच्छे नॉरेटिव वायरल करने का उन्होंने सुझाव दिया।

विषय प्रवर्तन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ मुरारजी त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म देवर्षि नारद से सीखना चाहिए। एजेंडा आधारित पत्रकारिता समाज का भला नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का इतिहास  सृष्टि के प्रारंभ मैं नारद जी से प्रारंभ होता है।    लोक मंगल हेतु की गई पत्रकारिता ही समाज के लिए उपयोगी है। मंच पर प्रचार विभाग के पालक आशीष जी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा देवर्षि नारद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समापन राष्ट्र सेविका समिति की बहनों के नेतृत्व में वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुआ।

गोष्ठी में प्रांत प्रचारक रमेश जी, राकेश जी सह भाग कार्यवाह, चारूमित्र जी, व्रत शील शर्मा  रितेश जी, विष्णु जी, कृष्ण मनोहर जी, आदित्य जी, संतोष, विजेंद्र, रामनरेश, पिंडी वास  राजेश प्रताप आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। अतिथि परिचय सह विभाग प्रचार प्रमुख मुकेश जी ने कराया। धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण मनोहर तिवारी एवं संचालन विभाग प्रचार प्रमुख वसु पाठक ने किया।

Monday, May 4, 2026

मीडिया का मूल उद्देश्य है संवाद : जितेन्द्र तिवारी

  • -    पंच परिवर्तन हमारी सनातन का अस्तित्व : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी
  • -  विश्व संवाद केन्द्र काशी एवं समाजशास्त्र विभाग व मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती के अवसर पर संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित

वाराणसी। विश्व संवाद केन्द्र काशी एवं समाजशास्त्र विभाग व मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती के अवसर पर रविवार को 'पंच परिवर्तन : समाज एवं मीडिया' विषयक संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययनपीठ सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिन्दुस्थान समाचार एजेन्सी, नई दिल्ली के संपादक जितेन्द्र तिवारी रहे। इस मौके पर जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि स्वाधीनता आन्दोलन में पत्रकारिता लोगों को एकजूट करने एवं ब्रिटिश हुकूमत का विरोध दर्ज कराने का सशक्त माध्यम थी। स्वाधीनता आन्दोलन में पत्रकारिता एक हथियार बन गई थी, जिसने ब्रिटिश हुकूमत के नाक में दम कर दिया था। मीडिया के उद्देश्य पर जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि मीडिया का काम कुछ भी हो परन्तु उसका मूल उद्देश्य संवाद ही है। मीडिया का कार्य जिज्ञासा उत्पन्न करना है। उन्होंने कहा कि संवाद तर्क है, विवाद नहीं। खुले मन से संवाद करना ही पत्रकारिता है। सत्यनिष्ठ पत्रकारिता ही समाज एवं सरकार के बीच सामंजस्य स्थापित कर सकती है। जब से मिशन से कमीशन में बदली है तब से पत्रकारिता जीवन खतरे में पड़ा है। अपने को खोजना ही नारद जी की पत्रकारिता है। हमें जन से जुड़ना होगा। एक पृथ्वी एक परिवार भारत का मूल मंत्र है।

अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि हमें गलत विचारों का त्याग करना होगा। नारद जीवन देने वाले हैं। हमें नारद के गुणों को प्रचारित करना होगा। यहीं, भविष्य की पत्रकारिता है। कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि नारद जी को पत्रकार के रूप में स्थापित करना होगा। नारद जी समरसता देखते थे। पत्रकारिता को समरूपता में देखना चाहिए। आपदा को मैनेज करने वाले पत्रकार नारद थे। हमें मानवता को स्थापित करना है। पंच परिवर्तन हमारी सनातन का अस्तित्व है। समय के अनुरूप पत्रकारिता को बदलना होगा। साथ ही विश्व के साथ सामंजस्य स्थापित करके भारतीय ज्ञान परम्परा का संचय, प्रसार एवं विकास करना होगा। नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ संकल्पति करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास का रास्ता सिर्फ ज्ञान से ही प्रशस्त होगा। अगले 25 साल पत्रकारों के लिए विशेष है।

इस अवसर पर काशी प्रान्त के 6 पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया जिसमें

1. स्वदेश दैनिक के प्रयागराज संवाददाता शिवाशंकर पाण्डेय,

2. आज दैनिक, वाराणसी के डॉ. जिनेश कुमार,

3. दैनिक जागरण, वाराणसी की वरिष्ठ उप सम्पादक वन्दना सिंह,

4. तरुण मित्र दैनिक, जौनपुर के संपादक आदर्श कुमार,

5. न्यूज नेशन, वाराणसी के सुशांत कुमार मुखर्जी एवं

6. हिन्दुस्तान दैनिक, मीरजापुर के उप ब्यूरो प्रमुख अशोक मिश्रा

शामिल रहे। स्वागत विश्व संवाद केन्द्र, काशी न्यास के सचिव प्रदीप कुमार, विषय प्रस्थापना काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अत्रि भारद्वाज, संचालन कार्यक्रम संयोजक डॉ. अम्बरीष राय एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्व संवाद केन्द्र, काशी न्यास, काशी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. हेमन्त गुप्ता ने किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन जी, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह डा0वीरेन्द्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी, काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश जी, समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, प्रो. राकेश तिवारी, महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह , डॉ0 पियुष श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।








Tuesday, April 7, 2026

'विश्व कल्याण' की भावना और हमारी संगठित शक्ति देख सभी देश भारत से मित्रता करना चाहते हैं — रमेश जी

पथ संचलन हमारे अनुशासन, हमारी एकता और संगठित शक्ति का प्रकटीकरण

प्रयागराज। अपने दैनिक जीवन के कार्यों के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की उन्नति का कार्य भी हम कर रहे हैं। यह कार्य पूरे भारतवर्ष का है। इसी प्रेरणा और संदेश के साथ आज इस 'पथ संचलन' का आयोजन है कि संपूर्ण समाज हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चले। यह पथ संचलन हमारे अनुशासन, हमारी एकता और संगठित शक्ति का प्रकटीकरण है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रयागराज दक्षिण भाग द्वारा हनुमान नगर एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में नववर्ष एवं शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित पथ संचलन को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि चैत्र मास और नवरात्रि के पावन अवसर पर भारतीय नववर्ष मनाते हुए प्रकृति की हरियाली और उसकी नवीन ऊर्जा से प्रेरणा लेकर हम एक संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जो लोग भारत माता को 'अबला' कहते थे, आज उन्हें यह देश बता रहा है कि 140 करोड़ बंधु-बांधवों की यह संगठित शक्ति अबला नहीं हो सकती। आज विश्व में युद्ध और विनाश का माहौल है, लेकिन ऐसे समय में भी हमारी 'विश्व कल्याण' की भावना और हमारी संगठित शक्ति को देखकर संसार के सभी देश भारत से मित्रता करना चाहते हैं। हमारी यह शक्ति किसी को मिटाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया का कल्याण करने के लिए है। हम तो विश्व बंधुत्व को मानने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि भारत ज्ञान और विज्ञान का सिरमौर है। इतिहास साक्षी है कि तक्षशिला, नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला जैसे हमारे महान विश्वविद्यालयों में कभी पूरी दुनिया से लोग पढ़ने आते थे और भारत को 'विश्व गुरु' मानते थे। सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान, यह सब भारतवर्ष की ही देन है। जब दुनिया 12 महीनों का कैलेंडर नहीं जानती थी, जब उन्हें सौरमंडल और 'सूर्य केंद्रित सिद्धांत' (Heliocentric Theory) का ज्ञान नहीं था, तब भी भारत युगों से जानता था कि सूर्य केंद्र में है और नवग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं। सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित हमारी सटीक कालगणना (सौर और चंद्र वर्ष का समन्वय तथा अधिकमास की व्यवस्था) हमारे विज्ञान का प्रमाण है। गणित से लेकर खगोलशास्त्र तक, हमने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।

उन्होंने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारतवर्ष जैसे-जैसे स्वाभिमान से भर रहा है, हमारी अस्मिता का जागरण हो रहा है। हमें अपने पूर्वजों, इतिहास, साहित्य, भूगोल और अपनी जन्मभूमि पर गर्व महसूस करना है और संगठित होकर एक दिशा में चलना है। यही संघ का लक्ष्य है।

"पूर्ण प्रखरतम उज्ज्वल रवि सम, हिन्दू राष्ट्र साकार प्रकट हो। सुखी, सबल, समर्थ भारत हो।" हम एक ध्येय और एक पथ के पथिक बनकर एक ही दिशा में प्रयासरत हैं। जब राष्ट्र विजय पथ पर चलेगा, तो स्वाभाविक रूप से पूरे विश्व में माँ भारती की जय-जयकार होगी। हमारा एकमात्र लक्ष्य है कि हमारी मातृभूमि दुनिया भर में शीर्ष पर विराजे और परम वैभव को प्राप्त हो। जैसे-जैसे हम संगठित होते जाएंगे, भारतवर्ष की उन्नति और हमारी मंजिल हमारे सामने होगी। माँ भगवती और परमात्मा से यही प्रार्थना है कि वे हम सबको शक्ति दें, ताकि हम संपूर्ण भारतवर्ष को संगठित कर देश को उन्नति के शिखर पर ले जा सकें।

पथ संचलन का प्रारंभ एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज से प्रारंभ होकर जानसन गंज चौराहा, बड़ी स्टेशन, थाना शाहगंज, नखास कोना, चौक, कोठा पर्चा,चंद्रलोक, हीवेट रोड, जानसन गंज चौराहा होते हुए पुन: एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज पहुंचकर विराम लिया। कई स्थानों पर नागरिकों ने स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भारत माता की जय उद्घोष से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करने का दृश्य जगह—जगह देखने को मिला।

संचलन में संजीव जी, घनश्याम जी, शिवकुमार जी, सुबन्धु जी, संजय जी, आशीष मोहन जी, शिवप्रकाश जी, वीर कृष्ण जी, वसु जी, अवधेश जी, नरेन्द्र जी समेत लगभग दो हजार की संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।