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Monday, May 7, 2012

आदि पत्रकार देवर्षि नारद सृष्टि के आदि संचारक हैं- बलदेवभाई शर्मा











वाराणसी, 6 मई। आदि पत्रकार देवर्षि नारद भू-लोक, देवलोक एवं पाताल लोक में सृष्टि के आदि संचारक है। इन तीनों लोकों की समस्याओं को विष्णु एवं भगवान शिव तक पहुंचाने वाले देवर्षि नारद समाजसेवा के लिए प्रतिबद्ध थे। चराचर जगत की समस्या का संचार ही नहीं करते थे अपितु उसके समाधान के लिए प्रयास भी करते थे। वे आधुनिक पत्रकारिता के लिए प्रेरक एवं सत्यान्वेषी थे।  वे पौराणिकता के लिए प्रेरणा थे। वे पौराणिक पात्र नहीं जीवन्त हैं। पत्रकार समाज को चेताने का काम करता है। पत्रकार हमारे जीवन के श्रेष्ठ आदर्शो पर चिन्तन, आचरण करते हैं। पत्रकार को देवर्षि नारद से प्रेरणा लेकर जीवन को संचालित करना चाहिए।
उक्त उद्गार निवेदिता शिक्षा सदन के भाऊराव देवरस सभागार में विश्व संवाद केन्द्र, काशी द्वारा आदि पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती (ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया) की पूर्व संध्या पर आयोजित पत्रकार-सम्मान समारोह एवं संगोष्ठी के मुख्य अतिथि पाचंजन्य के सम्पादक श्री बलदेवभाई शर्मा ने व्यक्त किये। उन्होंने ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा और पत्रकारिता के दायित्व’’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में कहा कि आजादी के बाद हमारा नजरिया राजनीति के चलते बदल गया। आतंकवाद, नक्शलवाद एवं मतान्तरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। ऐसे में मीडिया की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। पुराने पत्रकारों ने राष्ट्रवाद की अलख जगाये रखा। पत्रकारिता का सबसे बड़ा दायित्व राष्ट्रवाद की ज्योति को जलाये रखना है। मीडिया में विदेशी पूंजी निवेश तेजी से बढ़ रहा है। बाहर की पूँजी से संचालित मीडिया को राष्ट्रीय लेकिन वैश्वीकरण और विदेशी पूंजी के निवेशन ने पत्रकारिता लक्ष्य में बदलाव ला दिया।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डाॅ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर देश चिन्तित है। देश आन्तरिक सुरक्षा के गम्भीर संकट का सामना कर रहा है। अंग्रेजों ने देश को धर्म, समाज, जातपात वर्ग आदि कई टुकड़ों में बांटने का षड्यंत्र किया। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री सर विंस्टन चर्चिल इस षड्यंत्र के पीछे थे लेकिन तीन साल पहले उसी ब्रिटेन के वित्तमंत्री ने भारत दौरे के बाद कहा कि किसी भी आपदा के समय यह देश एकसूत्र में बंध जाता है और संकट से जल्दी ही उबर जाता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज के पीछे देखने वाली आँख है। समाज ने जो नहीं देखा उसे आगे लाने का काम पत्रकार करता है। पत्रकार इतिहास में जाकर खोज करता है और भूतकाल से समाचार निकालकर समाज के सामने रखता है। 
आधुनिक युग में कम्प्यूटर, इण्टरनेट, फेसबुक, ट्विटर से त्वरित गति से दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक समाचार सम्प्रेषित हो जाता है।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए सांसद डाॅक्टर मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि भौतिकतावाद एवं बाजारीकरण के चलते पत्रकारिता के मूल्यों एवं सिद्धान्तों में गिरावट आयी है। प्रौद्योगिकी एवं बाजारवाद से राष्ट्रीय सुरक्षा पर संकट बड़ा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब खबर दी नहीं जायेगी बल्कि बेची जायगी तब संकट बढ़ेगा तथा राष्ट्र की सुरक्षा प्रभावित होगी। सांस्कृतिक मान्यताएं खत्म होगी तो राष्ट्रीय संकट बढ़ेगा। जो आनेवाले संकट का संदेश देते हैं वे पत्रकार नारदतुल्य आदरणीय हैं। आर्थिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय मुद्दे पर मीडिया की भूमिका प्रगतिशील होनी चाहिए। 
इस अवसर पर आयोजित पत्रकार सम्मान समारोह में नगर के छः पत्रकारों डाॅ. वशिष्ठ नारायण सिंह, कुमार अजय, अरुण मिश्र, बद्री विशाल, सुश्री नीलिमा दीक्षित एवं लोकनाथ को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया। पाणिनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने वैदिक मंगलाचरण सुनील पाण्डेय ने पौराणिक मंगलाचरण एवं सरस्वती वंदना निवेदिता स्कूल की छात्राओं ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर हिमालच प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव, अमर उजाला के स्थानीय सम्पादक डाॅ. तीर विजय सिंह, संघ के क्षेत्र प्रचारक शिवनारायण जी, प्रान्त प्रचारक अभय कुमार, महामना मदनमोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह, प्रो. धनंजय पाण्डेय, प्रो. दीनबन्धु पाण्डेय, डाॅ. हंसनारायण सिंह ‘राही’ आयकर बार कौंसिल के अध्यक्ष श्री हर्ष सिंह, नागेन्द्र कुमार, विधायक श्यामदेव नारायण चैधरी, रवीन्द्र जायसवाल एवं ज्योत्सना श्रीवास्तव, केदारनाथ सिंह, डाॅक्टर आनन्द प्रभा सिंह, राधेमोहन त्रिपाठी, डाॅ. ज्ञान प्रकाश, डाॅ. माधवी तिवारी, प्रो. आद्या प्रसाद पाण्डेय, डाॅ. वीणा पाण्डेय, डाॅ. अनिल तिवारी, अजय परमार, ओम राहुल सिंह, प्रभाशंकर त्रिपाठी, ओंकार सिंह आदि लोग मौजूद थे। विषय प्रस्तावना विश्व संवाद केन्द्र के सचिव डाॅ. वीरेन्द्र जायसवाल तथा अतिथियों का स्वागत सनातन धर्म इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य डाॅ. हरेन्द्र कुमार राय ने किया। समारोह का संचालन वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. अत्रि भारद्वाज एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्व संवाद केन्द्र के अध्यक्ष प्रो. विशन किशोर ने किया। 
विश्व संवाद केन्द्र, काशी





Sunday, April 15, 2012

रक्त का धर्म है मानवता और मानव को जीवन देना: इन्द्रेश कुमार

















वाराणसी, 15 अप्रैल। विश्व संवाद केन्द्र के सभागार में धर्म संस्कृति संगम काशी सारनाथ के तत्वावधान में ‘‘भारत की खुशहाली सुरक्षा एवं विश्वशांति में सर्वपंथ समन्वय का महत्व’’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए मुख्यवक्ता इन्द्रेश कुमार ( अ.भा.कार्यकारिणी सदस्य, रा.स्व.संघ ) ने कहा कि धर्म समाज को जोड़ता है। रक्त का धर्म है मानवता और मानव को जीवन देना है। नफरत और घृणा के लिए मन में स्थान नहीं है। अहिंसा, अक्रोध, सत्य, मैत्री, करूणा, प्रेम, स्वतंत्रता, सम्मान, सुरक्षा, रोटी, पर्यावरण से ही समरसता एवं खुशहाली आयेगी। चिन्तन में यदि घृणा आ जायेगी तो सत्य के निकट नहीं जाने देगी। भाषा, जाति, पंथ, दल, क्षेत्र आदि से उÿपर उठकर माँ गंगा की अविरलता एवं निर्मलता के लिए कार्य करने की आवश्यकता है। पेड़ बल है जल जीवन है। कैलाश मानसरोवर के मुक्ति के लिए संघर्ष करना होगा। समन्वय एवं समरसता का साहस भारतीय संस्कृति में ही है।
उन्होंने कहा कि भष्टाचार, आतंकवाद, मतान्तरण, प्रदूषण, छुआछूत, बेरोजगारी, अशिक्षा एवं असुरक्षा से समाज कमजोर हो रहा है। अपने मूल पर गौरव का भाव रखते हुए बाकी लोगों का सम्मान करना चाहिए। समरसता और समन्वय की धारा तेजी के साथ बहनी चाहिए।
उन्होंने कविता के माध्यम से सन्देश दिया कि - ‘‘ सपनो के परदे आंखों से हटाती है, किसी भी बात से हिम्मत नहीं हारना, हिम्मत ही इन्सान को चलना व मंजिल पर पहुँचाना सिखाती है।’’
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. गेशे नवांग सामतेन (कुलपति, केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ) ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से संवाद की विकसित परम्परा रही है। आध्यात्मिक, शैक्षणिक एवं दार्शनिक दृष्टि से देखा जाय तो सभी मत-पंथ के लोग आपस में संवाद करते रहे है। भारत के लोग हमेशा सहिष्णु रहे हैं। काशी प्राचीन काल से सांस्कृतिक राजधानी रही है। यहाँ केे विचार सारे विश्व को आलोकित करता है। हमारे दृष्टि में सर्वपंथ समन्वय अनिवार्य किया जाय।
उन्होंने कहा कि खुशहाली एवं सुरक्षा केवल भौतिक संसाधनों से नही प्राप्त किया जा सकता है। खुशहाली व्यक्ति के अन्दर धार्मिक परम्परा द्वारा आती है। निर्भय जीवन के लिए हथियार नहीं बल्कि धार्मिक मूल्यों की आवश्यकता है। शिक्षा में सुधार आवश्यक है। नैतिक शिक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने आज की शिक्षा से यदि खुशहाली नहीं आ रही है तो मौलिक परिवर्तन आवश्यक है। संभी पंथों के द्वारा व्यक्ति परिवर्तन से समाज में खुशहाली एवं शांति लायी जा सकती है।
मुफ्ती अब्दुल वातिन नोमानी (मुफ्ती-ए-शहर बनारस खतीब व इमाम शाही मस्जिद ज्ञानवापी) ने कहा कि पूरी दुनियां में अमन चैने सुकुन हर आदमी चाहता है। कुरान सरीफ में इन बातों का जिक्र है। यदि हमारे मुल्क में अमन होगा तो पूरी दुनियां में अमन कायम होगा। भारत के सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि हमारा मुल्क तरक्की करे। हम अपनी जिम्मेदारी को समझें। कन्धे से कन्धा मिलाकर कार्य करने की जरूरत है। गंगा को दूषित करने वाली सरकार की कोई योजना हमें मंजूर नहीं है।
फादर आनन्द (आई.एम.एस. निदेशक, विश्व ज्योतिजनसंचार केन्द्र, वाराणसी) ने कहा कि खुशहाली केवल साधन एवं सुविधाओं से नहीं आती बल्कि हमारे अन्दर धार्मिक मूल्यों से आती है। सभी पवित्र ग्रन्थों में समदृष्टि की आवश्यकता है।
डाॅ. कपिलदेव शास्त्री (उपाचार्य, श्री कबीर भगवद् आश्रम, छितूपुर, वाराणसी) ने कहा कि भारत में शांति होगी तो पूरे विश्व में होगी। रागद्वेष से रहित होकर निर्णय करें।
श्री रमाशंकर शुक्ल (जोन कोआर्डिनेटर, संत निरंकारी मण्डल शाखा काशी) ने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग की शुरूवात अपने से करनी होगी। आज मनुष्य पैसे के पीछे भाग रहा है। धर्म के सच्चे स्वरूप को सामने लाने की जरूरत है। आचार्य भक्तिपुत्र रोहतम (संस्थापक, भक्तिकुल न्यास एवं संस्थापक मंत्री, राष्ट्रीय संस्कृति परिषद, काशी) ने कहा कि आज विविध सम्प्रदायों के बीच विवाद का कारण अहंकार है। हिंसा और अपराध को लोगों के बीच से निकालना होगा।
डाॅ. हरमिन्दर सिंह दुआ (प्रतिनिधि, गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी, गुरूबाग, वाराणसी) ने कहा कि सभी धर्माचार्यों का उद्देश्य समाज में फैली बुराईयों को दूर करना है। डाॅ. अशोक कुमार जैन (अध्यक्ष, जैन-बौद्ध-दर्शन विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी) ने कहा कि अपनी बातों के साथ-साथ दूसरों को भी सुनना होगा। सभी प्राणियों के साथ-साथ मित्रता का भाव होना चाहिए।
प्रो. रमेश चन्द्र नेगी (आचार्य, केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी) ने कहा कि सभी सम्प्रदायों के लोग आपस में विचारों का विनिमय करेंगे तो विश्व में अशांति नहीं होगी। श्रीमती अमिता दूबे (प्रतिनिधि, महिला मण्डल, अ.भा. गायत्री परिवार, वाराणसी) ने कहा कि कलयुग में संघे शक्ति की आवश्यकता है। डाॅ. आचार्या नन्दिता देवी चतुर्वेदा (प्रमुख, पाणिनी कन्या महाविद्यालय, वाराणसी) ने कहा कि शांति का मूल वेद और अध्यात्म है। स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी ज्योर्तिमयानन्द ने कहा कि खुशहाली मां गंगा की सुरक्षा से आयेगी। जल पहले सुरक्षित हो तो बाकी सब सुरक्षित हो जायेगा। माँ गंगा को निर्मल और अविरल बनाना हम सबका धर्म है।
डाॅ. भागीरथीदास (संत सिद्धपीठ, कबीरचैरा मठ मूलगादी, वाराणसी) ने कहा कि सभी धर्म ग्रन्थों में समानता है। बीच के लोग जो लड़ाई पैदा करते हैं उनकों समझाना होगा। धर्म संस्कृति संगम काशी सारनाथ के अध्यक्ष प्रो. रामरक्षा त्रिपाठी ने कहाकि धर्म एक पवित्र नदी है इसके तत्व को समझना होगा।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रो. जयप्रकाश लाल, प्रो. दीनबन्धु पाण्डेय, डाॅ. गणनाथ द्विवेदी, के.पी. पाण्डेय, आशा शर्मा, चरनजीत ंिसंह, दलजीत सिंह, रविशंकर पाण्डेय, अरविन्द नारायण, नरेन्द्र दत्त तिवारी, लक्ष्मी सिंह, नीरज तिवारी, मुकेश कुमार ओझा एवं नागेन्द्र कुमार सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन धर्म संस्कृति संगम काशी सारनाथ के मंत्री डाॅ. शुकदेव त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन धर्म संस्कृति संगम काशी सारनाथ की मंत्री डाॅ. माधवी तिवारी ने किया।
प्रस्तुति: विश्व संवाद केन्द्र, काशी

Monday, April 2, 2012

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा रामनवमी के अवसर पर नववर्ष का अभिनन्दन











विश्व संवाद केन्द्र काशी, 31 मार्च। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं दीक्षा ललित कला समिति के संयुक्त तत्वाधान में 31 मार्च को काशी के पवित्र अस्सी घाट पर भारतीय नववर्ष एवं रामनवमी के पावन पर्व पर सांस्कृतिक संध्या समारोह (प्रत्युषा) का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गोपा गौतम के गायन से हुआ। सबसे पहले गणेश वंदना, कजरी, समूहगान, गंगा प्रदुषण नृत्य व द्रौपदी चिरहरण नृत्य का आयोजन किया गया जिसमें मिताली, अंकिता मिश्र, अनुश्री, अर्पिता, राजदीप, प्रिंस, संदीप ने भागीदारी की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ कैंट विधानसभा की विधायक डाॅ. श्रीमती ज्योत्सना श्रीवास्तव एवं सनातन धर्म इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य डाॅ. हरेन्द्र राय ने भगवान श्रीराम के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर किया। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय नववर्ष एवं रामनवमी दोनों ही राष्ट्र के गौरव का विषय है। दोनों हमारी अस्मिता की पहचान हैं।
विशिष्ट अतिथि डाॅ. हरेन्द्र कुमार राय ने कहा कि भारत में लोग केवल अंग्रेजी नव वर्ष को याद रखते हैं जबकि हिन्दी नववर्ष को याद रखना चाहिए।
अतिथियों का स्वागत श्याम जी सिंह तथा चंदन दास गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से काशी विश्व हिन्दू परिषद के अभियन्ता अशोक यादव, जिला प्रचारक हरिशंकर जी, श्यामजी, सन्तोष कुमार पाठक, देवेश ठाकुर, बाल्मिकी तिवारी, योगेन्द्र पांडेय, अवनीश पांडेय, अभिषेक कुमार, शशांक शेखर व उदयबीर आदि लोग शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन आशिष उपाध्याय व मृत्युंजय कुमार द्वारा किया गया। प्रस्तुति: लोकनाथ, वाराणसी

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा रामनवमी के अवसर पर नववर्ष का अभिनन्दन


विश्व संवाद केन्द्र काशी, 31 मार्च। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद एवं दीक्षा ललित कला समिति के संयुक्त तत्वाधान में 31 मार्च को काशी के पवित्र अस्सी घाट पर भारतीय नववर्ष एवं रामनवमी के पावन पर्व पर सांस्कृतिक संध्या समारोह (प्रत्युषा) का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गोपा गौतम के गायन से हुआ। सबसे पहले गणेश वंदना, कजरी, समूहगान, गंगा प्रदुषण नृत्य व द्रौपदी चिरहरण नृत्य का आयोजन किया गया जिसमें मिताली, अंकिता मिश्र, अनुश्री, अर्पिता, राजदीप, प्रिंस, संदीप ने भागीदारी की।
कार्यक्रम का शुभारम्भ कैंट विधानसभा की विधायक डाॅ. श्रीमती ज्योत्सना श्रीवास्तव एवं सनातन धर्म इण्टर कालेज के प्रधानाचार्य डाॅ. हरेन्द्र राय ने भगवान श्रीराम के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलन कर किया। नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि भारतीय नववर्ष एवं रामनवमी दोनों ही राष्ट्र के गौरव का विषय है। दोनों हमारी अस्मिता की पहचान हैं।
विशिष्ट अतिथि डाॅ. हरेन्द्र कुमार राय ने कहा कि भारत में लोग केवल अंग्रेजी नव वर्ष को याद रखते हैं जबकि हिन्दी नववर्ष को याद रखना चाहिए।
अतिथियों का स्वागत श्याम जी सिंह तथा चंदन दास गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से काशी विश्व हिन्दू परिषद के अभियन्ता अशोक यादव, जिला प्रचारक हरिशंकर जी, श्यामजी, सन्तोष कुमार पाठक, देवेश ठाकुर, बाल्मिकी तिवारी, योगेन्द्र पांडेय, अवनीश पांडेय, अभिषेक कुमार, शशांक शेखर व उदयबीर आदि लोग शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन आशिष उपाध्याय व मृत्युंजय कुमार द्वारा किया गया। प्रस्तुति: लोकनाथ, वाराणसी