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Saturday, March 20, 2021

दत्तात्रेय होसबाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह बने

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में दत्तात्रेय होसबाले जी का सर्वसम्मति से अगले तीन वर्ष के लिए सरकार्यवाह (महासचिव/जनरल सेक्रेटरी) के दायित्व पर निर्वाचन हुआ.

दत्तात्रेय होसबाळे जी का जन्म 1954 में कर्नाटक के शिमोगा जिले के होसबाले गाँव में हुआ. बेंगलूरु यूनिवर्सिटी से अंग्रेज़ी विषय में स्नातकोत्तर तक की शिक्षा ग्रहण की.

दत्तात्रेय होसबाळे 1968 में 13 वर्ष की आयु में संघ के स्वयंसेवक बने. और 1972 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े. वर्ष 1978 में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने के पश्चात पूर्णकालिक बने। विद्यार्थी परिषद में प्रांत, क्षेत्र अखिल भारतीय स्तर पर विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने के पश्चात वर्ष 1992 से 2003 तक 11 वर्षों तक अ. भा. संगठन महामंत्री रहे. सन् 1975-77 के आपातकाल के दौरान आन्दोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई और लगभग 14 माह तक मीसाके अंतर्गत जेल में रहे.

वर्ष 2003 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-बौद्धिक प्रमुख बने. वर्ष 2009 से सह-सरकार्यवाह के पद पर कार्यरत थे. दत्तात्रेय होसबाळे को मातृभाषा कन्नड़ के अतिरिक्त अंग्रेज़ी, तामिल, मराठी, हिंदी व संस्कृत सहित अनेक भाषाओं का ज्ञान है. आप कन्नड़ मासिक पत्रिका असीमा के संस्थापक संपादक भी रहे.

भारत में पढ़ रहे विदेशी छात्रों का संगठन विश्व विद्यार्थी युवा संगठन (WOSY) के संस्थापक महामंत्री रहे. आपने अमेरिका, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों का भ्रमण किया है.

KBC में जीती राशि न देने पर नादिर ने दिया तीन तलाक, मामला दर्ज

 

भोपाल में महिला ने कौन बनेगा करोड़पति में जीती राशि न देने पर तीन तलाक देने का आरोप लगाया है. दो बहनों ने कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रुपये की राशि जीती थी. दोनों बहनों में से एक की शादी हो गई, शादी के बाद से ही शौहर रुपयों के लिए प्रताड़ित करने लगा. ससुराल से रुपये मंगवाने के लिए मारपीट करता. 13 मार्च को वह फिर ससुराल पहुंचा और झगड़ा करने लगा. पत्नी से बोला जा मैं तुझे तलाक देता हूं. तलाक, तलाक, तलाक. अब मैं तेरे साथ नहीं रह सकता हूं.

पत्नी को तलाक देने के पहले ही आरोपी दूसरी शादी भी कर चुका है. इससे महिला इतने तनाव में थी कि पता तक ठीक से नहीं बता पा रही थी. थाना प्रभारी तलैया डीपी सिंह ने बताया कि थाने पहुंचते ही महिला ने कहा कि FIR दर्ज कर लो, नहीं तो मैं एक-दो दिन में सुसाइड कर लूंगी. पुलिस ने महिला की पूरी बात सुनने के पश्चात शिकायत लेकर मामला दर्ज किया तथा आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया.

तलैया निवासी 36 साल की पीड़िता ने बताया कि उसके पिता व्यापारी हैं. दिसंबर 2012 में वह अपनी बहन के साथ KBC खेलने मुंबई गई थी. वहां 50 लाख रुपये की राशि जीती थी. इसके तीन साल बाद वर्ष 2015 में उसकी शादी ऐशबाग निवासी नादिर हुसैन से हुई. परिजनों ने दहेज में सोना और लाखों की नकदी दी. नादिर कुछ दिन बाद ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा. उनकी नजर KBC में जीते रुपयों पर थी. कई बार उसके साथ मारपीट कर घर से निकाला गया. उससे KBC में जीते रुपये मंगवाने लगा.

परेशान होकर परिजनों ने उसे रुपये भी दिए, लेकिन उनकी भूख नहीं मिटी. दिसंबर 2020 में नादिर ने दूसरी शादी कर ली. 2015 के बाद से ही वह बहुत कम ससुराल में रहती थी, क्योंकि पति और ससुराल वाले उसे मारपीट कर भगा देते थे. 13 मार्च की शाम वह अपने बड़े भाई के घर पर थी. इसी दौरान पति नादिर वहां पहुंचा और गाली-गलौज करते हुए धक्का-मुक्की भी की. वहां से जाने को कहा तो वह जोर से चिल्लाते हुए नाम लेकर कहता है कि जा तुझे तलाक दिया. अब कोई रिश्ता नहीं. यह कहते हुए वह वहां से चला गया.

दहेज प्रताड़ना का मामला चल रहा

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसने नादिर के खिलाफ ऐशबाग थाने में दहेज प्रताड़ना का मामला भी दर्ज करा रखा है. कई बार उनकी काउंसलिंग हुई. पुलिस और परिजनों ने उन्हें समझाने की कोशिश की. लेकिन वे नहीं माने. पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि KBC से जीती रकम को भी नादिर बर्बाद कर चुका है. उसके बाद भी वह उन्हें परेशान करता रहता है. वह पहले किताबों की सप्लाई का काम करता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद से वह बेरोजगार है और कुछ नहीं करता. महिला के परिजनों ने बताया कि नादिर का बड़ा भाई वकील है. वह उन्हीं के नाम पर धमकाता रहता है.

स्रोत- विश्व संवाद केन्द्र, भारत

Friday, March 19, 2021

निधि समर्पण अभियान में 5.45 लाख स्थानों पर 12.47 करोड़ परिवारों से किया संपर्क – डॉ. मनमोहन वैद्य

  • कोरोना काल में संघ के 5.60 लाख स्वयंसेवक सेवा कार्य में जुटे थे
  • प्रत्येक मंडल तक संघ कार्य पहुंचे, अगले तीन वर्षों की योजना पर होगी चर्चा
  • प्रतिनिधि सभा की बैठक में कल होगा सरकार्यवाह का चुनाव

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि प्रतिनिधि सभा की बैठक वार्षिक होती है, और इसमें हम वर्ष भर के संघ कार्य का सिंहावलोकन करते हैं, तथा अगले साल की तैयारी करते हैं. इस बार सरकार्यवाह का चुनाव भी होने वाला है, तो अगले तीन वर्ष की संघ कार्य की योजना पर भी बैठक में चर्चा होगी. डॉ. मनमोहन वैद्य बेंगलूरु में दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के उद्घाटन के पश्चात बैठक में चर्चा में आने वाले विषयों के संबंध में मीडिया को जानकारी दे रहे थे.

उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण मार्च माह से जून तक संघ का कार्य पूर्ण बंद था, शाखाएं बंद थीं. जुलाई से धीरे-धीरे शाखाएं लगना प्रारंभ हुई थीं. शाखाएं बंद थीं, लेकिन संघ स्वयंसेवक सक्रिय थे. कोरोना के कारण निर्मित आपदा में समाज की सहायता के लिए पहले दिन से ही देशभर में स्वयंसेवक सक्रिय थे. अन्य देशों में जहां वेलफेयर स्टेट प्रभावी है, वहां स्टेट मशीनरी ही सक्रिय होती है. लेकिन यह भारत की विशेषता है कि यहां सरकारी, प्रशासन की सेवाओं के साथ-साथ समाज भी सहयोगी था. बाढ़, भूकंप में सेवा करना अलग बात है, लेकिन कोरोना काल में संक्रमण के खतरे के बावजूद स्वयंसेवकों ने बड़ी मात्रा में सेवा कार्य किया.

सह सरकार्यवाह ने बताया कि कोरोना काल में स्वयंसेवकों ने देशभर में सेवा भारती के माध्यम से 92,656 स्थानों पर सेवा कार्य किए, इसमें 5,60,000 कार्यकर्ता सक्रिय रहे, 73 लाख राशन किट वितरित किए, 4.5 करोड़ लोगों को भोजन पैकेट वितरित किए गए, 90 लाख मास्क का वितरण किया, 20 लाख प्रवासी लोगों की सहायता की गई. 2.5 लाख घुमंतू लोगों की सहायता की, 60 हजार यूनिट रक्तदान भी किया. केवल संघ ही नहीं, समाज के अनेक संगठनों, मठ, मंदिर, गुरुद्वारों ने भी समाज की सेवा की.

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष मार्च की तुलना में 89 प्रतिशत शाखाएं पुनः प्रारंभ हो गई हैं. संघ का कार्य देश के सभी जिलों में है. देश में 6495 खंडों (तालुका) में से 85 प्रतिशत में संघ का कार्य है, 58,500 मंडलों में से 40 प्रतिशत में प्रत्यक्ष शाखा है और 20 प्रतिशत में संपर्क है. आने वाले तीन वर्षों में सभी मंडलों तक संघ का कार्य पहुंचे, ऐसा हमारा प्रयास रहेगा.

उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है, श्रीराम भारत की संस्कृति का परिचय है, चरित्र है. सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के समय 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था मंदिर हमारे सांस्कृतिक जागरण का केंद्र रहे हैं. आज यहां मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है, जिस दिन भारत के सांस्कृतिक मूल्य और भारत की समृद्धि उस ऊंचाई तक पहुंचेगी, तभी यह मंदिर निर्माण का कार्य पूर्ण होगा.

इस संदर्भ में देखा जाए तो सारे भारत को एक सूत्र में जोड़ने की भावनात्मक शक्ति श्रीराम हैं. भगवान मानें या ना मानें, लेकिन सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक अवश्य मानते हैं.

निधि समर्पण अभियान में स्वयंसेवकों का उद्देश्य अधिक निधि एकत्र करना नहीं था. देशभर में अधिक से अधिक गांवों, परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य था. इससे पहले इतना व्यापक जनसंपर्क अभियान नहीं हुआ था. अभियान के तहत स्वयंसेवक 5,45,737 स्थानों पर पहुंचे और लगभग 20 लाख कार्यकर्ता संपर्क अभियान में लगे. अभियान के तहत देश में 12,47,21,000 परिवारों से स्वयंसेवकों ने संपर्क किया. संपूर्ण देश में भावनात्मक एकात्मा का अनुभव हुआ है.

बैठक में कोरोना काल में समाज का सहभाग, भारत ने दुनिया के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया, वैक्सीन उपलब्ध करवाई, अभिनंदन करने वाला प्रस्ताव रहेगा. श्रीराम मंदिर को लेकर भी प्रस्ताव पर चर्चा होगी.

उन्होंने कहा कि कोरोना काल और श्रीराम मंदिर जनसंपर्क अभियान में ध्यान में आया कि संघ को जानने की समाज में उत्सुकता बढ़ी है. इसलिए स्थान-स्थान पर संघ परिचय वर्ग की योजना बनेगी. ऐसी हमारी योजना है. संघ से जुड़ने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है. समाज परिवर्तन के कार्य में संघ के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक लोग मिले हैं, उन सबको साथ लेकर समाज परिवर्तन की दिशा में कैसे अधिक से अधिक हम काम कर सकते हैं, इसके साथ ही अगले तीन वर्षों में संघ कार्य का विस्तार, कार्यकर्ताओं का विकास आदि पर भी चर्चा होगी.

स्रोत- विश्व संवाद केन्द्र, भारत

Wednesday, March 17, 2021

समाज जागरण के लिए सामाजिक-धार्मिक संगठनों को साथ जोड़ेगा संघ – अरुण कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा कि समाज में कार्यरत सामाजिक, धार्मिक संगठनों को साथ लेकर समाज व्यापी, राष्ट्र व्यापी सामाजिक शक्ति खड़ी करना ही संघ का लक्ष्य है. संघ समाज की सामूहिक शक्ति के जागरण का कार्य कर रहा है. देश समाज के लिए कार्य करने वाले समान विचार के समस्त लोगों, संगठनों को साथ जोड़ना इस दिशा में भी संघ प्रयास कर रहा है.

वे बेंगलुरु में 19, 20 मार्च को होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (जनसेवा विद्या केंद्र, बेंगलुरु) के संबंध में जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि कोरोना काल के एक साल में भले ही संघ की प्रतिदिन की गतिविधियां कम थीं, लेकिन स्वयंसेवकों, कार्यकर्ताओं का समाज में संपर्क बहुत बड़ा था. इस काल में अनेक सामाजिक- धार्मिक संगठन, समाज के लिए कार्य करने वाले लोग हमारे निकट आए, हमसे जुड़े, हम अनेक नए स्थानों पर पहुंचे. इसे देखते हुए ऐसी योजना करने वाले हैं कि सभी को साथ लेकर समाज जागरूकता के लिए क्या-क्या कर सकते हैं, इसे लेकर भी बैठक में चर्चा होगी.

हर तीन साल में हम कार्य की समीक्षा करते हैं. पिछले तीन वर्षों संघ कार्य के विस्तार, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण (विशेषकर जल संरक्षण, पौधारोपण, प्लास्टिक का कम से कम उपयोग), सामाजिक परिवर्तन को लेकर योजना तय की थी. प्रतिनिधि सभा में तीन साल में किये कार्य को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होगी कि हम कहां तक पहुंच पाए. सामाजिक परिवर्तन (सोशल ट्रांसफ़ॉर्मेशन) के कार्य में कितना आगे बढ़ सके. इसके साथ ही आने वाले तीन सालों की योजना पर भी चर्चा होगी, हमारी दिशा क्या होनी चाहिए, इस पर भी बैठक में चर्चा होगी.

उन्होंने कहा कि संघ ने अपने कार्य की दृष्टि से 60 हजार मंडल, 60 हजार बस्ती बनाई हैं. इनमें से लगभग 65 हजार स्थानों पर संघ की पहुंच है. इन स्थानों पर प्रत्येक परिवार तक संघ की पहुंच हो, कार्य विस्तार की दृष्टि से ऐसा संघ का प्रयास है.

उन्होंने कहा कि बेंगलुरू में 19 और 20 मार्च को प्रतिनिधि सभा होगी. आज शाम से कल शाम तक कार्यकारी मंडल की बैठक रहेगी. अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च ईकाई है. निर्णय प्रतिनिधि सभा में ही लिए जाते हैं.

पिछले वर्ष भी प्रतिनिधि सभा बेंगलुरु में होनी थी, लेकिन परिस्थितियां बदलीं. कोरोना के कारण स्थगित करने का निर्णय लिया गया. इस बार निश्चित हुआ कि बेंगलुरु में ही प्रतिनिधि सभा की जाए.

कोरोना के कारण संघ का भी नियमित काम प्रभावित रहा. लेकिन संघ सरकारी नियम व्यवस्था का पालन करता है और इसीलिए संघ ने अपनी महत्वपूर्ण प्रांत प्रचारक बैठक स्थगित की, इसी प्रकार कार्यकारी मंडल की बैठक भी एक स्थान के बजाय 11 स्थानों पर की.

प्रतिनिधि सभा में 1500 लोग अपेक्षित रहते हैं. लेकिन कोरोना का संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए पहले से ही ध्यान में रखकर तय किया और न्यूनतम आवश्यकता को देखते हुए 450 लोगों को बुलाया. साथ ही तीन दिन के स्थान पर दो दिन की बैठक रखी. उन्होंने कहा कि संघ कार्य की दृष्टि से 44 प्रांत बनाए हैं, इन प्रांतों के निर्वाचित प्रतिनिधि व अन्य लगभग 1000 लोग 44 स्थानों से ऑनलाइल माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे.

उन्होंने कहा कि 19 मार्च सुबह बैठक शुरू होगी, पहला सत्र 8.30 से प्रारंभ होगा. 9 बजे प्रेस वार्ता रहेगी. सह सरकार्यवाह डॉ. मनमोहन वैद्य जी प्रेस वार्ता में रहेंगे. वार्षिक प्रतिवेदन के साथ ही प्रस्तावों के संबंध में जानकारी देंगे. हर तीन साल में सरकार्यवाह का चुनाव होता है तो 20 मार्च को दूसरे सत्र में सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होगी.

खूंटी – जनजाति समाज की लड़कियों का शोषण करने वाला नर्सिंग इंस्टीट्यूट का निदेशक परवेज आलम गिरफ्तार

एनजीओ द्वारा खूंटी जिले में चलाए जाने वाले नर्सिंग इंस्टीट्यूट की कई छात्राओं ने निदेशक पर यौन शोषण का आरोप लगाया था. खूंटी में यह चर्चा थी कि झारखंड सरकार के कुछ रसूख वाले लोग इस मामले को दबाना चाहते हैं. आदिवासी छात्राओं के शोषण के मामले को आखिर हेमंत सोरेन की सरकार में क्यों दबाया जाएगा? इस प्रश्न का उत्तर बाद में स्पष्ट हुआ. बबलू का वास्तविक नाम परवेज आलम था, जो संस्थान को बबलू नाम से चला रहा था.

नर्सिंग की छात्राओं के सब्रका इम्तिहान लेने के लिए, उनसे छेड़छाड़ और यौन शोषण करने का आरोप झारखंड के एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के निदेशक बबलू पर लगा है. परवेज आलम एक नर्सिंग इंस्टीट्यूट का निदेशक है और अपना मजहब छिपाने के लिए उसने अपना नाम बबलू रखा था. वह छात्राओं के सब्र का इम्तिहान लेने के नाम पर उनके कपड़ों में हाथ डालता था और गलत तरीके से छूता था.

पीड़ित छात्राओं के अनुसार संस्थान का निदेशक परवेज आलम, छात्राओं के सब्र का इम्तिहान लेने के नाम पर उन्हें पकड़ कर अपने हाथ उनके कपड़ों में डालता था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आरोपी परवेज आलम पिछले काफी समय से नर्सिंग छात्राओं को अपना शिकार बनाता रहा है. परवेज की करतूतों का खुलासा उस समय हुआ, जब कुछ छात्राओं ने अपनी पीड़ा एक समाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी बाखला से शेयर की. छात्राओं की शिकायत के आधार पर लक्ष्मी ने इस संबंध में राज्यपाल को चिट्ठी लिखी. इसके बाद बीडीओ सविता सिंह के अधीन जांच शुरू हुई और स्थानीय महिला थाने की एक टीम को भी संस्थान में भेजा गया. जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट खूंटी एसपी आशुतोष शेखर को भेजी.

सविता सिंह के अनुसार लड़कियों ने बताया कि परवेज ने उन्हें गलत तरीके से छुआ. यह सब शक्ति परीक्षण के नाम पर हुआ. लड़कियों की उम्र कम है, उन्होंने बताया कि टेस्ट के नाम पर उनके साथ गलत व्यवहार हुआ है. सहनशक्ति परीक्षण क्या होता है, इसके संबंध में मुझे भी कोई अंदाजा नहीं है.

सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी ने राज्यपाल को जो पत्र लिखा है उसमें परवेज आलम के नाम का उल्लेख बबलू सर के तौर पर ही है. बाखला ने पत्र में लिखा कि बच्चियों द्वारा बताया गया कि ट्रेनिंग के नाम पर बबलू द्वारा 15 बच्चियों के साथ एक-एक कर बुलाकर छेड़छाड़ की गई.

बबलू उर्फ परवेज आलम गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन झारखंड की सोरेन सरकार में कई लोग उसे बचाना चाहते हैं.

वैसे झारखंड में मुसलमानों द्वारा आदिवासी महिलाओं को पत्नी का दर्जा दिए बिना घर में रखने की घटना मानो रिवाज बन चुका है. झारखंड की एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि जैसे ही जनजातीय लड़की नर्स या शिक्षिका बनती है, कोई न कोई मुसलमान लड़का उसके पीछे पड़ जाता है.

एक से अधिक विवाह के संबंध में अपने अध्ययन के दौरान इंडिया फाउंडेशन फॉर रूरल डेवलपमेन्ट स्टडीजने पाया कि रांची के आसपास के जिलों को मिलाकर ऐसे एक हजार से अधिक मामले इस क्षेत्र में मौजूद हैं.

झारखंड के जनजातीय समाज में अशोक भगत लंबे समय से काम कर रहे हैं. उनकी संस्था विकास भारती जनजातीय समाज के बीच एक जाना पहचाना नाम है. अशोक भगत शोषण की बात स्वीकार करते हुए कहते हैं एक खास मजहब के लोगों को एक से अधिक बेगम रखने की इजाजत है. उन लोगों ने अपने मजहब की इस कमजोरी का लाभ उठाकर एक-एक पुरुष ने झारखंड में कई-कई शादियां की हैं. आम तौर पर ये लोग झारखंड के बाहर से आए हैं और जनजातीय लड़कियों को दूसरी, तीसरी पत्नी बनाने के पीछे इनका मकसद झारखंड के संसाधनों पर कब्जा और इनके माध्यम से झारखंड में राजनीतिक शक्ति हासिल करना भी है. पंचायत से लेकर जिला परिषद तक के चुनावों में आरक्षित सीटों पर इस तरह वे जनजातीय लड़कियों को आगे करके अपने मोहरे तय करते हैं. वास्तव में जनजातीय समाज की लड़कियों का इस तरह शोषण जनजातीय समाज के खिलाफ अन्याय है. अशोक भगत बताते हैं रांची के मांडर से लेकर लोहरदग्गा तक और बांग्लादेशी घुसपैठियों ने पाकुड़ और साहेब गंज में बड़ी संख्या में इस तरह की शादियां की हैं.

उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि इतनी बड़ी संख्या में ईसाई जनजातीय समाज की लड़कियां दूसरी और तीसरी पत्नी बनकर गैर जनजातीय लोगों के पास गई हैं, लेकिन कभी चर्च ने या फिर कॉर्डिनल ने इस तरह की नाजायज शादी के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला. जनजातीय समाज बेगम-जमात की चालाकियों को समझ रहा है. मुझे विश्वास है कि जनजातीय समाज इन मुद्दों पर जागेगा. आने वाले दिनों में विरोध का स्वर उनके बीच से ही मुखर होगा.

खूंटी यौन शोषण मामले में पीड़ित लड़कियों में जनजातीय समाज की ईसाई लड़कियां भी शामिल हैं, लेकिन चर्च पूरी तरह खामोश है. अब लड़कियों पर दबाव बनाने की बात सामने आ रही है. उन्हें अपना बयान वापस लेने को कहा जा रहा है. यदि आरोपी परवेज आलम की जगह कोई बबलू पासवान या बबलू मिश्रा होता तो यह झारखंड की प्रमुख खबर होती. जैसे कुछ समय पहले झारखंड में एक चोरी के अरोपी के साथ हुई घटनाराष्ट्रीय चिन्ता का विषय बन गई थी क्योंकि आरोपी का नाम तबरेज अंसारी था. उसके बाद लिंचिंगकी कई घटनाएं झारखंड में ही हुई, लेकिन उसकी चर्चा आवश्यक नहीं समझी गई.

पिछले दिनों इटकी के कैसर आलम ने कांके रोड पर रहने वाली जनजातीय समाज की लड़की को जबरन मुसलमान बनाने की कोशिश की. इस संबंध में गोंदा थाने में मामला दर्ज है. आरोप है कि कैसर आलम ने पहले जनजातीय लड़की का बलात्कार किया और शादी के लिए लड़की के सामने उसने मुसलमान बनने की शर्त रख दी. 

स्रोत- विश्व संवाद केन्द्र, भारत 

Monday, March 15, 2021

कोरोना काल में पूरी दुनिया ने समाज के प्रति स्वयंसेवकों का समर्पण देखा

  • 50 वर्षों से संचालित इस शाखा में कई प्रख्यात समाजसेवकों के साथ जुड़ चुके हैं अल्पसंख्यक समाज के भी लोग
  • एक माह से हो रही थी वार्षिकोत्सव की तैयारी

काशी/ जब वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण ने विश्व भर को भयभीत कर दिया था और पूरी दुनिया को अपने घरों में बन्द रहने के लिए विवश कर दिया था तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयसेवकों ने विपत्ति के समय पुनः अपने साहस का परिचय देते हुए समाज के लिए स्वयं को समर्पित कर दिया था. उक्त विचार रविवार को आयोजित काशी दक्षिण भाग के मानस नगर, शिवाला( रत्नाकर) प्रभात शाखा के वार्षिकोत्सव के अवसर पर अपने बौद्धिक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रान्त प्रचारक श्रीमान रमेश जी ने व्यक्त किया.

उन्होंने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि संघ की शाखा अद्भुत कार्यशाला है जहाँ व्यक्तित्व निर्माण होता है. कोरोना काल के दौरान समर्पित स्वयंसेवकों के भाव और समर्पण को दुनिया ने देखा था कि किस प्रकार स्वयंसेवकों ने असहाय और गरीब लोगों की सेवा कर अपने सामाजिक कर्तव्य का निर्वहन किया. उन्होंने स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि संघ के स्वयंसेवको ने "कश्मीर से कन्याकुमारी भारत माता एक हमारी" इस नारे को आत्मसात किया है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्ज़ा समाप्त होना है. वार्षिकोत्सव की अध्यक्षता करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के वेद विभाग, सेवानिवृत प्रो. हृदय रंजन शर्मा ने कहा की सच्चा सुख तभी मिलता है जब पूरे विश्व को परिवार माना जाता है. संघ इसी मूल भावना के साथ कार्य करता है. इसके पूर्व शाखा के स्वयंसेवको ने खेल, दण्ड प्रयोग, पदविन्यास, सूर्य नमस्कार,  आसन, व्यायाम योग, सामूहिक गणगीत, घोष वादन का सुन्दर प्रदर्शन किया. इस दौरान अल्पसंख्यक लोगों के साथ क्षेत्र के गणमान्य प्रबुद्धजन एवं स्वयंसेवक परिवारों से माताएं-बहनें भी उपस्थित रही.

50 वर्षों से संचालित इस शाखा में कई प्रख्यात समाजसेवकों के साथ जुड़ चुके हैं अल्पसंख्यक समाज के भी लोग

50 वर्ष पहले शिवाला शाखा को सायं शाखा के रूप में  प्रारंभ किया गया जिसे 18 वर्षों से प्रभात शाखा के रूप में जाना जाता है. इस शाखा के स्वयंसेवकों को उत्साहित करने वाली बात है कि प्रभात शाखा से जहां श्री गोविंदाचार्य जी श्री शंकर तत्ववादी जी एवं प्रो0 दुर्ग सिंह चौहान जी जैसे लोग जुड़े हैं वहीं इस शाखा में अल्पसंख्यक समुदाय से सिकन्दर और फरहान भी जुड़ चुके है. वर्तमान में यह शाखा  नियमित रूप से प्रभात में लगाई जाती है  जहां औसतन उपस्थिति संख्या 26 रहती है जिसमें 8-10 बाल 12 तरुण एवं 5-6 प्रौढ़ स्वयंसेवक नियमित शाखा आते हैं.

एक माह से हो रही थी वार्षिकोत्सव की तैयारी

वार्षिकोत्सव हेतु स्वयंसेवक पिछले एक माह से तैयारी कर रहे थे जिसमें प्रतिदिन सामूहिक गीत, खेल, समता, डण्ड एवं पद्विन्यास आदि का अभ्यास स्वयंसेवकों द्वारा किया जा रहा था. कार्यक्रम के दौरान 50 स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहें. आबादी की दृष्टि से काफी घनी बस्ती वाले इस शाखा क्षेत्र को 5 गट में बाटा गया. वार्षिकोत्सव हेतु 4 बैठकें की  गई जिसमें पूर्ण गणवेश पर विशेष ध्यान दिया गया. कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ दक्षिण भारतीय प्रबुद्धजन भी उपस्थित रहें. इस बीच स्वयंसेवक अपने परिवारों के माता-बहनों एवं अभिभावकों की उपस्थिति से उत्साहित भी थे.