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Saturday, October 22, 2022

जानें, क्यों मनाई जाती है धन्वंतरि जयंती और काशी के धन्वंतरि कूप का महत्व

      हमारे धर्म ग्रंथों में भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद के जनक बताया गया है. हमारे ग्रंथ और शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक देवता किसी न किसी शक्ति से पूर्ण होते हैं. किसी के पास अग्नि की शक्ति है, कोई प्राण ऊर्जा का कारक, कोई आकाश और कोई हवा का संरक्षक है. इसी प्रकार चिकित्सा क्षेत्र में धन्वंतरि जी स्थान रखते हैं. भगवान धन्वंतरि आरोग्य देने वाले हैं जिनके स्मरण मात्र से रोगों से मुक्ति मिलती है| कई औषधियों की प्राप्ति इन्हीं के द्वारा ही प्राप्त हुई है. उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करने वाले देवता भी हैं. पृथ्वी पर उपस्थित समस्त वनस्पतियों और औषधियों के स्वामी भी धन्वंतरि को ही माना गया है. भगवान धनवन्तरि के आशीर्वाद से ही आरोग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु का विभिन्न अवतारों में से एक अवतार भगवान धन्वंतरि का भी है| धर्म ग्रंथों के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि अवतरित हुए थे, इसीलिए इसी तिथि को भगवान धन्वंतरि का पूजन कर हम संसार को रोग मुक्त करने की मंगलकामना करते हैं|

धनवन्तरि का स्वरुप :

धनवन्तरि को भगवान विष्णु का ही एक अंश रुप माना जाता रहा है. इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से ऊपर के दोनों हाथों में चक्र और शंख धारण किए होते हैं. अन्य दो हाथों में से औषधि और अमृत कलश स्थित है.

धन्वंतरि जयंती का महत्त्व :

धन्वंतरि जयंती की विस्तृत जानकारी हमारे ग्रंथों - भागवत, महाभारत, पुराणों इत्यादि में उल्लेख से प्राप्त होता है. भगवान धन्वंतरि को समस्त स्थानों पर आरोग्य प्रदान करने वाला ही बताया गया है. धन्वंतरि संहिता द्वारा ही देव धन्वंतरि के कार्यों का पता चलता है. यह ग्रंथ आयुर्वेद का मूल ग्रंथ भी माना गया है. पौराणिक मान्यता अनुसार आयुर्वेद के आचार्य सुश्रुत मुनि ने धन्वंतरिजी से ही इस शास्त्र का उपदेश प्राप्त किया था.

कौन थे धन्वंतरि ?

     भारतीय इतिहास में धन्वंतरि आयुर्वेद प्रवर्तक थे। इनको देवताओं का वैद्य या आरोग्य का देवता भी कहा जाता है। देवासुर संग्राम में जब देवताओं को दानवों ने आहत कर दिया, तब असुरों के द्वारा पीड़ित होने से दुर्बल हुए देवताओं को अमृत पिलाने की इच्छा से हाथ में कलश लिए धन्वं‍तरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए। देव चिकित्सक धन्वं‍तरि का अवतरण कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) को हुआ था। प्रति वर्ष इसी तिथि को आरोग्य देवता के रूप में धन्वं‍तरि की जयंती मनाई जाती है। उनके नाम के स्मरण मात्र से समस्त रोग दूर हो जाते हैं, इसीलिए वह भागवत महापुराण में स्मृतिमात्रतिनाशनकहे गए हैं। समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे। उसी में भगवान विष्णु के नामों का जाप करते हुए पीतांबरधारी एक अलौकिक पुरुष का आविर्भाव हुआ। 24 अवतारों में एक विष्णु के अंशावतार वही चतुर्भुज धन्वं‍तरि के नाम से प्रसिद्ध हुए और आयुर्वेद के प्रवर्तक कहलाए। आयुर्वेद के आठ अंग इस प्रकार हैं- काय चिकित्सा, बाल चिकित्सा, ग्रह चिकित्सा, ऊर्ध्वांग चिकित्सा, शल्य चिकित्सा, दंत चिकित्सा, जरा चिकित्सा और वृष चिकित्सा।

धन्वंतरि कूप का है बड़ा महत्व :

प्रचलित कथाओं के अनुसार महाभारत काल में राजा परीक्षित को नागराज तक्षक से महाराजा परीक्षित को भंगवान धन्वंतरि बचाने जा रहे थे। उसी समय भगवान धन्वंतरि और नागराज तक्षक की भेंट मध्यमेश्वर क्षेत्र स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर के परिसर में स्थित कूप के पास हुई। भगवान धन्वंतरि और नागराज तक्षक ने अपने-अपने प्रभाव का परीक्षण किया। अपने विष से हरे पेड़ को सुखा देने वाले नागराज तक्षक उस समय परेशान हो गए जब उन्होंने देखा कि भगवान धन्वंतरि ने अपनी चमत्कारी औषधि से उसे पुनः हरा-भरा कर दिया। तब नागराज तक्षक ने छलपूर्वक भगवान धन्वंतरि की पीठ पर डस लिया, जिससे कि वह औषधि का लेप वहां न लगा सकें। उसी समय भगवान धन्वंतरि ने अपनी औषधियों की मंजूषा कूप में डाल दी थी, जिसे काशी में धन्वंतरि कूप कहा जाता है।

Wednesday, October 19, 2022

देश में सब पर लागू होने वाली जनसंख्या नीति बननी चाहिए : दत्तात्रेय होसबाले

  • आरएसएस के सरकार्यवाह बोले, साल भर में बढ़ीं 6600 संघ की शाखाएं  


प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बुधवार को यहां कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय समुदाय के लोगों में भी स्वाभिमान जागरण के कारण ‘‘मैं भी हिन्दू हूँ ’’ का बोध विकसित हुआ है।  

संघ के सरकार्यवाह आज प्रयागराज के गौहनिया स्थित जयपुरिया स्कूल के वात्सल्य परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वाभिमान जागरण के कारण ही पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय समुदाय के लोग अब संघ से भी जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि मेघालय और त्रिपुरा राज्य के जनजाति समुदाय के लोग संघ के सरसंघचालक जी को भी इस बोध के साथ आमंत्रित करने लगे हैं।

प्रयागराज में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चार दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के अंतिम दिन दत्तात्रेय होसबाले ने  पत्रकारों को बताया कि संघ अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष में बहुत से आयामों में कार्य को गति प्रदान कर रहा है। कोरोना की विभीषिका के कठिन समय में भी संघ ने अपने कार्यों के आयामों में अभूतपूर्व प्रगति की है।

जनसंख्या असंतुलन पर चिंता जताई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह ने कहा कि देश में जनसंख्या विस्फोट चिंताजनक है। इसलिए इस विषय पर समग्रता से व एकात्मता से विचार करके सब पर लागू होने वाली जनसंख्या नीति बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि  मतांतरण होने से हिंदुओं की संख्या कम हो रही है। देश के कई हिस्सों में मतांतरण की साजिश चल रही है। कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ भी  हो रही है। सरकार्यवाह ने कहा कि जनसंख्या असंतुलन के कारण कई देशों में विभाजन की नौबत आई है। भारत का विभाजन भी जनसंख्या असंतुलन के कारण हो चुका है ।

2024 तक सभी मंडल शाखा युक्त होंगे

सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि वर्ष 2024 के अंत तक हिंदुस्तान के सभी मंडलों में शाखा पहुंचाने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि कुछ प्रांतों में यह कार्य चुनिंदा मंडलों में 99 प्रतिशत तक पूरा कर लिया है। चित्तौड़ ,ब्रज व केरल प्रांत में मंडल स्तर तक शाखाएं खुल गई है। सरकार्यवाह ने बताया कि पहले देश में 54382 संघ की शाखाएं थी अब वर्तमान में 61045 शाखाएँ लग रही है। साप्ताहिक मिलन में भी 4000 और मासिक संघ मंडली में विगत एक वर्ष में 1800 की बढ़ोतरी हुई है।

देश में तीन हजार निकले शताब्दी विस्तारक

सरकार्यवाह ने बताया कि वर्ष 2025 में संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस निमित्त संघ कार्य के लिए समय देने के लिए देशभर में तीन हजार युवक शताब्दी विस्तारक के नाते निकले हैं। अभी एक हजार शताब्दी विस्तारक और निकलने है। 

कार्यकारी मंडल की बैठक में सामाजिक विषयों पर भी हुई चर्चा

दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि संगम नगरी में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में जनसंख्या असंतुलन, महिला सहभागिता, मतांतरण और आर्थिक स्वावलंबन जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई तथा संघ कार्यों को विस्तार प्रदान करने की विस्तृत कार्ययोजना के संबंध में विचार मंथन हुआ। 

जनसंख्या असंतुलन से संबंधित एक सवाल के जवाब में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि विगत 40-50 वर्षों से जनसंख्या नियंत्रण पर जोर देने के कारण प्रत्येक परिवार की औसत जनसंख्या 3.4 से कम होकर 1.9 हो गई है। इसके चलते भारत में एक समय ऐसा आएगा जब युवाओं की जनसंख्या कम हो जाएगी और वृद्ध लोगों की आवादी अधिक होगी, यह चिंताजनक है।

देश को युवा देश बनाए रखने के लिए संख्या को संतुलित रखने पर उन्होंने ज़ोर दिया। वहीं मतांतरण और बाहरी घुसपैठ जैसे दुष्चक्र के कारण होने वाली जनसंख्या असंतुलन पर चिंता भी व्यक्त की। 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की बैठक जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर यमुनापार में गौहनिया स्थित वात्सल्य विद्यालय परिसर में आयोजित हुई। पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक का शुभारम्भ किया था। बुधवार यानि 19 अक्टूबर को बैठक का समापन  हुआ।

Tuesday, October 18, 2022

संघ की बैठक में परिवार प्रबोधन और पर्यावरण संबंधी कार्यों पर हुई विस्तृत चर्चा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ- अ.भा. कार्यकारी मण्डल बैठक का तीसरा दिन
प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की बैठक में मंगलवार को सेवा कार्य तथा विभिन्न गतिविधियों जैसे परिवार प्रबोधन एवं पर्यावरण संबंधी कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।  

बैठक में आज तीसरे दिन कुछ विशेष कार्यक्रमों के वृत्त रखे गये। इनमें पूजनीय सरसंघचालक जी की सितंबर 2022 में हुई मेघालय यात्रा का विषय भी शामिल था। इस यात्रा में मेघालय के खासी, जयंतिया व गारो लोगों द्वारा पूज्य सरसंघचालक जी का भव्य स्वागत किया गया था। पूज्य सरसंघचालक जी ने यात्रा के दौरान वहां सेंग खासी समुदाय के पारंपरिक धार्मिक पूजा स्थल का दर्शन भी किया था। 

पूज्य सरसंघचालक जी ने अगस्त 2022 में दिल्ली में “सुयश” कार्यक्रम के तहत विभिन्न सामाजिक कार्य में जुड़े संस्थाओं के कार्यक्रम में भाग लिया था। बैठक में मेघालय यात्रा और सुयश कार्यक्रम को लेकर कार्यकारी मंडल ने विस्तार से चर्चा की।

इसके अतिरिक्त आज की बैठक में संघ से ज्वाइन आरएसएस (ऑनलाइन) माध्यम से जुड़ने के लिए बड़ी संख्या में आ रहे लोगों को संघ कार्य से जोड़ने पर भी विस्तार से चर्चा हुई. बैठक में संघ कार्यविस्तार पर भी चर्चा हुई। ज्ञात हो कि संघ ने 2024 तक सभी मंडलों और एक लाख स्थानों तक कार्य पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की यह बैठक जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर यमुनापार में गौहनिया स्थित वात्सल्य विद्यालय परिसर में आयोजित हो रही है। 

पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक का शुभारम्भ किया था। बुधवार यानि 19 अक्टूबर को बैठक का समापन होगा। 

Sunday, October 16, 2022

प्रयागराज में प्रारम्भ हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की बैठक

प्रयागराज। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की बैठक आज प्रयागराज में आरम्भ हुई। बैठक का शुभारम्भ परमपूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहनजी भागवत और माननीय सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करके किया। यह बैठक 19 अक्तूबर सायंकाल तक चलेगी। बैठक में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी, संघ द्दृष्टि से सभी 11 क्षेत्रों व 45 प्रांतों के संघचालक, कार्यवाह व प्रचारक और उनके सह उपस्थित हैं। बैठक में अपेक्षित 377 में से अधिकतम कार्यकर्ता उपस्थित हैं । बैठक का प्रारम्भ करते हुए माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने बैठक में आए हुए सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उसके पश्चात् गत दिनों दिवंगत हुए समाज जीवन में सक्रिय प्रमुख व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी गई, उसमें प्रमुख द्वारका पीठ के पूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी, पंचपीठाधीश्वर आचार्य धर्मेंद्र जी, पूर्व न्यायाधीश आर. सी. लाहोटी जी, हास्य कलाकार श्री राजू श्रीवास्तव जी, प्रसिद्ध उद्योगपति सायरस मिस्री जी, पुरातत्वविद श्री बी. बी. लाल जी तथा समाजवादी नेता श्री मुलायम सिंह यादव जी हैं. बैठक में संघ शताब्दी की दृष्टि से कार्यविस्तार के लिए बनी योजना की समीक्षा, प्रवास की योजना, समसामयिक विषयों पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त पूज्य सरसंघचालक जी के विजयादशमी उद्बोधन में आए विषयों - जनसंख्या असंतुलन, मातृभाषा में शिक्षा, सामाजिक समरसता, महिला सहभाग आदि विषयों पर चर्चा होगी। पर्यावरण, कुटुम्ब प्रबोधन में चल रहे प्रयासों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।




Saturday, October 15, 2022

अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल चार दिवसीय बैठक प्रयागराज में कल से प्रारंभ होगी

प्रयागराज. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की चार दिवसीय बैठक रविवार से प्रयागराज में प्रारम्भ हो रही है. बैठक में संघ रचना के सभी 45 प्रांतों के प्रांत संघचालक, कार्यवाह तथा प्रचारक एवं उनके सह भागीदारी करेंगे.

अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बैठक स्थल पर शनिवार को पत्रकारों को बताया कि बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, माननीय सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी तथा सभी सह सरकार्यवाह एवं अन्य अखिल भारतीय अधिकारियों सहित कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहेंगे.

सुनील आंबेकर ने बताया कि अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की इस चार दिवसीय बैठक में बीते मार्च माह में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में बनी वार्षिक योजना की समीक्षा होगी तथा संघ कार्य के विस्तार का वृत्त भी लिया जाएगा. देश में वर्तमान समय में चल रहे समसामयिक विषयों पर भी चर्चा होगी. इसके अलावा बैठक में संघ के विजयादशमी उत्सव पर पूजनीय सरसंघचालक जी के उद्बोधन में महत्वपूर्ण विषयों के अनुवर्तन पर भी चर्चा होगी.

उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की बैठक में इसके अलावा नागपुर में 14 नवम्बर से आठ दिसम्बर तक होने वाले संघ शिक्षा वर्ग (तृतीय वर्ष) जो इस वर्ष मई के अलावा आयोजित हो रहा है, उसकी योजना पर भी चर्चा होगी. बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष में कार्य विस्तार की रूपरेखा को लेकर भी चर्चा की जाएगी. 2025 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए कार्य विस्तार की योजना बनी है. वर्तमान में संघ की देश भर में 55 हजार स्थानों में शाखाएं हैं, जिन्हें मार्च 2024 तक एक लाख स्थानों तक पहुंचाने की योजना है.

पत्रकारों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर में सुनील आंबेकर ने कहा कि विजयादशमी उत्सव पर सरसंघचालक जी के उद्बोधन में उठाये गये मुद्दों पर बैठक में विशेष चर्चा होगी, जिनमें मातृभाषा में शिक्षा, जनसंख्या असंतुलन, महिला सहभाग, सामाजिक समरसता और समाज के सभी वर्गों के साथ संवाद प्रमुख हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की यह बैठक जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर यमुनापार में गौहनिया स्थित वात्सल्य विद्यालय परिसर में आयोजित हो रही है, बैठक का समापन 19 अक्तूबर को होगा.

Thursday, October 6, 2022

संघ राष्ट्र को वैभव के शिखर पर ले जाने के लिए कृत संकल्पित - रमेश जी


प्रयागराज| त्रिवेणी नगर स्थित नाग वासुकी मंदिर के सामने संपन्न हुये प्रयाग उत्तर भाग के विजयादशमी उत्सव में स्वयंसेवकों को प्रांत प्रचारक श्रीमान रमेश जी ने संबोधित किया। उन्होने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि अनाचार पर सदाचार की विजय का प्रतीक विजयदशमी पर्व है। देश में सदाचार की ही जय जयकार हो इसी उद्देश्य को लेकर विजयदशमी के दिन संघ की स्थापना 1925 में की गई। सज्जन शक्ति के संरक्षण तथा देश विरोधी तत्वों से लोगों को सजग करने के लिए कलयुग में संघावतार हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि जन-जन में अनुशासन तथा राष्ट्रप्रेम का भाव भरकर देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाली पूरी पीढ़ी तैयार करने के अभियान में संघ संलग्न है। संघ के प्रयासों से आज भारत पूरी दुनिया में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।  संघ वैभव के शिखर पर राष्ट्र को ले जाने के लिए कृत संकल्पित हैं। धारा 370 की समाप्ति, अयोध्या में भव्य राम मंदिर की शुरुआत काशी में विश्वनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण से देशवासियों की सैकड़ों वर्ष की आकांक्षा फलीभूत हुई है| वास्तव में परम वैभव की मंजिल के यह मील के पत्थर हैं। लक्ष्य तो अखंड भारत का निर्माण करना है जो महर्षि अरविंद का सपना था। अध्यक्षता डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. गोविंद दास ने की। मंच पर मा.सह विभाग संघचालक नागेंद्र जी भाग संघचालक लालता प्रसाद जी उपस्थित थे।

  उद्बोधन के पूर्व मंचस्थ अतिथियों के साथ प्रांत प्रचारक श्रीमान रमेश जी ने परंपरागत ढंग से अक्षत पुष्प आदि सेशस्त्र पूजन किया। पूर्ण गणवेश धारी, कंधे पर दंड संभाले विशाल संख्या में पंक्ति बद्ध बाल तरुण एवं प्रौढ़ स्वयंसेवकों ने नाग वासुकी मंदिर के पूर्वी दरवाजे से घोष की धुन के साथ पथ संचलन शुरू किया।  स्थानीय लोगों ने गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। कच्ची सड़क पहुंचने पर राष्ट्र सेविका समिति की बहनों ने भी पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के अनुष्ठान में लगा है संघ - अनिल जी

प्रयागराज| संघ व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के अनुष्ठान में लगा हुआ है| उक्त विचार पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक श्रीमान अनिल जी ने व्यक्त किया| वे शंकरगढ़ में आयोजित विजयदशमी उत्सव में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे।

     अपना विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विश्व गुरु के पद पर आसीन होकर यह देश पूरे विश्व को शांति मैत्री करुणा और अहिंसा का एक बार फिर भाव बोध कराए यही संघ चाहता है। उन्होंने कहा कि संघ का ध्येय व्यक्ति को समाज से जोड़ना है। सम्पूर्ण समाज को एकता के सूत्र में बांधने के लिए संघ पिछले 97 वर्षों से लगातार प्रयास कर रहा है। प्रयास के परिणाम अब दिखाई भी देने लगे है।

कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ यहां पथ संचलन निकाला जिसमें बालकों एवं प्रौढ़ गणवेशधारी स्वयंसेवक सम्मिलित हुए। प्रयागराज विभाग के सभी 40 नगरों तथा गंगापार, यमुनापार के सभी अंचलो में विशाल पथ संचलन एवं शस्त्र पूजन के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक‌ संघ ने विजयदशमी का पर्व संघ स्थापना दिवस के रूप में मनाया।