WELCOME

VSK KASHI
63 MADHAV MARKET
LANKA VARANASI
(U.P.)

Total Pageviews

Thursday, January 1, 2026

हिंदुत्व एक जीवन दृष्टि है, विनम्रता इसका स्वरूप — सुभाष जी



सोनभद्र। हिंदुत्व एक जीवन दृष्टि है। हिंदुत्व का एक रूप विनम्रता का भी है और हिंदुत्व का एक रूप विशालता का भी है जो हमेशा देखने को मिलता है। उक्त विचार सोनभद्र नगर द्वारा बभनौली मोहाल मे आयोजित हिन्दू सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने व्यक्त किया।

उन्होंने कहा​ कि हिंदू धर्म मानवता का धर्म है। हमारी संस्कृति हिंदू है इसलिए हम हिंदू है। हमारे पुरखे हिंदू थे, इसलिए हम हिंदू हैं। हिन्दूत्व की विनम्रता यह है कि हम चींटी के अंदर भी भगवान का दर्शन करते हैं। सर्वत्र ईश्वर का दर्शन करते हैं जो कुछ हमारे आंखों के सामने है उसे हम परमात्मा के रूप में हम देखते हैं। कबीरदास जी कहते हैं केवल काशी में ही भगवान नहीं है, सब जगह भगवान है। इस प्रकार की मान्यता सिर्फ हिंदुत्व की है। इसलिए हमारे देश में हमने धरती को भी माता माना है। हमारे देश के एक प्रसिद्ध कवि थे। भारत के प्रधानमंत्री भी बने जिनका नाम अटल बिहारी वाजपेयी था वे कहते थे यह जो धरती है। यह केवल ईट पत्थर का ढेर नहीं है। वे कहते थे यह वंदन की भूमि है। यह चंदन की भूमि है। यह अभिनंदन की भूमि है। इसका कण कण शंकर है, इसका बिंदु बिंदु गंगाजल है। हम जिएंगे तो इसके लिए, मरेंगे तो इसके लिए और मरने के बाद भी हमारी हड्डियों से एक ही आवाज़ आएगी, भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

उन्होंने आगे कहा कि भारत हिन्दुस्तान है, हिंदू भूमि है,यह पुण्य भूमि है। यह धर्म भूमि है। यह आर्यभूमि है। हम यहां पैदा हुए हैं। इसके नाते से हमारी पहचान है और इसलिए हम हिंदू हैं। विवेकानंद कहते थे वह रस हिंदू का रस है। गर्भ से हम हिंदू हैं। एक बड़ा परिवार हमारा पुरखे, सब हिंदू है विराट सागर समाज अपना, हम सब इसके बिंदु है पुरखे सबके हिंदू है। गर्व से कहो हम सब हिंदू है। जाति का नहीं, हिंदू के नाते हम सब गर्व करें। हिंदू स्थान में रहने वाले लोगों के साथ सभी हिन्दू है। हमने विनम्रता सीखा है और हमारे पुरखों ने हमको विशाल हृदय दिया है, विशालता भी सिखाया है। वसुंधरा परिवार हमारा यह विश्व एक परिवार है। दुनिया में अगर कोई विश्व को परिवार मानता है तो वो केवल और केवल हिंदू ही है, जो कहते हैं कि विश्व हमारा परिवार है, हम इतना विशाल चिंतन रखते हैं।

उन्होंने बताया कि विवेकानंद जी ने अमेरिका के वासियों को संबोधित करते हुए अमेरिका में कहा था कि मैं उस देश से आया हूं जिस देश के लोगों ने दुनिया के सताए हुए लोगों को शरण देने का काम किया है। उन्होंने कुटुम्ब के अभिभावकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि परिवार के अंदर हम मंगल संवाद करें। छोटे बच्चों को स्नेह दे बड़ों को सम्मान दें। नारी का सम्मान करें। महिलाओं का सम्मान करें। मातृ शक्ति का सम्मान करिए, नारी माता लक्ष्मी के रूप में है। नारी सरस्वती के रूप में है। नारी दुर्गा के रूप में है। जो संकट पड़ने पर नारी चंडी के रूप में भी प्रकट हो जाती है। नारी से ही नर होता है। जीजा माता बाल शिवा को शिवाजी बना करके दुश्मनों को धूल चटाने का काम करती है। नारी अपने पति के प्राणों को लाने के लिए यमराज से भी लड़ जाती है। नारी शक्ति है, उसको हम पहचानें और उसका सम्मान करें। परिवार को मजबूत करें। हमारे परिवार मजबूत होंगे तो भारत मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि हमारा समाज मजबूत होना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भूतपूर्व सैनिक कौशल गिरी ने किया। विशिष्ट अतिथि संत समाज के सौरभ भारद्वाज, मातृशक्ति चित्रा जालान व जिरवा देवी ने हिन्दू धर्म समाज व कुटुम्ब प्रबोधन और नागरिक कर्त्तव्य के पालन पर जोर दिया। कहा कि आज विश्व के पटल पर सर्वश्रेष्ठ देशो में एक ही नाम चलता है भारत, जिनको माता के नाम से संबोधित किया जाता है। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती व सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ से हुआ। कार्यक्रम का संचालन नीरज कुमार सिंह एडवोकेट ने किया। कार्यक्रम में हरेंद्र, महेश शुक्ला, शिवम सिंह, आशुतोष सिंह, अमन, प्रियांशु, सभासद विरेन्द्र प्रताप सिंह, रामबली आदि व मातृशक्ति के रूप में माताएँ बहने उपस्थित रही।