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Monday, February 26, 2024

काशी : राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि मंडल की बैठक संपन्न, संदेशखाली की घटना पर पारित किया निषेध प्रस्ताव

 

काशी. वाराणसी में आयोजित राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि मंडल की बैठक में संदेशखाली की घटना पर निषेध प्रस्ताव पारित किया गया| बैठक में राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका शातक्का जी ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज ने समाज के स्वत्व और स्वाभिमान का जागरण कर धैर्य और साहस से स्वराज्य के मार्ग की सभी बाधाओं का सामना किया. हम सब को भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज की सज्जन शक्ति को सक्रिय करने का कार्य करना है”. अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि मंडल की बैठक के समारोप सत्र में उन्होंने कहा कि “भविष्य सज्जन शक्ती के हाथ में है, जिसके कारण भारत विश्व वंदनीय होगा”.

वाराणसी में आयोजित बैठक को संकलित करते हुए प्रमुख कार्यवाहिका ए. सीताजी ने बैठक में चर्चित कार्य स्थिति और आगे करने वाले कार्य की योजना की जानकारी दी. पर्यावरण संवर्धन, परिवार प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य के प्रति समाज जागरण के कार्य को अधिक गति से करने की बात कही.

बैठक में सन्देशखाली में महिला उत्पीड़न की घटना के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया. बैठक में देश के 35 प्रांत से 115 प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

संदेशखाली की घटना पर निषेध प्रस्ताव

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में हो रही महिलाओं की त्रासदी अत्यंत खेदजनक और गंभीर चिंता का विषय है. दुर्भाग्य से राज्य की मुख्यमंत्री स्वयं एक महिला होने के उपरांत भी वहाँ महिलाओं के विरुद्ध हो रहे इन अपराधों पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. जननी, जन्मभूमि और जगत जननी ऐसी मातृत्व की त्रिधाराओं की विश्व में प्रतिस्थापना करने वाले शोनार बांगला में निरीह, निरपराध महिलाओं का शोषण और दर्दनाक उत्पीड़न सर्वथा निंदनीय है.

पिछले कुछ वर्षों से २४ परगना जिले के इस सीमावर्ती क्षेत्र में सामाजिक तानाबाना छिन्न-भिन्न होता दिखाई दे रहा है. अराजकता का माहौल, असामाजिक तत्वों की सक्रियता, अवैध घुसपैठ और जनसंख्या को असंतुलित करने के प्रयास राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत धोखादायक हैं. उच्चतम न्यायलय की खंडपीठ, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग इन सभी कानून व्यवस्था को बहाल रखने वाली संस्थाओं द्वारा कड़े शब्दों में लताड़े जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से कोई भी कार्यवाही न होना और अपराधियों को पकड़ने का प्रयास भी न करना, बल्कि पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग चढ़ाने का प्रयास करना राज्य सरकार की हीन मानसिकता का परिचायक है. राज्य प्रशासन महिलाओं का रक्षण करने में और उनको सामाजिक न्याय दिलाने में असफल रहा है. महिलाओं पर बर्बर बलात्कार और उनका निकृष्ट यौन उत्पीड़न करने के आरोपी शाहजहां शेख जैसे अपराधियों को राज्य सरकार का आश्रय मिल रहा हो, ऐसा प्रतीत हो रहा है.

सभ्य समाज का मस्तक लज्जा से झुका देने वाली इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिए राष्ट्र सेविका समिति का यह ‘अखिल भारतीय कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि मंडल’ पश्चिम बंगाल सरकार की कड़ी आलोचना करता है तथा उन पीड़ित महिलाओं के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार, पुलिस एवं जाँच एजेंसियों से निवेदन करता है कि सभी अपराधियों को कठोरतम दंड दिया जाए. साथ ही पीड़ित महिलाओं के शारीरिक और मानसिक उपचार की और उनके पुनर्वसन की व्यवस्था की जाए.

अमानवीय अत्याचार की भोग बनी अपनी पीड़ित भगिनी के कष्टों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राष्ट्र सेविका समिति उन्हें यह आश्वासन देना चाहती है कि इस विषम स्थिति में हम आपके साथ हैं. अन्याय के प्रति निडर होकर आवाज उठाने के आपके साहस पर हमें गौरव है. इसी भावना को मन में रखकर पश्चिम बंगाल और देशभर की सेविकाएं अपनी इन बहनों की यथासंभव सहायता के लिए तत्पर हैं.



स्रोत - विश्व संवाद केन्द्र, भारत 

Sunday, February 25, 2024

जौनपुर जिले में शाखा संगम का भव्य आयोजन


जौनपुर। जौनपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा बड़े स्तर पर शाखा संगम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिले के कुल 12 खंड एवं 02 नगर के कुल 168 शाखाओं पर यह कार्यक्रम आयोजित हुए। जिसमें 2276 स्वयंसेवक उपस्थित रहें।

जिले में सभी स्थानों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कार्यक्रमों को संबोधित किया जिसमें मुख्य रूप से सिकरारा खण्ड में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के मुख्य मार्ग प्रमुख राजेंद्र सक्सेना जी ने कहा कि शाखा संघ की साधना है। यह हमारी सांस्कृतिक एवं देश भक्ति का केंद्र बिंदु है। हिंदू समाज को संगठित करना, देश भक्ति की भावना को जागृत करना ही संघ का लक्ष्य है। कार्यक्रम में मा. खंड संघचालक, खंड कार्यवाह समेत अनेक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

शाहगंज नगर के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए काशी प्रांत के प्रचारक प्रमुख रामचंद्र जी ने कहा की शाखा संघ की शक्ति है। सभी बस्ती में शाखा लगे, हिंदू समाज के सभी लोग एकजुट हो, कोई मतभेद न हो शाखा में हम यही सीखते हैं। शाखा से व्यक्ति निर्माण होता है, व्यक्ति से परिवार, फिर समाज और अंत में देश का निर्माण होता है। कार्यक्रम में मा. नगर संघचालक दिलीप जी, सह जिला प्रचारक सूरज जी, कार्यवाह हनुमान जी एवं संघ के सभी स्वयंसेवक उपस्थित रहें।

जौनपुर नगर के टी. डी. कॉलेज में विभाग प्रचारक अजीत जी ने शाखा संगम को संबोधित करते हुए कहा कि सभी शाखाएं एक जगह एकत्रित हो, यह एकरूपता और सामाजिक समरसता को दर्शाता है। यह कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन का नही अपितु राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जागृत करता है। हिंदु समाज संगठित हो रहा है जिसका परिणाम हम श्रीराम मंदिर निर्माण के रुप में देख पा रहे हैं। कार्यक्रम में मा. जिला संघचालक डॉ सुबास सिंह, मा.नगर संघचालक धर्मवीर जी, मा.नगर सहसंघचालक अरुण जी, नगर प्रचारक मंगलेश्वरम जी, डॉ वेद जी, रविन्द्र जी, राजीव जी एवं अन्य स्वयंसेवक बंधु उपस्थित रहें।

खंड सिरकोनी में शाखा संगम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला प्रचारक रजत जी ने कहा कि शाखा ही संघ का आधार है। संघ व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र है। शाखा संगम की प्रसंगिता महत्वपूर्ण है। अगले वर्ष संघ का शताब्दी वर्ष है। इस हेतु से संघ देश के संपूर्ण ग्रामों में शाखा लगाने का लक्ष्य रखा है। यह कार्यक्रम हमे उस उद्देश्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यक्रम में मा.खंड संघचालक डा.आशुतोष मिश्र, खंड कार्यवाह हर्ष सिंह, जिला प्रचार प्रमुख अजय पाठक व अन्य स्वयंसेवक बंधु उपस्थित रहे।




Saturday, February 24, 2024

महापुरूष देश की एकता, अखंडता और अस्मिता के प्रतीक – रमेश जी

संत जब मां के कोख से जन्म लेता है, तो वह किसी न किसी जाति कुल में होता है। लेकिन वह महान बनता है अपने कर्म से

-    संत रविदास जी ने कहा है कि भगवान का भजन सब कर सकते हैं

मीरजापुर| महापुरूष जाति नही बल्कि देश की एकता, अखंडता और अस्मिता के प्रतीक हैं, इसीलिए हमारा संपूर्ण समाज महापुरूषों की जयंती मनाता है| यह संत रविदास, संत कबीर एवं गोस्वामी तुलसीदास जैसे मनीषियों के जीवन के समर्पण का परिणाम है कि विश्व पटल पर भारत एक महाशक्ति बनकर उभर रहा है| उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काशी प्रांत प्रचारक रमेश जी ने व्यक्त किया| वे मीरजापुर में आयोजित संत रविदास जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे|

उन्होंने कहा कि सर्वे भवंतु सुखिन: का दर्शन भारत में प्राचीनकाल से था, यहाँ की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सनातन परंपरा को आगे बढ़ाने वाले संतो एवं महापुरुषों के जीवन को आदर्श मानकर एवं उनकी तिथियों को मनाकर समाज परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लगातार कार्य करता आ रहा है ताकि समाज को संतो मनीषियों के जीवन से प्रेरणा मिल सके। संतो मनीषियों से प्रेरणा लेकर ही सर्व समाज राष्ट्रोन्नति मे अपनी भूमिका का निर्वहन कर पाएगा।

संत परंपरा के वाहक, जिन्होंने अपने तप साधना के बल पर समाज की कुरीतियों को दूर करने का प्रयास कर उसमें सफलता हासिल किया, ऐसे महानायक संत शिरोमणि की जयंती पर देश के अंदर भिन्न-भिन्न कार्यक्रम आज संपन्न हो रहे हैं। यह संपूर्ण समाज और देशवासियों के लिए गौरव की बात है। आडंबर एवं कृतियों से उठकर जहां संघ महापुरुषों की जयंती मना रहा है, वहीं कुछ लोग, दल व जाति में समाज को, महापुरुषों को बांटने का काम कर रहे हैं। यहां तक की देवी-देवताओं को भी जाति-बंधन में बांटने का प्रयत्न किया है।

कहाकि भारत भाव, राग और ताल से मिलकर बनता है। यहां की परंपराओं को पुनर्जीवित करने का कार्य संतो महापुरषों ने किया है, जिसके बल पर परम वैभव की शिखर पर यह देश पहुंच रहा है।  यही कारण है कि सारी दुनिया इसे जगतगुरु के रूप में सिरमौर मानती थी। इसके पीछे संत महापुरुष और यहां की आध्यात्मिक जीवन शैली है। संतो महापुरुषों ने मिलकर देश को गढा है। अलग-अलग युगों काल खंडो में महापुरुषों का जन्म हुआ। संत जब मां के कोख से जन्म लेता है, तो वह किसी न किसी जाति कुल में होता है। लेकिन वह महान बनता है अपने कर्म से। रविदास उन संतों में से हैं जिन्होंने धर्म से बड़ा कर्म को माना है। इस देश में कर्म की प्रधानता रही है और जो कर्म को आधार दिया वह महानता की शिखर पर चढ़ता आया है। 

    प्रांत विचारक ने आगे कहाकि एक बार संत रविदास के मित्र, जो साथ खेला करते थे जब वह एक दिन नहीं आये, तो रविदास चिंतित होकर उनके घर गए और देखा तो उनका प्राण निकल चुका था, लेकिन रविदास जी परिजनों को भी  देख व्यथित हो गए और शव के पास बैठकर सहलाने लगे, कुछ ही देर में वह बालमित्र उठकर बैठ गया।

    उन्होंने बताया कि रविदास जी संतो के लिए निशुल्क पदवेष बनाते थे। बालक रविदास संत शरण और संत चरण में लगातार बना रहे। इनका छोटी उम्र में विवाह कर दिया गया। उनकी सहधर्मिणी के आते ही उनकी आस्था और भी बढ़ गई और सामाजिक रूढ़ी और वैमनस्य को दूर करने का प्रयास शुरू किया। काशी में प्रवचन, प्रेरणा, प्रबोधन करना शुरू किया। तब कुछ लोगों में ईर्ष्या भाव होने लगी। रविदास जी ने कहा है कि भगवान का भजन सब कर सकते हैं।

    गंगा स्नान पर “मन चंगा तो कठौती में गंगा” प्रसंग की चर्चा करते हुए कटौती में से सोने का कंगन निकालना की वृत्तांत को विस्तार से बताया। कहा प्रयागराज कुंभ में शास्त्रार्थ के दौरान विद्वानों के चुनौती पर उन्होंने एक भारी भरकम पत्थर जब गंगा में डाला तो वह पत्थर गंगा स्नान कर नीचे जाने के बाद पुन: ऊपर जाकर तैरने लगा। चित्तौड़ की महारानी मीराबाई एवं झलकारी बाई भी रविदास की शिष्य थी, जो स्वयं काशी चलकर आई थी और बाद में चित्तौड़ में भंडारे का आयोजन कर उन्हें आमंत्रित किया था। जब रविदास पहुचे और भोजन का समय हुआ तो कुछ लोगों ने साथ बैठकर भोजन करने से मना किया। आश्चर्य की बात है कि जैसे ही सभी लोग भोजन करने लगे, हर दो विद्वानों के बीच संत रविदास बैठे हुए भोजन करते नजर आए यह आश्चर्य ही नहीं बल्कि ईश्वरी शक्ति थी जिसके कारण काशी नरेश ने भी उनको गुरु माना और उन्हें संत शिरोमणि की उपाधि प्राप्त हुई, क्योकि संत रविदास किसी पंथ संप्रदाय के विरोधी नहीं थे| वे व्यक्ति से नहीं बल्कि विचारों से परहेज करते थे। बताया कि रविदास और कबीर दोनों एक दूसरे को बड़ा और उपासक मानते थे। क्योंकि संतो ने छोटा-बड़ा, अगड़ा-पिछड़ा नही, बुराई, विसंगति दूर करने का काम, अधर्म से धर्म की ओर ले जाने का काम किया है। देश के अंदर सामाजिक चुनौतियो, बुराइयो को दूर करने वाले लाखो उनके भक्त बने। जब सिकन्दर लोदी को लगा कि इस्लाम को खतरा बढ़ गया है, तो रविदास को दिल्ली बुलाया। संत रविदास दिल्ली में लोदी से मिले, तो उनके सनातनी व्यवहार से वह उनके शरण में आ गया और माफी मांगा। उस समय संत रविदास ने प्रलोभन अथवा दबाव में आकर हिंदू धर्म अथवा हिंदुत्व को नहीं छोड़ा और न स्वीकार किया और निरंतर सनातन धर्म के लिए लगे रहे| ऐसी चुनौतियों को सहने के कारण ही दुनिया में सनातन का अस्तित्व है और भारत विश्व गुरु एवं परम वैभव की ओर आज अग्रसर है।

   इस अवसर पर मा. सह विभाग संचालक धर्मराज जी, विभाग प्रचारक प्रतोष जी, मा. जिला संघचालक शरद चंद जी, जिला कार्यवाह चंद्र मोहन जी, सह जिला कार्यवाह नीरज जी, जिला प्रचारक धीरज जी, अशोक सोनी जी, राजेंद्र जी, केशव जी, वीरेंद्र जी, सुनील जी, लखन जी, अनिल जी, विमलेश जी, शैलेश जी एवं सौरभ जी आदि स्वयंसेवक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें|



Thursday, February 15, 2024

लघु भारत है काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, जहां होता है राष्ट्र का चिंतन - रमेश जी

 पथ संचलन का उद्देश्य राष्ट्र कार्य हेतु प्रेरणा प्रदान करना और राष्ट्रनिर्माण का भाव जागृत करना होता है।

काशी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय लघु भारत है, जहां समग्र राष्ट्र चिंतन और दर्शन प्राप्त होता है। भारतीयता किस प्रकार उत्कर्ष की ओर बढ़े, यही इस विश्वविद्यालय का लक्ष्य है। उक्त विचार बसंत पंचमी के दिन काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी दक्षिण भाग के मालवीय नगर द्वारा आयोजित पथ संचालन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काशी प्रान्त प्रचारक श्रीमान रमेश जी ने कही।

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कृषि मैदान में स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 1929 में नागपुर के मोहिते का बाड़ा शाखा में महामना की भेंट डॉ.हेडगेवार जी से हुई। महामना ने संघ के उत्तम कार्यां को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए समाज से धनराशि एकत्र करने की बात कही। डाक्टर साहब ने उत्तर दिया कि मुझे केवल आपका सानिध्य चाहिए।

विश्वविद्यालय में सन 1928 में संघ कार्य प्रारम्भ हो चुका था

उन्होंने उपस्थित स्वयंसेवकों को बताया कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में सन 1928 में संघ कार्य भैयाजी दाड़ी सहित 30 स्वयंसेवकों ने प्रारम्भ किया था। श्री माधव सदाशिव गोलवरकर जी (श्रीगुरु जी) को संघ से जोड़ने वाले भैयाजी दाड़ी थे। 1936 से 1940 के बीच में संघ कार्य के विस्तार के लिए स्वयंसेवकों द्वारा समर्पित राशि से दो कमरों का भवन महामना ने बनवाया था जिसे आपातकाल के समय में तत्कालीन प्रशासन द्वारा हटा दिया गया।

उन्होंने आह्वान किया कि इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला व्यक्ति राष्ट्रभक्त, नैतिक मूल्यों का पालन करने वाला, देशहित के लिए जीने वाला एवं परम्पराओं का पालन करने वाला हो। क्योकि हिन्दू समाज का संरक्षण एवं सर्वांगीण उन्नति महामना और डाक्टर साहब दोनों ही महापुरुषों का लक्ष्य था। उन्होंने आगे कहा कि एक समय ऐसा था जबकि हिन्दुओं को एकत्र करना मेंढ़क को तराजू में तौलने के बराबर था, परन्तु आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। संघ से निकला कोई भी व्यक्ति अपने मानस में राष्ट्र को प्रथम रखता है, देश के सामने आयी विभिन्न चुनौतियों में संघ देश के साथ खड़ा रहता है। इसी कारण 1962 भारत-चीन युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री ने 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों को दिल्ली आमंत्रित किया था जिसमें तीन हजार स्वयंसेवकों ने गणवेष में भाग लिया।

श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति हेतु भी संघ ने देश भर में जनजागरण किया जिसका परिणाम 22 जनवरी 2024 को अयोध्या राममन्दिर के रूप में पूरे विश्व ने अनुभव किया। हिन्दुत्व की मूल अवधारणा को सत्य सिद्ध करने का और व्यावहारिक रूप में उतारने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ करता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चिकित्सा विज्ञान संस्थान, का.हि.वि.वि. के निदेशक डॉ. सत्यनारायण संखवार ने कहा कि निष्ठावान चरित्रवान व्यक्ति का निर्माण करना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य है। अपने विभिन्न आनुषांगिक संगठनों के द्वारा संघ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को स्वयं से जोड़ने का कार्य करता है। एन.एम.ओ. के कार्यों की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इस वर्ष थारु जनजाति के मध्य 90 हजार मरीजों का उपचार हुआ है। आपदाओं में संगठन की कार्यकुशलता अद्भुत है।

कदम से कदम मिलाकर स्वयंसेवकों ने दिया सन्देश

मुख्य वक्ता श्रीमान रमेश जी की पंक्ति ‘‘जिए देश हित मरे देश हित, कंटक पथ अपनाना सीखें’’ सुनकर उत्साहित स्वयंसेवकों ने कदम से कदम मिलाकर पथ संचलन किया। स्वयंसेवकों का पथ संचलन समाज को राष्ट्र कार्य हेतु प्रेरणा प्रदान कर रहा था और राष्ट्रनिर्माण का भाव जागृत कर रहा था।

प्रारम्भ में संघ का भगवा ध्वज लगाया गया। स्वयंसेवकों ने विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया। अतिथियों का परिचय मालवीय नगर कार्यवाह डॉ. अरुण देशमुख ने कराया। कार्यक्रम के पश्चात कृषि विज्ञान संस्थान से पथ संचलन प्रारम्भ हुआ जो संकाय मार्ग से होते हुए सिंह द्वार पर पहुंचा। संचलन में पहली बार सुसज्जित रथ पर भगवान श्रीराम दरबार की झांकी आकर्षण का केन्द्र रहा। इसी के साथ वाहन पर भारत माता, महामना पं0मदन मोहन मालवीय, आद्य सरसंघचालक डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार एवं प.पू.श्रीगुरू जी की झांकी संचलन का नेतृत्व कर रही थी। सभी स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में घोष वादन की धुन पर क्रमबद्ध पंक्ति में अनुशासन से चल रहे थे। स्वयंसेवको की ओर से माननीय भाग संघचालक अरुण जी द्वारा मालवीय जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद पथ संचलन स्थापना स्थल पर पहुंचा। वन्देमातरम गायन के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस दौरान उपस्थित लोगों में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय टोली सदस्य श्रीमान रामाशीष जी, अवध प्रान्त बौद्धिक प्रमुख सुनील जी, मा.विभाग संघचालक डॉ.जे.पी. लाल, विभाग प्रचारक नितिन जी, भाग प्रचारक विक्रान्त जी, डॉ.सत्यप्रकाश पाल, सुनील मिश्रा, आशुतोष समेत सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित थे।



Monday, February 12, 2024

राष्ट्र के प्रति सब कुछ समर्पित करने का भाव है पथ संचलन – रमेश जी

जौनपुर। पथ संचलन शक्ति प्रदर्शन का कार्यक्रम नहीं है, अपितु राष्ट्र के प्रति सब कुछ समर्पित करने का भाव है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने व्यक्त किया| वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जौनपुर द्वारा राज कालेज मैदान में आयोजित सामाजिक एकता एवं सामाजिक समरसता के उद्देश्य से आयोजित पथ संचलन को संबोधित कर रहे थे|

उन्होंने संघ का इतिहास बताते हुए कहा कि परम पूजनीय डॉ.केशव बलिराम हेडगेवार जी ने विजय दशमी के दिन संघ की स्थापना की थी और हिन्दू समाज को एकत्रित करने का संकल्प लिया। आज यह संगठन वट वृक्ष बनकर दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन चुका है। स्वयंसेवक अपने लिये नहीं, अपनों के लिये जीता है। उन्होंने कहा कि 98 साल की साधना के पश्चात् संगठन 99वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और एक वर्ष पश्चात् यह भारतवर्ष का पहला संगठन होगा जो राष्ट्रहित में कार्य करता हुआ अपने 100 वर्ष पूरा करेगा।

उन्होंने कहा कि भारतवर्ष के स्वतंत्र होने के पश्चात् संघ द्वारा राष्ट्रहित में निरंतर किये गये कार्यों का यह परिणाम हुआ कि 26 जनवरी 1963 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा गणतंत्र दिवस के परेड में स्वयंसेवकों को बुलाकर उनका अभिवादन किया गया। आने वाले समय में भारतवर्ष जगद्गुरू और प्रबल राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।

उद्बोधन के पश्चात पथ संचलन का कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित स्वयंसेवक अनुशासन व धैर्य का परिचय देते हुए द्वारा राज कालेज के मैदान से सब्जी मण्डी, कोतवाली, चहारसू, अटाला मस्जिद, किला होते हुए पुनः राज कालेज के मैदान में पथ संचलन को विराम दिया गया।

कार्यक्रम में प्रान्त प्रचारक प्रमुख रामचन्द्र जी, प्रान्त सम्पर्क प्रमुख दीनदयाल जी, प्रान्त कार्यालय प्रमुख जगदीश जी, विभाग प्रचारक अजीत जी, जिला कार्यवाह रजनीश, जिला प्रचारक रजत जी, ज्ञान प्रकाश सिंह, शिवप्रकाश, डा. नितेश, जी, मंगलेश्वर आदि उपस्थित रहे।