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Saturday, August 29, 2026

विश्व बन्धुता के संरक्षण व संवर्धन का आधार है हमारी एकता एवं एकात्मता – सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी

काशी, 28 अगस्त, 2026 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी मध्य के तिलक नगर में रक्षाबन्धन उत्सव में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि हमारी एकता एवं एकात्मता विश्व बन्धुता के संरक्षण और संवर्धन का आधार है। न्यायोचित मार्ग पर चलते हुए बन्धुता को आधार बनाकर स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करने के लिए भारत ने सामाजिक समरसता को अंगीकार किया है।

सिगरा स्थित डॉ. सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उपस्थित स्वयंसेवकों एवं मातृशक्ति से कहा कि योग वशिष्ठ के एक श्लोक के अनुसार ऐसे लोग जो हमारे बन्धु नहीं हैं, उनसे प्रतिदिन मिलने से निकटता बढ़ती है और वह हमारे बन्धु बन जाते हैं। जबकि निकटता के अभ्यास को छोड़ने से बन्धुता का स्नेह बन्धन छूट जाता है। संघ में भी अपरिचित को परिचित एवं परिचित को मित्र बनाने की परम्परा रही है। स्वतंत्रता, समानता एवं बन्धुता, इन तीनों अवधारणाओं को विश्व के अनेक देशों ने अलग-अलग रूपों में स्वीकार किया है। ऐसे राष्ट्र जहां केवल स्वतंत्रता को महत्व दिया गया, वहां स्वच्छंदता व्याप्त हो गयी। जबकि सोवियत रूस जैसे देश ने समानता को ​वरीयता दी, यह विचार भी टिक नहीं पाया। भारतीय संस्कृति में बन्धुता को स्वतंत्रता और समानता के साथ जोड़ा गया है। इन तीनों तत्वों का मूलाधार सामाजिक समरसता है।

सरकार्यवाह जी ने कहा कि हिन्दू संस्कृति में सम्पूर्ण विश्व को एक कुटुम्ब स्वीकार किया गया है। मैं और समस्त जीव एक ही परमात्मा के अंश हैं, उदार चरित के साथ इस भावना को स्वीकार करना चाहिए। सम्बन्धों के मध्य अविश्वास, रक्षाबन्धन के स्नेहसूत्र को कमजोर करते हैं। आपस में बंटने पर विरोधी पक्ष को उसका लाभ मिलता है। जब हम सभी विश्व बंधुत्व की चर्चा करते हैं तो उसका मूलाधार भविष्य पुराण का श्लोक –

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल॥

जिसका अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि को स्नेह बन्धन में बांधा गया, उसी प्रकार मैं भी आपको  स्नेह बन्धन में बांधता हूं। यह बन्धन स्थिर रहे। वर्तमान में परिवार और समाज में जो अस्थिरता उत्पन्न हो गयी है, उसका कारण स्वार्थ है। मनुष्य के अन्दर स्वार्थ विकार के रूप में नहीं आना चाहिए।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी, काशी मध्य के संघचालक डॉ. हेमन्त गुप्त जी, तिलक नगर के नगर संघचालक प्रदीप जी ने भगवा ध्वज को रक्षा सूत्र बांधा। कार्यक्रम का संचालन नगर कार्यवाह सत्यपाल ने किया। उत्सव में प्रमुख रूप से क्षेत्र कार्यवाह डॉ0वीरेन्द्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, क्षेत्र सेवा प्रमुख युद्धवीर जी, प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल जी, सह प्रान्त कार्यवाह डॉ0 राकेश जी, प्रान्त प्रचारक रमेश जी, 0प्र0 के आयुष राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र दयालू, काशी के महापौर अशोक तिवारी, प्रो0मंजू द्विवेदी, गुंजन नन्दा, निवेदिता मेहरोत्रा, अंजू अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं मातृशक्ति उपस्थित रहीं।

नेपाल प्राकृतिक आपदा पीड़ितों के प्रति श्रद्धांजलि

दो दिन पूर्व नेपाल के बाढ़ आपदा में मृतक जनमानस के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने पूरे संघ परिवार की ओर से श्रद्धांजलि निवेदित की। उन्होंने कहा कि जो बन्धु इस आपदा में संकटग्रस्त हुए हैं, संघ परिवार उनके प्रति भी अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।





Saturday, August 8, 2026

किसी भी समस्या का समाधान संवाद से संभव है, आंदोलन से विभाजन नहीं होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

मुंबई। इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस’ (I.I.M.U.N.) के 15वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित वार्षिक कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान संवाद के माध्यम से संभव है, समस्या का निवारण न होने पर संवैधानिक तरीके से आंदोलन करना उचित है। आंदोलन लोकतंत्र द्वारा दिया गया एक साधन होने के बावजूद उसका उपयोग अपनी विवेक बुद्धि से करना चाहिए, जिससे समाज में विभाजन न हो।

मुंबई स्थित नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में देश के 100 से अधिक शहरों से 15 से 24 आयु वर्ग के 2,000 से अधिक छात्र उपस्थित रहे। भावी नेतृत्व तैयार करना, संवाद कौशल विकसित करना और राष्ट्रीय तथा वैश्विक प्रश्नों के विषय में युवाओं में एक सकारात्मक दृष्टिकोण का निर्माण करना कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य था। I.I.M.U.N. के संस्थापक ऋषभ शाह ने मोहन भागवत जी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने छात्रों के मन के विभिन्न प्रश्न सरसंघचालक जी के सामने रखे। संवाद सत्र में डॉ. भागवत जी ने आंदोलन संस्कृति, शिक्षा व्यवस्था, सोशल मीडिया का युवाओं पर प्रभाव, LGBTQ विषय, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण तथा विकसित भारत के लिए आवश्यक भावी नेतृत्व जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया।

सरसंघचालक जी ने कहा कि आंदोलन संवाद का एक माध्यम होने के बावजूद उससे समाज में विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। भारतीय परंपरा की शास्त्रार्थ संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि जेन-जी के प्रश्नों को केवल विरोध के रूप में न देखकर उनकी समस्याओं को समझकर उनका निवारण करना समाज और व्यवस्था की जिम्मेदारी है। जेन-जी आंदोलन कर रही है, इसका मतलब यह नहीं कि वह राष्ट्र विरोधी है। नई पीढ़ी हमारे समाज का ही हिस्सा है और उसके साथ आत्मीयता से संवाद साधना आवश्यक है; उसी से आपसी सामंजस्य बढ़ता है। आज की जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी अधिक प्रामाणिक है।

शिक्षा विषय पर उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है और वह सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए। शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार की नहीं है, बल्कि उसकी जिम्मेदारी समाज को भी उठानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक सहायता के बिना भी विद्या भारती संस्था आज करीब 23 हजार स्कूल चला रही है। शिक्षा व्यवस्था में आंदोलनों के बिना भी सकारात्मक सुधार संभव है।

सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से सकारात्मक और समाज हित की जानकारी ही शेयर करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल विश्वसनीय जानकारी पर विश्वास किया जाना चाहिए और जेन-जी में सही-गलत की पहचान करने का विवेक विकसित करने के लिए मार्गदर्शन करना आवश्यक है। जेन-जी को हिंसक नहीं, बल्कि सकारात्मक आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए।

मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत संवाद से सद्भाव निर्माण करने में विश्वास रखता है। संवाद और शांतिपूर्ण प्रयासों से ही स्थायी समाधान मिलता है। संघर्ष के समय नागरिकों को अपनी सरकार के साथ खड़ा रहना चाहिए। राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रश्नों पर सरकार के निर्णयों को समर्थन देना हर एक का कर्तव्य है। मानवता सर्वश्रेष्ठ है, यह संदेश महत्वपूर्ण है। दूसरों को जीतकर या समाप्त करके समाज आगे नहीं बढ़ता। समाज की प्रगति सुसंवाद, समन्वय और एक-दूसरे को समझने की प्रक्रिया से होती है, इसके लिए संवाद कायम रहना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि एलजीबीटी (LGBT) समुदाय के व्यक्ति भी हमारे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं, समाज को उन्हें सम्मानपूर्वक स्थान देना चाहिए। प्राचीन भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों के साथ रहने की व्यवस्था नहीं मानी जाती है। विवाह का उद्देश्य उत्तम संतति का निर्माण और सुदृढ़, सुसंस्कारित समाज का निर्माण करना भी है। विवाह संस्था के मूल स्वरूप में बदलाव होने पर उसके कुछ सामाजिक दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं, इसीलिए पहले समाज को इस विषय में जागृत करना आवश्यक है। कानून समाज तय नहीं करते, समाज की जरूरतों और मूल्यों के अनुसार कानून तय होते हैं। इस दृष्टिकोण से समलैंगिक विवाह को पारंपरिक अर्थों में विवाह न मानते हुए कंपैनियनशिप (सहचर्य) माना जाना चाहिए।

महिलाओं की राष्ट्र निर्माण में समान भागीदार और नेतृत्व के लिए आगे लाने की आवश्यकता पर कहा कि अपर्याप्त जानकारी के कारण संघ के बारे में ऐसी धारणा है। संघ की विभिन्न संस्थाओं में महिलाओं को समानता के साथ जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं और वे प्रभावी रूप से कार्य भी कर रही हैं। राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना संघ की स्थापना के काल में ही हुई थी। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में महिलाओं की सहभागिता होती है और निर्णय प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। संघ की विभिन्न संस्थाओं में भी महिलाओं की उल्लेखनीय सहभागिता होती है।

रोजगार को लेकर समाज की मानसिकता बदलनी चाहिए, रोजगार का अर्थ केवल नौकरी नहीं है। उद्यमिता और कौशल भी रोजगार के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। बेरोजगारी कम करने के लिए सभी प्रकार के कामों को समान सम्मान मिलना चाहिए। समाज में श्रम प्रतिष्ठा की भावना दृढ़ होनी चाहिए। श्रम प्रतिष्ठा को महत्व दिया जाना चाहिए तथा शिक्षा प्रणाली में उसी के अनुसार बदलाव करना जरूरी है।

आरक्षण के विषय़ पर कहा कि सामाजिक विषमता के कारण आरक्षण की आवश्यकता निर्माण हुई। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने इस विषय में स्पष्ट भूमिका रखी है। आरक्षण के प्रश्न पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और सामाजिक न्याय के लिए उपाय प्रामाणिक रूप से तथा प्रभावी रूप से क्रियान्वित किए जाने पर भविष्य में आरक्षण की आवश्यकता कम हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र के शाश्वत विकास लक्ष्यों की पूर्ति में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पर्यावरण के लिए पूरक विकास संभव है और पर्यावरण संवर्धन की शुरुआत घर से तथा दैनिक जीवन से ही होनी चाहिए।

वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण हेतु कल के प्रत्येक नेता में आवश्यक गुणों के बारे में कहा कि सच्चा नेतृत्व स्वयं से शुरू करता है। जो खुद को सही दिशा दे सकता है, वही दूसरों को मार्गदर्शन कर सकता है। नेतृत्व का वास्तविक कार्य केवल अनुयायी तैयार करना नहीं, बल्कि नए नेता गढ़ना है।

सार्थक संवाद के लिए अपनत्व का संबंध होना चाहिए – डॉ. मोहन भागवत जी

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में आयोजित I.I.M.U.N. के कार्यक्रम में युवाओं से संवाद किया। कार्यक्रम में देश के 100 से अधिक शहरों से आए 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग के करीब 2,000 हाई स्कूल विद्यार्थी शामिल रहे।

कार्यक्रम में सरसंघचालक जी के साथ के प्रमुख बिन्दु —

(भारतीय दृष्टिकोण से विश्व को एकजुट करने में युवाओं की भूमिका)
India’s International Movement to Unite Nations (I.I.M.U.N.)

Gen-Z

1.  यदि जेन-ज़ी (Gen-Z) आंदोलन कर रही है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह राष्ट्र विरोधी (Anti-National) है।

2.  नई पीढ़ी अपने ही समाज और राष्ट्र का हिस्सा है; उन्हें “अपने” मानकर समझने की आवश्यकता है।

3.  सार्थक संवाद के लिए अपनत्व का संबंध होना चाहिए।

4.  जब संवाद अपनत्व के साथ होता है, तभी एक-दूसरे की बात को सही ढंग से समझा जा सकता है।

5.  आज की जेन-ज़ी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) हमारी पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार हैं।

6.  यदि मुझे दोनों पीढ़ियों में किसी एक पर विश्वास करने के लिए कहा जाए, तो मैं जेन-ज़ी (Gen-Z) पर विश्वास करूँगा।

शिक्षा एवं नई पीढ़ी

1.  1. शिक्षा कोई व्यावसायिक (Commercial) व्यवसाय नहीं है, बल्कि जीवन की एक अनिवार्य आवश्यकता (Necessity) है।

2.  2. शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति तक उसकी पहुँच सुनिश्चित होनी चाहिए।

3.  3. शिक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

4.  4. शिक्षा का उद्देश्य केवल धन अर्जित करना या विद्यालयों का संचालन करना नहीं होना चाहिए।

5.  5. जो लोग शिक्षा प्रदान करते हैं, उनका भी उचित प्रशिक्षण (Training) होना आवश्यक है।

6.  6. शिक्षा पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6% व्यय करने की मांग लंबे समय से चली आ रही है, और मैं उसका समर्थन करता हूँ।

7.  7. हमारे संगठन भी बड़े स्तर पर विद्यालयों का संचालन करते हैं। हमारे कई हजार विद्यालय चल रहे हैं।

8.  8. शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए हर बार आंदोलन आवश्यक नहीं होता। बिना आंदोलन के भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव है।

9.  शिक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, यह हमारे बच्चों के लिए है। इसलिए हमें भी उसमें योगदान देना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य भविष्य की पीढ़ी का निर्माण है।

सोशल मीडिया

1.  यदि सोशल मीडिया पर मेरे कारण 10 लाख लोग कोई गलत निर्णय लेते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी भी है।

2.  सोशल मीडिया पर सकारात्मक, उपयोगी और समाजहित की सामग्री साझा करनी चाहिए।

3.  सोशल मीडिया पर केवल प्रामाणिक (Authentic) स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही विश्वास करना चाहिए।

4.  जेन-ज़ी (Gen-Z) में भी यह विवेक विकसित होना चाहिए कि क्या सही है और क्या नहीं।

5.  वरिष्ठ पीढ़ी की भी जिम्मेदारी है कि वह नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करे तथा उन्हें सही और गलत के बीच अंतर समझाए।

रोल मॉडलराष्ट्रीय दृष्टिकोण एवं वैश्विक संबंध

1.  जेन-ज़ी (Gen-Z) को हिंसक (Violent) रोल मॉडल का अनुसरण नहीं करना चाहिए।

2.  दो देशों के बीच संघर्ष (Conflict) की स्थिति में नागरिकों को अपनी सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए।

3.  भारत की नीति किसी देश को पराजित करना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से सद्भाव (Harmony) स्थापित करना है।

4.  किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान (Permanent Remedy) संवाद और शांतिपूर्ण प्रयासों से ही संभव है।

5.  सभी पाकिस्तानी भारत के शत्रु नहीं हैं; लोगों और परिस्थितियों में अंतर समझना चाहिए।

6.  संघर्ष के समय सरकार जो निर्णय ले, उसका समर्थन करना चाहिए।

7.  मानवता सर्वोपरि है — “Humanity is One.”

एलजीबीटी एवं विवाह

1.  एलजीबीटी (LGBT) समुदाय के लोग भी हमारे समाज का हिस्सा हैं और समाज को उन्हें स्थान देना चाहिए।

2.  भारतीय समाज में विवाह का उद्देश्य केवल दो व्यक्तियों का साथ रहना नहीं है।

3.  विवाह का उद्देश्य उत्तम संतति का निर्माण तथा एक सुदृढ़ समाज की रचना भी माना गया है।

4.  यदि विवाह संस्था के मूल स्वरूप में परिवर्तन किया जाएगा, तो उसके सामाजिक दुष्परिणाम (Side Effects) हो सकते हैं।

5.  इसी दृष्टि से समलैंगिक विवाह (Same-Sex Marriage) को विवाह नहीं कहा जाना चाहिए।

महिलाओं की भूमिका

1.  समाज में महिलाओं और पुरुषों की भूमिका समान (Equal) तथा एक-दूसरे की पूरक (Complementary) है।

2.  राष्ट्र सेविका समिति का गठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गठन के समय ही हुआ था।

3.  यह धारणा सही नहीं है कि संघ में महिलाओं का स्थान नहीं है।

4.  अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में महिलाओं की सहभागिता रहती है और निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका होती है।

रोज़गार (Employment)

1.  रोजगार का अर्थ केवल नौकरी (Job) नहीं है।

2.  उद्यमिता (Entrepreneurship) और कौशल (Skills) भी रोजगार के महत्वपूर्ण आयाम हैं।

3.  बेरोज़गारी कम करने के लिए सभी प्रकार के कार्यों को समान सम्मान देना आवश्यक है।

4.  समाज में श्रम-प्रतिष्ठा (Dignity of Labour) का भाव विकसित होना चाहिए।

आरक्षण (Reservation)

1 . सामाजिक कारणों से आरक्षण की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।

2 . जब तक सामाजिक भेदभाव (Discrimination) रहेगा, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।

3 . बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।

4 . आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।

5 यदि सभी उपायों को ईमानदारी और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो भविष्य में आरक्षण की आवश्यकता समाप्त हो सकती है।

सतत विकास (Sustainability) एवं पर्यावरण

1.  संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) की दिशा में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

2.  विकास पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना भी संभव है।

3.  पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की शुरुआत अपने घर और अपने दैनिक जीवन से होनी चाहिए।

नेतृत्व (Leadership)

1 . नेतृत्व का पहला गुण है कि व्यक्ति सबसे पहले स्वयं का नेतृत्व करना सीखे।

2 . सच्चा नेतृत्व भीतर से प्रारंभ होता है — “You have to lead within.”

3 . एक नेता में शास्त्रों में बताए गए पाँच गुण होने चाहिए। पात्रे त्यागी गुणे रागी संविभागी च बन्धुषु। शास्त्रे बोद्धा रणे योद्धा पुरुषः पञ्चलक्षणः॥

4 . नेतृत्व का उद्देश्य केवल अनुयायी बनाना नहीं, बल्कि नए नेताओं का निर्माण करना है — “Leadership is to create leaders.”

Friday, July 31, 2026

समुद्र प्रदक्षिणा तीनों सेनाओं की एकता और नारी शक्ति का प्रमाण


नई दिल्ली। भारतीय सेना के नौकायन पोत (आईएएसवी) त्रिवेनी से प्रथम त्रि-सेवा पूर्ण महिला समुद्री यात्रा ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ को सफलतापूर्वक पूरा करके घर लौटीं तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों को रक्षा मंत्री ने सम्मानित किया।

इन महिला अधिकारियों से बातचीत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चार महासागरों में लगभग 25,500 समुद्री मील की 314 दिनों की यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने में टीम के साहस और दृढ़ संकल्प की प्रशंसा की। उन्होंने अभियान को नारी शक्ति का प्रमाण और तीनों सेना की एकता तथा उनमें तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो प्रत्येक भारतीय को प्रेरित करेगा।

महिला अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अभियान की चुनौतीपूर्ण प्रकृति ने यात्रा को यादगार और फलदायी बनाया। राष्ट्र को गौरवान्वित करने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें प्रेरित रखा और उन्हें शारीरिक तथा मानसिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाया।

रक्षा मंत्री ने कहा कि उनके समर्पण ने उन्हें प्रेरित किया और उनके स्वयं के संकल्प को और मजबूत किया। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि दृढ़ विश्वास और संकल्प जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने में कैसे सहायक हो सकते हैं।

समुद्र प्रदक्षिणा’ की सफल समाप्ति ने उन रूढ़ियों को तोड़ दिया है, जिनमें कहा जाता था कि महिलाएं कठिन सैन्य अभियानों को अंजाम नहीं दे सकतीं। महिला अधिकारियों ने यह साबित कर दिया है कि शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता महिला-पुरूष भेद से परे हैं। भारत की हर बेटी आपको देखकर यह विश्वास कर सकती है कि वह भी समुद्र पार कर दुनिया को जीत सकती है।

भारतीय सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के अधिकारी एक ही ध्वज के नीचे एक ही पोत पर एक साझा मिशन को पूरा करने के लिए एक साथ रवाना हुए। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि हम साथ मिलकर आगे बढ़ें तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

संवाद के दौरान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर और तीनों सेनाओं के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री ने 22 जुलाई, 2026 को मुंबई में आगमन पर आईएएसवी त्रिवेनी की टीम का वर्चुअल रूप से स्वागत किया था। 11 सितंबर, 2025 को आईएएसवी त्रिवेनी की टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

मिशन की सफलता सावधानीपूर्वक योजना, लगभग दो वर्षों के गहन प्रशिक्षण, चौबीसों घंटे चलने वाले तट-आधारित समर्पित सहायता नेटवर्क और अनेक संगठनों एवं सहायक एजेंसियों की अटूट प्रतिबद्धता के कारण संभव हो पाई। अभियान ने देशांतर की सभी रेखाओं को पार करके, भूमध्य रेखा को दो बार पार करके, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार करके और तीन महान केपों – केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप – का चक्कर लगाकर विश्व भ्रमण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सभी मानदंडों को सफलतापूर्वक पूरा किया।

दुर्गम ड्रेक पैसेज को सफलतापूर्वक पार करने और केप हॉर्न का चक्कर लगाने से चालक दल को केप हॉर्नर्स के प्रतिष्ठित समुदाय की सदस्यता प्राप्त हुई, यह सम्मान उन नाविकों के लिए आरक्षित है जो दुनिया के सबसे कठिन समुद्री मार्गों में से एक को पार करते हैं।


कॉकरोच जनता पार्टी बनाम अलीगढ़ के लौंडे

(वीडियो - अपना चेहरा ढक कर पुलिस पर हमला करने वाले, भीड़ को उकसाने वाले कौन हैं...?) 👇

https://x.com/editorvskbharat/status/2080217565771800737 

पाकिस्तान क्या है, आखिर अलीगढ़ के लौंडों की शरारत भर है’, ये शब्द पाकिस्तान के ही मशहूर शायर जॉन एलिया के हैं, जो जन्मे तो भारत में पर आखिरी सांस कराची की गलियों में ली।

इंटरनेट मीडिया से उपजी कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन ने अचानक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उन विद्यार्थियों की याद दिलवा दी, जिन्होंने पाकिस्तान का विचार पैदा किया और बाद में इस विषाक्त विचार ने देश का विभाजन भी करवा दिया। दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को जिस तरह देश के युवा व ज़ेन ज़ी आदि विशेषणों से संबोधित किया जा रहा है। वे चाहे अभी वैसे न हों, परंतु उनके आसपास जुटने वाले लोग ऐसे जरूर हैं जो देश को फिर से बांटना चाहते हैं। देश विभाजन का विचार पैदा करने वाले अलीगढ़ के वे लौंडे भी उस समय इसी तरह युवा थे, उन्हें बढ़ने दिया गया और इसका परिणाम देश के बंटवारे के रूप में निकला।

कॉकरोच जनता पार्टी के मंच का उपयोग न केवल विपक्षी दलों के नेताओं ने किया, बल्कि विवादित व विभाजनकारी लोग भी यहां पहुंचे। दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद का पिता और प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का संस्थापक सैयद कासिम रसूल इलियास यहां पहुंचा। बड़ी संख्या में खालिद के समर्थक भी प्रदर्शन स्थल पर डटे।

सोशळ मीडिया पर वायरल वीडियो देख कर समझ आता है कि इनका एजेंडा न तो शिक्षा व्यवस्था में सुधार है और न ही पेपर लीक। इतना ही नहीं विवादित लेखिका अरुंधति राय भी इस मंच का उपयोग कर चुकी हैं। उन्होंने 21 अक्तूबर, 2010 को इसी दिल्ली में कहा था कि ‘कश्मीर कभी भारत का हिस्सा नहीं था और भारतीय सशस्त्र बलों ने जबरन कब्जा किया हुआ है।’ दो वर्ष पहले दिल्ली के उपराज्यपाल ने इस मामले में उनके विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। हिन्दू विरोधी कुण्ठा से ग्रस्त कुणाल कामरा ने तो मंच से ही देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी के किसी पदाधिकारी ने उसे नहीं रोका। रोकना तो दूर, लोग ताली बजाकर उसका साथ देते रहे। इसका कई संगठनों ने विरोध भी किया है। इसी तरह के कई अन्य विवादित लोग भी यहां पहुंचे।

इनमें से कुछ को मंच मिला, तो कुछ भीड़ में शामिल होकर अपमानजनक नारेबाजी करते रहे। इसे लेकर इंटरनेट मीडिया पर भारी विरोध हो रहा है। प्रदर्शन में युवतियों ने जिस तरह से न केवल मौखिक रूप से अश्लील गाली-गलौज की, बल्कि गालियों व भद्दी भाषा के पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। इसके बावजूद कुछ लोग इन उपद्रवियों को आंदोलनकारी बता रहे हैं।

कहने को तो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नीट पेपर लीक के विरोध में है, लेकिन इसका भरपूर राजनीतिक व देश के विरोध में इस्तेमाल हुआ। कई विपक्षी दलों के नेता यहां से अपना राजनीतिक भविष्य संवारने का मौका तलाशते रहे। वहीं, राष्ट्र की एकता व अखंडता को नुकसान पहुंचाने और हिन्दू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने वालों को अपना एजेंडा चलाने का अवसर मिला। इनकी उपस्थिति के कारण प्रदर्शन में असामाजिक तत्वों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को भी घुसने का मौका मिला, जिससे प्रदर्शन के नाम पर हिंसा भी देखने को मिली।

ये असामाजिक तत्व छात्रों को हिंसा के लिए भड़का रहे थे और पुलिस पर हमले भी हुए। जब हर तरफ से आलोचना शुरू हुई, तो प्रदर्शन के आयोजकों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि प्रदर्शन में कुछ असमाजिक तत्वों को भेजा गया है। संस्था के संस्थापक व पदाधिकारियों पर भी प्रश्न खड़े हो रहे हैं। संस्था के सर्वेसर्वा अभिजीत दीपके के पुराने ट्वीट्स इंटरनेट मीडिया पर शेयर हो रहे हैं। ट्वीट में उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का विरोध किया था। लंदन में रहने वाले उनके एक अन्य साथी अर्पित शर्मा के खिलाफ पिछले वर्ष सितंबर में बुलंदशहर में मामला दर्ज हुआ था। उसने अपने यूट्यूब चैनल पर नेपाल के जेन-जी आंदोलन को भारत से जोड़ते हुए वीडियो बनाया था।

रही सही कसर खालिस्तानी तत्वों ने पूरी कर दी। पिछले दिनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन एसएफजे प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इंटरनेट मीडिया पर वीडियो जारी कर दावा किया कि उसकी कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक हुई है। उसने संस्था को आर्थिक मदद देने की भी घोषणा की है। इसे लेकर भी कई लोग प्रदर्शन के पीछे विदेशी शक्तियों का हाथ होने का आरोप लगा रहे हैं।

आखिर देश विभाजन के पहले के अलीगढ़ के उन लौंडों और इन आंदोलनकारियों में क्या अंतर है?

देश को विभाजित करने की इच्छा रखने वाले याद रखें, जब देश बंटता है तो केवल जमीन ही नहीं बंटती, बल्कि दिल भी विभाजित हो जाते हैं। समय गुजरने के बाद जब अपनी मिट्टी की खुशबू याद आती है तो उस समय पछतावे के अतिरिक्त कुछ नहीं बचता।

उक्त पाकिस्तानी शायर जॉन एलिया विभाजन के बाद एक बार भारत आए तो उन्होंने इसी पछतावे को यूं ब्यां किया था –

हम आंधियों के बन में किसी कारवां के थे,

जाने कहां से आए हैं जाने कहां के थे।

ऐ जान-ए-दास्तां तुझे आया कभी ख्याल,

वह लोग क्या हुए जो तेरी दास्तां के थे।

मिलकर तपाक से हमें न कीजिए उदास,

खातिर न कीजिए कभी हम भी यहां के थे।

क्या पूछते हो नाम-ओ-निशान-ए मुसाफिरां,

हिन्दोस्तां में आए हैं हिन्दोस्तां के थे।