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Monday, May 11, 2026

समाज का प्रबोधन करना ही सच्ची पत्रकारिता — सुभाष जी

आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती के उपलक्ष्य में सामाजिक परिवर्तन में मीडिया की भूमिका विषयक संगोष्ठी गोष्ठी का आयोजन।

प्रयागराज। आद्य पत्रकार  देवर्षि नारद जयंती के उपलक्ष्य में   रविवार को हिंदुस्तानी अकादमी में विश्व संवाद केंद्र प्रयागराज काशी प्रांत के द्वारा 'सामाजिक परिवर्तन में मीडिया की भूमिका’ विषयक  गोष्टी आयोजित की गयी।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने कहा कि  समाज का  प्रबोधन करना ही सच्ची पत्रकारिता है। समसामयिक विषयो के प्रति सामाजिक जागरूकता बढाना मीडिया का कार्य है। इसके लिए पत्रकारो को दीपक की तरह जल कर समाज मे वैचारिक  प्रकाश फैलाना पड़ता है। इसकी प्रेरणा नारद जी से मिलती है। नारद जी आद्य पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि संपादक जगत नारायाण लाला जैसे संपादकों को श्रेष्ठ जीवन मूल्य स्थापित करने के प्रयास में अपने प्राणों का बलिदान करना पड़ा लेकिन अखबार का प्रकाशन बंद नहीं होने दिया। ऐसे लोग पत्रकारों के प्रेरणास्रोत हैं। गीता प्रेस के संस्थापक हुनुमान प्रसाद पोद्दार ने सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली भारत रत्न जैसे सम्मान को विनम्रता के साथ अस्वीकार कर पूरे समाज के सामने नया आदर्श स्थापित किया। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद कोमल चित्त वाले थे। उनके अंदर करुणा और ममता थी यह पत्रकारों का स्वभाव होना चाहिए। उन्होंने दैनिक जागरण के पूर्व संपादक नरेन्द्र मोहन की भी चर्चा की और उनसे पत्रकारों को प्रेरणा लेने की बात कहीं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अनावश्यक नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने से बचना चाहिए। पत्रकार सैनिकों की भाति  कलम के सिपाही हैं। कलम के सिपाही का मूल कर्तव्य है सामाजिक चेतना, सत्य को सामने लाना, राष्ट्र निर्माण, राष्ट्रीयता, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विचारों को संबल प्रदान करने का कार्य करना। यही नारद जयंती मनाने का उद्देश्य है।   

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं सम्पादक योगेश नारायण दीक्षित ने ‘आज की पत्रकारिता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम सब लोग पत्रकारिता के मूल उद्देश्य से भटक कर व्यवसायिकरण की ओर बढ़ रहे हैं।  हमें चिंतन करना होगा कि पत्रकार सत्य को उजागर एवं समाज की दृष्टि को सामने लाने के लिए समाज के प्रहरी के रूप में कार्य करता है। इसीलिए मीडिया को लोकतंत्र का सबसे मजबूत स्तम्भ माना गया है। सोशल मीडिया पर अच्छे नॉरेटिव वायरल करने का उन्होंने सुझाव दिया।

विषय प्रवर्तन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ मुरारजी त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म देवर्षि नारद से सीखना चाहिए। एजेंडा आधारित पत्रकारिता समाज का भला नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का इतिहास  सृष्टि के प्रारंभ मैं नारद जी से प्रारंभ होता है।    लोक मंगल हेतु की गई पत्रकारिता ही समाज के लिए उपयोगी है। मंच पर प्रचार विभाग के पालक आशीष जी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा देवर्षि नारद के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। समापन राष्ट्र सेविका समिति की बहनों के नेतृत्व में वंदे मातरम के सामूहिक गायन से हुआ।

गोष्ठी में प्रांत प्रचारक रमेश जी, राकेश जी सह भाग कार्यवाह, चारूमित्र जी, व्रत शील शर्मा  रितेश जी, विष्णु जी, कृष्ण मनोहर जी, आदित्य जी, संतोष, विजेंद्र, रामनरेश, पिंडी वास  राजेश प्रताप आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। अतिथि परिचय सह विभाग प्रचार प्रमुख मुकेश जी ने कराया। धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण मनोहर तिवारी एवं संचालन विभाग प्रचार प्रमुख वसु पाठक ने किया।

Monday, May 4, 2026

मीडिया का मूल उद्देश्य है संवाद : जितेन्द्र तिवारी

  • -    पंच परिवर्तन हमारी सनातन का अस्तित्व : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी
  • -  विश्व संवाद केन्द्र काशी एवं समाजशास्त्र विभाग व मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती के अवसर पर संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित

वाराणसी। विश्व संवाद केन्द्र काशी एवं समाजशास्त्र विभाग व मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती के अवसर पर रविवार को 'पंच परिवर्तन : समाज एवं मीडिया' विषयक संगोष्ठी एवं पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के गांधी अध्ययनपीठ सभागार में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हिन्दुस्थान समाचार एजेन्सी, नई दिल्ली के संपादक जितेन्द्र तिवारी रहे। इस मौके पर जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि स्वाधीनता आन्दोलन में पत्रकारिता लोगों को एकजूट करने एवं ब्रिटिश हुकूमत का विरोध दर्ज कराने का सशक्त माध्यम थी। स्वाधीनता आन्दोलन में पत्रकारिता एक हथियार बन गई थी, जिसने ब्रिटिश हुकूमत के नाक में दम कर दिया था। मीडिया के उद्देश्य पर जितेन्द्र तिवारी ने कहा कि मीडिया का काम कुछ भी हो परन्तु उसका मूल उद्देश्य संवाद ही है। मीडिया का कार्य जिज्ञासा उत्पन्न करना है। उन्होंने कहा कि संवाद तर्क है, विवाद नहीं। खुले मन से संवाद करना ही पत्रकारिता है। सत्यनिष्ठ पत्रकारिता ही समाज एवं सरकार के बीच सामंजस्य स्थापित कर सकती है। जब से मिशन से कमीशन में बदली है तब से पत्रकारिता जीवन खतरे में पड़ा है। अपने को खोजना ही नारद जी की पत्रकारिता है। हमें जन से जुड़ना होगा। एक पृथ्वी एक परिवार भारत का मूल मंत्र है।

अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि हमें गलत विचारों का त्याग करना होगा। नारद जीवन देने वाले हैं। हमें नारद के गुणों को प्रचारित करना होगा। यहीं, भविष्य की पत्रकारिता है। कुलपति प्रो. त्यागी ने कहा कि नारद जी को पत्रकार के रूप में स्थापित करना होगा। नारद जी समरसता देखते थे। पत्रकारिता को समरूपता में देखना चाहिए। आपदा को मैनेज करने वाले पत्रकार नारद थे। हमें मानवता को स्थापित करना है। पंच परिवर्तन हमारी सनातन का अस्तित्व है। समय के अनुरूप पत्रकारिता को बदलना होगा। साथ ही विश्व के साथ सामंजस्य स्थापित करके भारतीय ज्ञान परम्परा का संचय, प्रसार एवं विकास करना होगा। नई पीढ़ी को ज्ञान के साथ संकल्पति करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास का रास्ता सिर्फ ज्ञान से ही प्रशस्त होगा। अगले 25 साल पत्रकारों के लिए विशेष है।

इस अवसर पर काशी प्रान्त के 6 पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया जिसमें

1. स्वदेश दैनिक के प्रयागराज संवाददाता शिवाशंकर पाण्डेय,

2. आज दैनिक, वाराणसी के डॉ. जिनेश कुमार,

3. दैनिक जागरण, वाराणसी की वरिष्ठ उप सम्पादक वन्दना सिंह,

4. तरुण मित्र दैनिक, जौनपुर के संपादक आदर्श कुमार,

5. न्यूज नेशन, वाराणसी के सुशांत कुमार मुखर्जी एवं

6. हिन्दुस्तान दैनिक, मीरजापुर के उप ब्यूरो प्रमुख अशोक मिश्रा

शामिल रहे। स्वागत विश्व संवाद केन्द्र, काशी न्यास के सचिव प्रदीप कुमार, विषय प्रस्थापना काशी पत्रकार संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अत्रि भारद्वाज, संचालन कार्यक्रम संयोजक डॉ. अम्बरीष राय एवं धन्यवाद ज्ञापन विश्व संवाद केन्द्र, काशी न्यास, काशी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. हेमन्त गुप्ता ने किया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन जी, पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह डा0वीरेन्द्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी, काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश जी, समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. अमिता सिंह, कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, प्रो. राकेश तिवारी, महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह , डॉ0 पियुष श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।








Tuesday, April 7, 2026

'विश्व कल्याण' की भावना और हमारी संगठित शक्ति देख सभी देश भारत से मित्रता करना चाहते हैं — रमेश जी

पथ संचलन हमारे अनुशासन, हमारी एकता और संगठित शक्ति का प्रकटीकरण

प्रयागराज। अपने दैनिक जीवन के कार्यों के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की उन्नति का कार्य भी हम कर रहे हैं। यह कार्य पूरे भारतवर्ष का है। इसी प्रेरणा और संदेश के साथ आज इस 'पथ संचलन' का आयोजन है कि संपूर्ण समाज हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चले। यह पथ संचलन हमारे अनुशासन, हमारी एकता और संगठित शक्ति का प्रकटीकरण है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रयागराज दक्षिण भाग द्वारा हनुमान नगर एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में नववर्ष एवं शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित पथ संचलन को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि चैत्र मास और नवरात्रि के पावन अवसर पर भारतीय नववर्ष मनाते हुए प्रकृति की हरियाली और उसकी नवीन ऊर्जा से प्रेरणा लेकर हम एक संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जो लोग भारत माता को 'अबला' कहते थे, आज उन्हें यह देश बता रहा है कि 140 करोड़ बंधु-बांधवों की यह संगठित शक्ति अबला नहीं हो सकती। आज विश्व में युद्ध और विनाश का माहौल है, लेकिन ऐसे समय में भी हमारी 'विश्व कल्याण' की भावना और हमारी संगठित शक्ति को देखकर संसार के सभी देश भारत से मित्रता करना चाहते हैं। हमारी यह शक्ति किसी को मिटाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया का कल्याण करने के लिए है। हम तो विश्व बंधुत्व को मानने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि भारत ज्ञान और विज्ञान का सिरमौर है। इतिहास साक्षी है कि तक्षशिला, नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला जैसे हमारे महान विश्वविद्यालयों में कभी पूरी दुनिया से लोग पढ़ने आते थे और भारत को 'विश्व गुरु' मानते थे। सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान, यह सब भारतवर्ष की ही देन है। जब दुनिया 12 महीनों का कैलेंडर नहीं जानती थी, जब उन्हें सौरमंडल और 'सूर्य केंद्रित सिद्धांत' (Heliocentric Theory) का ज्ञान नहीं था, तब भी भारत युगों से जानता था कि सूर्य केंद्र में है और नवग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं। सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित हमारी सटीक कालगणना (सौर और चंद्र वर्ष का समन्वय तथा अधिकमास की व्यवस्था) हमारे विज्ञान का प्रमाण है। गणित से लेकर खगोलशास्त्र तक, हमने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।

उन्होंने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारतवर्ष जैसे-जैसे स्वाभिमान से भर रहा है, हमारी अस्मिता का जागरण हो रहा है। हमें अपने पूर्वजों, इतिहास, साहित्य, भूगोल और अपनी जन्मभूमि पर गर्व महसूस करना है और संगठित होकर एक दिशा में चलना है। यही संघ का लक्ष्य है।

"पूर्ण प्रखरतम उज्ज्वल रवि सम, हिन्दू राष्ट्र साकार प्रकट हो। सुखी, सबल, समर्थ भारत हो।" हम एक ध्येय और एक पथ के पथिक बनकर एक ही दिशा में प्रयासरत हैं। जब राष्ट्र विजय पथ पर चलेगा, तो स्वाभाविक रूप से पूरे विश्व में माँ भारती की जय-जयकार होगी। हमारा एकमात्र लक्ष्य है कि हमारी मातृभूमि दुनिया भर में शीर्ष पर विराजे और परम वैभव को प्राप्त हो। जैसे-जैसे हम संगठित होते जाएंगे, भारतवर्ष की उन्नति और हमारी मंजिल हमारे सामने होगी। माँ भगवती और परमात्मा से यही प्रार्थना है कि वे हम सबको शक्ति दें, ताकि हम संपूर्ण भारतवर्ष को संगठित कर देश को उन्नति के शिखर पर ले जा सकें।

पथ संचलन का प्रारंभ एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज से प्रारंभ होकर जानसन गंज चौराहा, बड़ी स्टेशन, थाना शाहगंज, नखास कोना, चौक, कोठा पर्चा,चंद्रलोक, हीवेट रोड, जानसन गंज चौराहा होते हुए पुन: एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज पहुंचकर विराम लिया। कई स्थानों पर नागरिकों ने स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भारत माता की जय उद्घोष से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करने का दृश्य जगह—जगह देखने को मिला।

संचलन में संजीव जी, घनश्याम जी, शिवकुमार जी, सुबन्धु जी, संजय जी, आशीष मोहन जी, शिवप्रकाश जी, वीर कृष्ण जी, वसु जी, अवधेश जी, नरेन्द्र जी समेत लगभग दो हजार की संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।





Saturday, March 28, 2026

रामरंग में शिव की नगरी, हर मुख पर जय श्रीराम

काशी। शिव की नगरी काशी में श्रीरामनवमी का उत्साह देखते ही बन रहा था। हर ओर भगवा पताका से पूरी काशी सनातनी रंग में खिल उठी थी। हर मुख पर जयश्रीराम का उद्घोष से प्रतीत हो रहा था कि मानो भगवान श्रीराम पुन: अवतरित हुए हो।

बाबा कीनाराम आश्रम मन्दिर से चली श्रीराम की शोभायात्रा

सनातन रक्षा परिषद द्वारा भव्य श्रीरामनवमी शोभायात्रा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रीराम भक्त रवीन्द्रपुरी स्थित बाबा कीनाराम आश्रम से यह यात्रा प्रारम्भ कर शिवाला, सोनारपुरा, बंगाली, टोला, मदनपुरा, जंगमबाड़ी होते हुए गदौलिया चौराहे पर पहुंची। यात्रा विराम स्थल के पूर्व मदनपुरा स्थित प्राचीन श्रीहनुमान मन्दिर पर भक्तों ने सामूहिक रूप से श्रीहनुमान चालीसा का पाठ किया। यात्रा में मुख्य आकर्षण श्रीराम की झांकी और हनुमान जी की वानर सेना थी। साथ ही बैंड ढोल और भव्य डीजे पर बज रहे भक्ति गीतों से वातावरण राममय हो चुका था। परंपरागत रूप से पांचवें वर्ष आयोजित श्रीरामनवमी यात्रा को गदौलिया चौराहे पर स्थापित श्रीनंदी जी महाराज की आरती के पश्चात विराम दिया गया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग प्रचारक नितिन जी, भाजयूमो वाराणसी महानगर के अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, विद्यासागर राय, उद्यमी प्रदीप जायसवाल, डॉ॰ राकेश त्रिवेदी जी, वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संयोजन सुयश अग्रवाल, सिद्धेश जिंदल, गुलशन कपूर ने किया। यात्रा का नेतृत्व भारतीय जनता युवा मोर्चा वाराणसी महानगर के अध्यक्ष रजत जायसवाल जी ने किया।कौशिक गुप्ता, रितिक सोनकर, आशीष पोद्दार, अनुराग यादव,  गौरव जायसवाल, अहिभूषण जायसवाल, साहिल सोनकर, विवेक सिंह, आदिति सिंह एवं अन्य कार्यकर्ताओं ने अपना योगदान देकर यात्रा सफल बनाया।

श्रीरामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा में 30 केवट बंधुओं का सम्मान

श्रीरामनवमी के शुभ अवसर पर प्रत्येक वर्ष की भांति श्रीराम कथा मंदाकिनी शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। श्रीराम भक्तों ने मां गंगा के तट पर मानो ब्रह्मांड से साक्षात उतरे भगवान श्रीराम के दर्शन किये| विभाग प्रचारक नितिन जी ने कहा कि वास्तव में भगवान श्री राम के जीवन के प्रत्येक कार्य विनय, संस्कार, सेवाऔर अध्यात्म को प्रदर्शित करता है। हमें उनके द्वारा दिखाए गए मर्यादित पथ पर चलकर अपने जीवन को धन्य करना चाहिए। रामकथा मंदाकिनी शोभा यात्रा विगत 39 वर्षों की भांति इस वर्ष भी भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस पर स्थानीय तुलसी घाट पर संकट मोचन मंदिर के महंत डॉ विश्वंभर नाथ मिश्र जी ने आरतीकर शोभायात्रा प्रारम्भ की। उक्त अवसर पर 30 केवट बंधुओं को साफा बांधकर उनका सम्मान किया गया। शोभायात्रा में भगवान श्री राम के जीवन पर आधारित झांकियां राम दरबार, वन गमन, हनुमान- कालनेमि संवाद, केवट संवाद, धनुष यज्ञ,लव- कुश प्रसंग, गंगा अवतरण, शिव स्तुति, लक्ष्मण परशुराम संवाद समेत प्रयागराज के पत्थरचट्टी रामलीला से आई  कुल 15 झांकियां शामिल थी, जिसका महिषासुर घाट पर स्थित मुक्ताकाश मंच पर भव्य मंचन हुआ। झांकी में शामिल कलाकार बच्चे ईश्वर रूपीवेशभूषा में विराजमान थे। उपस्थित भक्तजनों ने ईश्वर रूपी झांकी की भक्ति में आरती एवं शंखनाद से पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। स्थानीय महिषासुरघाट (भैसासुर), राजघाट  पर तीन श्रेष्ठ झांकियों को पुरस्कृत किया गया तथा शोभायात्रा में शामिल पात्रों को प्रमाण पत्र एवं मैडल भी दिया गया। शोभायात्रा में नवीन श्रीवास्तव, हरीश वालिया, ज्ञानेश्वर जायसवाल, डॉ शिशिर मालवीय, डॉ कमलेश तिवारी, मनीष खत्री, अजीत मेहरोत्रा, मुकुल पांडे, राजेश बहल, शैलेश वर्मा सहित हजारों राम भक्त उपस्थित थे।



हिन्दू समाज को एकजुट करने के लिए हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा ‘हिन्दू एकता शोभायात्रा’ संपन्न

श्रीरामनवमी के शुभ अवसर पर हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा भव्य ‘हिन्दू एकता शोभायात्रा’ का आयोजन किया गया। इस शोभायात्रा में अनेक हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी, अधिवक्ता, व्यापार मंडल के प्रतिनिधि तथा अनेक श्रीराम भक्त सम्मिलित हुए। यात्रा में सभी संत एवं हिंदू संगठनों द्वारा ‘विश्‍वकल्याण हेतु  प्रभु श्रीरामजी के चरणों में सामूहिक प्रार्थना कर रामराज्य के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया। शोभायात्रा का आरंभ धर्मध्वज का पूजन कर शंखनाद से हुआ। यात्रा में सहभागी सभी निरंतर ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ का नामजप कर रहे थे। यात्रा के समय ‘एक ही नारा एक ही नाम, जय श्रीराम जय श्रीराम’, ‘पवनसुत हनुमान की जय’ जैसे उद्घोष से वातावरण गूंज उठा। समाज के अनेक श्रद्धालु यात्रा में सहभागी होकर श्रीरामजी की प्रतिमा पर पुष्पवृष्टि कर रहे थे। काशी विश्‍वनाथ मंदिर के द्वार पर श्रीराम रचित शिव स्तुति की गयी। यह शोभायात्रा मैदागिन चौराहे से आरंभ होकर नीचीबाग, चौक, बासफाटक, दशाश्‍वमेध चौराहे से होते हुए चितरंजन पार्क में जाकर संपन्न हुई। यात्रा के समापन में हिन्दू जनजागृति समिति के धर्मप्रचारक सद्गुरु नीलेश सिंगबाळजी ने बताया कि हिन्दू धर्म ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की सीख देता है। ऐसे धर्म को संविधान द्वारा आधिकारिक संरक्षण मिलने के लिए भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना आवश्यक है। यह मांग विश्‍वकल्याण और हिन्दू संस्कृति को जीवित रखने के लिए है। रामसेतु के निर्माण के लिए जिस तरह गिलहरी ने योगदान दिया उसी प्रकार सभी रामभक्त प्रतिदिन ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ का नामजप करें एवं राष्ट्र तथा धर्मकार्य हेतु न्यूनतम 1 घंटा समय दें, ऐसे उन्होंने अंत में आवाहन किया।

इस शोभायात्रा में वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष अजीत सिंह बग्गा, महामंत्री कविन्द्र जायसवाल, अन्नपूर्णा उद्योग समूह के रवि झुनझुनवाला, गुजराती समाज के अध्यक्ष अनिल भाई शास्त्री, अखिल भारतीय मानस प्रचार समिति के अध्यक्ष रविशंकर सिंह, टाउनहॉल व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुजीत शर्मा,  शीतलामाता मंदिर के महंत अभिषेक पांडे, जालान परिवार के निधि जालान, अखिल भारतीय सनातन न्यास के डॉ0 अजय जायसवाल, स्वर्णकार समाज संघ के प्रदेश अध्यक्ष सत्यनारायण सोनी, पहल फाउंडेशन के संस्थापक सुबोधचंद्र राय, पूर्व प्रधान जय प्रकाश सिंह, सनातन संस्था की प्राची जुवेकर समेत हिन्दू समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।



रामनगर में निकाली गयी भव्य शोभायात्रा

रामनगर में भी श्रीरामभक्तों ने शोभायात्रा का आयोजन कर वातावरण राममय कर दिया। रथ पर सुसज्जित श्रीराम दरबार लोगों को आकर्षित कर रहा था। इसके अतिरिक्त विभिन्न झांकियां सजायी गयी थी। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई स्वरूपा बहनें बुलट पर सवार होकर यात्रा का नेतृत्व कर रही थी। नगर में हजारों घरों पर भगवा पताका फहर रहे थे।

Thursday, March 19, 2026

प्रकृति पर आधारित सूर्य व चन्द्र के गणना पर आधारित है हिन्दू पंचाग - मनोज जी

गाजीपुर। नववर्ष की परम्परा आदि अनन्त काल से चली आ रही है। प्रकृति पर आधारित सूर्य व चन्द्र के गणना पर आधारित हिन्दू पंचाग है जो पूरे विश्व में सास्वत है। इसकी गणना कभी गलत व भ्रामक नही होती है। जो युगाब्द, विक्रमी सम्वत पर आधारित है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गाजीपुर द्वारा आयोजित विशाल पथ संचलन को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र संम्पर्क प्रमुख मनोज जी ने व्यक्त किया।

वर्ष प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर बुधवार को लंका स्थित श्रीरामलीला मैदान में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि इसी गणना के आधार पर वर्ष प्रतिपदा प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के प्रथम दिन मनाया जाता है और सम्पूर्ण भारत मे एक साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति को लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति ने भारी क्षति पहुचाया है और भारत में अंग्रेजी पद्धति के कांवेन्ट स्कूल के माध्यम से भारतीय संस्कृति व परम्परा को धवस्त करने का काम किया है। कार्यक्रम में सर्वप्रथम सभी स्वयंसेवकों ने संघ के संस्थापक डा.केशव बलिराम हेडगेवार को आद्य सर संघचालक प्रणाम निवेदित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। कार्यक्रम मे जिला धर्म जागरण प्रमुख प्रेम कुमार ओझा के निधन पर दो मिनट का मौन रख श्रद्धाजलि अर्पित किया गया।

यह संचलन श्रीरामलीला मैदान से प्रारम्भ होकर लंका चुंगी होते हुए सिंचाई विभाग चौराहा होते हुए सरयू पाण्डेय पार्क कचहरी होते हुए अफीम फैक्ट्री, महुआबाग, दुर्गाचौक सकलेनाबाद, जेलगेट होते हुए श्रीराम लीला लंका मैदान में विराम लिया। कार्यक्रम के अन्त में संघ प्रार्थना व ध्वज प्रणाम किया गया। कार्यक्रम में मा0 विभाग संघचालक सचिदानन्द, मा0 जिला संघचालक जयप्रकाश, सह विभाग प्रचारक प्रेमप्रकाश, जिला प्रचारक प्रभात, नगर प्रचारक विक्रम आदि उपस्थित रहे।





Wednesday, March 18, 2026

काशी प्रांत में समाज परिवर्तन की दिशा में आरएसएस का का बढ़ा कदम, शताब्दी वर्ष में देश में छः हजार तो काशी प्रांत में 116 शाखाएं बढ़ी

काशी। वैचारिक स्पष्टता सुसंगत व्यवहार और कार्यपद्धति के बल पर संघ जहां समाज के प्रत्येक घरो और समुदाय में पहुंच बनाने में सफल हो रहा है वहीं संघ की शाखाएं भी निरंतर बढ़ रही है। शताब्दी वर्ष में सकारात्मक सोच के साथ संघ और समाज के समन्वय से काशी प्रांत में समाज परिवर्तन की दिशा में अच्छा परिणाम दिखाई दे रहा है। शून्य से शतक तक संघ की इस यात्रा में इस वर्ष विजया दशमी उत्सव, व्यापक गृह संपर्क, हिंदू सम्मेलन, युवाओ के लिए कार्यक्रम, सामाजिक सद्भाव, प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी के कार्यक्रमों को सकारात्मक एवं व्यापक जन समर्थन मिला। यह जानकारी लंका स्थित विश्व संवाद केन्द्र काशी के माधव सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त के प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल जी एवं प्रान्त प्रचार प्रमुख डा0मुरार जी त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से दी।

हरियाणा के समालखा में आयोजित त्रिदिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा से लौटने के पश्चात आयोजित पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए प्रान्त कार्यवाह ने बताया कि जागरण श्रेणी एवं गतिविधियाँ मिलकर समाज की सज्जन शक्ति ,सुप्त शक्ति और उत्सुक शक्ति के साथ समाज जागरण के अभियान में सक्रिय है। पंच परिवर्तन को जीवन में उतारने से व्यवस्था का परिवर्तन होगा और यही समाज परिवर्तन का आधार है। जहां तक संगठन श्रेणी की बात है तो शताब्दी वर्ष में हम लक्ष्य के करीब है। पिछले वर्ष प्रतिनिधि सभा के समय देश में कुल 83129 शाखाएं थी तो इस वर्ष लगभग 6 हजार शाखाओं की बढोत्तरी के साथ कुल अट्ठासी हजारी नौ सौ नवासी शाखाएं संचालित है। मिलन और मंडली को लेकर देश में कुल सवा लाख प्रत्यक्ष कार्य संचालित है। काशी प्रांत के सभी 155 खंडों और 115 नगरों में संघकार्य है। कुल 1504 न्याय पंचायतो में से 1438 में शाखाएं और शेष में मिलन के कार्य है। प्रांत के कुल नगरों में 1044 बस्तियां है और सभी में शाखाएं मिलन और मंडली चल रही है। गतवर्ष काशी प्रांत में 2851 शाखाएं थी तो इस वर्ष 116 की वृद्धि के साथ कुल 2967 शाखाएं संचालित है।

शताब्दी वर्ष में 2102 हिन्दू सम्मेलन के साथ 31 लाख से अधिक घरों में स्वयंसेवकों ने किया सम्पर्क

प्रान्त प्रचार प्रमुख डा0मुरार जी त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष देश भर में चल रहे संघ के शताब्दी वर्ष में प्रान्त में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें 2102 हिन्दू सम्मेलन हुए। घर-घर सम्पर्क अभियान के अन्तर्गत स्वयंसेवकों ने 3198841 घरों में सम्पर्क किया। अभियान के अन्तर्गत 2 लाख संघ साहित्य बिक्री हुई एवं 3124275 कर पत्रक वितरित किये गये। इस अभियान हेतु 16512 टोलियों का गठन किया गया। युवा कार्यक्रम संगठन की योजनातंर्गत गठित सभी 27 जिलों के 269 स्थानों पर 560 युवा सम्मेलन हुए। जिसमें 376 सम्मेलन विद्यार्थियों एवं 184 सम्मेलन युवा व्यावसायियों के मध्य हुए। युवा कार्यक्रम में कुल 53032 विद्यार्थी एवं 20342 व्यावसायी उपस्थित रहें। प्रान्त में सद्भाव बैठकें 240 स्थानों पर सम्पन्न हुई जिसमें 14434 पुरुष एवं 2025 मातृशक्ति समेत कुल 16459 लोग उपस्थित रहें।

संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी के 650वां प्राकट्य वर्ष मनाएगा संघ

वक्ताओं ने बताया कि काशी की धरती से अवतरित हुए संत शिरोमणि रविदास जी महाराज के 650वें प्राकट्य वर्ष पर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा द्वारा आगामी वर्ष में कार्यक्रमों की योजना बनाई गयी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करता है।

काशी प्रान्त में होंगे 2 सम्भाग

वर्ष 2027 से देश भर में 46 प्रान्त रचना के स्थान पर 85 सम्भाग अस्तित्व में आयेंगे। वर्तमान उत्तर प्रदेश राज्य एवं उत्तराखण्ड एक क्षेत्र के रूप में जाना जाएगा। इस योजना के अन्तर्गत वर्तमान काशी प्रान्त जिसमें संघ दृष्टि से 27 जिले है, को 2 सम्भागों में काशी एवं प्रयागराज में बांटा जाएगा।

Wednesday, January 14, 2026

राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का दायित्व पूरे समाज का है – नरेन्द्र ठाकुर जी


सोनभद्र। स्वामी विवेकानंद जयंती की पूर्व संध्या पर स्वामी विवेकानंद प्रेक्षागृह में युवा विद्यार्थी सम्मेलन तथा युवा व्यावसायी सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी ने कहा कि हमारे सामने भविष्य है और भविष्य से जुड़े सभी दायित्वों का निर्वहन आज के युवाओं को ही करना है। इसलिए प्रत्येक युवा को अपने परिवार, समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों पर गंभीरता से विचार करना होगा।

उन्होंने कहा कि मनुष्य अकेला नहीं जीता, वह परिवार, समाज, गांव, जिला, राज्य और देश से जुड़ा होता है। विश्व में घटित होने वाली घटनाओं का प्रभाव देश पर पड़ता है, इसलिए केवल स्वार्थ के आधार पर जीवन नहीं चल सकता। राष्ट्र निर्माण किसी एक दिन या एक पीढ़ी का कार्य नहीं, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य, निरंतरता और त्याग की आवश्यकता होती है। त्वरित परिणामों की अपेक्षा किए बिना लंबे समय तक समाज के बीच रहकर कार्य करना ही वास्तविक समाधान है।

उन्होंने कहा कि यदि देश को सशक्त बनाना है तो सबसे पहले स्वयं को ठीक करना होगा। स्वस्थ रहने का अर्थ केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि सही सोच, विवेक और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी है। बुद्धि और विवेक यदि सही न हों तो मनुष्य गलत मार्ग पर चला जाता है। भाग्य के साथ-साथ परिश्रम भी आवश्यक है। उन्होंने स्वयं के बौद्धिक और मानसिक परिष्कार पर बल दिया।

उन्होंने डॉ. हेडगेवार के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को बदले बिना देश नहीं बदलेगा। इसी उद्देश्य से ऐसे संगठन का निर्माण किया जो चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करे। राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और नैतिक चेतना है, जिसे जीवित रखने का दायित्व पूरे समाज का है। समाज को बदलने के लिए सत्ता नहीं, बल्कि संस्कारों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने स्व आधारित जीवन, स्वदेशी, स्वावलंबन, आत्मनिर्भरता, स्वभाषा, समरस समाज, नागरिक कर्तव्य बोध, पारिवारिक संस्कार एवं पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने युवाओं से जॉब सीकर नहीं, जॉब प्रोवाइडर बनने का आह्वान किया तथा छुआछूत, अस्पृश्यता और भेदभाव समाप्त कर समरस समाज के निर्माण पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि वास्तविक राष्ट्रभक्ति का अर्थ है बिना किसी अपेक्षा, अहंकार या स्वार्थ के राष्ट्र सेवा करना। राष्ट्र की उन्नति केवल भौतिक प्रगति से नहीं, बल्कि नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक चेतना से संभव है। युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव होना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर एक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में जिला संघचालक हर्ष अग्रवाल, सह प्रांत कार्यवाह राकेश तिवारी मंच पर उपस्थित रहे।