काशी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी महानगर द्वारा चौकाघाट स्थित गिरजा देवी सांस्कृतिक संकुल के सभागार में संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुखजन संवाद-संगोष्ठी में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के मौलिक दर्शन को मानने वालों का संगठन है। अपने सांस्कृतिक अधिष्ठान को सुरक्षित रखते हुए युगानुकूल तकनीक को स्वीकार कर समाज में संगठन का कार्य संघ कर रहा है। हिन्दू समाज दुनिया को बचाने का एकमात्र आधार है, परन्तु सबसे पहले हिन्दू समाज को अपना घर सुव्यवस्थित करना होगा।
उन्होंने
कहा कि 100 वर्षों की संघ यात्रा रोचक और रोमांचकारी है।
यद्यपि इस कालखण्ड में संघ को अनेक समस्याएं झेलनी पड़ी, परन्तु
संघ ने युगानुकूल परिवर्तन कर समाज को एकत्रित करने का कार्य जारी रखा। प्राचीन
भारत गणित, ग्रह गति, वस्त्र विन्यास,
कृषि, रसायन विज्ञान, मानव
शरीर रचना विज्ञान में विश्व में अग्रणी था। नालंदा, विक्रमशिला,
तक्षशिला जैसे विश्व विख्यात विश्वविद्यालय भारत में थे। विश्व
अर्थव्यवस्था में 30 प्रतिशत भारत का योगदान था। मानवीय
मस्तिष्क की जो भी उच्चतम कृति हो सकती है, वह सब भारत में
बनती थी। परन्तु हजारों वर्षों के संघर्ष के कारण शस्य श्यामला भूमि अकाल ग्रस्त
होने लगी। संघ संस्थापक पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने समस्याओं के समाधान
के तीन मुख्य बिन्दु बताए। प्रथम – भारतीय नागरिकों के मन में देशभक्ति भाव का
जागरण करना, दूसरा – समाज जीवन में आत्मविश्वास की वृद्धि
करना और तीसरा – पूर्वजों की कीर्ति को ध्यान में रखकर उसके अनुरूप कार्य करना।
अंग्रेजों का कथन था कि भारतीय अकर्मण्य है, प्रशासनिक समझ
नहीं है एवं आर्य बाहर से आए हैं। डॉ. हेडगेवार ने इन भ्रांतियों को हटाने का
कार्य प्रारम्भ किया।
सह
सरकार्यवाह जी ने कहा कि आज 90 हजार से अधिक शाखाएं
और 50 लाख से अधिक स्वयंसेवक एक समान उद्देश्य को लेकर
देशहित में अपना समय देते हैं। सामाजिक जीवन में बदलाव के लिए स्वयंसेवक अनेक
संगठन चला रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती, श्रमिकों
के मध्य भारतीय मजदूर संघ, सेवा के क्षेत्र में सेवा भारती,
वनवासी समाज के मध्य वनवासी कल्याण आश्रम जैसे अनेकों समूह समाज की
विषमता को दूर करने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने
उपभोक्तावादी संस्कृति से सचेत रहने का आग्रह किया। साथ ही विश्व में व्याप्त
असहिष्णुता को समाप्त करने का आह्वान किया। श्रोताओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते
हुए एक प्रश्न के उत्तर में सह सरकार्यवाह जी ने कहा कि 1947
में दुनिया के सभी देश मानते थे कि भारत एक राष्ट्र के रूप में
लम्बे समय तक नहीं टिक सकता, वह देश बिखर जाएगा। परन्तु आज
शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा के क्षेत्र में भारत की यात्रा अनवरत जारी है। कोरोना काल में
भारत एकमात्र देश रहा, जहां लाखों लोगों को प्रतिदिन
नि:शुल्क भोजन प्राप्त हो रहा था।
भारत
में हिन्दू वह व्यक्ति है, जो इस देश को
मातृभूमि मानता हो, सभी मत-पंथों के प्रति श्रद्धावान रहे।
हिन्दू सांस्कृतिक अधिष्ठान है जो अनन्त विविधताओं को साथ लेकर चलता है। यह ”वे ऑफ
लाइफ” है। स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका के प्रश्न पर डॉ. कृष्ण गोपाल जी
ने बताया कि डॉ. हेडगेवार स्वयं दो बार स्वतंत्रता संग्राम में जेल गए थे। डॉ.
हेडगेवार ने राजगुरु एवं सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों की सहायता भी की थी। संघ के
स्वयंसेवकों ने 1942 के आन्दोलन में जेल यात्रा की थी।
ज़ेन-ज़ी को धर्म और संस्कृति का संस्कार देने के प्रश्न पर कहा कि सभी हिन्दू
परिवारों को युवाओं के साथ चर्चा करनी चाहिए। युवाओं को यह बताना आवश्यक है कि
युगानुकूल परिवर्तन के लिए हिन्दू धर्म सदैव तैयार है। उनके मन में दूसरों के
प्रति आत्मीयता बढ़ानी होगी।
उन्होंने
कहा कि वास्तव में धर्म कर्तव्य का बोध है। वहीं धर्म का दूसरा पक्ष उसे गुण विशेष
बनाता है। मातृधर्म, राजधर्म, जल का धर्म, वायु का धर्म इत्यादि से धर्म की
व्याख्या की। धर्म परिवर्तन नहीं हो सकता, वह मात्र मतांतरण
होता है। कमजोर वर्गों को सम्भालना हमारी जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री राजेश्वर आचार्य ने कहा कि राष्ट्रधर्म सर्वोच्च है। कार्यक्रम का शुभारम्भ मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। निवेदिता शिक्षा सदन की बालिकाओं ने वन्देमातरम, एकल गीत प्रभात ने प्रस्तुत किया। संचालन विभाग कार्यवाह राजेश विश्वकर्मा एवं धन्यवाद ज्ञापन संजय चौरसिया ने किया।
प्रमुख
जन संवाद संगोष्ठी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 अजीत चतुर्वेदी, चिकित्सा विज्ञान संस्थान के निदेशक
डॉ0एस.एन.शंखवार जी, प्रसिद्ध उद्यमी
आर.के.चौधरी, पद्मश्री देवी प्रसाद द्विवेदी, प्रख्यात साहित्यकार डा.नीरजा माधव, समाजसेवी
सूर्यकान्त जालान, प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल जी, सह प्रान्त कार्यवाह डा0 राकेश जी, प्रान्त प्रचारक रमेश जी, सह प्रान्त प्रचारक सुनील
जी, प्रो0 मंजू द्विवेदी, डॉ आनन्द प्रभा सिंह, मीना चौबे सहित बड़ी संख्या
में काशी महानगर के गणमान्य एवं प्रबुद्धजन मातृशक्ति उपस्थित रही।





