प्रयागराज।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद काशी प्रांत की ओर से शनिवार को राष्ट्र साधना के 100 वर्ष के उपलक्ष्य में जिला पंचायत सभागार में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन
किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि काशी प्रांत के प्रचारक रमेश जी ने कहा कि
साहित्य परिषद सबके हित के कार्य को कवियों के माध्यम से रखने का प्रयास किया जा
रहा है। उन्होंने कहा कि देश का भाग्य ही प्रत्येक ना
गरिक का भाग्य है। देश समर्थ,
समृद्ध और विकसित होगा तो हम भी समर्थ, समृद्ध
और विकसित होंगे। देश में शांति स्थापित रहेगी तो हम भी शांति के साथ जीवन यापन कर
सकेंगे। संघ अपने स्थापना वर्ष से देशहित में कार्य कर रहा है। राष्ट्र की
सर्वांगीण उन्नति के लिए संघ 100 वर्षों से कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में धर्म, संस्कृति और समाज की खोई हुई
पुनः स्थापित करने का कार्य अखिल भारतीय साहित्य परिषद कर रही है।
अध्यक्षता
करते हुए अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री पवनपुत्र बादल ने कहा
कि साहित्य परिषद ने केवल हिंदी नहीं बल्कि सभी भारतीय भाषाओं को आगे बढ़ाने का
कार्य किया है। भारत की एकात्मता का भाव लेकर लेकर साहित्य परिषद काम कर रहा है।
उन्हेें राष्ट्र निर्माण के लिए साहित्य परिषद से जुड़ने का आग्रह किया। भारत की
पुरातन, सनातन और वैदिक भाव को पुनः जागृति करने के लिए
साहित्य परिषद कार्य कर रहा है। इस मौके पर स्वामी वैदेही वल्लभ सरकार ने कहा कि
ब्रह्म से भी पहले शब्द की उत्पत्ति हुई। संघ तो वटवृक्ष है और संपूर्ण साधना
सिखाता है।
‘एक दीप से जले हज़ारों यह अद्भुत विस्तार है, भारत के इस नव निर्माण में संघ शक्ति आधार है...’
इस
अवसर पर आमंत्रित कवियों ने राष्ट्रप्रेम और त्याग की कविताओं से वातावरण भावपूर्ण
बना दिया। कार्यक्रम में विनीत चौहान ने मंच संचालन किया। कवि अभय निर्भीक ने
‘त्याग तपस्या ज्ञान संघ है, क्षमता का उत्थान संघ
है, मातृभूमि को सदा पूजता भारत का सम्मान संघ है’ के माध्यम
से संघ को प्रस्तुत किया। कवियित्री प्रियंका राय ने ‘मैं भारत की आनबान सम्मान की
खातिर जीती हूं, मुरझाये चेहरों पर मैं मुस्कान की खातिर
जीती हूं, जीते होंगे लोग यहां धन-दौलत शोहरत की खातिर,
सच कहती हूं मैं तो हिन्दुस्तान की खातिर जीती हूं’ के माध्यम से
श्रोताओं में जोश भर दिया। कवि दास आरोही आनन्द ने ‘हम प्रखर पुंज, हम तेजवंत हम पारस जैसे सजे हैं, हमको हल्के में मत
लेना, हम भारत के बच्चे हैं’ के माध्यम से युवाओं को जागृत
किया। मध्यप्रदेश के भोपाल से आई नुसरत मेहंदी ने ’जन-जन में आत्मबोध जगाया है संघ
ने, सर्वाेपरि है राष्ट्र सिखाया है संघ ने’ के माध्यम से
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के बारे में बताया। कवियित्री नेहा शर्मा ने अपनी कविता
‘हमेशा याद रखना तुम की ये धरती तुम्हारी है, ये गंगा गोमती
सरयू, ये यमुना जी तुम्हारी है, तिरंगा
भी तुम्हारा है, और भमवा तुम्हारा है, सनातन
है तो सब कुछ है और हस्ती तुम्हारी’ के माध्यम से मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि प्रशांत
अवस्थी ‘प्रखर’ ने अपनी कविता ‘सुनो कथानक कहता हूं मैं, है
जिनकी कथा सुनहरी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक के संघी, सदा दंश के प्रहरी’ के माध्यम से श्रोताओं का मन मोह लिया।
गांव
और ग्रामीण संस्कृति पर कविता लिखने वाली मनु वैशाली ने अपनी कविता ‘चप्पल पहन के
जिनकी चलते थे शौक से हम तुम पूछते हो वैसे गांव में क्या रखा है’ के माध्यम से
गांव से जुड़ाव की याद दिलाई। कवि डां. प्रवीण आर्य ने कविता ‘जननी जन्मभूमि का
वंदन, आओ कर ले हम, वन्दे मातरम वन्दे
मातरम।। राम कृष्ण को मातृभूमि से स्वर्ग लगा धीमा धीमा, चूमे
चरण चांदनी भू के, भाल लगा के सर टीका, सुर नर मुनि तरसा करते, पाने को जहाँ जन्म, वन्दे मातरम वन्दे मातरम’ के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का वातावरण बनाया।
विख्यात मिश्र ने ‘सज गये सारंगधारी, संघ के कारण ही है,
अब सजेंगे ब्रजबिहारी, संघ के कारण ही है’ के
माध्यम से संघ का महत्व बताया। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे कवि और शिक्षक डॉ.
विनम्र सेन सिंह ने अपनी कविता ‘एक दीप से जले हज़ारों यह अद्भुत विस्तार है,
भारत के इस नव निर्माण में संघ शक्ति आधार है।’ के माध्यम से भारत
की एकता का परिचय दिया।
कार्यक्रम
का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन और भारत मां के चित्र पर पुष्प अर्पित करके किया गया।
इसके बाद साहित्य परिषद की ओर से सभी मंचासीन अतिथियों और कवियों को स्वागत किया
गया।
कार्यक्रम
में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के सह-कोषाध्यक्ष कमलाकांत गर्ग, प्रदेश महामंत्री महेश पाण्डेय ‘बजरंग’ पूर्व आईजी केपी सिंह, प्रो. वाईपी सिंह, डा. अमरेंद्र त्रिपाठी, प्रो. रमेश सिंह, डा. स्नेहसुधा, अर्चना सिंह और प्रो. कल्पना वर्मा आदि मौजूद रहे।
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