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Tuesday, April 7, 2026

'विश्व कल्याण' की भावना और हमारी संगठित शक्ति देख सभी देश भारत से मित्रता करना चाहते हैं — रमेश जी

पथ संचलन हमारे अनुशासन, हमारी एकता और संगठित शक्ति का प्रकटीकरण

प्रयागराज। अपने दैनिक जीवन के कार्यों के साथ-साथ समाज और राष्ट्र की उन्नति का कार्य भी हम कर रहे हैं। यह कार्य पूरे भारतवर्ष का है। इसी प्रेरणा और संदेश के साथ आज इस 'पथ संचलन' का आयोजन है कि संपूर्ण समाज हमारे साथ कदम से कदम मिलाकर चले। यह पथ संचलन हमारे अनुशासन, हमारी एकता और संगठित शक्ति का प्रकटीकरण है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रयागराज दक्षिण भाग द्वारा हनुमान नगर एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में नववर्ष एवं शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित पथ संचलन को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि चैत्र मास और नवरात्रि के पावन अवसर पर भारतीय नववर्ष मनाते हुए प्रकृति की हरियाली और उसकी नवीन ऊर्जा से प्रेरणा लेकर हम एक संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जो लोग भारत माता को 'अबला' कहते थे, आज उन्हें यह देश बता रहा है कि 140 करोड़ बंधु-बांधवों की यह संगठित शक्ति अबला नहीं हो सकती। आज विश्व में युद्ध और विनाश का माहौल है, लेकिन ऐसे समय में भी हमारी 'विश्व कल्याण' की भावना और हमारी संगठित शक्ति को देखकर संसार के सभी देश भारत से मित्रता करना चाहते हैं। हमारी यह शक्ति किसी को मिटाने के लिए नहीं, बल्कि दुनिया का कल्याण करने के लिए है। हम तो विश्व बंधुत्व को मानने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि भारत ज्ञान और विज्ञान का सिरमौर है। इतिहास साक्षी है कि तक्षशिला, नालंदा, वल्लभी और विक्रमशिला जैसे हमारे महान विश्वविद्यालयों में कभी पूरी दुनिया से लोग पढ़ने आते थे और भारत को 'विश्व गुरु' मानते थे। सभ्यता, संस्कृति, ज्ञान और विज्ञान, यह सब भारतवर्ष की ही देन है। जब दुनिया 12 महीनों का कैलेंडर नहीं जानती थी, जब उन्हें सौरमंडल और 'सूर्य केंद्रित सिद्धांत' (Heliocentric Theory) का ज्ञान नहीं था, तब भी भारत युगों से जानता था कि सूर्य केंद्र में है और नवग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं। सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित हमारी सटीक कालगणना (सौर और चंद्र वर्ष का समन्वय तथा अधिकमास की व्यवस्था) हमारे विज्ञान का प्रमाण है। गणित से लेकर खगोलशास्त्र तक, हमने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।

उन्होंने स्वयंसेवकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भारतवर्ष जैसे-जैसे स्वाभिमान से भर रहा है, हमारी अस्मिता का जागरण हो रहा है। हमें अपने पूर्वजों, इतिहास, साहित्य, भूगोल और अपनी जन्मभूमि पर गर्व महसूस करना है और संगठित होकर एक दिशा में चलना है। यही संघ का लक्ष्य है।

"पूर्ण प्रखरतम उज्ज्वल रवि सम, हिन्दू राष्ट्र साकार प्रकट हो। सुखी, सबल, समर्थ भारत हो।" हम एक ध्येय और एक पथ के पथिक बनकर एक ही दिशा में प्रयासरत हैं। जब राष्ट्र विजय पथ पर चलेगा, तो स्वाभाविक रूप से पूरे विश्व में माँ भारती की जय-जयकार होगी। हमारा एकमात्र लक्ष्य है कि हमारी मातृभूमि दुनिया भर में शीर्ष पर विराजे और परम वैभव को प्राप्त हो। जैसे-जैसे हम संगठित होते जाएंगे, भारतवर्ष की उन्नति और हमारी मंजिल हमारे सामने होगी। माँ भगवती और परमात्मा से यही प्रार्थना है कि वे हम सबको शक्ति दें, ताकि हम संपूर्ण भारतवर्ष को संगठित कर देश को उन्नति के शिखर पर ले जा सकें।

पथ संचलन का प्रारंभ एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज से प्रारंभ होकर जानसन गंज चौराहा, बड़ी स्टेशन, थाना शाहगंज, नखास कोना, चौक, कोठा पर्चा,चंद्रलोक, हीवेट रोड, जानसन गंज चौराहा होते हुए पुन: एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज पहुंचकर विराम लिया। कई स्थानों पर नागरिकों ने स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। भारत माता की जय उद्घोष से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करने का दृश्य जगह—जगह देखने को मिला।

संचलन में संजीव जी, घनश्याम जी, शिवकुमार जी, सुबन्धु जी, संजय जी, आशीष मोहन जी, शिवप्रकाश जी, वीर कृष्ण जी, वसु जी, अवधेश जी, नरेन्द्र जी समेत लगभग दो हजार की संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।





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