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Saturday, October 9, 2010

देश को तो राम ही चला रहा है

देश को तो राम ही चला रहा है
देश को तो राम ही चला रहा है . यह हकीकत ही है वरना न जाने क्या हो इस देश के साथ किसी को खबर भी नहीं लगे.
जिस किसी को देखो तो अपना ही राग अलाप रहा है जैसे की वो खुद ही सबसे बड़ा समजदार जानकर है भारत की इस पुण्यभूमि पर. देश का क, ख, ग ... की जानकारी है नहीं और दिखावा ऐसा की बस पूछो मत . खुली बहस का निमंत्रण दे दिया हो तो मुह की खानी पड़ेगी इसमें कोई दो राय नहीं होनी चाइये.

किसकी तुलना किससे और कैसे की जाये इसकी क्लास तो पहले हो जाती तो किरकिरी तो नहीं होती बाबा की.

मीडिया कैसे कार्य करता किसी से छुपा नहीं है , वो दिखलाओ जो हकीकत है नहीं दिखलाओ वो जिसे हकीकत में बदलना हो . इन्होने तो यह समझ ही लिया की इस देश की नई तस्वीर लिखने का ठेका हमें ही मिल गया है.

बहुत जल्द समझ में आने वाला है कि बाबा के बस में नहीं है कुछ भी , कुछ यस सर , यस मेडम कहने वालो का जमावड़ा खीच रहा है इस पार्टी को वरना कोंग्रेस ऐ से जेड बन जाएगी. और फिर विपक्षी दल भी तो जुदा जुदा है अपने अपने समीकरणों से. समाजवादी विचारधारा को तो कभी का त्याग दिया जे पी आन्दोलन वालो ने.

कभी पाक की धमकी कभी चीन की घुड़की अमेरिका का दोहरापन कुछ भी तो पक्ष में नहीं हमारे. कैसी विदेश नीति है और कैसी देश की नीति कोई भी अपने से ऊपर आने की नहीं सोच रहा है . नक्सल अपना जलवा दिखा ही रहा है और कश्मीर का रंग तो किसी से छुपा है ही नहीं .

उमर कहा के है ? यह समझ में मुश्किल से ही आएगा काहे को पाकिस्तान की चिंता मिया उमर को सता रही है ? धारा ३७० हटाओ सब समझ में आ जायेगा कश्मीर के ठेकेदारों को .
मिया उमर आप भारत में ही है ना ? ऐसा कैसा दबाव आया कि अलगाववादियों कि राग अलापने लगे. आपका यह चेहरा पहले ही सामने आ जाता तो ज्यादा अच्छा रहता.

अरुणाचल प्रदेश में ही नहीं पूर्वी राज्यों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया तो इस देश पर भारी मुसीबत आने वाली है . पाक के नापाक इरादों को अमली जामा आइ एस आई के द्वारा पहनाया जा रहा है .

जब तक तुष्टिकरण से ऊपर नहीं उठेंगे इस देश का भला होना मुश्किल है. इसी लिए तो में कह रहा हूँ इस देश का मालिक राम ही है.

2 comments:

Anonymous said...

I am fully agree with the unanimous verdict of the Lucknow bench on so-called Ayodhya dispute that this is Ramjanm Bhumi and the worship Lord Ram should be continued. It is demand of modern time that now faith and belief should be recognised by law and has been fulfilled by this verdict. It is in the favour of the society and nation too. Now the dispute has been resolved.


Faith is faith – it will be only foolish act to judge the faith on the basis of logic and reason. The result will be highly disappointing regarding the matter of temple and mosque on disputed land: The Baber who demolished the temple in 1528 was a foreign invader and now the Muslims who were demanding the right to worship on such land they have too worship only but in a different way they are also Indian.

It will be unfair to put the slur of demolition of Ramjanmbhumi Temple in fifteenth century on Indian Muslims because neither they are Babar nor they belong to his race. Indeed are transformed Muslims but only Indian. I support the view of the Advocate Shantibhushan that the verdict can not be better than this.

rssbhu@in.com

rssbhu said...

www.rssbhu.blogspot.com