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Sunday, March 15, 2015

मसर्रत आलम की रिहाई पर संघ देशवासियों के आक्रोश के साथ : दत्तात्रय होसबले

मसर्रत आलम की रिहाई पर संघ देशवासियों के आक्रोश के साथ : दत्तात्रय होसबले

DSC_0182नागपुर, मार्च 13. जम्मू-कश्मीर की मुफ़्ती सरकार द्वारा कश्मीरी अलगाववादी नेता मसर्रत आलम की रिहाई से पूरे देश में जनाक्रोश है. इस आक्रोश का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सह सरकार्यवाह दत्तात्रय होसबले ने कहा कि हम देशवासियों के साथ हैं. उन्होंने यह भी कहा कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी संसद में इस पर आक्रोश व्यक्त किया था. सह सरकार्यवाह अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक के पहले दिन मीडिया को सम्बोधित कर रहे थे. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सबकुछ ठीक चल रहा है, ऐसा हम नहीं मानते. सह सरकार्यवाह ने कहा कि आज एक राष्ट्रवादी राजनीतिक दल (भाजपा) वहां सरकार में शामिल है, यह एक प्रयोग के तौर पर है.
उन्होंने कहा कि संघ का कार्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करना है. संघ समाज को संगठित करने का कार्य करता है, इसलिए हम समाज के सम्पर्क में रहते हैं. संघ की शाखा हमारी ऊर्जा का केंद्र है. शाखा के माध्यम से हमें ऊर्जा मिलती है. इसी ऊर्जा के बल पर संघ के द्वारा देशभर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवाकार्य चलता है.
उन्होंने बताया कि देश भर में लगने वाली शाखाओं में तीन साल की अवधि में बढ़ोतरी हुई है. शाखा स्थान वर्ष 2012 की संख्या 5161 से बढ़कर वर्ष 2015 में 10413 हो गए हैं, ऐसे ही प्रतिदिन लगने वाली शाक्षाओं की संख्या वर्ष 2012 की संख्या 33,222 से बढ़कर वर्तमान में 51,330 हो गई है. इसी प्रकार साप्ताहिक मिलन की संख्या 12847 और मासिक मंडली की संख्या 9008 है, केवल युवा छात्रों की 6077 शाखाएं हैं. कुल 55010 स्थानों पर संघ कार्य चल रहा है.
सह सरकार्यवाह होसबले ने बताया कि गत मार्च के पश्चात संघ शिक्षा वर्गों में प्रथम वर्ष सामान्य और विशेष वर्गों में 59 वर्ग हुए, जिसमें 9609 स्थानों से 15332 शिक्षार्थी सहभागी हुए. वहीं द्वितीय वर्ष सामान्य एवं विशेष के 16 वर्गों में 2902 स्थानों से 3531 शिक्षार्थी सहभागी हुए. तृतीय वर्ष में 657 स्थानों से 709 संख्या रही. उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रान्तों में सम्पन्न प्राथमिक वर्गों में भी ग्रामों का प्रतिनिधित्व एवं शिक्षार्थियों की संख्या भी अच्छी रही है. इन वर्गों में कुल मिलाकर 23 हजार 812 शाखाओं से 80 हजार 409 शिक्षार्थी सम्मिलित हुए.
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संघ से बहुत सारे नए लोग जुड़ रहे हैं. वे लोग संघ के बारे में जानना चाहते हैं, अतः पश्चिम बंगाल में आधा और एक दिन का ‘संघ परिचय वर्ग’ का आयोजन किया गया. इस परिचय वर्ग में दक्षिण बंगाल में 11 हजार और उत्तर बंगाल में 5000 नए लोग शामिल हुए.
दक्षिण कर्नाटक में ‘समर्थ भारत’ संकल्पना को लेकर 2 दिवसीय चर्चा सत्र का आयोजन किया गया. इसके तहत सोशल मीडिया द्वारा पंजीयन के लिए युवाओं को आह्वान किया गया. देश व समाज के लिए कार्य करने की इच्छा रखनेवाले युवाओं का इसमें भरपूर उत्साह देखने मिला. इस 2 दिवसीय आयोजन में दक्षिण कर्नाटक से 3852 युवा सम्मिलित हुए. इस आयोजन में ग्राम-विकास, सेवा-बस्ती के कार्य, जल संवर्धन, स्वयंसेवी कार्य, महिलाओं की समस्या, शैक्षिक प्रयोग, पर्यावरण, वैचारिक आन्दोलन, मतिमंद और विकलांगों की समस्याएं आदि विषयों पर चर्चा हुई. इस समग्र आयोजन की संकल्पना को इन शब्दों में वर्णित किया जा सकता है – “समूह हेतु संकल्पना” और “संकल्पना हेतु समूह” (Team for Theme and Theme for Team). यही कारण है कि 77 युवकों ने एक वर्ष देश के लिए अर्पित करने के लिए सिद्धता प्रगट की.
सह सरकार्यवाह होसबले से पत्रकारों ने पूछा कि क्या वे मोदी सरकार के 9 महीने के कार्य से संतुष्ट हैं? तो उन्होंने जवाब दिया कि असंतुष्ट होने का कोई कारण नहीं है और संतुष्टि के लिये उन्हें 5 वर्ष का समय दिया जाना चाहिये. भूमि अधिग्रहण कानून के सन्दर्भ में पूछा गया कि संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ और मजदूर संघ इस बिल का विरोध कर रहे हैं, ऐसे में संघ किसके साथ है? उन्होंने कहा कि भारतीय किसान संघ और मजदूर संघ स्वतंत्र संगठन हैं. सरकार की नीतियों में सुधार के लिये अपनी भावनाएं व्यक्त करने का उनका अधिकार है. लेकिन जब किसी विषय पर कोई सुझाव या कुछ आपत्ति हो तो बैठकर उन नीतियों में सुधार करने के लिये संघ प्रेरित करता है.
भारत में कोई अल्पसंख्यक नहीं है जहां सब लोग ‘सांस्कृतिक, राष्ट्रीयता और डीएनए से हिंदू’ हैं.‘‘आप किसे अल्पसंख्यक कहेंगे ? हम किसी को भी अल्पसंख्यक नहीं मानते हैं. देश में अल्पसंख्यक की कोई अवधारणा नहीं है क्योंकि अल्पसंख्यक कोई है ही नहीं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मोहन भागवतजी ने कई बार कहा है कि भारत में जन्म लेने वाला सभी हिंदू हैं. चाहे वे इसे मानते हों या नहीं, सांस्कृतिक, राष्ट्रीयता और डीएनए के तौर पर एक हैं.’’

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