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Monday, August 31, 2026

हमारी संस्कृति ने सदैव समाज को जोड़ने और समरसता स्थापित करने का मार्ग दिखाया है — अनिल जी

गाजीपुर। रक्षाबंधन उत्सव के उपलक्ष्य में गाजीपुर में आयोजित रक्षाबन्धन उत्सव को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने कहा कि भारत त्योहारों का देश है और यह हम सभी सनातनियों का सौभाग्य है कि हमारे पूर्वजों ने हमें एक विराट एवं समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा प्रदान की है। हमारी संस्कृति ने सदैव समाज को जोड़ने, समरसता स्थापित करने और संपूर्ण मानव समाज के कल्याण का मार्ग दिखाया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देशभर में सनातन संस्कृति के प्रति जागरण और आस्था का एक व्यापक प्रवाह दिखाई दे रहा है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह सनातन की व्यापक स्वीकार्यता का ही प्रभाव है कि कश्मीर में विपरीत विचारधारा के राजनीतिक लोग भी शिवलिंग पर जल अर्पित करती हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने सभी से इस सांस्कृतिक जागरण को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

अनिल जी ने कहा कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे आचरण और व्यवहार में भी दिखाई देनी चाहिए। हमें अपने व्यक्तिगत जीवन में समाज के प्रति समभाव रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को समान दृष्टि से देखने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने तीर्थराज प्रयाग में आयोजित महाकुंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि संगम स्नान के लिए किसी को व्यक्तिगत निमंत्रण नहीं दिया जाता। इसके बावजूद देश के कोने-कोने से करोड़ों श्रद्धालु स्वतः प्रयागराज पहुंचते हैं और बिना किसी जातिगत भेदभाव के संगम में स्नान करते हैं। यह हमारी सनातन संस्कृति की स्वाभाविक समरसता और एकात्म भाव का जीवंत उदाहरण है।

क्षेत्र प्रचारक जी ने कहा कि आज समाज में सनातन संस्कृति और उसकी परंपराओं के विरुद्ध विभिन्न प्रकार के विमर्श प्रस्तुत किए जा रहे हैं। ऐसे प्रयासों से समाज को सावधान रहने की आवश्यकता है। हमें अपने स्वविवेक का उपयोग करते हुए भ्रामक एवं विभाजनकारी विचारों से बचना चाहिए तथा सामाजिक एकजुटता के साथ अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवन-मूल्यों के संरक्षण का कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के संकल्प का पर्व नहीं है, बल्कि यह व्यापक सामाजिक एकता, परस्पर आत्मीयता, समरसता और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व है। समाज के प्रत्येक वर्ग के बीच आत्मीयता और एकता का भाव मजबूत करना ही रक्षाबंधन की वास्तविक भावना है।

कार्यक्रम में विभाग प्रचारक आदित्य जी, सह विभाग प्रचारक प्रेम प्रकाश जी, जिला प्रचारक प्रभात जी, मा0जिला संघचालक जयप्रकाश जी तथा नगर संघचालक सर्वजीत जी सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं मातृशक्ति उपस्थित रहे।



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