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Tuesday, June 13, 2023

स्वदेशी-स्वभाषा और स्वभूषा के अभियान के साथ स्व का अभिमान भी हो - रामकुमार वर्मा

प्रयागराज। राम बनकर सबरी के झूठे बेर खाना तथा केवट को गले लगाना होगा तब हिन्दू समाज मजबूत होगा। स्वदेशी, स्वभाषा स्वभूषा के अभियान के साथ-साथ स्व का अभिमान भी होना चाहिए। नागरिक शिष्टाचार किसी राष्ट्र की मजबूती के लिए आवश्यक है तभी समान नागरिक संहिता लागू हो सकेगी। इसके अनुपालन से अखंड भारत का सपना साकार हो‌ सकेगा। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के मा.सह क्षेत्र संघचालक रामकुमार वर्मा जी ने कही। वे सोमवार को सायंकाल गौहनिया स्थित वात्सल्य परिसर में 20 दिवसीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष (सामान्य) के समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में प्रशिक्षणार्थियों एवं नागरिकों को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने आगे कहा कि देश में बढ़ रहे ईसाई मतान्तरणरण, लव जिहाद, पश्चिमी संस्कृति के बढ़ते प्रयोग, स्व भाषा के प्रति सम्मान की कमी, लिव इन रिलेशन, समलैंगिकता जैसी गतिविधियों से देश कमजोर हो रहा है। समय रहते देशवासियों को जागरूक होकर इसका प्रतिकार करना होगा।

देश में चल रहें राष्ट्र और समाज विरोधी गतिविधियों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि देश के भीतर की कुछ शक्तियां गजवा ए हिंद जैसे अभियान को चोरी-छिपे अपना समर्थन दे रही है। इससे सावधान रहने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान प्रबल राष्ट्र भाव के जागरण से ही संभव है। राष्ट्र भाव का यदि जागरण हो गया तो इस राष्ट्र को कोई मिटा नहीं सकता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रबलराष्ट्र  जागरण के कार्य में ही निरंतर लगा हुआ है। देश के भीतर की कुछ शक्तियां गजवा ए हिंद को चोरी छुपे समर्थन देकर इस राष्ट्र को कमजोर करने का षड्यंत्र कर रही हैं| देशवासियों को इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।

उपस्थित जन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अमृत महोत्सव के दौरान पूरे देश भर में संघ ने  राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले ऐसी वीर सपूतों की देशवासियों को याद दिलाई जिन्हें इतिहास के पन्नों में स्थान नहीं मिल सका था। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्यारोहण की 350 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में तथा महर्षि दयानंद की 200वी जयंती पर वर्ष भर संपूर्ण देश में राष्ट्रीयता एवं सांस्कृतिक नवजागरण का अभियान चलेगा, इसी से राष्ट्र के नवोत्थान का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र का भावात्मक स्वरूप ही राष्ट्रभाव कहा जाता है। यह सनातन सांस्कृतिक हिन्दू राष्ट्र है। यहां राष्ट्रपिता की कल्पना कठिन है। सामाजिक समरसता, पर्यावरण के प्रति जागरूकता, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी भाव के जागरण तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति पूर्ण समर्पण जैसे उपायों से इस राष्ट्र को सशक्त एवं सुदृढ़ किया जा सकता है। संघ के स्वयंसेवकों को इन उपायों का अवलंबन करना होगा। इसी से नष्ट होती मर्यादाओं को बचाया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी  संस्थान के निदेशक प्रो. केशर मुकुल शरद सुदावणे ने कहा कि संघ राष्ट्र को सर्वोपरि समझता है। आपने जीवन की शिक्षा प्राप्त की है। इसके लिए आप सभी को बधाई।  नागपुर की पवित्र भूमि मेरा गृह जनपद है। वर्ग में आकर मैं अपने आप को सौभाग्यशाली समझ रहा हूं।

मंच पर मा.प्रांत संघचालक डॉ. विश्वनाथ लाल निगम, वर्ग अधिकारी सीताराम केसरी, मा.विभाग संघचालक प्रो. के. पी. सिंह की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

इससे पहले परम पवित्र भगवा ध्वज का ध्वजारोहण हुआ और सामूहिक संघ प्रार्थना के साथ अनुशासनबद्ध स्वागत प्रणाम हुआ। वर्ग में पिछले 23 मई से शिक्षण प्राप्त कर रहे| गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से प्रत्युत्प्रचलनम, प्रदक्षिणा संचलन, सामूहिक समता, दण्ड, दण्डयोग, दंड प्रहार पदविन्यास नियुद्ध, योग आदि का समवेत आकर्षक प्रदर्शन किया।

वर्ग गीत के बाद अतिथि परिचय एवं वर्ग व्रृत्त वर्ग कार्यवाह घनश्याम जी ने प्रस्तुत किया। आभार ज्ञापन वर्ग व्यवस्था प्रमुख राकेश सेंगर अमृत वचन मधुरम एवं आशुतोष जी तथा एकल गीत चंद्रभूषण  ने प्रस्तुत किया।

ध्वजावतरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में गंगा समग्र के रामाशीष जी, मा. सहप्रांत संघचालक अंगराज जी, सहप्रांत कार्यवाह प्रो. राजबिहारी, प्रांत प्रचारक रमेश जी, सह प्रांत प्रचारक मुनीश जी, प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख संतोष कुमार, सह विभाग प्रचारक प्रयागराज नितिन जी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।



Sunday, June 11, 2023

भारत शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विकसित हो रहा – दत्तात्रेय होसबाले जी

सुलतानपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारत शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विकसित हो रहा है. जिसे रोकने के लिए तमाम विरोधी शक्तियां सामने आ रही हैं. यह वह शक्तियां हैं, जिन्हें उजाला पसंद नहीं है.

सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, विवेकानन्दनगर, सुलतानपुर के परिसर में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष (सामान्य व विशेष) के समापन अवसर पर सरकार्यवाह जी ने कहा कि देश की नवीन पीढ़ी को अपने देश के इतिहास, संस्कृति और विरासत से परिचित कराने की भी आवश्यकता है. जिससे प्रेरणा लेकर वह व्यक्तित्व निर्माण में योगदान दे सकें. भारत की इस मिट्टी में जन्मे सभी संत संप्रदाय के लोगों, सभी साधु संतों ने यही कहा है कि मनुष्य ठीक होना चाहिए.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सपना है कि देशभक्ति से ओतप्रोत समाज के लोग भारत के आध्यात्मिक चिंतन, जीवन मूल्यों की संस्कृति के आधार पर व्यक्तित्व निर्माण करें. कोई भी राष्ट्र कितने भी प्राकृतिक संसाधन से संपन्न हो, उनका प्राचीन इतिहास कितना भी भव्य हो, वहां के समाज में रहने वाले व्यक्ति में सेवाभाव नहीं है तो वह उन्नति नहीं कर सकता है. इसलिए एक-एक व्यक्ति के अंदर जीवन के उद्देश्य को लेकर अपने जीवन के आचरण, व्यवहार में उन मूल्यों को कैसे उतारना चाहिए, यह व्यक्ति निर्माण का कार्य संघ ने अपने हाथ में लिया है.

सरकार्यवाह जी ने कहा कि संघ ने समाज को संगठित करने का कार्य लिया है. समाज के अन्दर एक पुरुषार्थ, एक आत्मविश्वास को जागृत करने का कार्य संघ कर रहा है. अपना समाज हजारों वर्षों तक संघर्षरत रहा. दुनिया भर के आततायियों ने हमारी संस्कृतियों को नष्ट करने के प्रयत्न किये, लेकिन हमारा समाज सभी आततायियों से संघर्ष करने के पश्चात भी जीवित रहा, क्योंकि हमारा समाज पुरुषार्थी है. हमारा समाज भारत के जीवन मूल्यों के आधार पर आज भी जीवित है. हमारे समाज में समय-समय पर ऐसे महापुरुष अवतरित हुए, जिन्होंने समाज में व्याप्त कमियों को, दुर्बलताओं को, समस्याओं को दूर करने का प्रयत्न किया, समाज को दिशा दी, मार्गदर्शन दिया. संघ भी समाज परिवर्तन और व्यक्ति निर्माण के उद्देश्य से ऐसा ही कार्य कर रहा है.

उन्होंने अमृत महोत्सव की चर्चा करते हुए कहा कि भारत ने इस बार अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाया है. भारत के लोगों में यह विश्वास जागृत हुआ है कि हम अपनी समस्याओं, चुनौतियों का डटकर सामना कर सकते हैं. वैश्विक महामारी कोरोना काल में आत्मनिर्भर भारत का निर्माण हुआ. दुनिया के सामने भारत ने एक उदाहरण स्थापित किया. भारत के वैज्ञानिकों ने इस महामारी से लड़ने के लिए वैक्सीन बनाई तो दुनिया की पीड़ा का एहसास करते हुए हमारे राष्ट्र ने सहयोग की भावना से विश्व भर को वैक्सीन दी. उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज के कुटुम्ब को तोड़ने का कुत्सित प्रयास चल रहा है. लेकिन हमारा हिन्दू समाज अब जागृत हो रहा है. वैचारिक संघर्ष की यह लड़ाई एक समाज की रक्षा का विषय है. इसलिए हिन्दू समाज को जागृत होना पड़ेगा.

उन्होंने इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने पर कहा कि शिवाजी महाराज ने हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की तो इतिहास में यह बताया जाने लगा कि उन्होंने मराठा राज्य की स्थापना की है. जबकि शिवाजी ने एक बार भी मराठा राज्य नहीं कहा, बल्कि हिन्दू सम्राज्य का नाम दिया.

कार्यक्रम के अध्यक्ष सुलतानपुर गुरुद्वारा श्री गुरूसिंह सभा के महासचिव सरदार सुदीप पाल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाला सबसे बड़ा संगठन है या देश दुनिया के लोगों में राष्ट्र की भावना से ओतप्रोत कार्यक्रमों को नियमित रूप से चलाता रहता है.

इससे पूर्व 21 मई से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षार्थियों ने सामूहिक रूप से प्रत्युत्प्रचलनम् प्रदक्षिणा संचलन, सामूहिक समता, दण्ड, दण्डयोग, व्यायाम योग, पद विन्यास, आसन, यष्टि की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम में क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, प्रान्त प्रचारक रमेश जी, क्षेत्र कार्यवाह डॉ. वीरेंद्र जायसवाल, प्रान्त संघ चालक डॉक्टर निगम जी, गंगा समग्र के राष्ट्रीय मंत्री रामाशीष, क्षेत्र संघचालक वीरेंद्र पराक्रमादित्य, सर्वाधिकारी पृथ्वीराज सिंह विभाग संघचालक रामशंकर मिश्र रहे.




Friday, June 9, 2023

संघ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासन के साथ निकाला पथ संचलन

काशी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत द्वारा आयोजित संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष सामान्य के प्रशिक्षण शिविर में आज प्रशिक्षण ग्रहण कर रहे 308 स्वयंसेवकों द्वारा एस एस पब्लिक स्कूल, बाबतपुर से पथ संचलन प्रारम्भ हुआ l

    यह पथ संचलन प्रशिक्षण स्थल से निकलकर बाबतपुर एयरपोर्ट मार्ग से होता हुआ पुनः एसएस पब्लिक स्कूल आकर पूरा हुआ संचलन में स्वयंसेवकों के दल के साथ घोष दल भी पूर्ण गणवेश में उपस्थित रहा l घोष दल द्वारा यात्रा मार्ग में संघ द्वारा तैयार विभिन्न वाद्य रचनाएं बजाई जा रही थी जिन पर स्वयंसेवक एक साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे l

    इस प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन 26 मई को हुआ था एवं समापन 15 जून को होगाl संघ द्वारा प्रत्येक वर्ष संघ शिक्षा वर्ग आयोजित किया जाता है जिसमें स्वयंसेवकों को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक जीवन जीने का कौशल, व्यक्ति  निर्माण आदि का  कठोर प्रशिक्षण दिया जाता है l

    सह प्रांत कार्यवाह राकेश जी ने बताया कि पथ संचलन ऋग्वेद में उल्लेखित मंत्र संगच्छध्वम संवदध्वं का व्यवहारिक रूप है, अर्थात सभी स्वयंसेवक मन में यह भाव रखते हैं कि हम सभी साथ-साथ चलें, साथ-साथ बोलें और हमारे मन एक साथ कार्य करें l

    पथ संचलन का नेतृत्व मुख्य शिक्षक प्रवेश एवं सह मुख्य शिक्षक रजत ने किया। घोष दल का नेतृत्व प्रांत घोष प्रमुख राममिलन कर रहे थे जबकि वर्ग अधिकारी पुनीत लाल ने संचालन का निरीक्षण किया l

 संचलन के आगे-आगे सुसज्जित वाहन पर डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी, माधव राव जी (गुरुजी) एवं भारत माता के चित्र लगे थे l पथ संचलन में वर्ग कार्यवाह सच्चिदानंद, वर्ग पालक रामचंद्र, शारीरिक प्रमुख प्रत्योष सहित बड़ी संख्या में संघ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे l 


Wednesday, June 7, 2023

संगमनेर में हिन्दू समाज का भगवा मार्च

संगमनेर. लव जिहाद सहित क्षेत्र में हिन्दुओं के खिलाफ अन्य घटनाओं को लेकर संगमनेर (जिला अहमदनगर) में हिन्दू समाज ने एकता का प्रदर्शन किया. मंगलवार सुबह संगमनेर में अभूतपूर्व भव्य भगवा मार्च निकाला, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए. साथ ही संगमनेर शहर और तहसील में पूर्ण बंद रखा गया. आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अन्य व्यवसाय और विभिन्न प्रतिष्ठान बंद रहे.

यह भव्य भगवा मार्च मंगलवार सुबह नगर परिषद के सामने से शुरू हुआ. उपस्थित जनता ने छत्रपति शिवाजी महाराज की जय के नारे लगाए. सभी क्षेत्रों और समाज के सभी वर्गों ने मार्च में भाग लिया.

पिछले सप्ताह संगमनेर तहसील के जोर्वे गांव में आठ हिन्दू युवकों पर मुस्लिम दबंगों ने धारदार हथियार हमला किया था, जिसके बाद से समाज में रोष बढ़ रहा था. इस कारण मंगलवार को संगमनेर में मार्च आयोजित किया गया. मार्च में संगमनेर के ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी शामिल हुए. साथ ही नागरिकों के स्वतःस्फूर्त बंद को भी आवश्यक सेवाओं को छोड़कर 100% प्रतिसाद मिला.

नए अहमदनगर रोड पर प्रांताधिकारी कार्यालय पर मार्च के पहुंचा, यहां सभा में वक्ताओं ने संबोधित किया. वक्ता सुरेश चव्हाण ने कहा कि संगमनेर, श्रीरामपुर और बीड लव जिहाद के प्रमुख केंद्र बन रहे हैं. लव जिहाद की घटनों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने के आवश्यकता है. आप चाहे किसी भी पार्टी में हों, किसी भी वर्ग से हों, लेकिन हिन्दू के रूप में एकजुट रहें. संगमनेर में लव जिहाद के साथ-साथ धर्मांतरण की घटनाएं भी सामने आ रही हैं. उन्होंने कहा कि अनाधिकृत बूचड़खानों को बंद करना चाहिए, गोहत्या को गैर इरादतन हत्या का अपराध बनाने के लिए एक कानून लाना चाहिए. कानून व्यवस्था के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. इसमें एसआरपी, दंगा नियंत्रण दस्ता आदि सहित विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारी व कर्मचारी शामिल थे. इसके अलावा कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी नजर रखे हुए थे.

मार्च के बाद समनापुर में पथरावदो घायलवाहन क्षतिग्रस्त

शहर में शांतिपूर्वक भगवा मार्च निकाले जाने के बाद संगमनेर के समीप समनापुर गांव में पथराव की घटना हुई. जिसमें चार पहिया और दो पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए. प्राथमिक जानकारी के अनुसार, घटना में दो लोग घायल हुए हैं. अहमदनगर के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में किया. मार्च समाप्त होने के बाद कुछ लोग नारे लगाते हुए संगमनेर से अपने गांव लौट रहे थे. इसी दौरान उन पर स्थानीय अराजक तत्वों ने पथराव किया. पथराव में दो लोग घायल हुए, जिन्हें उपचार के लिए स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस अधीक्षक राकेश ओला ने पत्रकारों को बताया कि घटनास्थल पर शांति है और संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा.





Saturday, June 3, 2023

काशी में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव

हिन्दू साम्राज्य स्थापित करने के साथ भारतवासियों में 

स्वत्व जागरण के लिए संकल्पित थे शिवाजी

 

काशी| काशी में शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव मनाया गया। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हिन्दवी स्वराज्य या हिन्दू साम्राज्य की स्थापना इतिहास का प्रसंग अद्भुत है जिसके उदाहरण दुनियाँ में बहुत कम देखने को मिलते हैं। शिवाजी महाराज का संकल्प केवल हिन्दू साम्राज्य स्थापित करना भर नहीं था अपितु संपूर्ण भारतवासियों को स्वत्व जागरण का संदेश देना था इसलिए इसका नाम हिन्दवी स्वराज्य" रखा गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रांत के एस एस पब्लिक स्कूल बाबतपुर में चल रहे संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष (सामान्य) के २० दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता आई. आई. एम. सी. के डॉ. राकेश उपाध्याय ने कहा कि शिवाजी ने हिंदू साम्राज्य की स्थापना उस समय की जब जनसामान्य के मध्य में दिल्लीश्वरो वा जगदीशश्वरो वा " का भाव भरा हुआ था जिसका अर्थ है जो दिल्ली का राजा है वही परमेश्वर है और उस समय दिल्ली में मुगलों का आधिपत्य था।

काशी, मथुरा, अयोध्या में हिंदू संस्कृति पर जैसे झाडू लग गई थी मगर उस आंधी को मात देकर शिवाजी महाराज जैसे सूर्य का उदय हुआ। शिवाजी के राज्यारोहण के पूर्व कभी लगता ही नहीं था कि हिंदू संस्कृति सभ्यता का सूर्य दोबारा इस धरा पर उदित होगा। वक्ता ने आगे बताया कि १६४६ से १६५४ तक के मध्य में ४० से अधिक किलो से मुगलिया झंडा हटा कर भगवा ध्वज स्थापित कर दिया गया था। शिवाजी कुशल रणनीतिकार थे। उन्होंने ५०००० की फौज लेकर आए अफजल खान को बाघ नख से उसकी चालाकी को मात देते हुए उसका वध कर दिया। शिवाजी के बार-बार विजयी होने का कारण यह भी था कि शिवाजी ने देशभक्तों की एक लंबी सेना तैयार की थी जिसमें जीवाजी, बाजीराव देशपांडे, तानाजी मालसुरे आदि अनेक ऐसे नाम हैं। वक्ता ने बताया कि वाराणसी से शिवाजी का विशेष संबंध है क्योंकि यहीं के विद्वान वेद पंडित गागा भट्ट जी ने शिवाजी का राज्याभिषेक करवाया था। शिवाजी गुरिल्ला युद्ध के जनक माने जाते हैं साथ ही भारत में नौसेना स्थापित करने का श्रेय भी शिवाजी को जाता है।

मंच पर वर्ग के वर्गाधिकारी श्रीमान पुनीत लाल जी उपस्थित थे। एसएस पब्लिक स्कूल के निदेशक प्रबोध नारायण सिंह जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया एवं शिवाजी और भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन किया गया। इस अवसर पर प्रांत प्रचारक प्रमुख रामचंद्र, प्रांत प्रचारक रमेश, सह प्रांत कार्यवाह राकेश, गौरीशंकर सच्चिदानंद संतोष प्रतोष प्रवेश सहित बड़ी संख्या में संघ के अधिकारी एवं वर्ग में शिक्षा प्राप्त कर रहे शिक्षार्थी उपस्थित थे। संचालन वर्ग के सह वर्ग कार्यवाह सुरेंद्र ने किया।

कमच्छा विनायका स्थित कामाख्या नगर के शंकराचार्य शाखा पर आयोजित हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव में मुख्य वक्ता उ.प्र. माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के पूर्व सदस्य डॉ. हरेंद्र राय ने कहा कि बाल्यकाल से माता जीजा बाई द्वारा सुनाई गई छोटी छोटी कहानियां और संस्कार देने के उपायों ने ही छत्रपति शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व गढ़ा था। उन्होंने कहा कि पिता के निर्देश के बावजूद कम आयु में भी शिवाजी ने आदिल शाह के सामने सर झुकाने से मना कर दिया था, जो दिखाता है कि किसी बालक पर पिता से अधिक मां के दिए संस्कार का प्रभाव होता है। उन्होंने बताया कि युवा शिवा को माता जीजाबाई के बाद समर्थ गुरु रामदास का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ, जिससे उनके कार्यशैली में धैर्य के अद्भुत गुण का समावेश हुआ। उन्होंने आगे कहा कि सन 1925 में स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी छत्रपति शिवाजी की कार्यशैली से धैर्य पूर्वक व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के रास्ते पर चल रहा है। कार्यक्रम में मा. नगर संघचालक श्री विजय जायसवाल, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री प्रदीप कुमार चौरसिया, ग्राहक पंचायत वाराणसी के उपाध्यक्ष श्री राजेश डोगरा, सह भाग शारीरिक प्रमुख राजकिशोर जी आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाज सेवी श्री अरविंद त्रिपाठी ने किया। संचालन बृजेश जी ने किया।

लंका स्थित माधव मार्केट के केदारेश्वर नगर में आयोजित हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव पर मुख्य वक्ता रामसुचित पाण्डेय ने कहा कि शिवाजी एक न्यायप्रिय, सबका हित करने वाले लोकप्रिय शासक थे। जीवन के साथ जीवन यापन करने वाले स्वातंत्र्य प्रिय, साहसी मावले युवको की एक सुन्दर टोली शिवाजी के नेतृत्व में उनके लिए प्राण देने वाली सेना के रूप में एकत्रित हो गयी। उन्होंने साल्वेर की लड़ाई में विशाल मुगल सेना को हराया था। अध्यक्षता प्रख्यात चिकित्सक डॉ. सुनील जायसवाल ने किया। कार्यक्रम में वेंकट रमण घनपाठी, धर्मराज त्रिपाठी जी, डॉ. वैभव जायसवाल, राजेंद्र सक्सेना, सुनील किशोर, अभय सिंह, अजीत, सौरभ सिंह, शशि जी, केशव सेठ, संतोष उपाध्याय, सेवा प्रमुख राकेश यादव जी, संदीप आदि उपस्थित रहें। संचालन डॉ. रजनीश ने किया।

अन्य स्थानों पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज पूरे भारत में स्वत्व स्वाभिमान आत्मनिर्भर समाज की रचना करना चाहते थे। अपने इस संकल्प को आकार देने के लिये ही आक्रमणकारी सत्ताओं के हिन्दवी स्वराज्य की नींव रखी गई थी। वह ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष त्रयोदशी विक्रम संवत् १७३१ ( ईस्वी सन १६७४ ) की तिि जब दक्षिण भारत के रायगढ़ किले में हिन्दवी स्वराज्य हिन्दू पदपादशाही की नींव रखी गई थी। इसी दिन शिवाजी मह का राज्याभिषेक हुआ था। शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक उत्सव पूरे दस दिन चला था। यह आयोजन शिवाजी मह की माता जीजा बाई और समर्थ स्वामी रामदास जी के निर्देशन में हुआ था। इसलिए यह केवल राज्याभिषेक आयोजन न था। अपितु इसे संपूर्ण भारत राष्ट्र के स्वाभिमान और स्वत्व जागरण के उत्सव का स्वरूप प्रदान किया था। वक्ता आगे कहा कि वह कालखंड साधारण नहीं था। वह मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा भारत में हिन्दूत्व के दमन अि का दौर था। औरंगजेब ने १६६५ में सभी साँस्कृतिक प्रतिष्ठानों और मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश निकाला था। भय और लालच से मतान्तरण का अभियान चलाया जा रहा था। भारत के मूल निवासियों के समक्ष अपनी ही मातृभूमि प्राण बचाने और पेट भरने का संकट सामने था। उन विषम और विपरीत परिस्थितियों में शिवाजी महाराज ने स्वत्व स्वाभिमान जागरण अभियान आरंभ किया वह भी अपने चारों ओर आक्रमणकारी सत्ताओं के भीषण दबाव के बीच उनकी संकल्पशक्ति थी कि उन्होंने पूरे भारत को दासत्व से मुक्ति का मार्ग दिखाया ।

इन स्थानों पर हुए कार्यक्रम

काशी दक्षिण भाग में केदारेश्वर नगर में 3 विवेकानंद नगर में 2 रामनगर में 4 कर्दमेश्वर में 2, मात नगर में 4. कामाख्या में 3 हनुमान नगर में 3, संत रविदास नगर में 3, शूलटकेश्वर 2. मानस नगर में 6 माह 4. केशव नगर में 4 विश्वकर्मा में 3, कबीर नगर में 2, शिवधाम नगर में 2 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए।





Friday, June 2, 2023

देश की अखंडता बनाए रखना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग समापन समारोह में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि देश की स्वाधीनता के 75 साल पूरे हो गए हैं. इसके माध्यम से हजारों अनुकरणीय चरित्र हमारे सामने आए और हमारी स्मृतियों को जाग्रत किया. देश के प्रति गौरव और स्वाभिमान भी जाग्रत हुआ. पूरी दुनिया में हमारे देश का गौरव हो रहा है. कोरोना, आर्थिक संकट में भारत ने बेहतर कार्य किया. हमारे देश की तरक्की देखकर दुनिया अचंभित है. भारत को जी-20 की अध्यक्षता मिली. नए संसद भवन का उद्घाटन किया गया. दुनिया ने वहां की तस्वीर और वहां का समग्र माहौल देखा. जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसकी वास्तव में हमारे देश को आवश्यकता थी. भारत प्रगति कर रहा है, कई आंतरिक मामलों में सुधार कर रहा है. तो आम लोग इससे खुश नजर आ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में आंतरिक विवाद भी हैं. आपस में भाषा, पंथ, रिवाज को लेकर विवाद हैं. हम दुश्मन को अपनी ताकत दिखाने की जगह आपस में लड़ रहे हैं. हम भूल रहे हैं कि हम एक देश हैं. हमारे देश में चल रहे आंतरिक कलह को प्रोत्साहित करने वाले कई लोग हैं. राजनीति में विभिन्न दल होते हैं और उनमें सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा भी होती है. उन्हें एक दूसरे की आलोचना करनी चाहिए. लेकिन कम से कम विवेक तो होना चाहिए कि लोगों में कलह न हो और देश का नाम खराब न हो. देश की अखंडता को बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है. एक-दूसरे पर दोषारोपण करने से कुछ हासिल नहीं होगा.

मध्य युग में हमारे मन में जाति और संप्रदाय के आधार पर भेदभाव पैदा हुआ. लेकिन बाहर से आए लोग अब अपने हो गए हैं. उन्हें बाहरी लोगों से संबंध भूलकर इस देश में रहना चाहिए. हमें भी उन्हें अपना मानना चाहिए और गलत होने पर उन्हें समझाना चाहिए. अन्यथा ऐसे भेद गंभीर क्षति का कारण बन सकते हैं. कुछ बाहरी लोग अपने स्वार्थ के लिए भारत में कलह पैदा करने का प्रयास करते हैं. उन्हें मौका मिलता है और विवाद को बढ़ाने के लिए दुष्चक्र बनाते हैं. सही स्थिति को जानकर, अतीत और वर्तमान की स्थिति को समझ कर सभी को मिलकर काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि अहंकार, मतभेद के कारण हमने अतीत का बोझ अपने मन पर डाल रखा है. सारा भारत हमारी मातृभूमि है. इसमें सामंजस्य से किसी की पहचान नहीं मिटेगी. भारत में हर कोई एक विशिष्ट पहचान के साथ सुरक्षित है. भारत के बाहर ऐसी कोई तस्वीर नहीं है. अगर एक निश्चित पहचान हो तो नागरिकों का जीना मुश्किल हो जाता है.

मुसलमानों ने स्पेन, मंगोलिया पर आक्रमण किया. वहां के लोग जागे और वहां बदलाव लाए. लेकिन  हमारे देश में इस्लाम की उपासना सुरक्षित रूप से की जा सकती है. सहजीवन सदियों से चल रहा है. हमें इस बात को स्वीकार कर लेना चाहिए कि हमारे पूर्वज इस देश के पूर्वज हैं. विविधता हमारे लिए संघर्ष का कारण नहीं है. लेकिन हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं. पहले हम खुद को भूल जाते हैं और फिर बाहरी लोगों के हमलों का शिकार हो जाते हैं.

जाति भेद के कारण हमारे देश में अन्याय हुआ है. हम अतीत को नहीं बदल सकते. अपनी छोटी सी पहचान खोने के भ्रम में देश की एकता को क्यों नज़रअंदाज किया जा रहा है. हम विविधता का उत्सव मनाते हैं. जिन्हें दुनिया में कहीं भी शरण नहीं मिलती, उन्हें भारत में सुरक्षित स्थान मिल जाता है. हम भारत के प्रति भावुक भक्ति रखते हुए विविधता के साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं. स्व के आधार पर जीवन का पुनर्गठन करना है. क्षुद्र कारणों से आपस में लड़ना अनुचित है.

उन्होंने कहा कि दुनिया भारत से एक नई दिशा की उम्मीद कर रही है. हमारे पास वह क्षमता है. हम अभी तक पूरी तरह से उस दिशा को नहीं समझ पाए हैं, जिसकी इस संभावना को जरूरत है. उसके लिए दृष्टि जगानी पड़ती है. हम सब बाहर से अलग दिखते हैं, लेकिन अंदर से हम सब एक हैं. भारत हमारी मातृभूमि है और वही एकता की प्रेरणा है.

समस्या के समाधान का तरीका है, भावनाओं में विश्वास और आपसी विश्वास. एकतरफा संवाद से अंतरंगता नहीं बढ़ सकती. देश के लिए सभी को कुछ न कुछ कुर्बानी देनी होगी. इसकी आदत पड़ती है. इस प्रक्रिया को संस्कार कहा जाता है. यह काम सभी को मिलकर करना चाहिए. पिछले सौ सालों में जिन देशों ने तरक्की की और धराशायी हुए, उनमें आम लोगों की भूमिका का अध्ययन करें. राष्ट्रहित के लिए जब जनता साथ आई तो वे देश प्रगति के शिखर पर पहुंचे.

सरसंघचालक जी ने कहा कि शिवाजी महाराज ने राष्ट्र की स्वतंत्रता की घोषणा की थी और हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की थी. शिव राय ने पुराने मूल्यों को जगाया. गोहत्या बन्द कर मातृभाषा में व्यापार करने लगे. नौसेना की स्थापना हुई. उन्होंने जनता को एकजुट किया. उन्होंने उन लोगों की रक्षा की जो देश के प्रति वफादार थे. कल देश शिव राय के गौरवशाली कार्य को याद रखेगा. एक सामान्य व्यक्ति आदर्शों को रखना चाहता है. स्वयंसेवकों को हनुमान और छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुसरण करना चाहिए. संघ को कुछ नहीं चाहिए और न ही संघ किसी चिज का श्रेय लेना चाहता है. समाज स्वयंसेवकों के साथ काम कर रहा है और अच्छी चीजें हो रही हैं.

प. पू. अदृश्य काडसिद्धेश्वर स्वामीजी

स्वामी जी ने कहा कि संघ के पिछले कई वर्षों के कार्यों से समाज प्रभावित हुआ है. जनसंख्या की दृष्टि से भारत विश्व का सबसे बड़ा देश है. हमारे देश के पड़ोस में दोस्तों से ज्यादा दुश्मन हैं. लेकिन हमारा सबके साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार है. फिर भी हमारे देश पर कई बार हमले हुए.

हमारे देश की प्राचीन परंपरा रही है. देश के कई राजा और प्रशासक दुनिया के लिए रोल मॉडल बने हैं. उन्होंने भारतीय संस्कृति और सभ्यता की शिक्षाओं को विश्व में फैलाया. दुनिया के कई लोगों ने हमारी सांस्कृतिक परंपराओं का पालन किया. लेकिन हमारे लोग इसे कुछ हद तक भूल गए हैं. समाज को अपनी भूली-बिसरी परंपराओं को याद दिलाने की जरूरत है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस दिशा में काम कर रहा है और देश को वैश्विक नेता के रूप में फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रहा है.

हमारा देश युवाओं का देश है. जनसंख्या देश के लिए समस्या नहीं है. अपनी परंपरा और गौरवशाली संस्कृति को भूलना एक बड़ी समस्या है. संघ अनुशासन, सेवा और समर्पण, हिन्दुत्व, राष्ट्रीयता, ज्ञान, सज्जनता, सकारात्मकता, समरसता का प्रतीक है.

मैं संघ का स्वयंसेवक नहीं हूं. लेकिन मैं संघ का प्रशंसक हूं. संघ मूल्यों को युवाओं में बिठाना चाहिए. केवल शस्त्र से देश की रक्षा नहीं होती. समाज को सुरक्षित रखने के लिए संस्कार, ज्ञान, सामान्य ज्ञान, समझ की जरूरत है. संघ इन मूल्यों की दिशा में काम कर रहा है.

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में कुछ गुण छिपे होते हैं. उन गुणों को खोजना होगा. संघ शिक्षा वर्ग इन गुणों को प्रकट करने वाला मंथन है. मुझे भी तीन दिनों में बहुत अच्छा अनुभव हुआ. मुझे भी सीखने को मिला और मेरा नागपुर में आना सार्थक रहा.

बच्चे शाखा में जाकर अवश्य ही सही दिशा में जाएंगे. यदि बच्चों को सुरक्षित रखना है तो उन्हें संघ की शाखाओं में भेजा जाना चाहिए. उसी से बच्चे देशभक्त, समाज चिंतक, स्वावलंबी बनेंगे.

देश के संतों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ना चाहिए. कीर्तन प्रवचन के बाद शेष समय संघकार्य करते हुए व्यतीत करना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो धर्म के साथ-साथ राष्ट्र की भी उन्नति होगी.

संघ द्वारा समाज में सभी प्रकार के मुद्दों पर विचार किया जाता है. देश के लोगों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को भी यही संस्कार दें. विभिन्न लोग हमारे देश को नष्ट करने के लिए युवाओं को नशेड़ी बना रहे हैं. इसमें विदेशी तत्व भी शामिल हैं. संस्कारों के द्वारा ही इन्हें रोका जा सकता है.