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Wednesday, November 10, 2021

कर्नाटक – संतरे बेचने वाले हरेकला ने गांव में बनवाया स्कूल, पद्मश्री से सम्मानित

 नारंगी विक्रेता हरेकला हजब्बा ने हरेकला-न्यूपाडपु (Harekala-Newpadpu) गांव में एक स्कूल का निर्माण करवाकर ग्रामीण शिक्षा में क्रांति लाने का प्रयास किया. जिसके चलते उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किय़ा गया है.

65 वर्षीय हजब्बा द्वारा निर्मित स्कूल में गांव के 175 छात्रों का नामांकन है. पिछले 44 वर्षों से संतरा बेचने वाले हरेकला हजब्बा ने स्वयं औपचारिक शिक्षा नहीं ली है.

अपने गांव में सबसे वंचितों को भी शिक्षा उपलब्ध कराने का विचार उनके दिमाग में उस समय आया, जब वह एक विदेशी के साथ संवाद करने में विफल रहे, जिसने उनसे संतरे मांगे थे. पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित हजब्बा ने बताया, ” मैं विदेशी के साथ संवाद नहीं कर सका, मुझे बुरा लगा और मैंने गांव में एक स्कूल बनाने का फैसला किया. मैं केवल कन्नड़ जानता हूं, अंग्रेजी या हिंदी नहीं. इसलिए मैं उदास था कि मैं विदेशी की मदद नहीं कर सका.

परोपकारी कार्यों के कारण अक्षरा सांता (पत्र संत) की उपाधि अर्जित की. हजब्बा अभी भी सुबह जल्दी उठकर स्कूल परिसर में झाडू लगाते हैं. वह कैंपस को अपना घर मानकर छात्रों और शिक्षकों के लिए पीने का पानी उबालते हैं. उन्हें 2004 में कन्नड़ प्रभा द्वारा पर्सन ऑफ द ईयरऔर 2009 में सीएनएन-आईबीएन द्वारा रियल हीरोजपुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से सम्मानित किया.

हजब्बा ने मैंगलोर शहर से लगभग 35 किमी दूर हरेकला-न्यूपाडपु गांव में एक स्कूल का निर्माण किया है. वर्तमान में इस स्कूल में गांव के 175 वंचित छात्र हैं. हजब्बा 1977 से मैंगलोर बस डिपो पर संतरा बेच रहे हैं और उसने कभी किसी स्कूल में पढ़ाई नहीं की.

उन्होंने अपनी कमाई से जिस स्कूल का सपना देखा, बाद में सरकारी मदद और लोगों की सहायता से वह तैयार हुआ और उसे हजब्बा स्कूल के नाम से जाना जाने लगा.

28 छात्रों के साथ स्कूल शुरू हुआ था और अब कक्षा 10 तक 175 छात्र उनके द्वारा बनवाया गए स्कूल में पढ़ते हैं. पद्म पुरस्कार विजेता ने अपने गांव में और स्कूल और कॉलेज बनाने का लक्ष्य रखा है. उन्होंने बताया कि उन्होंने लोगों से पैसा लिया है और स्कूलों और कॉलेज के लिए जमीन खरीदने के लिए पुरस्कार राशि जमा की है. मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने गांव में एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज (कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए) का निर्माण करने का अनुरोध किया है.

Monday, November 8, 2021

नया पाकिस्तान – कोटरी में चोरों ने हिन्दू मंदिर को निशाना बनाया, चांदी के हार और नकदी ले उड़े

 

इमरान खान के नया पाकिस्तान में हिन्दुओं व उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों का क्रम निरंतर जारी है. नए घटनाक्रम में पाकिस्तान के कोटरी शहर में चोरों ने हिन्दू मंदिर को निशाना बनाकर वहां से गहने और नगदी चुरा ली. बुधवार को घटित घटना में चोरों ने तीन चांदी के हार और मंदिर की दानपेटी से 25 हजार रुपये की नकदी चुरा ली. हालांकि, पुलिस ने मंदिर के केयरटेकर भगवान दास की शिकायत पर केस दर्ज किया है, लेकिन पूर्व के अनुभवों को देखते हुए कार्रवाई की उम्मीद कम ही है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चोरों ने कोटरी में देवी मां मंदिर का ताला तोड़ा और भगवान की मूर्तियों के गले से चांदी के तीन हार और दान पेटी से करीब 25 हजार रुपये चुरा लिए. भगवान दास ने बताया कि चांदी के तीनों हारों का वजन 10 तोला था.

रिपोर्ट्स के अनुसार, जमशोरो SSP जावेद बलोच ने कहा कि मंदिर प्रबंधन को शक है कि पास के रहवासी इलाके से किसी ने मंदिर में लूट की.

सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ज्ञानचंद ईरानी ने SSP को FIR दाखिल करने और आरोपियों को पकड़ने का आदेश दिया है. उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन में हिन्दू समुदाय दीवाली का त्यौहार मनाने जा रहा है, ऐसे समय में इस तरह की घटना बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

दो महीने पहले जन्माष्टमी के अवसर पर भी सिंध प्रांत के संघार जिले के खिर्पो में मंदिर में तोड़फोड़ की घटना हुई थी. इसमें रखी मूर्तियों को तोड़ दिया गया और वहां मौजूद हिन्दुओं से मारपीट और बदसलूकी की गई. सिंध में हुई घटना की जानकारी पाकिस्तान के ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट राहत आस्टिन ने सोशल मीडिया पर दी थी. उन्होंने लिखा था-  मंदिर पर हमला इसलिए किया गया क्योंकि यहां हिन्दू समुदाय धूमधाम से भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाने जुटे थे.

बांग्लादेश में भी मंदिरों पर हुए थे हमले

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा (नवरात्रि) के दौरान कई क्षेत्रों में पूजा पंडालों और मंदिरों में तोड़फोड़ की गई थी. इसके बाद हिंसा ने भयावह रूप ले लिया था. चिट्टगांव के कोमिला में दुर्गा पंडालों पर हुए हमलों में 4 लोगों की मौत हो गई थी. सोशल मीडिया पर अफवाह के बाद कई जगहों पर हिंसक घटनाएं हुईं. चांदपुर, चिट्‌टागांव, गाजीपुर, बंदरबन, चपाई नवाबगंज और मौलवी बाजार में पूजा पंडालों में तोड़फोड़ की गई.

नोआखाली में इस्कॉन मंदिर में तोड़फोड़ की. 200 लोगों की भीड़ ने इस्कॉन के एक सदस्य पार्थो दास को बेरहमी से मार डाला, जिनका शव मंदिर के पास वाले तालाब में मिला. बेगमगंज में जतन कुमार साहा नाम के एक शख्स को मार डाला गया, जबकि 17 लोग घायल हुए थे.

Saturday, November 6, 2021

महिलाओं ने मातृभूमि के लिए निरंतर संघर्ष किया है- शशि बघेल

वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई जयंती (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) पर काशी में आयोजित कार्यक्रम 

 

काशी| प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना माहारानी लक्ष्मीबाई का 186वां जन्मोत्सव अस्सी स्थित श्री गोयनका संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्र सेविका समिति की क्षेत्र प्रचारिका पूर्वी उत्तर प्रदेश सुश्री शशि बघेल जी ने कहा कि भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित करने वाली झांसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं। महारानी लक्ष्मीबाई सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारम्भ महारानी लक्ष्मीबाई की तस्वीर पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया गया। पाणीनी कन्या महाविद्यालय की छात्राओं ने मंगला चरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का नेतृत्व महारानी लक्ष्मीबाई के रूप में संत अतुलानन्द कान्वेंट स्कूल की कक्षा 8 की छात्रा आस्था राय ने किया। 




 

राष्ट्र सेविका समिति के साथ विभिन्न विद्यालयों की छात्राओं ने कार्यक्रम में भाग लिया। आदर्श शिक्षा मंदिर द्वारा गणेश वंदना प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में परिणी कन्या महा विद्यालय की छात्राओं ने नियुद्ध व भाला का प्रदर्शन, राष्ट्र सेविका समिति द्वारा योग, अतुलानंद कान्वेंट स्कूल द्वारा अमृत महोत्सव पर नाटक, हरिश्चन्द्र पीजी कॉलेज द्वारा कराटे व कन्या कुमारी विद्या मंदिर इंटर कॉलेज द्वारा सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किया गया। मुख्य वक्ता सुश्री बघेल जी ने आगे कहा कि भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित करने वाली झांसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं। स्वाधीनता से स्वतंत्रता का कालखंड बहुत बड़ा है जहाँ भारतीय समाज में नारियों ने निरंतर देश रक्षा के लिए संघर्ष किया है। आज हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं| उसके पीछे करोङो देशभक्तों का बलिदान है जिसे हमें कभी नही भूलना चाहिए। भारतीय समाज आत्म गौरव और इतिहास का साक्षी है। 


विशिष्ट अतिथि डॉ. नम्रता मिश्र ने कहा कि इतने गद्दारों के बावजूद भी हमारे देश मे शौर्य की कमी नही है| नारी शक्ति के बिना कोई कार्य पूरा नही हुआ है। कार्यक्रम में महारानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान से नौ नारी शक्तियों को सम्मानित किया गया, जिनमें सीए जमुना शुक्ला, चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर निरुपमा सिंह, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की चैयर पर्सन स्नेहा उपाध्याय, आर जे तृषा, नारायणपुर की मेडिकल ऑफिसर डॉ. शिल्पा शाह, भारती मिश्रा, आइडियल वुमेन में कार्यकारिणी बीना सिंह, आदर्श शिक्षा मंदिर की प्रियंका गुप्ता व भारतीय महिला शिक्षण संस्थान की उर्मिला मिश्रा को दिया गया। 

निबंध प्रतियोगिता में सरस्वती इंटर कॉलेज की प्रथम द्वितीय व तृतीय विजेता क्रमशः रोहिणी दुबे, राजनंदिनी व जान्हवी शुक्ला, कन्याकुमारी विद्या मंदिर की प्रथम द्वितीय व तृतीय छात्रा क्रमशः गुंजा प्रजापति, निशा पांडेय व भूमि शर्मा, संत अतुलानंद स्कूल की छात्राओं ने  प्रथम, द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ क्रमशः सृस्टि, प्रत्यक्षा पांडेय, नित्या विनय व शिवांगी ने प्राप्त किया| वही वल्लभ विद्यापीठ से प्रथम, द्वितीय व तृतीय क्रमशः शाम्भवी टंडन, गौरी प्रजापति व तम्मना यादव, परिणी कन्या विद्यालय से प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान क्रमशः क्षमा आर्या, श्रद्धा आर्या, सुमेधा आर्या,  व दिव्य श्री| आदर्श शिक्षा मंदिर की क्रमशः राधिका साहनी, पुष्पांजलि त्रिपाठी, शिवानी शुक्ला। दुर्गा बालिका व कृष्ण मोहिनि विद्यालय से क्रमशः मुस्कान चौबे, श्रद्धा गुप्ता, सोनी राजभर, खुशी जायसवाल, अभिलाषा सरोज, विभा कुमारी, वैभवी गुप्ता, नैंसी गुप्ता, स्वतंत्त्र कुमार, दीपाली तिवारी, अमिता यादव आँचल उपाध्याय, ज्योति कुमार व सुधांशु श्रीवास्तव को वितरित किया गया।




     आयोजन में लक्ष्मीबाई न्यास के संस्थापक मंत्री एडवोकेट राजेन्द्र प्रताप पांडेय, लक्ष्मी बाई न्यास की न्यासी श्रीमती मीना चौबे, डॉ. पद्मजा मेहता, डॉ. कल्पना, वैदेही सिंह, पायल लक्ष्मी सोनी, कविता मालवीय, मंजू निगम, अनुप्रिया अग्रहरि, दीक्षा केसरी, मालती मनी, रीता जायसवाल, डॉ.मंजू द्विवेदी, अनु पटेल, बबिता कुशवाहा व अन्य सैकड़ों की संख्या के सेविकाओं की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का एकल गीत कु.अंशिका, स्वागत भाषण डॉ. कल्पना, वंदे मातरम कु.जहान्वी ने व धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्र सेविका समिति की प्रान्त बौद्धिक प्रमुख डॉ. रंजना श्रीवास्तव ने किया| संचालन ममता बरनवाल ने किया। कार्यक्रम का संयोजन अंजू सिंह व नेहा दुबे ने किया।

Wednesday, November 3, 2021

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हुई बर्बरता की निन्दा करता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ- मुरलीपाल

  •  धारवाड़ में अखिल भारतीय कार्यकारणी मंण्डल की तीन दिवसीय बैठक में पारित हुआ प्रस्ताव
  • प्रस्ताव - बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए उन्मादी इस्लामिक आक्रमण की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल द्वारा भर्त्सना

काशी| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की काशी प्रान्त इकाई बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए उन्मादी इस्लामिक आक्रमण की कड़े शब्दो में निन्दा करता है। यह बात काशी प्रान्त के प्रान्त कार्यवाह मुरलीपाल ने पराड़कर भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कही|  उन्होने ने बताया कि संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल की कर्नाटक के धारवाड़ में हुई| तीन दिवसीय बैठक में बांगलादेश में रह रहे, हिन्दू अल्पसंख्यकों पर हुए हिंसक अत्याचारों पर दुख जतातें हुए प्रस्ताव पारित किया गया था। आरएसएस बांग्लादेश के इस्लामिक जिहादी संगठनों के षडयन्त्र की घोर निन्दा करते हुए वहां के हिन्दू अल्पसंख्यकों पर लागातार हो रहे क्रूर हिंसा को रोकने तथा उनकी सुरक्षा के प्रति भारत सरकार का इस ओर ध्यान दिलाया है। अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल के प्रस्ताव कि चर्चा करते हुए प्रान्त कार्यवाह ने कहा कि बांग्लादेश के हिन्दू समाज एवं हिन्दू मन्दिरों पर हिसंक आक्रमणों का क्रम बिना रोक टोक चल रहा है। दुर्गा पुजा के समय हुई संप्रदायिक हिंसा में अनेक निर्दोष हिन्दुओं की हत्या हुई,  तो सैकड़ो घायल हुएं| वही हजारो बेघर हुए पिछले दो सप्ताह में हिन्दू समाज की अनेक माता-बहनें अत्याचार की शिकार हो गई है। कट्टर इस्लामिक शक्तियों द्वारा बांग्लादेश से हिन्दू समाज के निर्मुलन हेतु सुनियोजित षडयन्त्र चलाया जा रहा है, फलस्वरूप वहां हिन्दू  जनसंख्या में निरन्तर कमी होती जा रही है। ज्ञात हो कि विभाजन के समय पूर्वी बंगाल में हिन्दुओं कि जनसंख्या 28 प्रतिशत थी, जो घटकर अब केवल 8 प्रतिशत रह गई है। बांग्लादेशी जमात-ए-इस्लाम जैसे कट्टरपंथी समूहों के अत्याचारों से विभाजन काल एवं 1971 के यु़द्ध के समय बड़ी संख्या में हिन्दू समाज को पलायन करना पड़ा, आज भी वे समाजिक सौहार्द बिगाड़ रहे है, जिससे अल्पसंख्यक हिन्दू समाज में असुरक्षा कि भावना उत्पन्न हुई है, संघ ने बांग्लादेश सरकार को चेताया है कि अल्पसंख्यक समाज के विरुद्ध बढ़ रही हिसंक घटनाओं को रोकने हेतु उचित कदम उठाये और साथ की हिन्दू विरोधी हिंसा के अपराधियों को कठोर दण्ड दे, उन्होने कहा कि अखिल भारतीय कार्यकारी मण्डल मानवाधिकार के तथा कथित प्रहरी और संयुक्त राष्ट्र संघ के मौन पर चिन्ता जताते हुए अन्तराष्ट्रीय समुदाय को आह्वान करता है कि, वह इस हिंसा कि निन्दा करने के लिए आगे आये और बांग्लादेश के हिन्दू ही नहीं बौद्ध सहित अन्य अल्पसंख्यक समाज के बचाव एवं सुरक्षा हेतु अपनी आवाज उठायें| कट्टरपंथी इस्लामिक शक्ती का उभार शान्ति प्रिय देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकार के लिए गंम्भीर खतरा है, कट्टरवादी हिंसा से पीड़ित बांग्लादेश के हिन्दू भाई बहनों के प्रति सम्वेदना दिखाते हुए सहयोग करने वाले अनेक संगठनों कि सराहना करते हुए हम विश्वास दिलाते है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित सम्पूर्ण हिन्दू समाज बांग्लादेश के अल्पसंख्यक पीड़ितों के साथ डटकर खड़ा है।

केवल शाखायें ही नही समाजिक परिर्वतन कि ओर संघ का बड़ा कदम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रान्त कार्यवाह मुरलीपाल ने बताया कि कोविड महामारी काल में संघ का केवल शाखाओं पर ही जोर नही था, अपितु सामाजिक परिवर्तन की ओर सराहनीय कार्य किया है, महामारी काल में कार्यकर्ताओं की सक्रियता के चलते काशी प्रान्त के 26 जिलों के 1511 खण्डों एवं 105 नगरीय क्षेत्रों के 1495 स्थानों पर संघ कि कुल 2189 नियमित शाखायें चल रही है। 226 स्थानों पर सप्ताहिक मिलन है, जबकि 293 सेवा बस्तियों में शाखा द्वारा सेवा कार्य किया जा रहा है।

त्याग, शौर्य, बलिदान के प्रतीक और हिन्दुत्व की पहचान, परम पवित्र भगवा ध्वज को संघ ने अपना गुरू माना है, वर्ष में एक बार प्रत्येक स्वयंसेवक स्वयं उपस्थित होकर गुरूपुजन करता है, कोविड संकट के बावजूद 6057 पुजक स्थानों पर रिकार्ड 1,60,816 स्वयंसेवकों ने पुजन किया। आत्मीय परिवर्तन के साथ समाज परिवर्तन हेतु संघ क्रियाशील है, समाज में व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघ के गतिविधि आयाम, सामाजिक समरसता, सामाजिक सद्भाव, कुटुम्ब प्रबोधन, सम्रग ग्राम विकास, गोसेवा, धर्मजागरण तथा पर्यावरण के कार्य से सामाज में वैचारिक, सामजिक एवं आर्थिक परिवर्तन दिखाई देने लगे है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल), धारवाड़ - 28-30 अक्टूबर 2021

प्रस्ताव - बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए उन्मादी इस्लामिक आक्रमण की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल द्वारा भर्त्सना

        अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (अ. भा. का.मंडल) बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हिंसक आक्रमणों पर अपना गहरा दुःख व्यक्त करता है और वहाँ के हिंदू अल्पसंख्यकों पर लगातार हो रही क्रूर हिंसा और बांग्लादेश के व्यापक इस्लामीकरण के जिहादी संगठनों के षडयन्त्र की घोर निंदा करता है ।

बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हिंदू समाज व हिंदू मंदिरों पर हिंसक आक्रमण का क्रम बिना रोकटोक चल रहा  है। गत समय में दुर्गा-पूजा के पवित्र पर्व काल में प्रारम्भ हुई इस साम्प्रदायिक हिंसा में अनेक  निरापराध हिंदुओं की हत्या हुई, सैंकड़ों लोग घायल हुए और हज़ारों  परिवार बेघर हो गए। गत  दो सप्ताह में ही हिंदू समाज की अनेक माता-बहनें अत्याचार की शिकार हुईं तथा मंदिरों व दुर्गा-पूजा पंडालों  का विध्वंस हुआ। निराधार झूठे समाचार प्रसारित कर साम्प्रदायिक उन्माद फैलानेवाले कुछ दोषियों की गिरफ़्तारी से यह स्पष्ट हुआ है  कि कट्टरपंथी इस्लामिक शक्तियों का वर्तमान आक्रमण एक  सुनियोजित षडयन्त्र था। हिंदू समाज को  लक्षित कर बार-बार हो रही  हिंसा का वास्तविक  उद्देश्य बांग्लादेश से हिंदू समाज का संपूर्ण निर्मूलन है, फलस्वरूप भारत विभाजन के समय से ही  हिंदू समाज की जनसंख्या में निरंतर कमी आ रही है।

     विभाजन के समय पूर्वी बंगाल में हिंदुओं की जनसंख्या जहाँ लगभग अठ्ठाईस प्रतिशत  थी वह  घटकर अब लगभग आठ प्रतिशत  हो गई है। जमात-ए-इस्लाम ( बांग्लादेश) जैसे कट्टरपंथी इस्लामी समूहों द्वारा अत्याचारों के कारण विभाजन काल से और विशेषकर 1971 के युद्ध के समय  बड़ी संख्या में हिंदू समाज को भारत में पलायन करना पडा। बांग्लादेश निर्माण के उपरान्त आज भी वही तत्व सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ रहे है जिसके कारण अल्पसंख्यक हिंदू समाज में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है ।

अ. भा. का.मंडल का यह मत है कि बांग्लादेश सरकार अपने ही देश के  अल्पसंख्यक समाज के ख़िलाफ़ बढ़ रही हिंसक घटनाओं को रोकने हेतू कठोर कदम उठाये। सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि हिंदू विरोधी हिंसा के अपराधियों को कठोर दंड प्राप्त हो ताकि हिंदू समाज में ऐसा विश्वास उत्पन्न हो कि बांग्लादेश में वे अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए सम्मानपूर्वक सुरक्षित जीवन जी सकते हैं 

अ. भा. का.मंडल मानवाधिकार के तथाकथित प्रहरी संगठनों और संयुक्त राष्ट्र संघ से संबंधित संस्थाओं के गहरे मौन पर चिंता व्यक्त करता है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आवाहन करता है कि वह  इस हिंसा की निंदा करने के लिए आगे आए व बांग्लादेश के हिंदू ,बौद्ध व अन्य अल्पसंख्यक समाज के बचाव व सुरक्षा हेतु अपनी आवाज़ उठाए ।हम यह भी आगाह करना चाहते है कि  बांग्लादेश या विश्व के किसी भी अन्य भाग में कट्टरपंथी इस्लामिक शक्ति का उभार विश्व के शांतिप्रिय देशों की लोकतांत्रिक व्यवस्था और मानवाधिकार के लिए गम्भीर ख़तरा सिद्ध होगा।

अ. भा. का.मंडल भारत सरकार से भी यह अनुरोध करता है कि वे उपलब्ध सभी  राजनयिक माध्यमों का उपयोग करते हुए बांग्लादेश में हो रहे आक्रमणों व मानवाधिकार हनन के बारे में  विश्व भर के हिंदू समाज एवं संस्थाओं की चिंताओं से बांग्लादेश सरकार को अवगत कराये ताकि वहाँ के हिंदू और बौद्ध  समाज की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। कट्टरपंथी हिंसा से पीड़ित बांग्लादेश के हिंदू भाई-बहनों के साथ जुड़कर संपूर्ण सहयोग करनेवाले  इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन,  भारत सेवाश्रम संघ, विश्व हिंदू परिषद एवं अनेक हिंदू संगठनों-संस्थाओं की अ. भा. का. मंडल सराहना करता है। हम यह भी विश्वास दिलाते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित संपूर्ण हिंदू समाज बांग्लादेश के हिंदू और अन्य प्रताड़ित अल्पसंख्यको के  इस कठिन एवं चुनौतीपूर्ण समय में उनके साथ डटकर खड़ा  है।