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Saturday, September 15, 2012

पूर्व सरसंघचालक कुप्प् सी. सुदर्शन जी का निधन


Source: VSK- BHOPAL      Date: 9/15/2012 12:04:44 PM
$img_titleभोपाल, 15 सितंबर 2012 :  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक पूजनीय श्री. सुदर्शन जी का आज, शनिवार सुबह 6:50 पर हृदयाघात से रायपुर प्रवास के दौरान निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। स्व. श्री. सुदर्शन जी का अंतिम संस्कार कल, रविवार  दिनांक 16 सितंबर 2012  को अपरान्ह 3:00 बजे नागपुर में होगा।
स्व. श्री. सुदर्शन संघ प्रमुख के पद से हटने के बाद से भोपाल में रह रहे थे और संघ के विभिन्न कार्यों में मार्गदर्शक की भूमिका में थे। कल शाम वह एक पुस्तक के विमोचन के सिलसिले में रायपुर गए थे। संयोग से उनका जन्म भी रायपुर में ही हुआ था।
आज सुबह जब अपना नित्य का टहलने का क्रम पूरा कर सुदर्शन जी वापस लौटे तभी उन्हें कुछ थकावट और बैचेनी महसूस हुई। उसके कुछ देर बाद ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।
संक्षिप्त परिचयबाल्यकाल से ही अद्भुत प्रतिभा संपन्न तथा अनेक विषयों का गहन अध्ययन अन्वेषक वृत्ति से करनेवाले, कई भाषाओं के मर्मज्ञ, प्रभावी वक्ता, तथा कई पुस्तकों के रचयिता निवर्तमान सरसंघचालक श्री. सुदर्शन जी का जन्म छत्तीसगढ़ प्रान्त के रायपुर नगर में १८ जून १९३१ को हुआ था। आपका पूरा नाम कुप्पहल्ली सीतारामय्या सुदर्शन है। उनका परिवार कर्नाटक प्रान्त का रहने वाला माना जाता है। परन्तु वास्तव में उनके पूर्वज तमिलनाडु के संकेती के रहने वाले है और इसलिए उनकी मातृभाषा तमिल और तेलुगु मिश्रित शकैटी है। सुदर्शन जी के पिताजी श्री. सीतारामय्या मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग में सेवारत होने के कारण मध्य प्रदेश आये थे। अपने सेवाकाल में प्रान्त के कई स्थानों पर रहे। उनके साथ रहते हुए ही दमोह, मंडला, रायपुर आदि स्थानों पर सुदर्शन जी की प्राथमिक शिक्षा पूरी हुई। आज के महाराष्ट्र का चंद्रपुर उस समय मध्य प्रदेश में ही हुआ करता था। अत: जब पिता जी चंद्रपुर में पदस्थ थे तब वहां से उन्होंने अपनी हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके पश्चात सन १९५४ में जबलपुर से दूरसंचार विषय में अभियांत्रिकी स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
तीन भाई व एक बहन में सबसे बड़े सुदर्शन जी ही थे। बचपन से ही उनका सम्बन्ध संघ से हो गया था। परिणाम यह हुआ की अभियांत्रिकी उपाधि प्राप्त करते ही उन्होंने जीवनभर अविवाहित रहते हुए संघ के माध्यम से समाज कार्य करने के लिए प्रचारक जीवन स्वीकार कर लिया और उनकी पहली नियुक्ति छत्तीसगढ़ प्रान्त के रायगढ़ जिला प्रचारक के रूप में हुई। वे रीवा विभाग प्रचारक भी रहे। १९६४ में ही उन की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर उन्हें मध्य भारत के प्रान्त प्रचारक की जिम्मेदारी सौंपी गई।
मध्य भारत के प्रान्त प्रचारक रहते हुए ही सन १९६९ में उन्हें अखिल भारतीय शारीरिक प्रमुख का दायित्व भी दिया गया। सन १९७५ में आपातकाल की घोषणा हुई और पहले ही दिन इंदौर में उन को गिरफ्तार कर लिया गया। पुरे उन्नीस माह उन्होंने कारावास में बिताये। आपातकाल समाप्ति के पश्चात सन १९७७ में उन्हें पूर्वांचल [असम, बंगाल और पूर्वोत्तर राज्य] का क्षेत्र प्रचारक बनाया गया। क्षेत्र प्रचारक के रूप में उन्होंने वहाँ के समाज में सहज रूप से संवाद करने के लिए असमिया, बंगला भाषाओँ पर प्रभुत्व प्राप्त किया तथा पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातियों की अलग अलग भाषाओँ का भी पर्याप्त ज्ञान प्राप्त किया। कन्नड़, बंगला, असमिया, हिंदी, इंग्लिश, मराठी, इत्यादि कई भाषाओँ में उन्हें धाराप्रवाह बोलते हुए देखना यह कई लोगों के लिए एक आश्चर्य तथा सुखद अनुभूति का विषय होता था।
सन १९७९ में उन्हें अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख व १९९० में सह-सरकार्यवाह का दायित्व सौंपा गया। अपनी लंबी शारीरिक अस्वस्थता के कारण श्री. राजेंद्र सिंह जी ने १० मार्च २००० को अवकाश लेने की घोषणा करते हुए अपने स्थान पर सुदर्शन जी को सरसंघचालक मनोनीत किया। इतनी प्रतिभा और संघ के सर्वोच्च स्थान पर होने के बावजूद उनकी सहजता व सरलता के कारण समाज के विभिन्न स्तरों के लोग तथा स्वयंसेवक उन्हें विना संकोच मिलकर अपनी अपनी बात रखते थे।
उनके ९ वर्ष के कार्यकाल में संघ के ७५ वर्ष की पूर्ति के निमित्त राष्ट्र जागरण अभियान, द्वितीय सरसंघचालक श्री. गुरूजी की जन्मशती, आदि कई अभियानों के माध्यम से संघ कार्य का विस्तार हुआ। ग्रामविकास के कार्य, स्वदेशी तंत्रज्ञान, आदि विषयों के माध्यम से साम्यवाद तथा पाश्चिमात्य जगत के भौतिकवाद से अलग हटकर हिंदू समग्र चिंतनपर आधारीत विकासपथ के अन्वेषण को उन्होंने प्रोत्साहित किया।
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RSS former Sarasanghachalak KS Sudarshanji no more
Raipur, September 15, 2012 : Former Sarsanghachalak Shri. Sudarshanji breathed his last this morning at 6.55 am at Raipur in Chattisgarh state. He was 81. He went for a morning walk as usual today, returned and was doing his usual course of Yogasana and Pranayama exercise, when he suffered from a massive cardiac attack. The funeral will be held at Nagpur on 16th September 2012 at 3 pm.
Shri. Kupahalli Sitaramayya Sudarshan ji was born on 18 June 1931 at Raipur. He started working as a Pracharak [full time worker of RSS] in 1954. In year 2000 he became Sarsanghachalak. In 2009 he handed over the responsibility to Shri. Mohan ji Bhagwat because of receding health and advancing age.

About Sudarshan ji :
Born on June 18, 1931 in Raipur, it was then part of Madhya Pradesh, at the age of 9, Sudarshan ji joined RSS. He did his Bachelor of Engineering in Telecommunications (honours) from Sagar University. He became RSS- pracharak in 1954. His first posting as a pracharak was in Raigarh district. In 1964, he was become Prant Pracharak of Madhya Bharat at a fairly young age. This was followed by a stint in the North-East (1977) and then, he took over as the Akhil Bharaiya Boudhik Pramukh (chief of RSS think-tank) 2 years later. In 1990, he was appointed Sah-Sarakaryavah (Joint General Secretary) of the organisation. He has the rare distinction of having held both posts of sharirik (physical exercises) and baudhik (intellectual) pramukh on different occasions.
On March 10, 2000 KS Sudarshan ji became 5th Sarsanghachalak (Supreme Chief) of the RSS. He succeeded Prof. Rajendra Singh. He then stepped down on due to ill-health in March 2009. Mohan ji Bhagwat is presently heading the organisation since March 2009.
Condolence message by Shri Bhayyaji Joshi :
With utmost sadness I inform the Swamsevaks and the people of the country about the sad demise of Man. K.S. Sudarshan Ji (former Sar Sanghchalak of RSS). He was 81 years old.
Man. Sudarshan Ji was at Raipur on his routine pravaas. After his morning walk he experienced severe unease and soon his life mission came to an abrupt end.
Man. Sudarshan Ji was an engineer by training. He spent more than five decades in the service of our Motherland as Pracharak. He was Sar Sanghchalak of RSS between 2000 and 2009.
His body will be brought to Nagpur today evening and will be kept for darshan at the Resham Bagh Ground in Nagpur till afternoon tomorrow.
The final journey of his mortal remains will commence at 3 PM tomorrow (September 16, 2012) from Resham Bagh grounds.

-Suresh (Bhayyaji) Joshi
Sar Karyavah, RSS
15 September 2012
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$img_titleस्व. श्री. सुदर्शन जी के कुछ स्मृति-चित्र-
१) आत्मीय व्यक्तित्व : मा. सुदर्शन जी बैठक में.
२) बालकों मे बालक समान : ३ अगस्त २०१२- मैसूर मे बाल स्वयंसेवकों के साथ मा. सुदर्शन जी.
३) सादगी का स्वाभाविक परिचय : सरसंघचालक पद छोडने के बाद किसी भी बैठक में मा. सुदर्शन जी सामान्य स्वयंसेवक के भांति सहभागी होते थे.
४) सुसंवादी : मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, बंगलोर द्वारा २०१२ में मा. सुदर्शन जी का सत्कार.
५) समरसता का ध्यास : महाराष्ट्र के दलित पंथर के संस्थापक नेता तथा साहित्यिक श्री. नामदेव ढसाल श्री. सुदर्शन जी से मिलते हुए.
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Saturday, July 28, 2012

असम में हुए हिंसा के विरोध में काशी के संतों ने भरी हुंकार



       
 वाराणसी 28 जुलाई (विश्व संवाद केन्द्र, काशी)। असम में हो रहे हिंसा के विरोध में काशी के सभी प्रमुख मठों, मंदिरों और अखाड़ों के साधु संतों औए सामाजिक संगठनों ने सुमेरु मठ से अस्सी घाट तक विरोध मार्च निकाला। मार्च का नेतृत्व कर रहे श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद सरस्वती जी महराज ने कहा कि असम में अपने ही घर से बेघर  किये गए मूल निवासियों को तत्काल समुचित आवास व्यवस्था प्रदान की जाय तथा उन्हें अपने घरों में वापस सुरक्षात्मक प्रबंध सहित रहने की व्यवस्था एक सप्ताह के अन्दर की जाय। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इसमें विलम्ब हुआ तो देश के लाखों राष्ट्र भक्त हिन्दू असम के लिए कूच करेंगे और ऐसी स्थिति में संत समाज अपना चातुर्मास्य व्रत त्यागने को मजबूर होगा। जिसकी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी जो संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का केंद्र सरकार हनन माना जायगा।      
       इस अवसर पर काशी विद्वत परिषद् के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. कामेश्वर उपाध्याय ने कहा कि असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों  की तलाश कर उन्हें बाहर किया जाय अथवा उन्हें बंदी बनाकर राष्ट्र द्रोह कानून के तहत जेलों में बंद किया जाय। असम में कानून व्यवस्था कायम रखने में वहां की सरकार असफल रही है। अतः राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था शांति स्थापन काल तक पूरी तरह सेना को सौप दिया जाय। 
        उन्होंने केंद्र और असम सरकार को आगाह करते हुए कहा कि असम में हो रहे नर संहार के लिए जिम्मेदार लोगों को तत्काल खोजकर उनके खिलाफ कठोर दमनात्मक कारवाई की जाय, ताकि उनके हिंसक मनोबल को नियंत्रित किया जा सके, अन्यथा ढिलाई बरतने पर ये घुसपैठिये देश के अन्य प्रान्तों में अपना जल फैलाकर राष्ट्रीय अस्थिरता और अशांति की भयावह स्थिति पैदा कर सकते हैं।
        संतों के इस विरोध मार्च में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व वेड विभागाध्यक्ष प्रो. व्यास मिश्र, दंडी सन्यासी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मठ मछलीबंदर के महंत स्वामी विमल देव, अनंत विज्ञान मठ के महंत स्वामी इन्द्र प्रकाश आश्रम (नाग बाबा), आचार्य आद्या प्रसाद द्विवेदी, आचार्य नन्द किशोर, आनंद त्रिपाठी, जयप्रकाश त्रिपाठी, स्वामी दुर्गेश्वरानंद तीर्थ , स्वामी श्यामदेव आश्रम, स्वामी शिव आश्रम सहित अनेक संत और सदगृहस्त शामिल थे। 

Saturday, July 7, 2012

संघ के सह सरकार्यवाह डाॅ. कृष्ण गोपाल जी के भाषण का विडीयो



 वाराणसी, 6 मई।  निवेदिता शिक्षा सदन के भाऊराव देवरस सभागार में विश्व संवाद केन्द्र, काशी द्वारा आदि पत्रकार देवर्षि नारद जयन्ती (ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया) की पूर्व संध्या पर आयोजित पत्रकार-सम्मान समारोह एवं  ‘‘राष्ट्रीय सुरक्षा और पत्रकारिता के दायित्व’’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी  के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डाॅ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर देश चिन्तित है। देश आन्तरिक सुरक्षा के गम्भीर संकट का सामना कर रहा है। अंग्रेजों ने देश को धर्म, समाज, जातपात वर्ग आदि कई टुकड़ों में बांटने का षड्यंत्र किया। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री सर विंस्टन चर्चिल इस षड्यंत्र के पीछे थे लेकिन तीन साल पहले उसी ब्रिटेन के वित्तमंत्री ने भारत दौरे के बाद कहा कि किसी भी आपदा के समय यह देश एकसूत्र में बंध जाता है और संकट से जल्दी ही उबर जाता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज के पीछे देखने वाली आँख है। समाज ने जो नहीं देखा उसे आगे लाने का काम पत्रकार करता है। पत्रकार इतिहास में जाकर खोज करता है और भूतकाल से समाचार निकालकर समाज के सामने रखता है। 

Wednesday, July 4, 2012

वनवासी कल्याण आश्रम को उपहार राशि का दान

 वनवासी कल्याण आश्रम के विभाग संगठन मंत्री आनन्द जी को उपहार राशि भेंट करती हुई  सुनीता मिश्रा एवं चन्द्र प्रकाश मिश्र
        उत्तर प्रदेश के काशी महानगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र शारीरिक प्रमुख चन्द्रमोहन जी के भतीजे का गत्दिनों विवाह सम्पन्न हुआ। चन्द्रमोहन जी संघ के प्रचारक हैं उनकी प्रेरणा से वर चन्द्र प्रकाश मिश्र एवं वधु सुनीता मिश्रा ने समाज के लिए अनुकरणीय कार्य किया। हुआ यूं कि 30 जून 2012 को माधवकुंज पार्क में प्रीतिभोज कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में आये स्वजनों ने आशीर्वाद स्वरूप वर और वधु को उपहार और राशि भेट की गयी। आशीर्वाद राशि के रूप में 11,122 रुपये मिले थे। चन्द्रप्रकाश और सुनीता ने इस रूपये को सहज भाव से वनवासी कल्याण आश्रम के विभाग संगठन मंत्री आनन्द जी के माध्यम से ‘‘सेवाकुंज आश्रम’’ कारीडाड़, चपकी, सोनभद्र छात्रावास को दान कर दिया। चन्द्र प्रकाश की बहन रंजना मिश्रा ने भी अपने उपहार राशि को छात्रावास को दे दिया। उल्लेखनीय है कि यह छात्रावास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक रज्जूभैया के इच्छा और प्रेरणा से सन् 1999 में सेवाकुंज आश्रम की स्थापना सोनभद्र में हुई। स्वयंसेवकों के अथक परिश्रम, सेवाभावना समाज के सहयोग से यह आश्रम प्रगति पथ की ओर बढ़ रहा है। इस छात्रावास में वनवासी छात्र रहते हैं। आश्रम की विश्वसनियता सेवा करने की भावना तथा इसकी ख्याति ही प्रगति की प्रतीक बन गयी है।  
       सेवा समर्पण संस्थान द्वारा संचालित सेवाकुंज आश्रम, कारीडाड़, चपकी, सोनभद्र जिले के बभनी ब्लाक में स्थित है। 1996 के जुलाई माह में वनवासी क्षेत्र के विषय में कार्यकर्ताओं में चर्चा चली एवं यह तय किया गया कि बभनी ब्लाॅक में वनवासी क्षेत्र के विकास के लिये कुछ कार्य किया जाय, उस क्षेत्र में 80 प्रतिशत वनवासी रहते हैं। यहाँ पर शिक्षा स्वास्थ्य एवं स्वावलम्बन के नाम पर कुछ भी नहीं हैं यहाँ पर अशिक्षा, बेरोजगारी एवं स्वास्थ्य के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। इसके अभाव में भोले-भोले वनवासी बन्धु मिशनरियों के चंुगुल में फसकर इसाई बनते जा रहे है। सामाजिक उपेक्षा के कारण यह क्षेत्र राष्ट्रीय विचारधारा से कटता जा रहा है। 95 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार है, शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं है। उपरोक्त समस्याओं पर विचार कर यह योजना बनी की सुदूर दक्षिणांचल में एक केन्द्र बनाया जाय जो अपने प्रयासों से उनके जीवन स्तर को सुधारने का कार्य करें। अप्रैल 1999 में यहाँ जमीन क्रय कर प्रकल्प की स्थापना की गयी।
      छात्रावास- सर्वप्रथम 4 विद्यार्थियों को लेकर छात्रावास की स्थापना की गई। वर्तमान समय में 80 विद्यार्थी 60 गाँवों के 12 जनजाति के लोग निवास कर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
ल् विद्यालय- जुलाई 2000 में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की गयी। प्रथम वर्ष में 65 छात्र थे, इस समय 125 छात्र आसपास के गाँवों से आकर पढ़ते हैं। पढ़ाने के लिये तीन अध्यापक एवं एक अध्यापिका कार्यरत हैं। शुरू में विद्यालय भवन का अभाव था लेकिन दानदाताओं के सहयोग से भवन का निर्माण हुआ एवं 23 मार्च को उसका लोकार्पण प्रान्तीय अध्यक्ष श्री आनन्द भूषण शरण, वरिष्ठ अधिवक्ता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के करकमलों से हुआ।
     मंदिर- सितम्बर 1999 में वनवासियों की मांग पर पूजन करने हेतु शिवलिंग की स्थापना परम पूजनीय शंकराचार्य श्री वासुदेवानन्द जी के करकमलों द्वारा रूद्राभिषेक से की गई। यहां पर वनवासी बन्धु प्रति सोमवार रात्रि में कीर्तन करते हैं एवं नित्य पूजन चल रहा है।
     स्वास्थ्य- वनवासियों के स्वास्थ्य सुधार के लिए एक डाॅक्टर सदैव उपलब्ध रहते हैं जो होमियो पैथिक एवं एलोपैथिक दवाओं से उपचार करते है। वहाँ पर 8 मरीजों को परीक्षण करने की व्यवस्था अभी बनपाई है। प्रतिमाह वहाँ पर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के डाॅक्टरों की टीम जाकर उनका निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार करती है। वर्ष में 2 बार आँखों का परीक्षण एवं आपरेशन होता है और निःशुल्क चश्में प्रदान किये जाते हैं। वर्ष 2001-12 में 45 आँखों के आपरेशन किये गये वर्ष में 2 बार हाइड्रोसील एवं हार्निया के आपरेशन भी किये, जिसका 25 वनवासियों ने लाभ उठाया।
     पौधशाला- जमीन सुधार हेतु यहाँ पर पौधशाला चालू की है। अल्प में करीब 3000 पेड़ लगाये गये है। जिसमें फलदार   एवं छायादार पौधे लगे हैं।
ल् स्वावलम्बन- वनवासी महिलाओं एवं बालिकाओं को आत्मनिर्भर करने हेतु यहाँ पर महिला सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र 2001 में चालू किया गया जिसमें 12 महिलाओं ने प्रशिक्षण लिया एवं उसके दूसरे दौर में 10 महिलाओं एवं छात्र छात्राओं के द्वारा प्रशिक्षण कार्य चल रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर उनको आधी किमत पर मशीन दी जाती है।
    खेल-कूद केन्द्र- उस समय बालकों के स्वास्थ्य के लिए 2 खेलकूद केन्द्र चलते हैं जिसमें खेलकूद के अलावा व्यायाम एवंहणं बौद्धिक विकास का कार्य भी चलता है। खेलकूद प्रतिभा के विकास हेतु तीरन्दाजी एक बड़ा केन्द्र खेल विभाग में सहयोग चल रहा है। जिसमें 92 तीरन्दाज नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। वहां से निकलकर 90 तीरन्दाज उ0प्र0 खेत विभाग के तीरन्दाजी छात्रावास में चयनित होकर राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण, रजत पदक प्राप्त किये है। - प्रस्तुति: लोकनाथ, 63 माधवकुंज, माधव मार्केट कालोनी, लंका, वाराणसी

Friday, June 15, 2012

सुलतानपुर में संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष का समापन


आंतरिक व बाह्य संकटों से घिरा है भारत: कन्नन 

 सुलतानपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह के.सी. कन्नन ने कहा कि आज देश आंतरिक एवं बाहरी संकटों से घिरा हुआ है। इसके लिए सबकुछ सरकार ही करें, ऐसा सोच कर बैठे रहना हमारा काम नहीं है। समाज में परिवर्तन की जरूरत है। देश चारों तरफ की सीमाओं पर दुश्मनों से घिरा हुआ है। जिसमें चीन सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है। सीमाओं पर दुश्मन तो देश के अन्दर भ्रष्टाचार व घोटाले का घुन लगा हुआ है। तमाम संकटों में संघ ने राष्ट्र रक्षा के लिए काम किया है और आगे भी करता रहेगा।  
उक्त बातें उन्होंने सुलतानपुर नगर के विवेकानन्दनगर स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय विवेकानन्दनगर परिसर में पिछले 21 मई से चल रहे काशी प्रान्त के प्रथम वर्ष संघ शिक्षा वर्ग का आज समापन था। इस अवसर पर आयोजित समारोह में श्री कन्नन ने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन भारत के खिलाफ लड़ने का मौका तलाश रहा है। देश की सीमा कराची पोस्ट व दक्षिण सीमा पर आना शुरू हो गया है। चीन कई बार भारत की सीमा में घुस चुका है। भारत सरकार कुछ भी नकी करती है। पाकिस्तान जन्मजात दुश्मन है। अब तालिबान के पास भी अणुबम हो गया है। जिसका खतरा सबसे ज्यादा भारत के लिए है। ऐसी परिस्थिति में सबकुछ सरकार पर छोड़ देना ठीक नहीं है। हम देश के जिम्मेदार नागरिकों को जागरूक होकर आगे आना होगा। 
उन्होंने कहा कि देश के अन्तर की स्थिति भी कम नहीं है। देश में भ्रष्टाचार व घोटाला अपने चरम पर है। जिसके लिए आन्दोलन भी चल रहे है किन्तु यह सब कानून बनाने से खत्म होने वाला नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वह कानून बनाने के विरोधी नहीं हैं किन्तु देश मंे कानून की कमी नहीं है। भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोगों में मानसिक परिवर्तन की जरूरत है। इसके लिए शिक्षा में सबसे ज्यादा सुधार की जरूरत है। आज भी हम पाश्चात्य संस्कृति के पीछे चल रहे हैं। हमें अपने देश के त्यागी व गौरवपूर्ण गाथाओं को शिक्षा में लाना होगा। चुनावी प्रक्रिया पर भी प्रतिक्रिया करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव में भी सुधार की जरूरत है। आज सांसद व विधायक करोड़ों खर्च करके जनप्रतिनिधि बन रहे हैं इसी कारण वह सत्ता में आते ही अपना हिसाब बराबर करने में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे है। उन्हीं के कारण उपर से नीचे तक भ्रष्टाचार है। उन्होंने जम्मू कश्मीर की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए नागरिकों को झकझोरने का प्रयास किया। 
श्री कन्नन ने कहा कि संघ का एकमात्र उद्देश्य भारत को परमवैभव तक ले जाना है। इसलिए सम्पूर्ण हिन्दू समाज सका संगठन करना है। संघ एक सोसियो साइकोथेरिपी है। संघ सुधारवादी, राष्ट्रवादी संगठन है। केरल के एक कट्टर माक्र्सवादी प्रोफेसर ने सुधार के लिए अपने बेटे को भेजा जहाॅं वह सुधार गया। शाखा ने मलेशिया में होनी वाली आत्महत्या समाप्त होगी। यह बड़ा परिवर्तन मलेशिया ने डब्ल्यू एच ओ को बताया। भारत में संघ का सबसे बड़ा टेªड यूनियन भारतीय किसान संघ है। 
समारोह की अध्यक्षता कर रहे प्रख्यात चिकित्सक डाॅ0 आर0ए0 वर्मा ने कहा कि आज देश की सीमाएं जिस तरह से दुश्मनों से घिरी पड़ी हैं, उसमें हमें ऐसे नवजवानों की जरूरत है। जो राष्ट्रसेवा के लिए काम कर सके। 
इसके पहले वर्गाधिकारी नरेन्द्र बहादुर सिंह ने वर्ग का वृत्त प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्रथम वर्ष का संघ शिक्षा वर्ग देश के कुल 41 प्रान्तों में प्रान्त सह नियोजित है और काशी प्रान्त के कुल 24 जिलों (12 शासकीय जिलों) से कुल 446 स्वयंसेवक सुदूर दक्षिण के वनांचल (सोनभद्र) से लेकर सुलतानपुर तथा कौशाम्बी से लेकर गाजीपुर तक के स्वयंसेवक अपने खर्च पर पूर्ण गणवेश की तैयारी कर, अपना-अपना यात्रा एवं अन्य शुल्क वहन कर प्रशिक्षण प्राप्त किया। यह प्रशिक्षण वर्ग 21 मई से प्रारम्भ होकर 10 जून 2012 को पूर्ण हुआ। इन तरुण स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देने हेतु कुल 50 शिक्षक एवं लगभग 50 व्यवस्था के अन्य लोग दिन-रात अपनी सेवायें प्रदान किये। जिसमें 406 विद्यार्थी तथा 40 गैर विद्यार्थी भाग लिये। स्वयंसेवकों की दिनचर्या प्रातः 4.00 बजे जागरण से प्रारम्भ होकर रात्रि 10.00 बजे दीप विसर्जन के साथ पूर्ण होती है। इस अत्यधिक व्यस्त दिनचर्या में योजनानुसार 2.30 घण्टे प्रातः एवं 1.30 घण्टे सायं, कुल 4 घण्टे का विभिन्न शारीरिक कार्यक्रम जिसमें योग, दण्डयोग, समता एवं आसन आदि का प्रशिक्षण देकर चुस्त, दुरूस्त, अनुशासित कार्यकर्ता का निर्माण किया जा रहा है। शारीरिक के साथ-साथ स्वयंसेवकों के अन्दर राष्ट्रभाव को पुष्ट करने हेतु विभिन्न बौद्धिक कार्यक्रम जैसे 1 घण्टे का बौद्धिक, चर्चा, प्रवचन आदि होता है। इन सम्पूर्ण कार्यक्रमों को स्वयंसेवकों ने बडे़ ही मनोयोग के साथ आत्मसात किया, कुछ का प्रदर्शन आप स्वयं देख सकते हैं। 
कार्यक्रम में प्रान्त संघचालक विश्वनाथ लाल निगम, प्रान्त प्रचारक अभय जी, प्रान्त व्यवस्था प्रमुख जय प्रकाश, प्रान्त शारीरिक प्रमुख रत्नाकर, सह प्रान्त कार्यवाह बांकेलाल, वर्ग कार्यवाह डाॅ0 रमाशंकर पाण्डेय, वर्ग बौद्धिक प्रमुख डाॅ0 सत्य पाल तिवारी, विभाग प्रचारक धनंजय, मनोज, सुभाष सहित संघ के तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 
प्रस्तुति: सत्य प्रकाश गुप्ता, सुलतानपुर।

काशी में संघ शिक्षा विशेष वर्ग का समापन paper cuting