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Saturday, September 7, 2024

विदेशी ताकते रच रही भारत के विरुद्ध षड्यंत्र- मिलिंद परांडे



वाराणसी. मिलिंद परांडे ने कहा कि कुछ विदेशी ताकतों तथा विधर्मियों द्वारा सनातन धर्म एवं हिन्दू संस्कृति के खिलाफ लगातार षड्यंत्र रचा जा रहा, इस संबंध में प्रबुद्धजनों को सतर्क रहना होगा. विश्व के कुछ देशों को भारत का उत्थान सहन नहीं हो रहा, वे यहां लंगड़ी सरकार चाहते हैं जिससे उनकी बादशाहत कायम रहे.

विश्व हिन्दू परिषद काशी प्रांत द्वारा शुक्रवार को आयोजित (रामाश्रय वाटिका) कचहरी तथा बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में प्रबुद्धजनों की गोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे जी ने संबोधित किया.

उन्होंने कहा कि कट्टर विधर्मियों के साथ ग्लोबल मार्केट के खिलाड़ी हमारी संस्कृति के खिलाफ नया-नया कुचक्र रच कर अपना नेरेटिव सेट कर रहे हैं. कई देश चाहते हैं कि भारत में हिन्दू समाज खंड-खंड में विभक्त रहे, जिससे उनकी दुकानदारी चलती रहे. कट्टरवादियों के साथ मिलकर कुछ देश जनता द्वारा चुनी सरकारों को कमजोर करने का कुचक्र रचते हैं. बांग्लादेश में चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंकना व हिन्दू समाज पर जघन्य हमला, उसी का हिस्सा था. भारत में भी बांग्लादेश जैसा जघन्य कृत्य करने की धमकी दी गई है. ऐसे में हिन्दू समाज को एकत्रित होकर ऐसी ताकतों का कड़ा प्रतिकार करना होगा.

मिलिंद परांडे ने कहा कि 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन उसके पूर्व हजारों साल तक हमारी संस्कृति पर आक्रमण होता रहा. सनातन संस्कृति को मिटाने की लाख प्रयास हुए, लेकिन हम फिर से उठ खड़े हुए. आज पूरी दुनिया भारत का लोहा मान रही है. प्रबुद्धजनों को यह समझना होगा कि एक तरफ हम विश्व की तीसरी आर्थिक शक्ति बनने जा रहे हैं तो दूसरी तरफ विदेशी षड्यंत्र और कट्टरवादियों के खतरे से भी हम जूझ रहे हैं. देश को कमजोर करने के लिए ऐसे षड्यंत्र रचे जा रहे हैं, ताकि हिन्दू समाज युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अगड़ा-पिछड़ा में अलग-अलग बँट जाए. इस चुनौती से लड़ने के लिए युवा शक्ति को जागृत कर समाज की एकता के लिए सभी को संकल्पित होना होगा.

उन्होंने कहा कि 16वीं शताब्दी तक समूचे विश्व की 35% संपदा भारत के पास रही जो 17वीं सदी तक घटकर 22 प्रतिशत रह गई. 21वीं सदी में भारत फिर से आर्थिक, सामरिक क्षेत्र में अपना डंका बजाने लगा है तो विश्व के कुछ बड़े देश जलने लगे. वसुधैव कुटुंबकम की राह पर चलने वाले हम वो पथिक हैं जो कभी विश्व गुरु रहे. महर्षि अरविंद ने भी कहा था कि भारत की स्वाधीनता स्वयं के लिए नहीं, बल्कि विश्व कल्याण के लिए है.

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में कार्यक्रम के अध्यक्ष विश्व वैदिक विज्ञान केंद्र के समन्वयक प्रोफेसर उपेंद्र कुमार त्रिपाठी ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन वृत्त पर चर्चा की.

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद पूर्वी उ०प्र० के क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र जी, काशी प्रांत के अध्यक्ष कविंद्र प्रताप सिंह, सह मंत्री सत्य प्रकाश सिंह, डॉ० हरेंद्र राय, प्रतिभा दीदी, काशी उत्तर भाग के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पांडेय, काशी दक्षिण के अध्यक्ष सच्चिदानंद सिंह, काशी ग्रामीण के जिला अध्यक्ष राजेश पांडे, सेंट्रल बार के अध्यक्ष मुरलीधर सिंह बनारस बार के अध्यक्ष अवधेश जी समेत अनेक प्रोफेसर, विद्वत् जन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गण उपस्थित रहे. संचालन काशी ग्रामीण जिला मंत्री पवन जी ने किया.





Wednesday, September 4, 2024

संवेदनशील, दायित्ववान नागरिक ही सर्वोच्च राष्ट्र का निर्माता - रमेश कुमार


काशीl जिस समाज जिस देश में हमको रहना है उसे हमें ही सुंदर बनाकर रखना होगाl एक दायित्ववान और संवेदनशील नागरिक ही सर्वोच्च राष्ट्र के प्रति चिंतन करता हैl राष्ट्र में यदि बदलाव लाना है तो सभी नागरिकों द्वारा सकारात्मक प्रयासों से ही यह कार्य संभव हो सकता हैl उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, पंच संकल्प समिति, काशी दक्षिण भाग द्वारा काशी हिंदू विश्वविद्यालय स्थित सामाजिक विज्ञान संकाय के समता भवन में आयोजित  संगोष्ठी - नागरिक कर्तव्य बोध एवं उसका निर्वहन में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रांत के प्रान्त प्रचारक रमेश कुमार ने व्यक्त कियाl प्रान्त प्रचारक ने कहा कि सभ्य राष्ट्र के नागरिकों के लिए नियम कानून का पालन आवश्यक है। उदाहरण स्वरूप यातायात के नियमों का पालन करना, वाहन को सही स्थिति में पार्किंग में खड़ा करना, अपने बाएँ ओर से चलना, शुद्ध जल वायु इत्यादि के लिए पर्यावरण का संरक्षणl नागरिक किसी भी विचारधारा के हों, परंतु सबको प्राकृतिक होगाl संविधान की चर्चा करते हुए मुख्य वक्ता ने कहा कि राष्ट्र की संपत्ति की सुरक्षा, स्वच्छता प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य हैl दोष मुक्त समाज का निर्माण, नशाखोरी पर लगाम, अनर्गल व्यसनों से युवा पीढ़ी को बचाने का काम यह सब सभ्य नागरिक का कर्तव्य हैl

नागरिक कर्तव्य में सेवा कार्यों के उल्लेख करते हुए कोरोना काल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों द्वारा किए गए सेवा कार्यों का उल्लेख भी मुख्य वक्ता ने कियाl शांति और सद्भाव रहने से समृद्धि अपने आप आती हैl रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी उल्लेख किया है कि जहां सुमति तहां संपति नाना।

संगोष्ठी में भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रोफेसर सदाशिव द्विवेदी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत में उत्पन्न सभी विषयों का एकमात्र उद्देश्य था लोक का नियमन और यदि कर्तव्य बोध से कोई हटता है तो उसकी रक्षा हेतु समय-समय पर शास्त्र की रचना की गईl जनमानस को उसके कर्तव्य बोध पर चलाने के लिए पुराण की रचना की गयीl भारत के ऋषि परंपरा ने सर्वस्व का त्याग करके अत्यंत कर्त्तव्यशील होते हुए समाज हित में कार्य करने की शिक्षा दी हैl अधिकार एवं कर्तव्य एक दूसरे से जुड़े हुए हैंl वर्तमान स्थिति में कर्तव्य बोध की चर्चा इसलिए आवश्यक है कि इस समय मनुष्य संवेदना से विहीन हो रहा हैl वक्ता ने नारी शक्ति के कर्तव्य बोध की चर्चा करते हुए कहा कि भारत में शक्ति और प्रकृति के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा गया हैl

कार्यक्रम में दूसरे वक्ता के रूप में निवेदिता शिक्षा सदन इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ0 आनंद प्रभा सिंह जी ने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का अपने अधिकारों पर ध्यान अधिक है, कर्तव्य पर ध्यान की अपेक्षाl

नागरिक कर्तव्य बोध के लिए समाज के भीतर जाकर तथा कथित सभ्य समाज के मध्य उसका निर्वहन करवाना आवश्यक हैl वक्त ने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसी घटनाएं नियम कानून बनाने से नहीं रुकती वह कर्तव्य बोध निर्वहन से ही रुक सकेंगी मानवीय संवेदनाओं की जागृति आवश्यक हैl वर्तमान समाज ने आत्मीय संबंधों को विस्मृत कर दिया हैl यदि हमें पन्नाधाय, जीजाबाई, लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई जैसे वीर संताने  पुनः पैदा करनी है तो महिलाओं में कर्तव्य बोध की भूमिका को बढ़ाना होगाl भारतीय थल सेना मध्य कमान लखनऊ के कर्नल आदित्यदेव ने कहा कि सैनिकों का जो कर्तव्य सीमा पर होता है वही नागरिक कर्तव्य बोध प्रत्येक नागरिक का देश के प्रति होना चाहिए। यदि हमारे अंदर नैतिक बल है तो कोई भी काम हम आसानी से कर सकते हैंl देश से हम काफी उम्मीदें रखते हैं परंतु हम देश के लिए क्या कर सकते हैं यह महत्वपूर्ण विचार हैl वास्तव में नागरिक कर्तव्य बोध के स्थान पर नागरिक चेतना का विमर्श अधिक उपयोगी होगाl

संविधान का अनुच्छेद 51(A) में स्पष्ट वर्णित है कि मौलिक कर्तव्य मौलिक अधिकार से पहले आते हैंl अपना देश जिस प्रकार आंतरिक और वाह्य रूप से दुश्मनों से घिरा हुआ है ऐसे में हर नागरिक को सुरक्षा चेतना भी होनी चाहिएl
वक्ता ने कई पूर्व बलिदानी सैनिकों के संस्मरण भी सुनाएंl

कार्यक्रम के प्रारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा महामना मदन मोहन मालवीय जी की प्रतिमा एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन करके किया गयाl के. वेंकटरमन घनपाठी द्वारा मंगलाचरण की प्रस्तुति की गईl काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र शनि रस्तोगी ने विश्वविद्यालय का कुल गीत प्रस्तुत कियाl विषय स्थापना राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो0 हेमंत मालवीय द्वारा की गईl सुश्री गोपा गौतम के वंदे मातरम गायन से संगोष्ठी का समापन हुआl कार्यक्रम का संचालन सुनील कुमार द्विवेदी एवं धन्यवाद ज्ञापन कृष्णमोहन द्वारा किया गयाl

इस अवसर पर काशी दक्षिण भाग के मा. भाग संघचालक अरुण, काशी प्रांत के सह प्रांतकार्यवाह राकेश, काशी विभाग के विभाग प्रचारक नितिन सहित बड़ी संख्या में वरिष्ठ गणमान्य नागरिक एवं माता भगिनी उपस्थित थीl

Saturday, August 24, 2024

प्रयागराज : बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार एवं हिंसा रोकने की मांग लेकर हिन्दू समाज ने दिखायी एकता


प्रयागराज। बांग्लादेश में हिंदुओं पर सामूहिक रूप से की जा रही लक्षित हिंसा एवं दमन चक्र से‌ क्षुब्ध हजारों हिन्दुओं ने सडक पर निकल कर हिंदू रक्षा समिति के तत्वावधान में आक्रोश रैली निकाली। वक्ताओं ने हिंसा तत्काल रोकने एवं हिंदुओं को पूर्ण सुरक्षा देने की जोरदार मांग की। सुभाष चौराहे पर आतंकवाद का पुतला फूंका तथा हिंदू रक्षा के लिए आवाज बुलंद की।

विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष कवीद्र प्रताप सिंह ने भारत सरकार से मांग की कि कूटनीतिक उपाय के अलावा हिंदुओं की रक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर सेना का उपयोग करें। जबकि कुछ संतों ने मांग की कि सीमाएं खोल दी जाए संत एवं हिंदू समाज मिलकर अपने हिंदू भाइयों की रक्षा करेंगे।

हल्की बूंदाबांदी के बीच केपी ग्राउंड से गुरुवार को आक्रोश रैली की शुरुआत हुई। रैली में हजारों हिंदू हाथों में तिरंगा एवं केसरिया ध्वज लिए ’बांग्लादेशी हिंदुओं पर अत्याचार नहीं सहेगा। हाथों में ‘‘वी वांट जस्टिस, हिंदुओं को भी जीने का अधिकार है’’ आदि नारे लिखी तख्तियों को हाथों में पकडे हिंदुओं का यह समूह मेडिकल चौराहे से सी. ए. वी. कॉलेज के सामने से हनुमान मंदिर चौराहे पर पहुंचे। सुभाष चौराहे पर मूर्ति के समक्ष आतंकवाद का पुतला फूंका गया। आक्रोश रैली में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, शिक्षक, व्यापारी, छात्र तथा महिलाएं शामिल थी।

रैली में महापौर गणेश केसरवानी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं अन्य कार्यकर्ताओं के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राज बिहारी, शिक्षक डॉ. मुरारजी त्रिपाठी समेत विविध संगठनों के कार्यकर्ता अनेक संत महात्मा व्यापारी शिक्षक तथा छात्र-छात्राए उपस्थित थे।

सुभाष चौराहे पर संपन्न हुई विशाल जनसभा में आयोजकों ने संपूर्ण हिंदू समाज का आह्वान किया कि वे जेहादी तत्वों के विरुद्ध आगे आएं अन्यथा हिंदुस्तान में भी शांति के साथ हिंदुओं का रहना दूभर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी हिंदुओं के खिलाफ जिस प्रकार अत्याचार किये जा रहे हैं, उसे हम अब मौन होकर नहीं सहेंगे। उसके खिलाफ हिंदुओं का संघर्ष जारी रहेगा। सभी हिंदू भाई-भाई है, कोई भी ताकत हमें जाति पंथ मत में नहीं बांट सकती। मंच से उन्होंने हर जोर जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है का उद्घोष किया। इस पर सभी ने तालियां बजाकर अपना समर्थन जताया। भारत में बांग्लादेश की घटना को दोहराए जाने की आशंका जताने वाले नेताओं को करारा जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत के लोग शांति के पुजारी हैं लेकिन कोई हमारी शांति व्यवस्था में खलल डालेगा तो हम इसका भरपूर जवाब देंगे। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि बांग्लादेशी हिंदुओं एवं अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ किए जा रहे अत्याचार को रोकने के लिए कूटनीतिक उपाय के साथ जरूरत पड़ने पर सेना का उपयोग करें तथा संयुक्त राष्ट्र संघ से हस्तक्षेप करने का आग्रह करें। इस अभियान में संपूर्ण हिंदू समाज सरकार के साथ है।

इसके पूर्व योगीराज राजकुमार ने मंच से कहा कि हिंदू जागेंगे तभी रक्षा कर पाएंगे। रैली में परशुराम महाराज ने सरकार से मांग की कि सरकार सीमा खोल दे संतों और हिंदुओं को लेकर हम लोग बांग्लादेश पहुंचकर हिंदुओं की रक्षा करेंगे। इसी दिन के लिए संतो के 13 अखाड़े स्थापित किए गए हैं। हिंदुओं की जान बचाने में कोई भी संत पीछे-पीछे नहीं रहेगा। सच्चा आश्रम के चंद्र देव महाराज ने कहा कि हिंदुओं की रक्षा के लिए नौजवानों को आगे आना होगा। पड़ोस की पीड़ा को हम समझेंगे तभी हिंदुस्तान में भी हिंदुओं की सुरक्षा हो पाएगी। वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ जनसभा समाप्त हुई।



Friday, August 23, 2024

गाजीपुर/चन्दौली : बांग्लादेश की घटना से आहत हिन्दू रक्षा समिति ने हिन्दू जन आक्रोश रैली निकालकर राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन

गाजीपुर/चन्दौली। बांग्लादेश सहित पूरे विश्व में हिन्दुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उददेश्य से गुरूवार को राजकीय होम्योपैथक कालेज गुरूबाग रौजा से हिन्दू जन आक्रोश रैली निकाली गयी| रैली में वक्ता के रूप में सच्चिदानन्द राय, अधिवक्ता रणजीत सिंह, गायत्री शक्तिपीठ के सुरेन्द्र नाथ सिंह, आदित्य प्रकाश आर्य समाज, दिनेश चन्द्र पाण्डेय ने कहा कि बांग्लादेश में हर जिले में यह वीभत्स कुकृत्य होने की सूचना है| कटटरपंथियों के निशाने पर शमशान तक नही बचे है| मंदिरो को भारी क्षति पहुचाई गयी है। निरंतर अंतराल पर होने वाले ऐसे दंगों का ही परिणाम है कि बांग्लादेश में हिन्दू जो विभाजन के समय 32 प्रतिशत से घटकर अब 8 प्रतिशत से भी कम बचे है और वे भी लगातार जिहादी उत्पीड़न के शिकार है। देश की सरकार से हर सम्भव कदम उठाने की मांग करती है। वर्तमान में बांग्लादेश राजनैतिक षड़यत्र और अराजकता की दौर से गुजर रहा है जिसमें वहां  रहने वाले निर्दोष अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर धर्मान्धता के कारण अमानवीय अत्याचार किये जा रहे है। हिन्दुओ की सम्पत्ति को लूटा जा रहा है हिन्दू महिलाओं पर घिनौने अत्याचार किये जा रहे है। उनकी आबरू लूटकर हत्या की जा रही है, जबरन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है। ऐसे में हिन्दू वहां एक लावारिश की भांति अपने जीवन भीख जिहादियो से मांग रहे है। ऐसी परिस्थति में भारत का हिन्दू समाज मुख दर्शक नहीं बना रहेगा। अपने हिन्दू भाई बहनो की सुरक्षा के लिए हम सभी हर सम्भव प्रयास करेगे। बाग्ंलादेश की वर्तमान परिस्थिति को देखते हुए वहा शान्ति एवं सौहार्द कायम रखने हेतु भारत सरकार से अपेक्षा है। हिन्दु हमेशा शान्ति प्रिय रहा है| आज गाजीपुर के सभी हिन्दु संगठन जिसमें व्यापारिक, सामाजिक व धार्मिक संगठनो द्वारा बांग्लादेश में हो रहे हिन्दुओ प्रति अत्याचार के विरूद्ध जनाक्रोष मार्च किया गया। आज हम भारत सरकार को इस ज्ञापन के माध्यम से निवेदन करते है कि बांग्लादेश के साथ साथ विश्व के हिन्दू समुदाय की सहायता व सुरक्षा के लिए जो आवश्यक कदम अतिशीघ्र उठाकर प्रभावी कार्यवाही करे। जिससे हिन्दू समाज की सुरक्षा हो सके। महामहिम राष्ट्रपति भारत गणराज्य को सम्बोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर प्रखर उत्तम को सरयू पाण्डेय पार्क में दिया गया। इस अभियान के समर्थन में सिविल बार एसोसिएशन, अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी, श्री हंसयोग आश्रम, प्रजापति ब्रम्हकुमारी आश्रम, श्रीगुरूसंत आश्रम गुरूबाग, आर्यसमाज समिति, गायत्री शक्तिपीठ, बालदुर्गा पूजा समिति नबाबगंज, मानस समिति हनुमान मंदिर कोट, नव युवक दुर्गा पूजा समिति मारकीनगंज, संयुक्त दुर्गा पूजासमिति चीतनाथ, जिला उद्योग व्यापार मण्डल, बजरंग दल, हिन्दु जागरण मंच, भारत विकास परिषद, अधिवक्ता परिषद, भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ, वनवासी कल्याण आश्रम समिति रहा। रैली ओवरब्रिज विश्वेश्वरगंज होते हुए महुआबाग, ओपियम फैक्ट्री होते हुए कचहरी स्थित सरयू पाण्डेय पार्क मे आकर सभा का रूप लिया।


चन्दौली में हिन्दू समाज ने किया आक्रोश प्रदर्शन, कहा – बांग्लादेश में हिन्दुओं-अल्पसंख्यकों की पीड़ा असहनीय  

चंदौली : बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे है अत्याचार के विरोध में चंदौली में हिन्दू समाज के साथ विभिन्न हिंदू संगठनों ने हिंदू रक्षा समिति द्वारा आयोजित रैली में सहभाग किया| वक्ताओं ने कहा कि बांग्लादेश में हिन्दुओं एवं अन्य अल्पसंख्यक समाज के साथ हो रहे अत्याचार और हिंसा को भारत का हिन्दू समाज सहन नही करेगा| बांग्लादेश में हिन्दू एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का घर जलाया जा रहा है, उनके साथ लूट, हत्या, महिलाओं-बच्चियों के साथ बलात्कार, उनकी हत्याएं की जा रही है| वहां पर अल्पसंख्यक समाज की पीड़ा असहनीय है| वंदेमातरम और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ रैली चंदौली की यूनियन बैंक शाखा के सामने से प्रारंभ होकर कचहरी होते हुए लगभग 6 किलोमीटर यात्रा करके वापस उसी स्थान पर समाप्त हुई| रैली में चंदौली जनपद के विभिन्न हिन्दू संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता सम्मिलित थे| बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं पर अत्याचार के विरोध में हाथों में तख्तियां एवं तिरंगा ध्वज लेकर लोगों ने रैली में सहभाग किया| रैली के पश्चात हिंदू रक्षा समिति के पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को एक ज्ञापन भेजा गया| अंत में समस्त हिंदू समाज द्वारा विश्व में अलग-अलग स्थानों पर रह रहे सभी हिंदू परिवारों की सुरक्षित रहने की भी कामना की गई| रैली में प्रमुख रूप से गुलाब सिंह, रामकिशोर पोद्दार, आशुतोष, डॉ अनिल यादव, शंभू गुप्ता, विकास चौधरी, संतोष उपाध्याय, भुवनेश्वर, रोहित जायसवाल, कृष्णा इत्यादि नागरिक उपस्थित थे|

बांग्लादेश में हिन्दुओं व अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे संयुक्त राष्ट्र संघ – स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती जी

 

वाराणसी. हिन्दू रक्षा समिति वाराणसी ने बांग्लादेश में हिन्दुओं व अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा व अत्याचार के विरुद्ध आक्रोश रैली का आयोजन किया. आक्रोश रैली में संयुक्त राष्ट्र संघ से बांग्लादेश के हिन्दुओं व अन्य अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया.

रैली के प्रारम्भ में आयोजित जनसभा में अखिल भारतीय सन्त समिति एवं गंगा महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानन्द सरस्वती जी ने कहा कि बांग्लादेश में शेख हसीना की लोकतांत्रिक सरकार का तख्ता पलटने के बाद बांग्लादेश के कट्टरपंथी अराजक तत्वों ने हिन्दू, सिक्ख एवं अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक स्थानों, दुकानों, घरों को नष्ट किया है. हिन्दू महिलाओं का अपहरण किया जा रहा है. हिन्दू बालिकाओं पर अत्याचार जारी है. बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर जो अत्याचार हो रहा है, उसे रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ एवं विश्व मानवाधिकार आयोग और अल्पसंख्यक आयोग को तत्काल कार्रवाई करनि चाहिए.

उन्होंने कहा कि भारत के पड़ोस में हिन्दुओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पर भारत चुप नहीं रह सकता क्योंकि भारत की प्रतिबद्धता है कि दुनिया में शान्ति कायम रहे. पाकिस्तान और कुछ विदेशी ताकतें बांग्लादेश के माध्यम से भारत में भी अशान्ति फैलाने के लिए आतंकवादियों की घुसपैठ करा सकती है. हमें इसके प्रति भी सतर्क रहना होगा.

विश्व हिन्दू परिषद ने मांग की कि भारत सरकार बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे. जम्बूद्वीप बौद्ध मठ के प्रभारी सुमेधा थेरो ने कहा कि बांग्लादेश राजनीतिक षड्यंत्र और अराजकता के दौर से गुजर रहा है और वहां के हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध, जैन सम्प्रदाय के नागरिकों पर अत्याचार किया जा रहा है. हम इसकी निंदा करते हैं. गुरुद्वारा गुरुबाग के मुख्य ग्रन्थी सरदार रंजीत सिंह ने कहा कि बांग्लादेश में पाकिस्तान की गुप्तचर एजेन्सी आईएसआई के इशारे पर वहां के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और अन्य अधिकारियों से जबरन त्यागपत्र लिया जा रहा है. हिन्दू, जैन, बौद्ध, सिक्ख आदि अल्पसंख्यकों से उनकी सरकारी नौकरियों से जबरन त्यागपत्र लिया जा रहा है. यह अत्याचार रूकना चाहिए. सन्त रविदास मन्दिर के महन्त भारत भूषण जी ने कहा कि बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति को देखते हुए हम भारत सरकार से यह अपेक्षा करते हैं कि कूटनीतिक, राजनीतिक और संयुक्त राष्ट्र संघ पर दबाव बढ़ाए. यदि आवश्यक हो तो बांग्लादेश में शान्ति स्थापना के लिए सैन्य हस्तक्षेप भी करे. भारत का पूरा हिन्दू सनातन समाज भारत सरकार के साथ खड़ा है.

वाराणसी व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के अध्यक्ष ने भी संबोधित किया. वाराणसी व्यापार मण्डल के महामंत्री, वाराणसी उद्योग व्यापार मण्डल के अध्यक्ष, काशी व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के महामंत्री, उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल, इस्कॉन मन्दिर के प्रतिनिधियों ने भी जनसभा को संबोधित किया तथा बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की.

जनसभा के अन्त में प्रस्ताव पारित किया गया कि आज धर्म एवं विद्या की राजधानी काशी में हिन्दू सिक्ख, बौद्ध, जैन सभी सनातनियों के संयुक्त प्रयास, वाराणसी के सभी व्यापारिक संगठन, समाज की सुरक्षा में सतर्क रहने वाले धार्मिक संगठन, महामहिम राष्ट्रपति एवं भारत सरकार से निवेदन करते हैं कि बांग्लादेश के साथ-साथ विश्व के उन सभी देशों में जहां हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध एवं जैन अल्पसंख्यक हैं, उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाना चाहिए. इसके लिए हिन्दू रक्षा समिति काशी और काशी के सामाजिक, व्यापारिक संगठन भारत सरकार के ऋणी होंगे.

इस आशय का ज्ञापन सौ से अधिक धार्मिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर से राष्ट्रपति को भेजा गया.

सभा के उपरान्त हिन्दू रक्षा समिति के नेतृत्व में विशाल हिन्दू आक्रोश रैली वाराणसी नगर निगम मुख्यालय से भारत सेवाश्रम संघ तिराहा, काशी विद्यापीठ, फूलमण्डी, मलदहिया चौराहा, सिगरा थाना, तिलक मूर्ति से चन्द्रिका नगर होते हुए नगर निगम मुख्यालय पर समाप्त हुई.






जौनपुर में गरजा हिन्दू समाज, बांग्लादेश में बंद हो हिन्दुओं पर हिंसा-अत्याचार

 

जौनपुर। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे हिंसा और अत्याचार के विरोध में हिन्दू रक्षा समिति के तत्वावधान में हिन्दू समाज के लोगों ने आक्रोश प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में उपस्थित लोगों आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि बांग्लादेश के अल्संख्यकों में हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन पर होने वाला हिंसा बंद होना चाहिए। बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन सम्प्रदाय के नागरिकों पर अत्याचार किया जा रहा है और हत्याएं जारी हैं।  हम इसकी निंदा करते हैं। सभी ने अपने वक्तव्य में बांग्लादेश में हो रहे अत्यन्त पीड़ायुक्त नरसंहार का विरोध किया और सो रहे हिन्दुओं को एकजुट होकर जागृत होने का संदेश दिया। सनातन संस्कृति, हिन्दू समाज, मठों इस सबकी रक्षा करने का आह्वान किया। 

    वन्देमातरम् और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ यह प्रदर्शन यात्रा गांधी तिराहे से प्रारम्भ होकर कलेक्ट्रेट, शेषपुर, जोगियापुर, ओलन्दगंज, शाही पुल तथा कोतवाली से होते हुए सद्भावना पुल स्थित श्री नवदुर्गा शिव मन्दिर पहुंचकर समाप्त हुई। यात्रा के प्रारम्भ में हिन्दू समाज के डा. सन्दीप पाण्डेय, विमल सिंह, सुरेन्द्र सिंह, सन्तोष त्रिपाठी ने इस अत्याचार की घोर निंदा की। रैली में अजीत जी, रजत जी, रामचन्द्र जी, पुष्पराज सिंह, सीमा द्विवेदी, विधु प्रकाश शुक्ल, फलाहारी महाराज, सुशील मिश्र समेत हिन्दू महासभा व अनेक हिन्दू संगठनों के साथ व्यापार मण्डल, श्री दुर्गा पूजा महासमिति, जेसीआई, रोटरी, लायन्स सहित कई संगठनों के लोग उपस्थित रहे।

Wednesday, August 21, 2024

रक्षाबंधन के अवसर पर कृति, मन, आचरण, सनातन दर्शन के अनुकूल बनाने का संकल्प लें – डॉ. कृष्णगोपाल जी

काशी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी दक्षिण भाग द्वारा ज्ञानदीप अकादमी में आयोजित रक्षाबंधन उत्सव में सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने कहा कि श्रावण पूर्णिमा को हिन्दू समाज की रक्षा का भाव लेकर हम सभी एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधते हैं. रक्षा सूत्र बांधते समय हमारी शिक्षा, हमारी डिग्री, हमारे एकत्व में बाधा नहीं आने देती है. भाषा, जाति, वर्ण, आर्थिक स्तर शैक्षणिक स्तर, सब गौण हो जाता है, केवल “हम एक हैं” यह भाव शेष रहता है. रक्षाबंधन के दिन स्वयंसेवक अपने मन, चिंतन एवं कृति से धर्म पालन का संकल्प लेता है.

उन्होंने कहा कि जब-जब भारत की शक्ति जागृत हुई है, तब तब ग्रीक, शक, हुण को हमने पराजित किया. जब भी देश विखंडित हुआ है, मुट्ठी भर चने लेकर आने वाले लोग भी यहां शासन करने लगे. हमें रक्षाबंधन के पर्व पर संकल्प लेना होगा कि हमारी कृति, मन, आचरण, व्यवहार सनातन दर्शन के अनुकूल होना चाहिए. संविधान ने भारत के लोगों को समरसता का अधिकार दिया है, परंतु संविधान के आधार पर ही नहीं अपितु हमारे मन में भी समरसता का भाव स्पष्ट दिखना चाहिए.

हिन्दू समाज का विगत 1000 वर्षों का संघर्ष हमें बताता है कि यदि हम संगठित नहीं रहेंगे तो जिस प्रकार पूर्वकाल से खंडित होते हमारे देश का स्वरूप हमें दिख रहा है, यदि भविष्य में लोग अपने देश और संस्कृति के बारे में सजग नहीं होंगे एवं अपनी जीवन शैली में शामिल नहीं करेंगे तो यह खंडित होता स्वरूप कहां तक जाएगा?

सह सरकार्यवाह ने कहा कि हमने नक्षत्र की गति नापी, नाड़ी देखकर रोग का निदान किया. मंदिर रचना, लौह स्तंभ रचना, व्याकरण, दर्शन, न्याय, गणित, बीजगणित, खगोल विज्ञान, बड़े जहाज द्वारा व्यापार, नालंदा-तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालय यह हमारे गौरव के प्रतीक थे. प्राचीन भारत आध्यात्मिक एवं आर्थिक दोनों रूपों से विश्व का सिरमौर था. किंतु मात्र एकता के अभाव में हमें विगत एक हजार वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा.

1905 में जब बंग भंग आंदोलन प्रारंभ हुआ, तब कवि रवींद्र नाथ टैगोर एवं उनके साथियों ने रक्षाबंधन के दिन बंगाल के लोगों को गंगा किनारे बुलाकर नदी में स्नान करवाया एवं वहां से सभी लोग जुलूस निकालते हुए एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधते हुए आगे बढ़े. यह आंदोलन इतना सफल रहा कि 1911 आते-आते बंग भंग का निर्णय समाप्त कर दिया गया. इस आंदोलन के प्रभाव से कोलकाता से राजधानी दिल्ली कर दी गई.

काशी की जीवन शैली में समरसता का भाव निहित

काशी का वर्णन करते हुए कहा कि यहां भारत एवं उसकी विभिन्न प्राचीन गौरवमयी संस्कृतियों का दर्शन होता है. यहां तीर्थंकरों, शंकराचार्य, महात्मा बुद्ध, संत रविदास एवं संत कबीर जैसे मुनियों के विचारों का भी दर्शन होता है. यहां पर सभी ने अपने विचारों का तत्व बोध कराया. विभिन्न प्रकार की उपासना पद्धति को काशी ने विशेष स्थान दिया है. इसी प्रकार संघ भी हिन्दू समाज में समन्वय को स्थापित करने का उद्देश्य लेकर कार्य कर रहा है.

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय स्थित विश्वनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार पर जो श्लोक वर्णित है, उसमें महामना के विचारों को स्पष्ट देखा जा सकता है – विश्वनाथ जी की कृपा प्रसाद से काशी में भागीरथी के किनारे पर एक महान विश्वविद्यालय की स्थापना हो रही है जो हिन्दू नाम के मान वर्धन करने के लिए हो रही है. संघ भी इस हिन्दू मान वर्धन हेतु कार्य कर रहा है.

जब तक हम सभी अपने आसपास के वंचित लोगों को अपने परिवार में बैठा कर उन्हें पवित्र हिन्दू समाज का अंग नहीं मानेंगे, तब तक समरसता केवल उद्बोधन में ही रहेगी.

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. वांगचुक दोरजी नेगी (कुलपति, तिब्बती अध्ययन उच्च संस्थान सारनाथ) ने कहा कि माता-पिता का दायित्व है कि बच्चों में संस्कार दें. बालकों में बौद्धिकता के विकास हेतु उन्हें किसी प्रकार के दबाव में नहीं डालना चाहिए. सेवा भाव के समर्पण को अपने जीवन में आत्मसात करने का प्रयास करना चाहिए.

कार्यक्रम के प्रारंभ में काशी विभाग के विभाग संघचालक प्रो. जेपी लाल एवं काशी दक्षिण भाग के संघचालक अरुण कुमार सहित मंचस्थ अतिथियों ने भगवा ध्वज को रक्षा सूत्र बांधा.

हनुमान प्रसाद पोद्दार महाविद्यालय से संबंधित पूर्वोत्तर भारत के बालक एवं बालिकाएं पारंपरिक वेशभूषा में आकर्षण का केंद्र रहे. कार्यक्रम का संचालन भाग कार्यवाह रामकुमार जी ने किया l

 इस अवसर पर काशी प्रांत के प्रान्त प्रचारक रमेश जी, प्रांत कुटुंब संयोजक शुकदेव त्रिपाठी, काशी प्रांत अभिलेखागार प्रमुख सत्य प्रकाश पाल, विभाग कार्यवाह राजेश, विभाग प्रचारक नितिन, भाग प्रचारक आदर्श सहित बड़ी संख्या में समाज के बंधु, माताएं एवं भगिनी उपस्थित रही l