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Saturday, March 31, 2012

संघ कार्यालय में स्वयंसेवकों ने दी अंजनी आचार्य जी को श्रद्धांजलि






वाराणसी, 28 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भूतपूर्व भाग संघचालक अंजनी आचार्य जी के निधन पर बुधवार को सिगरा स्थित संघ कार्यालय में स्वयंसेवकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के शारीरिक प्रमुख श्री चन्द्रमोहन जी ने अंजनि आचार्य जी को संघ का ध्येनिष्ठ कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि संघ संस्थापक डाॅ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन को पढ़ने से जो कार्य करने की प्रेरणा मिलती है। वही प्रेरणा श्री आचार्य जी के प्रत्यक्ष जीवन से मिलती है। जीवन भर उन्होंने दूसरे की सेवा सेवा करते रहे। अपने पेंशन को वे वनवासी कल्याण आश्रम, सेवाभारती, गरीब छात्रों को पढ़ाने में व्यय करते थे। अन्तिम समय में नेत्र और देहदान समर्पित कर दी।
संस्कृत भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री डाॅ. संजीव कुमार ने कहा कि आचार्य जी ने समाज सेवा एवं राष्ट्र सेवा जीवन के अंतिम क्षणों तक किया। एक आदर्श स्वयंसेवक की भाँति राष्ट्र में घटित घटनाओं से अपने को पूर्णतः सम्बद्ध करने वाले आचार्य जी अवकाश प्राप्ति के बाद पेंशन की राशि आने से पूर्व ही जरूरत मंद लोगों की सूची तैयार रखते थे। नगर कार्यवाह एवं भाग संघचालक आदि विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए 21 मार्च को काशी में शरीर का त्याग किया।
श्रद्धांजलि सभा में आचार्य जी के पुत्र कमाण्डिंग आफिसर डीआईजी एन. वी. नर्सिम्ह ने बताया कि मेरे पिता स्वर्गीय अंजनी आचार्य (82 वर्ष) सन् 1952 ई. में दक्षिण भारत से माताजी के साथ काशी में अध्ययन हेतु आये और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से बी.एस.सी. उत्तीर्ण हुए। अध्ययन काल में जीविका निर्वाह हेतु काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में ढाबा चलाए, पान का दुकान, होटल क्लार्क में सेवा करते हुए गृहस्थ आश्रम का सुचारू संचालन करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आकर व्यक्तित्वनिर्माण जीवन में अनुशासन और राष्ट्रसेवा का ही संस्कार पाकर ध्येयपूर्ण जीवन जीया।
आचार्य जी के दूसर पुत्र हिमाचल प्रदेश में आग्लभाषा के एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. राजगोपाल जी ने कहा कि राष्ट्र के सुख दुःख की संवेदनाओं से पूर्णतः सम्बद्ध जीवनव्रती आचार्य जी नेत्रदान एवं देहदान कर भविष्य में आने वाली पीढ़ी को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अपना पार्थिव देह समर्पित कर दिया। देहदान का निर्णाय परिवार के लिए कठिन था फिर भी उनकी अंतिम इच्छानुसार उनके पार्थिव देह को राष्ट्रकार्य के लिए काशी हिन्दूविश्वविद्यालय के सरसुन्दरलाल अस्पताल प्रशासन को समर्पित किया गया।
संघ प्रान्त कार्यकारिणी के सदस्य श्री रामसूचित पाण्डेय ने कहा कि आचार्य जी ने संघ में अपना एक पदचिन्ह बनाया है। सच्ची श्रद्धांजलि उनके पदचिन्हों पर चलना है।
इस अवसर पर श्री मणिचेलन ने उनके आदर्श जीवन का अनुकरण करने की महत्ता बताई। आचार्य जी हम लोगों के बीच भौतिकरूप से नही हैं लेकिन उनकी पवित्र स्मृतियां है। जो हमें सदैव प्रेरणा देती रहेगी।
काशीनाथ शास्त्री ने कहा कि आचार्य जी दूसरों को प्रेरणा अपने जीवन से देते थे। मृदुभाषी और शान्त स्वभाव के थे। इस प्रकार वे एक आदर्श स्वयंसेवक थे। उनका पूरा परिवार संघमय था। अपने बच्चों को उन्होंने अच्छा संस्कार दिया।
इस अवसर पर संघ स्वयंसेवाकों ने आचार्य जी के बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त कार्यवाह डाॅ. वीरेन्द्र जायसवाल, बौद्धिक प्रमुख डाॅ. रामदुलार सिंह, प्रान्त प्रचारक अभय कुमार जी, प्रान्त व्यवस्था प्रमुख, जयप्रकाश जी, प्रचार प्रमुख कृष्ण मोहन जी, कार्यालय प्रमुख अशोक उपाध्याय, विभाग प्रचारक रत्नाकर जी, जिला प्रचारक हरिशंकर जी, भाजपा के क्षेत्र संगठन मंत्री ओम प्रकाश जी, महानगर अध्यक्ष रामगोपाल मोहले, जिला संघचालक डाॅ. शुकदेव त्रिपाठी, विभाग धर्म जागरण प्रमुख श्री मुरली जी, एन. श्रीनिवास, रामकृष्ण जी, आनन्द अग्रवाल, अरूण श्रीवास्तव, सुनील किशोर द्विवेदी, गौरीशंकर जी, जितेन्द्र नारायण ंिसह, विद्या भारती के अर्जुन उपाध्याय, पवन उपाध्याय आदि सैकड़ो लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन दीनदयाल पाण्डेय ने किया।

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