प्रयागराज। गंगापार स्थित कौड़िहार के कुरेसर घाट पर हुई घटना ने मानव धर्म और संघ संस्कारों को जीवंत किया। कौड़िहार निवासी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक खण्ड शारीरिक शिक्षण प्रमुख सुरेश केशरवानी जी अपने प्राण न्यौछावर कर गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित चौपाई ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई’ को चरितार्थ किया।
स्थानीय लोगों के अनुसार सोमवार
प्रातः कुरेसर घाट पर एक परिवार स्नान कर रहा था। उस परिवार के राम सिंह यादव
डूबने लगे,
उन्हें बचाने उनका छोटा भाई नितेश और उनकी पत्नी अनीता भी कूद पड़ी।
तीन लोगों को डूबते देख जब चीख पुकार मची तो सुरेश जी ने एक क्षण भी देर नहीं की
और तेज धारा में छलांग लगा दी। उन्होंने दो लोगों को तो बचा लिया, लेकिन महिला को बचाते बचाते स्वयं काल के गाल में समा गए। प्रशासन और जल
पुलिस की टीम देर रात तक महिला और सुरेश केशरवानी के शव को ढूंढने में लगी रही।
मंगलवार दोपहर को संघ स्वयंसेवक सुरेश का शव मिला। सुरेश केशरवानी प्रतिदिन की तरह
शाखा के पश्चात नहाने के लिए कुरेसर घाट गए थे।
न कोई पहचान, न कोई रिश्ता, अजनबी सुरेश बने फरिश्ता
लोगों ने बताया कि डूब रहे लोगों से सुरेश जी की कोई जान पहचान नहीं थी, फिर भी जान की बाजी लगाने से पीछे नहीं हटे। उन्होंने दो लोगों को जीवन दिया। उनका यह समर्पण मानवता का उदाहरण बन गया।
संघ कार्य में बीतता था दिन
परिजनों ने बताया कि सुरेश को बस एक
धुन संघ कार्य की रहती थी। कहते थे कि हम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता
हैं, और हमें जीवन समाज के लिए ही मिला है। देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो
कुछ देना सीखें। लेकिन किसे पता था कि सुरेश इतना शीघ्र अपना सब कुछ अर्पण कर
हमारे बीच से चले जाएंगे।


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