स्वयंसेवक सतर्क होकर राष्ट्र रक्षा के लिए कार्य करें — रमेश जी
काशी। समाज को विघटनकारी शक्तियों के विरुद्ध संगठित होकर देवत्व का निर्माण करना होगा। आसुरी शक्तियों के बढ़ने से देवता संगठित हुए, जिससे देवी दुर्गा का प्रादुर्भाव हुआ। असंगठित होने से दैत्य शक्ति में वृद्धि होती है। विजयादशमी के पूर्व नौ दिनों तक देवी की आराधना का संदेश यह है कि हम अपनी आंतरिक शक्ति में वृद्धि करें। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी दक्षिण भाग के शिवाला स्थित रत्नाकर पार्क में विजयादशमी उत्सव कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय टोली सदस्य रामाशीष जी ने मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 101 वाँ
वर्ष पूर्ण होने पर स्थापना दिवस की शुभकामना देते हुए वक्ता ने कहा कि भगवान राम
भारतवर्ष का अंक है इन्हें बचा कर रखने की आवश्यकता है।
क्योंकि यदि एक अंक सुरक्षित है तो
उसके आगे लगने वाले शून्य संख्या में गुणात्मक वृद्धि करेंगे जबकि एक अंक मिट जाने
पर केवल शून्य बचेगा । हिंदुत्व की वर्तमान स्थिति पर विचार रखते हुए वक्ता ने कहा
कि भारत ने अपना दो तिहाई भूखंड खो दिया है, अफगानिस्तान
पाकिस्तान बांग्लादेश में हिंदुओं की दशा अत्यंत शोचनीय हो गई है । भारत में
हिंदुत्व की विचारधारा को मजबूत करने की आवश्यकता है । जाति व्यवस्था पर हिंदू
समाज को सावधान करते हुए रामाशीष जी ने कहा कि जिस प्रकार केले और प्याज को
बार-बार छीलने पर सिर्फ छिलका रह जाता है, केला और प्याज
पूरे नहीं मिलते हैं । उसी प्रकार हिंदू समाज को जाति में बांटने पर हिंदू राष्ट्र
को कुछ भी नहीं मिलेगा।
विदेशी ज्ञान एवं विज्ञान के भारत
में आने पर वक्ता ने बताया कि अपने मकान में स्वच्छ हवा आने के लिए खिड़की खोलना
आवश्यक है ना की पूरी दीवाल को हटाया जाता है अतः भारत को अपनी दीवारें नहीं
गिरानी चाहिए । भारतीय ज्ञान विज्ञान ही भारत की मजबूत दीवारें हैं । संघ की
स्थापना के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय टोली सदस्य ने
बताया कि हिंदू समाज अपने आंतरिक शक्ति के विघटन के कारण विदेशी आक्रांताओं से
परास्त हुआ । यूरोप का एक समूह यहां व्यापार करने आया था और सत्ता पर स्थापित हो
गया । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हिंदू समाज को शारीरिक ,मानसिक ,आर्थिक और
राजनीतिक दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए हुई है । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए
शेखर द्रविड़ घनपाठी जी ने कहा कि सभी के मंगल की कामना करने वाला एकमात्र धर्म
हिंदू धर्म है ।
हिंदू समाज को भी इस चिंतन को ध्यान में रखना चाहिए कि जो राष्ट्र हमें सब कुछ प्रदान करता है हम भी उसके लिए तन, मन ,धन से खड़े रहे । कार्यक्रम के प्रारंभ में मंचासीन अतिथियों द्वारा शस्त्र पूजन किया गया । विजयादशमी उत्सव का संचालन शाखा कार्यवाह रंजीत जी ने किया।
स्वयंसेवक सतर्क होकर राष्ट्र रक्षा
के लिए कार्य करें — रमेश जी
काशी मध्य के चांदपुर औद्योगिक
संस्थान स्थित महेश शाखा में काशी प्रान्त के प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने कहा कि
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डाॅ0 केशव बलिराम हेडगेवार ने मूल रूप से
आधार अथवा जड़ों पर काम किया। विजयादशमी के अवसर पर हम रावण को जलाते हैं। रावण के
दस सिर थे। भगवान श्रीराम बार-बार सिर काटते थे और वे जम आते थे। लेकिन जब भगवान
श्रीराम ने रावण की नाभि में प्रहार किया तो वह मरा। इसीलिए डाॅ0 हेडगेवार ने
चरित्र निर्माण को आधार बनाकर समाज की जड़ों में व्याप्त कुरीतियों के केन्द्र अथवा
नाभि को भेदने का कार्य किया। हम सदियों से इसलिए गुलाम और पराजित रहे क्योंकि
व्यक्ति और समाज के व्यवहार और चरित्र में भेदभाव और कुरीतियां व्याप्त थी। इसे
मिटाने के लिए डाॅ0हेडगेवार ने उसी प्रकार की शक्ति समाज के बीच प्रकट किया जैसे
नवरात्र की आराध्य देवी दुर्गा देवताओं की सामूहिक शक्ति से प्रकट हुई थी और
देवताओं ने उन्हें अस्त्र-शस्त्र दिये। ठीक उसी प्रकार डाॅ0हेडगेवार ने संघ के
माध्यम से समाज की सज्जन शक्ति को एकत्र किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में
विश्व की शक्तियों द्वारा भारत के विकास को रोकने के लिए षड़यंत्र जारी है, हम स्वयंसेवक
सतर्क होकर राष्ट्र रक्षा के लिए कार्य करें। सौ वर्षाें में अर्जित हिन्दू शक्ति
से श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति हो सकी और आगे विश्वनाथ मंदिर भी मुक्त होगा। इस अवसर
पर स्वयंसेवकों द्वारा परम्परागत विधि से शस्त्र पूजन सम्पन्न किया गया।
बागीश्वरी नगर में काशी विभाग
कार्यवाह राजेश जी ने कहा कि संघ संस्थापक परमपूज्य डा. हेडगेवार जी ने राष्ट्र की
अवनति के तीन प्रमुख कारणों को समझा पहला देश के गौरवशाली इतिहास की विस्मृति, दूसरा सम्पूर्ण
समाज का हित नहीं बल्कि व्यक्तिगत हित का भाव और तीसरा सामूहिक एकता की कमी। समाज
के इन दोषों को दूर करने हेतु स्वाभिमानी, संस्कारित, चरित्रवान, अनुशासन एवं
देशभक्ति से परिपूर्ण परन्तु व्यक्तिगत अहंकार से दूर रहने वाले लोगों के संगठन की
आवश्यकता और उसके महत्व को समझकर 1925 में आज ही के दिन डा. साहब ने संघ की स्थापना
की। दैनंदिन संघ की शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण एवं व्यक्ति निर्माण से
राष्ट्र निर्माण की यह अनोखी पद्धति डा. साहब द्वारा विकसित की गयी।
काशी उत्तर भाग के दीनदयालपुर स्थित
वाटर पार्क मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव के मुख्य वक्ता काशी विभाग के सह
विभाग कार्यवाह डॉ आशीष जी ने कहा कि अहंकार ही रावण का वास्तविक स्वरूप है। हमें
अपने भीतर के अहंकार पर विजय प्राप्त कर सत्य, सदाचार एवं
विनम्रता को अपनाना चाहिए। वक्ता ने कहा कि समाज में बदलाव की अपेक्षा करने से
पहले हमें स्वयं में परिवर्तन लाना चाहिए तथा अपने परिवार से इसकी शुरुआत करनी
चाहिए।
काशी उत्तर भाग के वरुणा नगर में आयोजित विजयादशमी उत्सव को मुख्य
वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए विभाग प्रचारक श्रीमान नितिन जी ने कहा कि संघ
की स्थापना से लेकर 101वें वर्ष तक की यात्रा, स्वयंसेवक
निर्माण, संगठन विस्तार, समाजसेवा एवं राष्ट्र निर्माण में योगदान
का काल खण्ड रहा। काशी महानगर के सभी 33
नगरों में विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया गया, कई स्थानों पर पथ संचलन का भी आयोजन रहा।





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