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Saturday, June 26, 2021

धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए विहिप ने उठाई केन्द्रीय कानून की मांग

 

दिल्ली के जामिया नगर से धर्मांतरण के षड्यंत्रकारियो के पकड़े जाने के बाद पूरे देश को यह स्पष्ट हो गया है कि धर्मांतरण का जाल कितना गहरा, व्यापक, घिनौना और राष्ट्रव्यापी है. ये लोग अभी तक भोले और मासूमों को अपना शिकार बनाते थे. अब वे मूक-बधिर बालकों को भी निशाना बनाने का अमानवीय अपराध कर रहे हैं. कई बच्चे लापता हैं. इनको आतंकी गतिविधियों में शामिल किए जाने की आशंका है.


इन लोगों को विदेशों से भी पैसा मिल रहा है तथा मुस्लिम समाज का एक वर्ग इनका समर्थन भी कर रहा है. इसीलिए बिना तथ्यों के जाने एक मुस्लिम नेता ने इनको निरपराध घोषित कर दिया. हो सकता है इनके बचाव के लिए ये लोग महंगी फीस देकर बड़े वकीलों की एक फौजी भी खड़ी कर दें, जैसा ये पहले भी करते रहे हैं. इनका यह षड्यंत्र आज का नहीं है. इस्लाम के भारत में प्रवेश के साथ ही धर्मांतरण का कुचक्र शुरू हो गया था. इस षड्यंत्र का स्वरूप राष्ट्रव्यापी है तथा इसके कई रूप सामने आ चुके हैं. इसीलिए न्यायपालिका ने कहा था कि लव जिहाद धर्मांतरण का सबसे घिनौना रूप है.


कोरोना काल में पीड़ितों की सहायता के लिए संपूर्ण देश पूर्ण समर्पण के साथ जुटा है. परंतु, जेहादी और मिशनरी अपने इस घिनौने एजेंडे को लागू करने में लगे हैं. उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून होने के कारण इनका यह गिरोह पकड़ा गया. परंतु जहां यह कानून नहीं है, वहां तो, इनके लिए मैदान खुला है. टूल किट गैंग इनकी सहायता के लिए तत्पर रहता ही है.


विहिप का मत है कि अब धर्मांतरण के इस घिनौने स्वरूप की व्यापक जांच के लिए नियोगी कमीशन जैसा जांच आयोग बनाना चाहिए, जिसका कार्यक्षेत्र संपूर्ण देश हो. नियोगी कमीशन और वेणु गोपाल कमीशन ने धर्मांतरण विरोधी केंद्रीय कानून बनाने की सिफारिश की थी. संविधान सभा के कई सदस्य भी इसी मत के थे. इसलिए केंद्र सरकार को अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए एक कानून बनाने पर विचार करना चाहिए. धर्मांतरण के कारण देश विभाजन की एक त्रासदी झेल चुका है और जेहादी आतंकवाद की पीड़ा का सामना कर रहा है. अब भारत को इस मानवता विरोधी षड्यंत्र से मुक्त कराने का समय आ गया है.

स्रोत- विश्व संवाद केन्द्र, भारत 

Thursday, June 24, 2021

उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव

  • सोशल मीडिया पर भी छाया रहा #हिन्दूसाम्राज्यदिवस

  • ट्विटर पर दूसरे स्थान पर किया ट्रेंड

    काशी| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त द्वारा बुधवार को हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव विभिन्न नगरों की शाखाओं पर मनाया गया। प्रान्त के काशी विभाग के सिगरा क्षेत्र में केशव शाखा पर अखिल भारतीय गो सेवा संयोजक अजीत प्रसाद महापात्र जी एवं काशी प्रान्त प्रचारक रमेश जी के साथ नगर के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस विशिष्ट पर्व पर पूर्व महानगर संघचालक डॉ. बी. बी. लाल जी ने हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव का महत्व स्वयंसेवको को बताया। जयप्रकाश शाखा रेलवे कॉलोनी में भाग कार्यवाह डॉ. आशीष जी ने हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव और वर्तमान भारत के परिप्रेक्ष्य पर अपने मूल्यवान विचार रखे।

    लाजपत नगर की कैन्टोनमेंट स्थित माँ चण्डिका शाखा पर भाग सेवा प्रमुख  सुरेन्द्र जी ने शिवाजी व अफजल खान के मध्य हुए युद्ध व अफजल खान की मौत के साथ शिवाजी की विजयश्री पर प्रकाश डाला गया। इस दौरान लाजपत नगर के संघचालक डॉ गंगाधर राय के साथ माँ चण्डिका शाखा के स्वयंसेवक उपस्थित थे| प्रेमचन्द्र नगर में सुधाकर शाखा पर भाग के सह शारिरिक प्रमुख जितेंद्र जी ने शिवाजी के जीवन मे भगवान श्रीकृष्ण के आचरण व उनकी महाभारत काल की युद्ध नीति को किस प्रकार शिवाजी ने अपने आचरण में समाहित किया,   इस विषय पर चर्चा की।

    बागेश्वरी नगर जैतपुरा मे माँ बागेश्वरी शाखा पर काशी उत्तर भाग संघचालक वीरेंद्र गुप्त जी की अध्यक्षता में प्रान्त के सह शारीरिक प्रमुख राकेश अग्रहरि जी ने शिवाजी के हिन्दू साम्राज्य की स्थापना के पश्चात देश भर में हिन्दू शासकों की एकजुटता पराक्रम पर अपना बौद्धिक प्रदान किया। गौतम नगर में ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित कर हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव मनाया गया। संगोष्ठी में हिन्दू साम्राज्य दिवस आविर्भाव पर जगतपुर इंटरमीडिएट कॉलेज, जगतपुर के प्रवक्ता रेवती रमण शर्मा ने अपना विचार रखा। उन्होंने तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला और शिवाजी महाराज के द्वारा हिन्दू साम्राज्य की एकता-अखंडता का नव निर्माण हेतु किये गए कार्यों की चर्चा की। रेवती जी ने बताया कि आज के ही  दिन शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था। यह दिवस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विशिष्ट पर्वों में से एक है। कार्यक्रम में गौतम नगर के दर्जनों स्वयंसेवको ने सहभागिता की।

    हिन्दू साम्राज्य दिवस के उपलक्ष्य में गौतम नगर द्वारा  छत्रपति शिवा जी महाराज के चित्र पर पुष्पार्चन व दीप प्रज्जवलित कर उसत्व मनाया गया। कार्यक्रम में हिन्दू साम्राज्य दिवस के महत्व के संदर्भ में चर्चा की गई।

    इसी प्रकार रविदास नगर मच्छोदरी क्षेत्र, भारतेन्दु बेनिया, मैदागिम नगर, विश्वेश्वर नगर गौदौलिया व पक्का महाल क्षेत्र, चेतसिंह नगर लहुराबीर क्षेत्र, शिव नगर राजर्षि नगर कपिल नगर में भी शाखा पर विविध कार्यक्रम आयोजित हुए। काशी दक्षिण भाग के प्रचार प्रमुख रवि जी ने बताया कि हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव पर नगरों की शाखाओं पर कार्यक्रम हुए जहाँ काशी प्रान्त के सह प्रान्त कार्यवाह डॉ राकेश तिवारी ने माधव नगर स्थित शाखा पर शिवा जी के राज्यारोहण के बारे में स्वयंसेवको को बताया| उन्होंने तत्कालीन हिन्दू समाज की तुलना वर्तमान परिस्थितियों से करते हुए वर्तमान युग में भी शिवा जी की नीतियों को प्रासंगिक बताया| विभाग कार्यवाह त्रिलोक नाथ जी ने विवेकानंद नगर में कार्यक्रम को सम्बोधित किया| कोरोना महामारी के कारण अन्य स्थानों पर वर्चुअल कार्यक्रम भी आयोजित किये गए| इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया पर भी हिन्दू साम्राज्य दिन उसत्व छाया रहा| ट्विटर पर #हिन्दूसाम्राज्यदिवस हैज टैग दूसरे स्थान पर रहा|

Thursday, June 17, 2021

सफल नहीं होगा ‘रामद्रोही वर्ग’ का षड्यंत्र

 - लोकेंद्र सिंह


जब ऋषि-मुनि समाज कल्याण के उद्देश्य के साथ यज्ञ-हवन करते थे
, तब पुनीत कार्य में बाधा उत्पन्न करने के लिए राक्षस अनेक प्रकार के धतकर्म करते थे. प्राचीन ग्रंथों में अनेक स्थानों पर इस प्रकार का वर्णन आता है. समय बदल गया, परिस्थितियां बदल गईं. लेकिन राक्षस कर्म वैसा का वैसा ही है. देश में कुछ ताकतें ऐसी हैं, जो वर्षों से रामकाज में बाधा उत्पन्न करने के भरसक प्रयास करती आ रही हैं.

पहले इन ताकतों ने यह सिद्ध करने के लिए पूरा जोर लगा दिया कि अयोध्या में श्रीराम का कोई मंदिर नहीं था. जब लगा कि इनके झूठ चल नहीं रहे तो न्यायालय में जाकर सुनवाई को टालने के प्रयास किए. इस काम में भी जब सफलता मिलती नहीं दिखी तो कहने लगे कि मंदिर की जगह अस्पताल या स्कूल बनाना चाहिए. परंतु, न्यायालय से लेकर समाज तक ने एकजुटता से इनकी मंशा को पूरा नहीं होने दिया. जब सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के पक्ष में निर्णय दिया और वहाँ मंदिर निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ने लगी, तब इस ‘रामद्रोही वर्ग’ के कलेजे पर खूब सांप लौटे. मंदिर निर्माण में समाज के सहयोग और उत्साह को देखकर उन्हें बहुत पीड़ा हुई. जब रामभक्तों ने अपने प्रभु के भव्य मंदिर के लिए दिल खोलकर समर्पण किया, तब भी रामद्रोही वर्ग को बहुत कष्ट हुआ. उन्होंने उस समय भी भरपूर प्रयास किए कि लोग श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए दान न दें. लेकिन, समाज ने तब भी उनकी नहीं सुनी.

अधम गति को प्राप्त हो चुका यह वर्ग अभी भी बेशर्मी से श्रीराम मंदिर के पुनीत कार्य को बदनाम करने के प्रयासों में लगा हुआ है. इस पृष्ठभूमि से आप समझ गए होंगे कि श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए कथित ‘जमीन घोटाले’ के पीछे कौन-सी मानसिकता एवं षड्यंत्र है. जिन्होंने यह प्रयास किए कि श्रीराम मंदिर के निर्माण के लिए लोग दान न दें, वे आज ‘रामधन’ को लेकर चिंतित होने की नौटंकी कर रहे हैं. जिन्होंने न्यायालय में हलफनामा दिया कि राम का कोई अस्तित्व नहीं है तथा राम काल्पनिक थे, वे आज ‘रामनाम’ ले रहे हैं. ऐसे में उनके पाखंड को समझना किसके लिए कठिन है. दरअसल, रामद्रोही वर्ग नहीं चाहता कि देश के स्वाभिमान से जुड़े पुनीत स्मारक का निर्माण निश्कलंक और निर्विघ्न सम्पन्न हो. वह अभी तक श्रीराम को स्वीकार नहीं कर सका है.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से चंपत राय जी ने समूची सच्चाई को प्रकट कर दिया है, लेकिन धूर्त अभी भी नहीं मानेंगे. क्योंकि उनका तो काम ही है, धूल का गुब्बार उड़ाकर लोगों के सामने धुंध उपस्थित करना और खुद दूर खड़े होकर तमाशा देखना. परंतु, वे भूल गए कि यह रामकाज है, यहाँ उनकी धूर्तता चलने वाली नहीं. जिन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए समर्पण किया है, उन्हें भली प्रकार पता है कि उनकी एक-एक पाई का उपयोग ‘रामकाज’ में होगा. यह निश्चित है कि राष्ट्रनिर्माण के यज्ञ में विघ्न पैदा करने का काम कर रहीं राक्षसी मानसिकता कभी सफल नहीं हो सकती.

स्रोत- विश्व संवाद केन्द्र, भारत 

शिकंजा – आयकर विभाग ने पीएफआई का 80जी का रजिस्ट्रेशन रद्द किया

नई दिल्ली. पिछले कुछ समय से आतंकी गतिविधियों व हिंसक में शामिल होने के आरोपों के बीच आयकर विभाग ने मंगलवार को इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है. आयकर विभाग ने सेक्शन 12AA(3) के तहत रजिस्ट्रेशन रद्द किया है. आयकर विभाग को लगता है कि कोई संस्था या ट्रस्ट वास्तविक नहीं है और ये अपने ट्रस्ट के अनुरूप काम नहीं कर रहा है तो वो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर सकता है. PFI पर पिछले साल सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को फाइनेंस करने का आरोप लगा है.

आयकर विभाग सामाजिक, सांस्कृतिक और परोपकार के लिए कार्य करने वाले संगठनों को 80जी का प्रमाणपत्र देता है. इससे उन संगठनों को जो लोग दान देते हैं, उन्हें पूरी या आंशिक रूप से आयकर में छूट मिलती है. पीएफआई ने भी अपने को एक सामाजिक और सेवा संगठन बताकर आयकर विभाग में 80जी का रजिस्ट्रेशन कराया था.

आयकर विभाग ने पीएफआई को सेवा संगठन न मानकर राजनीतिक संगठन माना है और कहा कि यह संगठन विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारा और मित्रता को समाप्त करने वाले कार्यों में संलिप्त है. यह भी कहा गया कि पीएफआई एक विशेष मजहबी समुदाय को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रहा था. यह आयकर अधिनियम 1961 के खंड 13(1)(बी) का उल्लंघन था. आयकर विभाग ने पीएफआई के विरुद्ध कार्रवाई की है.

आतंकी संगठनों से संबंध

केरल में 2006 में स्थापित पीएफआई का नाम सीएए के विरोध से लेकर दिल्ली के दंगों तक में उछला. यही नहीं, पीएफआई से जुड़े 100 से अधिक युवा आतंकवादी बन चुके हैं. अनेक ऐसे आतंकवादी गुट हैं, जिनके तार पीएफआई से जुड़े हैं. हालांकि ऐसे मामलों से पीएफआई अपने आपको किनारे कर लेती है. वह बार-बार यही कहती है, ‘‘जो लोग आईएसआईएस में शामिल हुए हैं, उन्होंने बहुत पहले ही पीएफआई को छोड़ दिया था या उन्हें निकाल दिया गया था.’’ यह पीएफआई की रणनीति का एक हिस्सा है.

प्रतिबंध के बाद सिमी ने पीएफआई का रूप धारण कर लिया. यानि पीएफआई में वही लोग सक्रिय हैं, जिन लोगों ने सिमी को खड़ा किया था. पीएफआई का नक्सलियों से भी संबंध है. यही कारण है कि कुछ वर्ष पहले झारखंड सरकार ने पीएफआई को प्रतिबंधित किया था, तो अनेक नक्सली संगठनों ने प्रतिबंध हटाने की मांग की थी.


ED ने कहा- फंड का इस्तेमाल समरसता बिगाड़ने में हुआ

ED ने मंगलवार को स्पेशल कोर्ट में कहा कि PFI ने केरल में टेरर कैंप के लिए फंड इकट्ठा किए. जांच के दौरान पता चला कि इन फंड का इस्तेमाल आतंक से जुड़ी गतिविधियों और सामाजिक समरसता बिगाड़ने के लिए किया गया. PFI और इससे जुड़ी संस्थाओं के बैंक अकाउंट की जांच के दौरान ये तथ्य सामने आए हैं.

ED ने बताया कि हमने 2013 में ये केस अपने हाथ में लिया था, जब NIA ने PFI के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. इस चार्जशीट में कहा गया था कि PFI/SDPI के एक्टिविस्ट आपराधिक साजिश में शामिल हैं और उन्होंने अपने कैडर को हथियारों और विस्फोटकों की ट्रेनिंग दी. ये ट्रेनिंग कन्नूर जिले में लगाए गए आतंकी कैंपों में दी गई. इनका मकसद दो धर्मों के लोगों के बीच नफरत पैदा करना और आतंकी गतिविधियों के लिए उन्हें तैयार करना था.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सोमवार को उन जगहों पर छापा मारा, जहां PFI ने आतंकी कैंप लगाए थे. यहां से जिलेटिन की छड़ें और डेटोनेटर्स भी बरामद किए हैं. छापा कोल्लम के जंगलों में मारा गया था. यहां से बैटरी, डेटोनेटर्स के अलावा भड़काऊ साहित्य भी मिला है.


हाथरस कांड के दौरान हिंसा भड़काने की साजिश रचने का आरोप

PFI का नाम यूपी के चर्चित हाथरस कांड में आया था. आरोप लगा था कि जस्टिस फॉर हाथरस नाम से बनी एक वेबसाइट पर जाति के नाम पर भड़काकर हिंसा फैलाने के लिए घटना से जुड़ी फर्जी खबरें दी गईं. इसी दौरान PFI से जुड़े 4 लोगों को यूपी पुलिस ने अरेस्‍ट किया था. पुलिस को शक था कि जस्टिस फॉर हाथरस वेबसाइट के पीछे PFI हो सकता है.

स्रोत- विश्व संवाद केन्द्र, भारत 

गाजियाबाद घटना में झूठे प्रोपेगंडा का पर्दाफाश, पुलिस ने मुख्य आरोपी परवेश गुज्जर सहित कल्लू, आदिल को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली. लिबरल, सेकुलर, ब्रिगेड का झूठा प्रोपेगंडा एक बार फिर नेस्तनाबूत हो गया. कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसके आधार पर आरोप लगाया गया कि उ. प्र. के गाजियाबाद में एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ मारपीट की गई और उससे जबरन जय श्री रामबुलवाया गया. व्यक्ति ने 4 अज्ञात लोगों पर पिटाई और जबरन दाढ़ी काटने का आरोप लगाया. दावा किया कि उसका अपहरण करके एक घर में ले जाया गया और वहीं जय श्री रामबुलवाया गया.

जिसके बाद हिन्दू-हिन्दुत्व को बदनाम करने को तत्पर ब्रिगेड सक्रिय हुई. और इस बार भी AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और फेक्ट चेकर AltNews के जुबैर ने बदनाम करने का बीड़ा उठाया.

वीडियो शेयर करते हुए ओवैसी ने लिखा कि ये लोग उसी विचारधारा के हैं. इसी तरह ज़ुबैर ने भी इस खबर को शेयर कर झूठ फैलाया. ओवैसी ने कहा कि हिंदुत्व में बुजुर्गों और बच्चों पर हमला करना ही वीरता कहलाती है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को टैग करते हुए उन्होंने प्रतिक्रिया की माँग की. साथ ही कहा कि हिन्दू हमलावरहमेशा भीड़ में होते हैं, अकेले नहीं.

लेकिन, जब पुलिस ने कल्लू और आदिल नाम के आरोपियों को गिरफ्तार किया तो ज़ुबैर ने सिर्फ गाजियाबाद पुलिस से ताज़ा अपडेटकहकर चुप्पी साध ली, आरोपियों के नाम नहीं बताए.

पूरे घटनाक्रम की जांच के पश्चात गाजियाबाद पुलिस ने वास्तविकता सबके समक्ष रखी. पुलिस ने बताया कि घटना जून 5, 2021 की है, जिसके बारे में 2 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज कराई गई. सोशळ मीडिया पर वायरल वीडियो की जांच में पुलिस को पता चला कि पीड़ित अब्दुल समद बुलंदशहर से लोनी बॉर्डर स्थित बेहटा आया था. एक अन्य व्यक्ति के साथ मुख्य आरोपी परवेश गुज्जर के घर बंथना गया था. वहीं पर कल्लू, आरिफ, आदिल मुशाहिद और एक अन्य व्यक्ति आया.

अब्दुल समद ताबीज बनाने का काम करता है. आरोपी उसे पहले से ही जानते थे. आरोपियों के अनुसार उसके ताबीज से उनके परिवार पर बुरा असर पड़ा. अब्दुल समद गाँव में कई लोगों को ताबीज दे चुका था. पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. कल्लू और आदिल भी गिरफ्तार कर लिए गए. पुलिस ने अन्य अभियुक्तों की जल्द गिरफ़्तारी का आश्वासन दिया है.

स्रोत- विश्व संवाद केन्द्र, भारत 

Saturday, June 12, 2021

स्वयंसेवकों ने विधि विधान से किया संत लालबाबा का अंतिम संस्कार

बनारस के समाजसेवी संत लालबाबा का लंबी बीमारी के बाद जिला चिकित्सालय अनूपपुर में निधन हो गया. वे लगभग 25 वर्ष से अमरकंटक में साधनारत थे. क्योंकि वे बाल ब्रम्हचारी थे और वर्षों पूर्व अपना परिवार त्याग कर साधना और समाजसेवा के लिये अमरकंटक और इसके आसपास के क्षेत्र में निवासरत थे. इसलिये उनके निधन उपरान्त उनकी अंत्येष्टि जिला चिकित्सालय प्रशासन के समक्ष बड़ी चुनौती बन गया. लालबाबा के संत होने के कारण यह चिंता स्वाभाविक थी कि यदि उनका अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल (यद्यपि उन्हें कोरोना की पुष्टि नहीं थी) के तहत किया जाता तो संत समाज और धर्मावलंबियों में नाराजगी फैल सकती थी. इससे चिंतित चिकित्सालय प्रबंधन ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता को सूचना दी. स्वयंसेवकों ने इसके बाद पूरे विधि विधान के साथ बाबा की अंत्येष्टि नर्मदा तट, अमरकंटक में की.

वट सावित्री अमावस्या और सूर्य ग्रहण का अद्भुत संयोग

लालबाबा की साधना, उनके संतत्व का ही यह प्रतिफल था कि जब उनका अंतिम संस्कार नर्मदा तट पर वट सावित्री अमावस्या, सूर्य ग्रहण पर्व के दिन हुआ. लालबाबा का शेष कर्मकाण्ड हिन्दू रीति रिवाज एवं स्थानीय परंपरा के अनुसार अमरकंटक मे किया जाएगा.

बाबा पिछले छह महीने से बीमार थे. उनकी खराब तबियत को देखते हुए उन्हें जिला चिकित्सालय में 6 माह पूर्व भर्ती करवाया गया था. अप्रैल में कुछ स्वस्थ होने पर वे अमरकंटक वापस चले गए थे. स्वयंसेवकों ने बीमारी की दशा में उनकी सेवा सुश्रुवा की. 9 जून को अचानक उनके निधन की सूचना मिलने पर स्वत: स्फूर्त तरीके से स्वयंसेवकों ने अमरकंटक के कुछ वरिष्ठ संतों की अनुमति मिलने पर अंत्येष्टि की.

जनजाति समाज के युवक ने दी मुखाग्नि

लालबाबा के किसी रिश्तेदार, संबंधी की जानकारी ना होने के कारण संघ के स्वयंसेवकों ने बाबा की अंत्येष्टि का जिम्मा अपने कंधों पर लिया. जनजातीय समाज के युवक रोशन पुरी ने बाबा का अंतिम संस्कार स्वयं करने की इच्छा जाहिर की. उन्होंने अपने पिता रामदास पुरी से इस हेतु अनुमति प्राप्त कर नर्मदा तट पर पुरोहित लखन महाराज द्विवेदी के मार्गदर्शन में पंचगव्य स्नान सहित पूरे विधि विधान से बाबा का अंतिम संस्कार किया. सामाजिक समरसता, हिन्दू संस्कृति और सनातन संस्कार का ऐसा समन्वय विरले ही देखने को मिलता है.

लालबाबा का जन्म बनारस के ब्राह्मण परिवार में रामकुमार गर्ग के घर 65 वर्ष पूर्व हुआ था. उन्होंने बनारस से संस्कृत से आचार्य की शिक्षा प्राप्त की. आध्यात्मिक रुझान होने के कारण वे पहले बनारस और फिर अमरकंटक में किसी स्थान पर पिछले 25 वर्ष से कठोर साधना में लीन थे. उन्होंने अमरकंटक में कोई आश्रम, मठ या पक्का निर्माण नहीं करवाया था. संपत्ति के नाम पर मात्र एक झोला, कुछ कपड़े, पुस्तकें तथा एक साइकिल थी. संस्कृत के प्रकाण्ड विद्वान होने के साथ वे शक्ति अनुष्ठान में रुचि रखते थे. अंतिम समय में दुनिया से जाते जाते भी समाज को मानवता, संवेदना और एकजुटता का संदेश दे गए.

संस्कार भारती – ‘पीर पराई जाने रे’ अभियान की समिति का गठन

नई दिल्ली. कोरोना महामारी के बीच विभिन्न कला विधाओं के कलाकारों की आर्थिक सहायता हेतु संस्कार भारती द्वारा प्रारंभ विशेष अभियान पीर पराई जाने रेकी दिल्ली प्रान्त समिति की बैठक में आज अभियान के संरक्षक मंडल एवं अन्य पदाधिकारियों का मनोनयन हुआ.

संरक्षक मंडल में कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज, नृत्यांगना एवं कला विदुषी तथा राज्यसभा सांसद डॉ. सोनल मानसिंह, प्रख्यात सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खां, सुप्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार, पंडित साजन मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा, भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. सरोजा वैद्यनाथन, नाटक लेखक एवं निर्देशक तथा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डी.पी. सिन्हा का नाम सम्मिलित है.

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शक्ति सिन्हा और विख्यात कवि एवं विचारक डॉ. कुमार विश्वास को समिति के उपाध्यक्ष के रूप में तथा भूपेंद्र कौशिक व महेंद्र गुप्ता को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया है. पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज की पुत्री अधिवक्ता बांसुरी स्वराज एवं प्रज्ञा अग्रवाल सदस्य बनाई गई हैं.

पीर पराई जाने रेअभियान के अध्यक्ष हंसराज हंस ने संरक्षक मंडल के सदस्यों पंडित बिरजू महाराज, डॉ. सोनल मानसिंह, उस्ताद अमजद अली खां एवं पंडित साजन मिश्रा से व्यक्तिगत रूप से मिलकर अभियान की रूपरेखा पर विस्तृत चर्चा की है, जिसे आने वाले दिनों में क्रियान्वित किया जाएगा.