WELCOME

VSK KASHI
63 MADHAV MARKET
LANKA VARANASI
(U.P.)

Total Pageviews

Tuesday, December 30, 2025

धर्मान्तरित लोगों की घर वापसी कराना प्रत्येक हिन्दू का दायित्व — अनिल कुमार जी

हीन भावना से दूर रहने वाला हिन्दू है — भवानी नन्दन यति जी

काशी। धर्मान्तरित लोगों की घर वापसी कराना प्रत्येक हिन्दू का दायित्व है। हमारे ही परिवारों में कार्य करने वाले स्त्री—पुरुष धर्मान्तरण कर रहे हैं और हमें इस संकट का अनुमान भी नहीं है। गरीबी के कारण धर्मान्तरण होता है, यह बिल्कुल झूठ है क्योंकि वनवासी प्रदेशों में हमारे वनवासी भाई—बन्धु अपनी परम्पराओं को आज भी सहेजे हुए है। सोने को बेचकर यदि लोहा खरीदना पड़े तो अवश्य खरीदें। उक्त विचार काशी दक्षिण एवं उत्तर भाग में आयोजित हिन्दू सम्मेलनों को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार जी ने व्यक्त किया।

सकल हिन्दू समाज द्वारा आयोजित काशी दक्षिण के श्रीनाथ उपवन सामने घाट एवं काशी उत्तर के हनुमान मंदिर परमानन्दपुर में कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू के शरीर पर सोना तभी तक सुरक्षित है, जब तक उनके घरों में लोहा सुरक्षित है। 1947 के भारत पाक बंटवारे के समय कराची एवं लाहौर में अनेक धनवान हिन्दुओं को अपना सबकुछ छोड़कर आना पड़ा। यह घटना दोहराई न जाए अत: समग्र हिन्दू समाज को धर्मयोद्धा बनना ही पड़ेगा। सामाजिक समरसता के सन्दर्भ में मुख्य वक्ता ने कहा कि दुर्भाग्य यह है कि वर्तमान में अलग—अलग महापुरुषों की जयन्तियां अलग—अलग जातियों के लोग आयोजित कर रहे हैं। जबकि भारत की ही थारू एवं गाडिया लोहार जन—जाति महाराणा प्रताप को देवता की तर​ह सम्मान देती है। महापुरुष किसी भी जाति में नहीं बांधी जा सकती है। स्वामी विवेकानन्द जी का कथन है कि जब कोई व्यक्ति धर्मान्तरित होता है तो देश का एक दुश्मन बढ़ता है। हिन्दू सम्मेलन की सार्थकता धर्मांतरण को समाप्त करने में है।

काशी उत्तर के हनुमान मंदिर परमानन्दपुर में मुख्य अतिथि हथियाराम मठ गाजीपुर के पीठाधीश्वर भवानी नन्दन यति जी महाराज ने कहा कि हीन भावना से दूर रहने वाला हिन्दू है। हिन्दू धर्म वरिष्ठ जनों का सम्मान, राष्ट्रभक्ति, भातृप्रेम एवं संस्कारों का अनुपालन करना है। परहित सरिस धर्म नहीं भाई, परपीड़ा सम नही अधमाई। धारण किये जाने योग्य कर्तव्य ही धर्म है। हिन्दू सम्मेलन का उद्देश्य ही यह है कि युवा धर्म को ठीक प्रकार से समझे। भगवान कृष्ण ने श्रीमद्भगवत् गीता में कहा कि अपने धर्म में रहकर मर जाना अच्छा है। दूसरे के धर्म में जीवन भी निरर्थक है। भारत के विखण्डन का मूल आधार धर्म ही रहा है। परन्तु वर्तमान भारत में धर्म एवं संस्कृति की उपेक्षा आज भी जारी है। काशी दक्षिण के श्रीनाथ उपवन में साध्वी मु​क्तेश्वरी देवी जी ने कहा कि हिन्दू घरों में जो पुरुष या महिला काम करते हैं वह केवल एक कम्बल के लिए चर्च चले जाए यह चिन्ता का विषय है। हिन्दू परिवारों में दिन का एक घण्टा ऐसा होना चाहिए, जब सारा परिवार एक साथ बैठकर बातें करें। इस कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन डॉ0हरेन्द्र राय ने किया। भारत माता की आरती से हिन्दू सम्मेलन का वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओत—प्रोत हुआ।

राष्ट्रीयता का विकास करने हेतु सामाजिक परिवर्तन आवश्यक है — हरमेश चौहान

काशी दक्षिण के असी घाट पर आयोजित हिन्दू सम्मेलन में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य हरमेश चौहान ने कहा कि राष्ट्रीयता का विकास करने हेतु सामाजिक परिवर्तन आवश्यक है। इस सामाजिक परिवर्तन को पांच प्रमुख परिवर्तनों द्वारा लाया जा सकता है। जिसे पंच प्रण का नाम दिया गया है। भारत की प्राचीन शिक्षा पद्धति की चर्चा करते हुए वक्ता ने कहा कि भारतीय शिक्षा अनुभव पर आधारित थी। व्यक्ति के अन्दर तीन ​गुण विशेष रूप से होने चाहिए। पहला जिज्ञासा, दूसरा धैर्य और तीसरा नेतृत्व क्षमता। हिन्दू समाज के जागृत होने पर उसका विरोध स्वाभाविक रूप से होगा। परन्तु राष्ट्र के विखण्डन का मूल्यांकन करना ही होगा।

बच्चों को अध्यात्म, साहित्य, संस्कृति, धर्म से जोड़ने की आवश्यकता — सुनील जी

काशी मध्य के शिवपुरवा बस्ती महमूरगंज में हिन्दू सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ काशी प्रान्त के सह प्रान्त प्रचारक सुनील जी ने कहा कि आज अपने बच्चों को जीवन मूल्य सिखाने की आवश्यकता है। बच्चों को अध्यात्म, साहित्य, संस्कृति, धर्म से जोड़ने की आवश्यकता है। बच्चों को कहानियों, व्यवहार, आचरण, शिक्षा से एक श्रेष्ठ नागरिक बनाने का कार्य करना है। संघ समाज में पंच परिवर्तन सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्यबोध, पर्यावरण, स्वदेशी और कुटुंब प्रबोधन को लेकर जा रहा है, इसे अपने जीवन में उतारना है। इस दृष्टि से अपने जीवन को सार्थक और सफल बनाने के लिए हमें संकल्प करना होगा।

प्राचीन भारत में समरसता, सहकारिता के सा​थ थी — त्रिलोक

काशी दक्षिण के खोजवा स्थित कम्पोजिट प्राथमिक विद्यालय परिसर में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता मा0सह विभाग संघचालक काशी विभाग त्रिलोक जी ने कहा कि प्राचीनभारत में समरसता, सहकारिता के सा​थ थी। सभी सामाजिक आयोजन एक दूसरे के परस्पर सहयोग से सम्पादित होते थे। प्राचीन भारत की अर्थव्यवस्थ भी सहकारिता आधारित कृषि पर निर्भर थी। हिन्दू धर्म को खतरा परकियों से नहीं बल्कि अपने आप से है। हिन्दुओं का खान पान, आचार विचार से 75 प्रतिशत धर्म परिवर्तन हो चुका है। 180 वर्ष पूर्व लॉर्ड मैकाले नामक अंग्रेज अधिकारी ने भारतीय शिक्षा पद्धति को नष्ट करने हेतु 6 बिन्दु दिये। उसके अनुसार हिन्दू समाज अतार्किक है, इसका कोई इतिहास नहीं है। य​ह अवैज्ञानिक धर्म है। इस धर्म में मिथ्या तथ्य दिये गये है, यह अनैतिक और कपोल कल्पित है। भारत की वर्तमान शिक्षा प्रणाली इन्हीं बिन्दुओं पर टिकी हुई है।

काशी मध्य भाग के विनायक और सरस्वती बस्ती में आयोजित हिंदू सम्मेलन के मुख्य अतिथि महंत द्वारकाधीश मंदिर श्री रामदास आचार्य जी मुख्यवक्त मुख्य वक्ता श्रीमान दीनदयाल जी ने सम्बोधित किया। दीनदयाल जी ने पंच परिवर्तन के सभी विषय उदाहरण सहित बताए। अध्यक्षता डॉ महेंद्र कुमार जायसवाल ने किया। विशिष्ट अतिथि देवी गुप्ता जी विद्यालय प्रबंधिका एवं श्री बाल गंगाधर प्रसाद समाजसेवी की उपस्थिति में संपन्न हुआ कार्यक्रम का संचालन प्रदीप चौरसिया एवं समीर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अंशु ने किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम छात्र—छात्राओं ने प्रस्तुत किया। बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की जानकारी के लिए जो चित्रकला प्रतियोगिता रखी गई थी उसका परिणाम भी घोषित किया गया और छात्रों को पुरस्कृत किया गया। हिन्दू सम्मेलन के कार्यक्रम कामाख्या नगर के नगर संघचालक श्रीमान ओमप्रकाश जी भी उपस्थित थे।

इन स्थानों पर भी आयोजित हुए हिन्दू सम्मेलन

केशव नगर स्थित महामनापूरी कॉलोनी एवं कबीर नगर के होरीलाल पार्क में नवीन श्रीवास्तव, लोहिया नगर कालोनी सामुदायिक केन्द्र आशापुर में गुलाब जी, मुड़ीकट्टा बाबा पार्क दौलतपुर में दिनेश जी, पिसौर (शिवनगर) में कमलेश जी, रामजानकी मंदिर एवं दास नगर कॉलोनी पार्क के सामने जगतगंज, चंदेश्वर महादेव मंदिर चंदापुर, आकाश वाटिका भरथरा समेत अन्य कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित हुए।







No comments: