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Wednesday, November 15, 2023

शिवाजी के शासन का उद्देश्य सभी जाति-धर्मों के लिए समान अवसर एवं शुद्ध प्रशासनिक प्रणाली रहा - नरेन्द्र ठाकुर

 विशेषांक से शिवाजी की सुशासन परम्परा को जानने का अवसर - लक्ष्मण आचार्य

काशी। शिवाजी के शासन का उद्देश्य अपने अधीनस्थों को शान्ति, सहिष्णुता, सभी जाति-धर्मों के लिए समान अवसर और शुद्ध प्रशासनिक प्रणाली प्रदान करना था। उनके राजनीतिक आदर्श ऐसे थे कि हम उन्हें आज भी बिना किसी परिवर्तन के स्वीकार कर सकते हैं। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने व्यक्त किया। वे मंगलवार को होटल सूर्या में आयोजित विश्व संवाद केन्द्र काशी द्वारा प्रकाशित चेतना प्रवाह के ‘हिन्दवी स्वराज विशेषांक’ के लोकार्पण समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। 

     उन्होंने आगे कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दू समाज के ‘स्व’ को जागृत करने के लिए मुगलों द्वारा ध्वस्त किये गये हिन्दू मन्दिरों का पुनरुद्धार किया। फारसी के स्थान पर मराठी और संस्कृत भाषा को प्राथमिकता दी। मुगल कर व्यवस्था को बदलकर अपनी कर प्रणाली लागू की। शिवाजी ने अपनी स्वयं की राजमुहर का निर्माण किया जो फारसी के स्थान पर संस्कृत भाषा में तैयार की गयी थी। शिवाजी ने अपने राज्य को सुरक्षित रखने के लिए अनेक किलों का निर्माण किया। इसके अतिरिक्त कुशल सेना के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए उन्होंने नौसेना का भी निर्माण किया।

     छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा अपने राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की कार्यप्रणाली का वर्णन करते हुए मुख्य वक्ता श्री ठाकुर ने आगे कहा कि छत्रपति ने अपने राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दृष्टि से कृषि को प्रधानता दी। किसानों को कृषि के लिए प्रोत्साहित किया।

शिवाजी की शासन व्यवस्था में शत्रु परिवार की महिला-बच्चों का हित और सम्मान भी निहित था - लक्ष्मण आचार्य

समारोह की अध्यक्षता करते हुए सिक्किम के राज्यपाल लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि इस विशेषांक का विमोचन न केवल “हिन्दवी स्वराज” के 350वें वर्ष पूर्ण होने और छत्रपति शिवाजी को स्मरण करने का अवसर प्रदान कर रहा है, वरन् भारत में “सुशासन” की जो परम्परा चली आ रही है, उसको भी समझने और जानने का एक सुन्दर अवसर है।

उन्होंने आगे कहा कि छत्रपति शिवाजी की शासन व्यवस्था और सोच इस प्रकार की थी कि उन्होंने जिन आक्रमणकारी मुगलों के विरुद्ध युद्ध किया, उनके परिवार की महिलाओं और बच्चों के हितों एवं सम्मान का भी ध्यान रखा। उनकी शासन प्रणाली अत्यन्त सुव्यवस्थित और पारदर्शी थी। उन्होंने नौसेना का भी गठन किया। उनको भारत के थोड़े भाग में मात्र 6-7 वर्षों तक ही शासन का अवसर प्राप्त हुआ, परन्तु इतने अल्पकाल में ही उन्होंने जो छाप छोड़ी, उसी से आज भी सुशासन के महत्वपूर्ण सूत्र हम प्राप्त कर रहे हैं। छत्रपति शिवाजी को पारंपरिक शिक्षा कुछ खास नहीं मिल पायी थी, परन्तु माता जीजाबाई और अपने गुरु समर्थ गुरु रामदास से उन्होंने भारतीय शास्त्रों और धर्म ग्रन्थों की भरपूर जानकारी प्राप्त किया, अपने माता पिता और गुरु का उनके व्यक्तित्व पर भरपूर प्रभाव था।

छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक के लिए मुगलों के रोकटोक और निषेध के आदेश के बावजूद काशी से जाकर पं. गागा भट्ट ने उनका राजतिलक किया। जिससे पौराणिक नगरी काशी का सम्मान और बढ़ा। विषय प्रवर्तन करते हुए पत्रिका के प्रधान सम्पादक प्रो0ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की राज्याभिषेक की स्मृति को जीवंत करता है। चंद्रगुप्त मौर्य और छत्रपति शिवाजी के बीच समानता यह है कि दोनों महान शासक थे लेकिन किसी राजवंश परंपरा के उत्तराधिकारी नहीं थे। यह विषय वस्तु इस विशेषांक का मुख्य आकर्षण है। इस विशेषांक में छत्रपति शिवाजी की नौसेना एवं मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि के साथ-साथ औरंगजेब जैसे क्रूर मुगल शासक को मात देकर उन्होंने हिंदवी स्वराज की स्थापना किया। इसके साथ ही इस विशेषांक में शिवजी के दो दिन के काशी गुप्त प्रवास एवं शिवाजी का राजतिलक करने वाले काशी के पंडित गंगा भट्ट की वंशावली भी इस विशेषांक में है।

विशिष्ट अतिथिद्वय वाराणसी के महापौर आशोक तिवारी एवं जाणता राजा महानाट्य समिति, काशी प्रान्त के अध्यक्ष अभय सिंह ने विशेषांक की सराहना करते हुए कहा कि यह विशेषांक वर्तमान पीढ़ी को  शिवाजी की कार्यप्रणाली, कूटनीति और शासन व्यवस्था से परिचित कराएगी।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों ने भारत माता एवं छत्रपति शिवाजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पार्चन किया। इसके साथ ही पारम्परिक रूप से मंगलाचरण एवं शंख ध्वनि से शिवाजी के राज्याभिषेक जैसा वातावरण प्रस्फूटित हुआ। स्वागत उद्बोधन विश्व संवाद केन्द्र काशी कार्यसमिति के अध्यक्ष डॉ.हेमन्त गुप्त एवं अतिथि परिचय सचिव प्रदीप चौरसिया ने कराया। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उ0प्र0क्षेत्र के क्षेत्र कार्यवाह डॉ0वीरेन्द्र जायसवाल एवं काशी प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल उपस्थिति रही।

कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह पू.उ.प्र., बिहार एवं झारखण्ड के संयोजक रामाशीष जी, पू.उ.प्र. के मुख्य मार्ग प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना, काशी प्रान्त प्रचारक रमेश जी, प्रधानाचार्य परिषद उ0प्र0 के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.हरेन्द्र राय,  डॉ.सत्य प्रकाश पाल, डॉ.अजय परमार, प्रांत सह कार्यवाह डॉ. राकेश तिवारी, जाणता राजा महानाट्य आयोजन समिति के राहुल सिंह, अनिल किंजवाडेकर, सी.ए. सतीश चंद्र जैन, भारत विकास परिषद के प्रमोद राम त्रिपाठी, रविप्रकाश जायसवाल, डॉ. कमलेश तिवारी, डॉ. अमिता सिंह, डॉ. कुमकुम पाठक एवं कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ. अशोक सोनकर, डॉ. कविता शाह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे और कार्यक्रम की सफलता हेतु सहयोग प्रदान किया। धन्यवाद ज्ञापन पत्रिका के प्रबन्ध सम्पादक नागेन्द्र एवं संचालन कार्यक्रम संयोजक नवीन श्रीवास्तव ने किया।







Monday, October 30, 2023

अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि मंदिर में रामलला की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोह को सफल बनाने हेतु रणनीति तैयार

संघ विचार परिवार की बैठक में कार्यक्रमों की की गई घोषणा

व्यापक गृह संपर्क एवं जन सम्पर्क अभियान

     काशी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार परिवार की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को संत अतुलानंद कान्वेंट स्कूल कोयराजपुर में संपन्न हुई। इस बैठक में 22 जनवरी को अयोध्या में संपन्न होने वाले ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह के संबंध में विस्तृत कार्य योजना की घोषणा की  गई। चार अलग-अलग सत्रो में पूरे दिन भर चली बैठक में विचार परिवार के 35 संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य करने का आह्वान किया गया।

     श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री एवं विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री चंपत राय जी ने पूरे 45 दिन तक चलने वाले महाअभियान की चरण बद्ध ढंग से विस्तृत जानकारी दी।

     निर्धारित योजना के अनुसार 4 नवंबर 2023 को 200 कार्यकर्ता अयोध्या पहुंचेंगे। पांच को वहां से अक्षत भरे पीतल के कलश लेकर सभी विभाग तक उसे पहुंचाएंगे। यह अक्षत न्यास की ओर से आमंत्रण का प्रतीक होगा।

     5 नवंबर से दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक कार्यकर्ता देशभर के सभी मंदिरों में अक्षत पहुंचायेंगे| 1 से 15 जनवरी 2024 तक पूजित अक्षत लेकर कार्यकर्ता हर गांव-मोहल्ले एवं बस्तियों में संपर्क कर सभी को अयोध्या पहुंचने का औपचारिक निमंत्रण देंगे। 

     प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन 22 जनवरी को कार्यकर्ता अपने-अपने गांव मोहल्ले के मंदिरों में इकट्ठे होंगे। वहां भजन कीर्तन के कार्यक्रम चलेंगे तथा सायं काल अपने दरवाजे पर दीप जलाएंगे। 5 करोड़ घरों में इस दिन दीपक जलाए जाएंगे।

     22 जनवरी को अयोध्या में केवल देश भर के कश्मीर से कन्याकुमारी तक के 140 संप्रदायों के साधु संत, मा0 प्रधानमंत्री, पूज्य सरसंघचालक तथा इस आंदोलन में प्राण गवाने वालों के परिजन और विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धियां अर्जित करने वाले समाज के विशिष्ट नागरिक उपस्थित होंगे।

     8000 लोगों की सीमित क्षमता होने के कारण कार्यकर्ताओं से 22 जनवरी को अयोध्या न आकर अपने-अपने क्षेत्र में कार्यक्रमों में जुटने का निर्देश दिया गया है। कार्यकर्ताओं को अलग-अलग तिथियों में उनके प्रांत के अनुसार अयोध्या पहुंचने का श्री चंपत राय जी ने निमंत्रण दिया। अयोध्या पहुंचने वाले कार्यकर्ताओं के रुकने तथा भोजन आदि की समुचित व्यवस्था का भी उन्होंने भरोसा दिलाया। 25000 कार्यकर्ताओ के प्रतिदिन अयोध्या में रूकने एवं खाने की व्यवस्था की जा रही है।

     काशी प्रांत के कार्यकर्ता 30 जनवरी को अयोध्या पहुंचेंगे। इसी तरह अलग-अलग प्रांतो के लिए अलग-अलग तिथियां होंगी। 45 दिनों तक चलने वाले इस अभियान  में 50 लाख लोगों के आवास एवं भोजन की व्यवस्था अयोध्या में उपलब्ध कराई जाएगी।

     काशी प्रांत के प्रांत प्रचारक श्रीमान रमेश जी ने द्वितीय सत्र में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। उन्होंने आग्रह किया कि संगठन की रीति नीति के अनुसार और सभी कार्यकर्ता अपने-अपने स्थान पर सौंपे  गये दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वाह करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र के मंदिरों की सूची बनाएं| प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन मंदिरों में संपूर्ण हिंदू शक्ति को एकत्रित कर भजन कीर्तन के कार्यक्रम संचालित करें। माइक लगाकर प्रभु श्री राम का गुणानुवाद कराये| इसके लिए कथावाचकों विद्वानों की भी सहायता ली जा सकती है।

1 से 15 जनवरी तक के महासंपर्क अभियान में न छूटे एक भी हिन्दू घर  

1 से 15 जनवरी तक अब तक का सबसे बड़ा महासंपर्क अभियान चलेगा। इसमें कार्यकर्ता पूरी भागीदारी निभायें। एक भी हिंदू घर छूटने न पाए इसका ध्यान रखें। 15 दिसंबर से पहले खंडो की समन्वय बैठकें हो जाए। टोलियों का गठन कर लें। गठित टोलिया ही परिवारों से संपर्क करेंगी।

     उन्होंने विचार परिवार की बैठक जिलास्तर पर करने के लिए अभी से तिथि तय करने का निर्देश दिया। कार्यकर्ताओं को 15 दिसंबर से पूर्व अयोध्या से लाई गई सारी सामग्री मिल जाएगी। दूसरी ओर मातृशक्ति-संगमको भी विभाग स्तर पर सफल बनाने लिए कार्यकर्ताओं से सक्रिय रहने का निर्देश दिया। इसके लिए अलग-अलग विभागों की तिथियां भी घोषित कर दी गई।

ऐतिहासिक महानाट्य जाणता राजा देखने के लिए सभी जिलों के तिथियों की भी दी गई जानकारी

छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित ऐतिहासिक महानाट्य जाणता राजा देखने के लिए सभी जिलों की तिथियां की भी जानकारी दी गई। 21 नवंबर को चंदौली-सोनभद्र, 22 को मिर्जापुर-भदोही, 23 को प्रयागराज, 24 को प्रतापगढ़-कौशांबी 25 को सुल्तानपुर-अमेठी तथा 26 को जौनपुर-गाजीपुर के कार्यकर्ता जाणता राजा महानाट्य देखेंगे। वाराणसी जिले के लोग स्थानीय होने के कारण सभी दिनों में प्रतिभाग कर सकते हैं।

मंच पर मा0 प्रांत संघचालक डॉ. विश्वनाथ लाल निगम, प्रांत कार्यवाह मुरलीपाल जी की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। संचालन सह प्रांत कार्यवाह डॉ. राकेश जी ने किया। इस समन्वय बैठक में भारत विकास परिषद, विहिप, सक्षम, आरोग्य भारती, सेवा भारती, अ.भा.विद्यार्थी परिषद, शैक्षिक महासंघ, इतिहास संकलन समिति, गंगा समग्र, भाजपा, भारतीय मजदूर संघ समेत कुल 36 संगठनों के 545 पदाधिकारी उपस्थित थे।




Tuesday, October 17, 2023

हिंदुत्व के ऊपर आक्रमण को रोकने का सर्वप्रथम प्रयत्न शिवाजी ने किया - अनिल ओक

काशी| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक ने कहा कि हिंदुत्व के ऊपर वैचारिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और शारीरिक आक्रमण को रोकने का सर्वप्रथम प्रयत्न शिवा जी ने किया| वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैदिक विज्ञान केन्द्र के सभागार में छत्रपति शिवाजी के जीवन पर आधारित और ऐतिहासिक महानाट्य जाणता राजा (दूरदर्शी राजा) के मंचन के पूर्व आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
21 से 26 नवंबर को आयोजित इस महानाट्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित हिन्दवी स्वराज के 350 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में काशी में इस महानाट्य का मंचन हो रहा है| शिवा जी की युद्धनीति के सन्दर्भ में चर्चा करते हुए श्री ओक ने आगे कहा कि स्वराज की स्थापना हेतु जीवित रहना आवश्यक है| अतः युद्ध जीतने के लिए लड़ना चाहिए। लन्दन मिलिट्री स्कूल में विश्व के सात प्रमुख युद्धों में शिवाजी और अफजल खान के मध्य हुए युद्ध को सम्मिलित किया गया है| इस युद्ध के वर्णन के मुख्य वक्ता ने कविता के रूप में प्रस्तुत किया|
शिवाजी के सुशासन नीति के बारे में उन्होंने कहा कि वास्तव में शिवाजी ने मात्र सात वर्ष युद्ध किया तथा 28 वर्ष सुराज के लिए कार्य किया| सर्वप्रथम पेंशन योजना, अनुकम्पा नियुक्ति, हर परिवार को अनाज योजना, नौसेना, मर्चेंट नेवी का प्रारम्भ शिवाजी के ही शासन काल में हुआ| नाट्य की एक भाग में औरंगजेब ने भी शिवाजी के चरित्र की प्रशंसा की है| श्री ओक ने आगे कहा कि महानाट्य जाणता राजा वर्तमान परिस्थितियों में आमजन के मध्य छत्रपति शिवाजी जैसी दहाड़ मरेगा। हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना के लिए शिवा जी ने ऐसे मित्र बनाये जिनका आदर्श वर्तमान परिस्थिति में भी प्रासंगिक है शिवाजी नाई का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि युद्ध में पारंगत न होते हुए भी स्वराज के लिए अपने प्राणों की चिंता न करके शत्रु के दल में सीधा प्रवेश किया। वहीं बाजी प्रभुदेश पाण्डे ने छत्रपति शिवाजी के प्राणों की रक्षा के लिए मात्र तीन सौ मावलों को लेकर चार हजार पठान घुड़सवारों के साथ भीड गये और वीरगति को प्राप्त हुए वर्तमान में महाराष्ट्र का वह स्थान पावन खिण्ड के नाम से प्रसिद्ध है। राष्ट्रभक्ति का भाव शिवाजी में कूट-कूटकर भरा था। उन्हें राजा बनने की इच्छा नहीं थी परन्तु हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना के लिए उन्होंने छत्रपति की उपाधि धारण की शिवाजी महिलाओं का भी विशेष सत्कार करते थे। गरीब महिला के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण अपने सगे मामा मोहिते को भी आजीवन कारावास का दण्ड दिया। त्वरित निर्णय लेना छत्रपति शिवाजी की विशेषता थी मात्र 60 सैनिकों को लेकर शाइस्ता खान के महल में एक लाख सैनिकों को गुरिल्ला युद्ध करके पराजित किया। नये दुर्गों का निर्माण, नौसेना की स्थापना, सुशासन हेतु पंत प्रधानों की नियुक्ति छत्रपति शिवाजी द्वारा रामराज्य की परिकल्पना को साकार करती है। शिवाजी के इन्हीं आदशों को कलमबद्ध करते हुए बाबा साहब पुरन्दरे जी ने महानाट्य की रचना की।
संबोधन के दौरान सभागार में उपस्थित युवाओं ने "जय भवानी-जय शिवाजी" के उद्घोष से जाणता राजा की उपस्थिति का भान कराया| कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए प्रख्यात कथावाचक शांतनु जी महाराज ने प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भारतीय इतिहास के साथ षड़यंत्र कर कई महापुरुषों के चरित्रों को इतिहास के पृष्ठों से गायब कर दिया गया| सेवा भारती काशी प्रान्त ऐसे ही एक चरित्र को पढ़ाने, दिखाने और सुनाने का कार्य करेगा| महामना की बगिया में जाणता राजा का मंचन महामना को भी प्रसन्न करेगा| शिवाजी ने संकल्प लिया कि हिन्दवी साम्राज्य की स्थापना करनी है ऐसा सोचने वाले वह एक मात्र राजा थे| जिस प्रकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण हेतु सभी भारतीयों ने अपनी - अपनी आहुति डाली थी, उसी प्रकार सभी की आहुति इस महानाट्य हेतु भी होनी चाहिए| अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री डॉ.महेन्द्र नाथ पाण्डेय ने कहा कि शिवाजी महाराज के जीवन में काशी के विद्वत जनों का भी योगदान था| यही के पंडित गागा भट्ट ने शिवाजी का राज्याभिषेक कराया| वास्तव में वर्तमान कालखंड भी ऐसी परिस्थियों से गुजर रहा है जैसी परिस्थितियां शिवाजी के समय में थी| ऐसे में जाणता राजा महानाट्य का मंचन हमें उन परिस्थितियों का समाधान प्रदान करेगा| शिवाजी के गुरु समर्थ गुरु रामदास ने उन्हें जाणता राजा कहा था जिसका अर्थ है दूरदर्शी राजा|
कार्यक्रम के प्रारम्भ में मंचासीन अतिथियों द्वारा महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्ज्वलन किया गया| संगीत मंच कला संकाय की छात्राओं द्वारा कुलगीत की प्रस्तुति की गयी| इस दौरान मंच पर काशी प्रान्त प्रचारक रमेश चन्द्र एवं सेवा भारती काशी प्रान्त के अध्यक्ष राहुल सिंह उपस्थित रहें|

      कार्यक्रम में मुख्य रूप से महानाट्य आयोजन समिति के सह सचिव डॉ.हरेन्द्र राय, डॉ.सत्य प्रकाश पाल, प्रो.डीसी राय, काशी विभाग प्रचारक नितिन सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रोफ़ेसर एवं विद्यार्थी उपस्थित रहें| धन्यवाद ज्ञापन वैदिक विज्ञान केन्द्र के समन्वयक प्रो.उपेन्द्र नाथ त्रिपाठी तथा संचालन पत्रकारिता विभाग के डॉ.ज्ञान प्रकाश मिश्र ने किया|  

प्राप्त धन से कैंसर अस्पताल के तीमारदारों के लिए होगी आवासीय व्यवस्था

श्री ओक ने बताया कि 21 से 26 नवंबर तक एम्फीथियेटर मैदान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में यह नाटक सायं काल 5:30 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाटक देखने के लिए टिकट की व्यवस्था की गई है। इस टिकट से प्राप्त होने वाली धन से काशी के कैंसर अस्पताल के सामने तीमारदारो के लिए आवासीय व्यवस्था की जाएगी।


Sunday, October 15, 2023

वर्तमान में देश को छत्रपति शिवाजी की कुशल रणनीति की आवश्यकता - अनिल ओक जी

 

प्रयागराज/प्रतापगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख अनिल ओक ने कहा कि वर्तमान में चुनौतियों से घिरे हुए अपने देश को छत्रपति शिवाजी महाराज की कुशल रणनीति की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है, इसलिए शिवाजी आज सर्वाधिक प्रासंगिक है। 

छत्रपति शिवाजी महाराज की 350वीं जयंती के उपलक्ष्य में काशी में आयोजित होने वाले जाणता राजा की तैयारी बैठक को संबोधित करते हुए क्रमशः शनिवार को प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज स्थित प्रीतम दास मेहता प्रेक्षा गृह में एवं रविवार को प्रतापगढ़ के तुलसी सदन में उन्होंने उक्त विचार प्रस्तुत किया। विचार परिवार के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि काशी में सेवा भारती की ओर से आयोजित होने वाला यह नाटक केवल मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि हिंदुत्व के विशालजागरण के लिए हो रहा है। 350 साल पहले शिवाजी महाराज जितने प्रासंगिक थे आज उससे भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। शिवाजी की प्रशासनिक, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक नीतियों का विस्तार से वर्णन करते हुए अपने उद्बोधन में श्री ओक ने कहा कि शिवाजी महाराज की सराहना उनका सबसे बड़ा दुश्मन औरंगजेब भी करता था। उसने कहा था हुकूमत करना हो तो शिवा का चलन सीखो।

प्रयागराज में आयोजित कार्यक्रम 

उन्होंने कहा कि आज देश को मिर्जा राजा जयसिंह तथा बाजी प्रभु देशपांडे एवं जयचंद तथा पृथ्वीराज के बीच अंतर करना सीखना होगा। देश में जितनी श्रेष्ठ प्रशासनिक व्यवस्था शिवाजी ने दी थी उतना शायद ही कोई दे पाएगा। कर्मचारियों के लिए अनुकंपा नियुक्ति तथा पेंशन योजना एवं सभी गरीबों के घर ढाई शेर अनाज पहुंचाने की योजना शिवाजी ने लागू की थी। उन्होंने समर्पित देशभक्त एवं जुझारू योद्धाओं के बल पर हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की थी। आज देश में सैकड़ों मिर्जा राजा जयसिंह पैदा हो गए हैं। शिवाजी के नीति का अनुपालन करते हुए इन्हें अलग-थलग करना सीखना होगा। आज देश को फिर से खंडित करने के कुचक्र चले जा रहे हैं, देश चुनौतियों से घिरा हुआ है। सांस्कृतिक एवं धार्मिक आक्रमण हो रहे हैं। सनातन धर्म को लांछित किया जा रहा हैं। इसलिए शिवाजी की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने राज्य में सभी के लिए समान न्याय और सभी के लिए समान सम्मान की व्यवस्था की थी| भ्रष्टाचार मुक्त शासन और जनता के लिए सुलभ राजा शासन का प्रमुख अंग था| राजा प्रजा के प्रति समर्पित हो, ऐसा उनके शासनकाल में परिलक्षित हुआ| उनके शासनकाल में नारी को विशेष सम्मान प्राप्त था| माता जीजाबाई के विशेष मार्गदर्शन और समर्थ गुरु रामदास की शिक्षा दीक्षा ने शिवाजी को सशक्त योद्धा के रूप में विकसित किया| इसके पूर्व समिति के संरक्षक प्रसिद्ध कथावाचक शांतनु जी महाराज ने जाणता राजा के महत्व एवं उसकी प्रासंगिकता पर अत्यंत ओजस्वी शब्दों में प्रकाश डाला। ‌उन्होंने कहा कि शिवाजी के जीवन से वर्तमान पीढ़ी पूरी तरह अपरिचित है, इसलिए इस नाटक का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। 

मंचन के प्राप्त आय से मरीजों के तीमारदारो के लिए होगी आवासीय व्यवस्था

श्री ओक ने बताया कि 21 से 26 नवंबर तक एम्फीथियेटर मैदान, काशी हिंदू विश्वविद्यालय में यह नाटक सायं काल 5:30 बजे से रात्रि 8:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाटक देखने के लिए टिकट की व्यवस्था की गई है। इस टिकट से होने वाली आय से काशी के कैंसर अस्पताल के सामने तीमारदारो के लिए आवासीय व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए भूमि की व्यवस्था हो चुकी है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज निवासी 23 नवम्बर को महानाट्य देख सकेंगे जबकि प्रतापगढ़ के निवासियों के लिए 24 नवम्बर की तिथि निर्धारित की गयी हैं|


प्रतापगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित जनमानस 

Friday, October 13, 2023

ऑपरेशन अजय – इस्रराइल से 212 भारतीय पहली विशेष उड़ान से स्वदेश लौटे

नई दिल्ली. भारत ने युद्धग्रस्त इस्राइल से भारतीय नागरिकों को वापस लाने के ऑपरेशन अजय प्रारंभ किया है. ऑपरेशन अजय के तहत पहली उड़ान आज सुबह दिल्ली हवाई अड्डे पहुंची.

इस उड़ान से 212 भारतीयों को स्वदेश लाया गया. केन्‍द्रीय मंत्री राजीव चन्‍द्रशेखर ने इनकी अगवानी की. यह विमान तेल-अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे से कल शाम रवाना हुआ था.

विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने इस्राइल से वापस आने के इच्छुक भारतीयों के लिए ऑपरेशन अजय शुरु किये जाने की घोषणा की थी. इस्राइल पर हमास के हमले के बाद जारी लड़ाई को देखते हुए यह निर्णय लिया गया था. इस बीच इस्राइल में भारतीय दूतावास ने आज के लिए दूसरी उड़ान की घोषणा की है और इस बारे में ई-मेल भेज दिया है.

भारत इससे पहले भी विभिन्न देशों में फंसे (रूस युक्रेन युद्ध, सूडान संकट, अफगानिस्तान संकट, कोरोना काल, व अन्य अवसरों पर) हजारों भारतीय नागरिकों को सकुशल वापिस ला चुका है.

ऑपरेशन गंगा

रूस और यूक्रेन की जंग के बीच यूक्रेन में फंसे भारतीयों की घर वापसी के लिए केंद्र सरकार ने ऑपरेशन गंगाअभियान चलाया था. इस दौरान बड़ी संख्या में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भारत सुरक्षित भारत लाया गया था. पिछले साल ऑपरेशन गंगाअभियान चलाया गया था. इस अभियान में यूक्रेन में फंसे करीब 22,500 से अधिक नागरिकों को स्वदेश लाया गया था.

वंदे भारत मिशन

कोरोना महामारी के दौर में जब पूरी दुनिया महामारी से ग्रस्त थी. तब वंदे भारत मिशन चलाया गया था. इसके तहत केंद्र सरकार ने विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए वंदे भारत मिशन चलाया. इस ऑपरेशन के तहत 30 अप्रैल, 2021 तक लगभग 60 लाख से अधिक भारतीयों को स्वदेश लाया गया. केंद्र के अनुसार, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों से 18,79,968 भारतीयों ने वापसी की. वहीं, 36,92,216 लोगों ने चार्टर्ड उड़ानों के माध्यम से वापसी की. वहीं 5,02,151 को जमीनी सीमाओं के माध्यम से वापस लाया गया.

ऑपरेशन समुद्र सेतु

कोरोना संकट के ही दौरान भारत ने ऑपरेशन गंगा की तरह ऑपरेशन समुद्र सेतु चलाया था. इसमें भारतीयों को अपने देश में लाने के लिए नौसेना ने उत्कृष्ट कार्य किया था. यह एक नौसैनिक अभियान था. इसके तहत 3,992 भारतीय नागरिकों को समुद्र के रास्ते वतन वापस लाया गया. भारतीय नौसेना के जहाज जलाश्व (लैंडिंग प्लेटफार्म डाक), और ऐरावत, शार्दुल और मगर (लैंडिंग शिप टैंक) ने ऑपरेशन में भाग लिया. यह अभियान करीब 55 दिनों तक चला. इसमें समुद्र द्वारा 23,000 किमी से अधिक की यात्रा शामिल थी.

ऑपरेशन राहत

यमन की सरकार और हौथी विद्रोहियों के बीच साल 2015 में संघर्ष छिड़ा था. सऊदी अरब द्वारा घोषित नो-फ्लाई जोन होने के कारण हजारों भारतीय फंसे हुए थे और यमन हवाई मार्ग से सुलभ नहीं था. ऑपरेशन राहत के तहत भारत ने यमन से लगभग 5,600 लोगों को निकाला.

ऑपरेशन मैत्री

नेपाल में साल 2015 में भीषण भूकंप आया था. इस भूकंप के बाद नेपाल में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए ऑपरेशन मैत्री चलाया गया था. अभियान के तहत सेना-वायु सेना के संयुक्त ऑपरेशन में नेपाल से वायु सेना और नागरिक विमानों की मदद से 5,000 से अधिक भारतीयों को वापस लाया गया. भारतीय सेना ने अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और जर्मनी के 170 विदेशी नागरिकों को सफलतापूर्वक निकाला था.