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Thursday, March 23, 2023

प्रारम्भ के पन्द्रह वर्ष में एक लाख स्वयंसेवकों को डॉक्टर हेडगेवार ने संगठित किया था - मधु भाई कुलकर्णी जी

काशी।  काशी उत्तर भाग के लाजपत नगर एवं काशी दक्षिण भाग के मालवीय नगर (बीएचयू) में आयोजित वर्ष प्रतिपदा कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मधु भाई कुलकर्णी जी (सदस्य राष्ट्रीय कार्यकरणी मण्डल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने कहा कि मैं से हम की यात्रा ही स्वयंसेवकत्व है। हिन्दू समाज एक लंबे कालखंड तक मैं और मेरा का विचार करते हुए जीवन जीता रहा इसलिए हम गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक ने इसी कमी को दूर करने के लिए शाखा का निर्माण किया जहाँ देशभक्तों का संगम होता है। अतः हम सबको संघ की शाखा में आकर व्यक्ति निर्माण की प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए।

    उन्होंने आगे कहा कि वर्ष प्रतिपदा पृथ्वी का जन्मदिन है। इसी दिन 1 अप्रैल, 1889 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी का जन्म हुआ था । प्रारम्भ के पन्द्रह वर्ष में एक लाख स्वयंसेवकों को डॉक्टर हेडगेवार ने संगठित किया था। डॉ. हेडगेवार ने कभी पेशेवर डॉक्टर के रूप में कार्य नहीं किया। वे देश की स्वतंत्रता और सेवा हित में चलाये जाने वाले कार्यक्रमों से जुड़कर अध्ययन करते रहे। आगे कहा कि डॉ. हेडगेवार के महाप्रयाण के तेहरवें दिन यानि 3 जुलाई, 1940 को नागपुर में डॉ. साहब की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सरसंघचालक के नाते श्री गुरूजी ने उन्हें याद करते हुए बताया था कि डॉ. साहब के कार्य की परिणिति पंद्रह सालों में एक लाख स्वयंसेवकों के संगठित होने में हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सन्दर्भ में दंत्तोपंत ठेंगडी कहते हैं, "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निर्माण किसी भावना या उत्तेजना में आकर नहीं हुआ है। श्रेष्ठ पुरुष जन्मजात देशभक्त डॉक्टर जी जिन्होंने बचपन से ही देशभक्ति का परिचय दिया, सब प्रकार का अध्ययन किया और अपने समय चलने वाले सभी आन्दोलनों में, कार्यों में जिन्होंने हिस्सा लिया, कांग्रेस और हिन्दू सभा के आन्दोलनों में भाग लिया, क्रांतिकार्य का अनुभव लेने के लिए बंगाल में जो रहे, उन्होंने गहन चिंतन के पश्चात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना बनाई।" कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर संघचालक डॉ.विवेक पाठक ने की|

डॉ. हेडगेवार सभी को परिवार के सदस्य के रूप मानते थे- अजित प्रसाद महापात्र
    तिलक नगर स्थित केशव शाखा पर वर्ष प्रतिपदा कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय गौसेवा संयोजक अजित प्रसाद महापात्र ने कहा कि डॉ. हेडगेवार की भाषा और आचरण में सामान्यतः सरलता एवं आत्मीयता थी। चूँकि संघ का कार्य राष्ट्र का कार्य हैं। इसलिए उन्होंने सभी को परिवार के सदस्य के रूप माना। परस्पर घनिष्ठता और स्नेह-संबंधों के आधार पर उन्होंने नियमित स्वयंसेवकों को तैयार किया। उनका विचार था कि किन्ही अपरिहार्य कारणों से संघ का कार्य अवरुद्ध न होने पाए। उनका उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं बल्कि वास्तव में हिन्दुओं को संगठित करना था। इसके लिए उन्होंने समझाया कि संघ का कार्य जीवनपर्यंत करना होगा। समाज में स्वाभाविक सामर्थ्य जगाना ही इसका अंतिम लक्ष्य होगा।

संघ को जानने के लिए डॉ. हेडगेवार को जानना आवश्यक - रमेश जी
    संघ को जानने के लिए डॉ. हेडगेवार को जानना आवश्यक है। वे संघ के निर्माता है। हम लोग ऐसा कहते है कि उन्होंने अपने को बीजरूप में मिट्टी में मिलाकर संघ के वृक्ष को बड़ा किया। इसलिए संघ के सारे कार्य में डॉ. हेडगेवार के मानस का प्रतिबिम्ब दिखता है। बिना हेडगेवार को जाने संघ को समझना कठिन है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रान्त प्रचारक श्रीमान रमेश जी ने लहरतारा के कबीर नगर में आयोजित वर्ष प्रतिपदा उत्सव को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार जी से प्रेरणा लेकर और दृढ संकल्प के साथ कठिन मार्ग पर चलकर यह देश परम वैभव को देखेगा और पूरी दुनिया में भारत का जय जयकार होगा।

    मानस नगर में आयोजित वर्ष प्रतिपदा उत्सव को सम्बोधित करते हुए सह प्रान्त कार्यवाह डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि डॉ. हेडगेवार जी ने 1924 से 1925 तक समाज की परतन्त्रता का अध्ययन किया। इसमें मुख्य रूप से तीन समस्याएं प्रकाश में आयी। पहला आत्मविस्मृत समाज, दूसरा आत्मकेन्द्रित जनमानस तीसरा अनुशासन का अभाव। डॉ. हेडगेवार ने इन समस्याओं के निदान के लिए 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की। उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना काल से वर्ष 1940 तक संघ सम्पूर्ण भारत में व्याप्त हो चुका था। वर्ष 1975 तक संघ ने विभिन्न समस्याओं के निदान हेतु विभिन्न सामाजिक संगठनों की स्थापना की। वर्ष 2000 के बाद से संघ ने इस बात पर ध्यान केन्द्रित किया है कि संघ और समाज के विचारों में एकरूपता आ जाये ।

जन्मजात देशभक्त एवं क्रांतिकारी थे डॉ. हेडगेवार - राजेन्द्र सक्सेना

    कामाख्या नगर में आयोजित वर्ष प्रतिपदा उत्सव को सम्बोधित करते हुए पूर्वी उ0प्र0क्षेत्र के मुख्य मार्ग प्रमुख राजेन्द्र सक्सेना जी ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जन्मजात देशभक्त एवं क्रांतिकारी थे एक प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया के राज्यारोहण के 60 साल पूरे होने पर स्कूल में मिठाई दी गई। उसे बालक केशव ने कूड़ेदान में फेंक दिया, क्योंकि विक्टोरिया का राज्य पराया है, परायी रानी के उत्सव की मिठाई नहीं खा सकता। एक अन्य प्रसंग की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि मैट्रिक पढ़ाई करने के लिए नागपुर के नीलशिटी हाई स्कूल में केशव का प्रवेश हुआ। उसी समय अंग्रेज सरकार ने एक रिस्ले सर्कुलर जारी किया, जिसमें विद्यार्थी वन्देमातरम गीत नहीं गा सकते थे, वन्देमातरम का उद्घोष नहीं कर सकते। इसके पीछे का एक ही उद्देश्य था, विद्यार्थियों को स्वतंत्रता आंदोलन से दूर रखना लेकिन विद्यालय निरीक्षण के समय केशव ने अपने नेतृत्व के साथ पूरे विद्यालय में वन्देमातरम का उद्घोष करवा डाला। इस घटना से पूरे विद्यालय में खलबली मच गई मामला तूल पकड़ता गया और अन्त में इस योजना में बालक केशव है, पता चला तो उन्हें विद्यालय से बाहर कर दिया गया।

    इसके अतिरिक्त काशी दक्षिण भाग के रामनगर, हनुमान नगर, शूलटकेश्वर, संतरविदासनगर, मालवीयनगर, केदारेश्वर नगर, माधवनगर, केशवनगर, कर्दमेश्वरनगर, विश्वकर्मानगर, विवेकानन्दनगर एवं शिवधाम में वर्षप्रतिपदा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

    काशी उत्तर भाग के शिव नगर में सह विभाग कार्यवाह डॉ. आशीष जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित किया। भारतेन्दु नगर, प्रेमचन्द्र नगर के अतिरिक्त भाग के 30 से अधिक शाखाओं पर कार्यक्रम आयोजित किये गये। इसके अतिरिक्त काशी दक्षिण भाग के सभी 15 नगरों में कार्यक्रम आयोजित हुए ।

अपनी संस्कृति पर गर्व करने का भाव जागृत करना हम सब का कर्तव्य - मनोज जी

प्रतापगढ़| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,प्रतापगढ़ नगर द्वारा आयोजित वर्ष प्रतिपदा उत्सव एवं पथ संचलन कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश के सह क्षेत्र संपर्क प्रमुख मनोज जी ने कहा कि समाज को दिशा देना और अपनी संस्कृति पर गर्व करने का भाव जागृत करना हम सब का कर्तव्य है| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता समाज के प्रति अपने दायित्व का पूर्ण निर्वहन करते हैं| उन्होंने कहा कि दुराचारी शक्तियों के सर्वनाश के लिए समाज को काली और दुर्गा का रूप उसी प्रकार का रखना होगा जैसे मां काली ने रक्तबीज का संहार करने के लिए रक्त की बूंद को पृथ्वी पर नहीं गिरने दिया| भारतीय सनातन परंपरा और ज्योतिष वैज्ञानिक काल गणना पर आधारित है| अनादि काल से चली आ रही परंपरा के प्रति हमें गर्व है|

     उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हम सभी समाज को एकता के सूत्र में जोड़कर, समरसता का भाव स्थापित करें, संगठित, समृद्ध और सशक्त समाज की स्थापना करने के साथ-साथ सशक्त गौरवशाली राष्ट्र की स्थापना के लिए अपनी संपूर्ण शक्ति से प्रयास करें| कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा कि आज का दिन भारतीय संस्कृति और परंपरा के लिए सर्वोत्कृष्ट दिवस है| आज ही के दिन सृष्टि की रचना हुई| भगवान श्री राम  का राज्याभिषेक भी आज ही हुआ था| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्म आज ही के दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को हुआ था| आयोजित संचलन तुलसी सदन से प्रारंभ होकर बाबागंज, पंजाबी मार्केट, श्रीराम चौराहा, घंटाघर होते हुए तुलसी सदन पहुंचा| इस अवसर पर स्थान-स्थान पर मातृशक्ति द्वारा पुष्प वर्षा भी की गई| कार्यक्रम में मा.नगर संघचालक नितेश खंडेलवाल, विभाग कार्यवाह हरीश, जिला कार्यवाह डॉ सौरभ पांडेय, जिला प्रचारक शिव प्रसाद, डॉ रंगनाथ, कार्तिकेय, शीतांशु, प्रभा शंकर, देवदत्त, हरिओम समेत बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने सहभाग किया|

अपनी संस्कृति को संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व - रमेश जी

जौनपुर/चन्दौली| हम सभी का दायित्व है कि अपनी संस्कृति के निर्माण एवं संरक्षण में अपने पूर्वजों के योगदान को याद रखें और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपनी संस्कृति का संरक्षण करें। उक्त विचार टी.डी.कॉलेज में वर्ष प्रतिपदा के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जौनपुर द्वारा आयोजित पथ संचलन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए काशी प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने व्यक्त किया|

उन्होंने कहा आज का दिन आज गौरव का दिन है। आज ही के दिन नववर्ष प्रारंभ हुआ, सृष्टि की रचना हुई, आर्य समाज की स्थापना हुई| आज ही संत झूलेलाल जयंती, चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन के साथ संघ संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार जी की जयन्ती है। संघ समाज एवं  देश का कार्य निरंतर 98 वर्ष से कर रहा है। संघ का स्वयंसेवक देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि जब हिन्दू समाज संगठित रहेगा तभी देश विश्व गुरु बनेगा। क्योंकि संघ में शक्ति है और कलयुग का यह मंत्र है। कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में डा.कैप्टन ने सभी को नववर्ष की शुभकामना दी| कार्यक्रम में आयोजित पथ संचलन टीडी कालेज से प्रारंभ होकर नगर के विभिन्न मार्गो से होता हुआ पुनः टीडी कालेज में समाप्त हुआ।  कार्यक्रम में  विभाग प्रचारक जगदीश, प्रांत गोरक्षा प्रमुख अरविंद, वीरेंद्र मौर्य, मा.जिला संघचालक  डा. सुभाष सिंह, जिला प्रचारक रजत, जिला कार्यवाह रजनीश, रवींद्र सिंह, धर्मवीर, अजय पाठक, आलोक, प्रदीप, अजय एवं समाज के अन्य जनमानस के साथ बड़ी संख्या में स्वयंसेवक बंधु उपस्थित रहे।

संघ को जानने के लिए डॉ. हेडगेवार को जानना आवश्यक - रमेश जी

चन्दौली| इसके पूर्व चन्दौली जिला में वर्ष प्रतिपदा के पूर्व संध्या पर आयोजित पथ संचलन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए काशी प्रान्त प्रचारक रमेश जी ने कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भाव का जागरण एवं नागरिक कर्तव्य इन पांच मन्त्रों को जीवन में आत्मसात करना होगा तभी देश मजबूत राष्ट्र बनेगा|  संघ को जानने के लिए डॉ. हेडगेवार को जानना आवश्यक है। वे संघ के निर्माता है। हम लोग ऐसा कहते है कि उन्होंने अपने को बीजरूप में मिट्टी में मिलाकर संघ के वृक्ष को बड़ा किया। इसलिए संघ के सारे कार्य में डॉ. हेडगेवार के मानस का प्रतिबिम्ब दिखता है। बिना हेडगेवार को जाने संघ को समझना कठिन है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, काशी प्रान्त प्रचारक श्रीमान रमेश जी ने लहरतारा के कबीर नगर में आयोजित वर्ष प्रतिपदा उत्सव को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किया। उन्होंने आगे कहा कि संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार जी से प्रेरणा लेकर और दृढ संकल्प के साथ कठिन मार्ग पर चलकर यह देश परम वैभव को देखेगा और पूरी दुनिया में भारत का जय जयकार होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. कृपाशंकर सिंह ने किया| एकत्रित स्वयंसेवकों ने महेन्द्र टेक्निकल इंटर कॉलेज से प्रारम्भ होकर सकलडीहा रोड होते हुए इलिया मोड़ से पुरानी बाजार में भ्रमण करते हुए पुनः महेन्द्र टेक्निकल इंटर कॉलेज में पहुंचा| संचलन में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहें| 

सनातन संस्कृति की छाप छोड़ रहे हैं स्वयंसेवक, समाज में दिख रहा है परिवर्तन - अनिल जी

 

मीरजापुर | स्वयंसेवक सनातन संस्कृति की छाप छोड़ रहे हैं जिसका प्रभाव समाज में निरंतर परिवर्तन के रूप मे दिख रहा है। अपनी संस्कृति के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ रही है| उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने व्यक्त किया| वे वर्ष प्रतिपदा के पूर्व संध्या पर मंगलवार को लालडिग्गी स्थित लायंस मैदान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मिर्जापुर के तत्वावधान में आयोजित पथ संचलन कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे|

    उन्होंने आगे कहा कि विश्व का कल्याण भारतीय संस्कृति से ही संभव हैअन्य कोई भी संस्कृति विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त नहीं कर सकती। संघ संस्थापक डॉक्टर हेडगेवार जी से प्रेरणा लेकर और दृढ संकल्प के साथ कठिन मार्ग पर चलकर यह देश परम वैभव को देखेगा और पूरी दुनिया मे भारत की जय-जयकार होगी। 

    उन्होंने कहा कि हम भारतीय नववर्ष मनाते हैंलेकिन आंग्ल नववर्ष का विरोध नहीं करते। जब भारतीय नववर्ष सर्वव्यापी हो जाएगातो शेष स्वतः गौण हो जाएंगे। ऐसा परिवर्तन देश के अंदर आ गया है। स्वयंसेवकों ने समाज में परिवर्तन स्थापित किया है| 10 वर्ष पहले 14 फरवरी को तथाकथित वैलेंटाइन डे के दिन जब मैं काशी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मिलने गया थातो परिसर का दृश्य देखकर स्तब्ध था। लेकिन इस बार 14 फरवरी को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रांत की बैठक में गयातो एक बड़ा परिवर्तन दिखा। युवाओं ने पुलवामा के शहीदों की स्मृति में मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थेतो वहीं मालवीय जी के प्रतिमा के पास लगभग 500 विद्यार्थी इकट्ठा होकर वैलेंटाइन डे की जगह पुलवामा के शहीदों की स्मृति में जुलूस निकाल रहे थे। इस वर्ष 1 जनवरी को लगभग 8.30 लाख लोगों ने अयोध्या और लगभग 4.5 लाख लोगों ने काशी में प्रभु के दर्शन किए। यह परिवर्तन संकेत है राष्ट्र को सनातन की ओर ले जाने का। पूरे विश्व को प्रेरणा देने के लिए भारत का नौजवान आगे बढ़ रहा है। योग, आयुर्वेद ही नहींहमारी सभ्यता और संस्कृति की स्वीकार्यता भी पूरे विश्व में बढ़ रही है। आज स्वामी विवेकानंद का सपना- "जगत जननी भारत माता विश्व के सिंहासन पर विराजमान हैं और पूरे दुनिया की शक्ति नतमस्तक हो रही है" उनका यह स्वप्न आज साकार होते दिख रहा है। 

    संघ स्थापना की चर्चा करते हुए क्षेत्र प्रचारक ने कहा कि जब हेडगेवार जी को अपने ही समान लोगों का संगठन खड़ा करने का विचार आया  तब कलकत्ता में सुभाष जी से मिलने गये| वे अनमने मन से मिले और कहा कि मैं हिन्दू समाज का संगठन खड़ा करना चाहता हूँतो सुभाष जी ने कहा कि आपका उद्देश्य महान लेकिन काम कठिन हैविचार उत्तम है लेकिन असंभव है और कार का गेट बंदकर सुभाष जी चले गये। लेकिन डाक्टर साहब के मन मे निराशा नही आयी। उन्होने संगठन की स्थापना की और स्थापना के दो वर्ष बाद पहली बार नागपुर महानगर मे रेलवे स्टेशन के पास से संचलन निकाला। संयोग से जिस समय संचलन उद्घोष के साथ प्लेटफार्म संख्या एक के पास से गुजर रहा थासंयोग से सुभाष जी की ट्रेन वहां रूकीउन्होने चार कदम आगे बढ़कर पूछा तो बताया गया कि हेडगेवार आया हुआ है। सुभाष जी के मुंह से निकला- हो गया...! और ट्रेन की सीटी बजी और सुभाष फिर सवार होकर रवाना हो गये। क्षेत्र प्रचारक ने कहा कि एक समय थाजब सुभाष जी ने डाक्टर साहब से चलते-चलते मुलाकात किया था और एक समय वह आया जब डाक्टर साहब अंतिम सांस ले रहे थे तब श्रद्धेय गुरू जी की उपस्थिति में उनसे मिलने आए। उस समय आर.एस.एस. देश के सभी बड़े शहरो तक पहुँच चुका था।  

    उन्होने कहा कि डाक्टर हेडगेवार जी ने स्वयं को स्थापित न करसंगठन को सर्वोपरि रखा और आज वह संगठन दुनिया का सबसे बडा संगठन है। आज भले ही भारत का एक एक व्यक्ति संस्थापक को न जानता होलेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बच्चा-बच्चा जानता है। "कार्यकर्ता" नामक पुस्तक के अंतिम पृष्ठ की चर्चा करते हुए क्षेत्र प्रचारक ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगडी जी राज्यसभा सदस्य थेअवकाश के समय सब चाय पी रहे थे। एक कम्युनिस्ट सासंद और सांसद मेनन वहां बैठे थे। कम्युनिस्ट सासंद ने ठेंगडी जी से पूछा कि हेडगेवार किस चिड़िया का नाम हैतो उन्होने अनसुना कियालेकिन जब दोबारा पूछा तो ठेंगडी ने जवाब दिया कि जानना क्या चाहते होसासंद ने कहा हेडगेवार के बारे मे और साथ मे कुछ और भी...। तब मेनन ने जवाब दिया कि हेडगेवार की मृत्यु 1940 मे हुई और नेहरू की मृत्य 1964 मे हुईलेकिन दोनो के नाम पर मरने वाले लोग कितने हैमहत्व इस बात का है कि व्यक्ति के चले जाने के बाद परछाई कितनी दूर तक जाती है। संघ के प्रारंभ मे विचारों का विरोध करने वाले भी जन्मजात देशभक्त थे। इसके अनेक प्रसंग है। 

    हजारों की संख्या में उपस्थित स्वयंसेवकों द्वारा संचलन लायंस मैदान से गणेशगंज चौराहामुकेरी बाजार, गुरहट्टी बाजारधुंधीकटराबस नई बाजार त्रिमुहानीशहीद उद्यानकेबीपीजी कालेजनवीन चौराहा से लालडिग्गी होते हुए लायंस मैदान मे पहुचकर विराम हुआ।

    इस अवसर पर स्वयंसेवकों के साथ-साथ प्रवासी कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। 






Friday, March 10, 2023

पानीपत की धरती पर बनेगी संघ की शताब्दी वर्ष योजना

12 से 14 तक समालखा के पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना केंद्र में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा

पानीपत, 10 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने कहा कि अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा संघ की सबसे महत्वपूर्ण सभा होती है। इस सभा में पिछले वर्ष किए गए कार्यों की समीक्षा व संघ द्वारा आगामी वर्ष में किए जाने वाले कार्यों की योजना तैयार की जाती है। इस वर्ष यह प्रतिनिधि सभा पानीपत जिला के समालखा स्थित पट्टीकल्याणा के सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र में 12, 1314 मार्च को होने जा रही है। इसमें देशभर से संघ के 1400 से अधिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसमें 34 विविध संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। इससे पहले 11 मार्च को अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक होगी। इसमें प्रतिनिधि सभा में आने वाले प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन 14 मार्च को सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले पत्रकारों से बातचीत में पारित प्रस्ताव के बारे में जानकारी देंगे। सुनील आम्बेकर शुक्रवार को सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

सुनील आम्बेकर ने कहा कि 12 मार्च को प्रतिनिधि सभा का शुभारंभ होगा। जिसमें सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी, विविध संगठनों के पदाधिकारी, सभी क्षेत्र व प्रांतों के संघचालक व कार्यवाह उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में संघ स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। प्रतिनिधि सभा में शताब्दी वर्ष कार्य विस्तार योजना 2022-23 की समीक्षा व अनुभव के आधार पर 2023-24 की कार्य योजना बनेगी।

इस वर्ष की समीक्षा के साथ-साथ 2025 तक नए लोगों को संघ से जोड़ना, वर्ष 2023-24 की कार्य योजना तैयार करने पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि संघ की रीढ़ शाखा है और शाखा सामाजिक परिवर्तन का केंद्र है। शाखा के स्वयंसेवक सामाजिक परिस्थितियों के अध्ययन के आधार पर विषयों का चयन करते हैं, और समाज परिवर्तन के लिए कार्य करते हैं। समाज को स्वावलंबी बनाने, सेवा कार्यों का विस्तार, समाज में सामाजिक समरसता का वातावरण बनाने, पर्यावरण संरक्षण, अमृतकाल के तहत देशभर में क्या कार्य किए जाएं, ये सभी विषय शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों द्वारा समाज में चलाए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि महर्षि दयानंद के जन्म को 2024 में 200 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं तथा भगवान महावीर स्वामी के 2550वें निर्वाण वर्ष के बारे में भी विशेष वक्तव्य जारी किये जाएंगे।