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Wednesday, October 14, 2020

प्रवासी कामगारों को सस्ती दरों पर मिलेगा आवास, तेल कंपनियां करेंगी 50 हजार आवासों का निर्माण

संवेदनशील सरकार कमियों से सीखती है और जनता के हित में कदम उठाती है. कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन के बीच प्रवासी कामगारों ने अपने गांवों की ओर पलायन शुरू कर दिया था. अब सरकार ने इस ओर कदम उठाना शुरू कर दिया है. प्रवासी कामगारों को सस्ती दरों पर किराये पर आवास उपलब्ध करवाने की योजना पर कार्य शुरू किया है. तेल कंपनियों से कहा गया है कि 50 हजार घरों का निर्माण करवाएं.

अपनी जमीन पर घरों का निर्माण करें कंपनियां

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार योजना पर कार्य शुरू से पूर्व बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में शामिल तीन अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि तेल मंत्रालय ने अपने अधीन सरकारी तेल कंपनियों से अपनी जमीन पर घरों का निर्माण करने को कहा है. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल), गेल इंडिया लिमिटेड और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) तेल मंत्रालय के अधीन आती हैं. तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सभी कंपनियों से घरों के निर्माण का प्लान तैयार करने को कहा है.

मंत्रालय ने 5 अक्तूबर को एक ट्वीट कर कहा था कि तेल मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस मंत्रालय और हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की है. बैठक में ऑयल एंड गैस प्रोजेक्ट में काम कर रहे प्रवासी और शहरी गरीब कामगारों को किफायती किराये पर मकान देने की योजना पर चर्चा की. अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लैक्स पीएम आवास योजना की सब-स्कीम है. इसका लक्ष्य शहरी गरीबों और प्रवासी कामगारों को वर्क साइट पर किफायती किराये पर आवास उपलब्ध कराना है. कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान रिवर्स माइग्रेशन को रोकने के लिए यह योजना लाई गई है.

सरकार ने जुलाई में दी थी योजना को मंजूरी

मार्च में देशव्यापी लॉकडाउन के कारण प्रवासी कामगार शहरों को छोड़कर अपने गांवों को लौट गए थे. इसके बाद सरकार ने जुलाई में प्रवासी कामगारों को किफायती किराये के आवासों के निर्माण की योजना को मंजूरी दी थी. वर्ष 2022 तक सभी को घर देने की योजना के तहत इस योजना को शामिल किया गया है. स्कीम के तहत खाली पड़े सरकारी घरों को अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लैक्स में शामिल किया जा सकता है. प्राइवेट डेवलपर भी इस स्कीम में भाग ले सकते हैं.

श्रोत - विश्व संवाद केन्द्र, भारत

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